14 Sep डीएएचडी सचिव ने मुंबई सीपीडीओ का दौरा; पोल्ट्री सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचे पर जोर दिया
✎ पोल्ट्री क्षेत्र का समग्र विकास, जिसमें बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण और जैव-सुरक्षा शामिल है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधन जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
- Prelims: केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO), राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), जैव सुरक्षा (Bio-security), पशु संगरोध एवं प्रमाणीकरण सेवा (AQCS), पोल्ट्री उद्यमिता
- Essay: भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में पशुधन क्षेत्र की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: पोल्ट्री क्षेत्र का समग्र विकास, जिसमें बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण और जैव-सुरक्षा शामिल है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के सचिव ने मुंबई स्थित केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) (पश्चिमी क्षेत्र) का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य पोल्ट्री बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और जैव-सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना था। उन्होंने पोल्ट्री विकास योजनाओं के कार्यान्वयन का भी जायजा लिया और हितधारकों के साथ बातचीत की, जिसमें पोल्ट्री उद्यमी और पशु चिकित्सा छात्र शामिल थे।
पृष्ठभूमि
- भारत में पोल्ट्री क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो लाखों ग्रामीण परिवारों को आजीविका प्रदान करता है।
- यह क्षेत्र प्रोटीन युक्त भोजन (मांस और अंडे) की बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सरकार विभिन्न योजनाओं, जैसे राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission – NLM) के माध्यम से पोल्ट्री क्षेत्र के विकास और आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे रही है।
- केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) देश में पोल्ट्री उत्पादन को बढ़ावा देने, गुणवत्तापूर्ण चूजों की आपूर्ति करने और किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- जैव सुरक्षा (Bio-security) उपाय पोल्ट्री फार्मों में रोगों के प्रसार को रोकने और पशुधन स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
- पशु संगरोध एवं प्रमाणीकरण सेवा (Animal Quarantine and Certification Service – AQCS) देश में पशु रोगों के प्रवेश को रोकने के लिए आयातित पशुओं और पशु उत्पादों की जांच करती है, जिससे राष्ट्रीय जैव सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) और राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) क्या हैं?
- केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के तहत कार्य करते हैं।
- इन संगठनों का मुख्य उद्देश्य देश में पोल्ट्री उत्पादन को बढ़ावा देना, उन्नत नस्लों का विकास करना और किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
- CPDO प्रजनन, चूजों के पालन-पोषण, फीड प्लांट संचालन और पोल्ट्री प्रबंधन में प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित करते हैं।
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना है जिसका उद्देश्य पशुधन क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देना है।
- एनएलएम के तहत, पोल्ट्री विकास के लिए विभिन्न उप-योजनाएं शामिल हैं, जिनमें उद्यमिता विकास, नस्ल सुधार और बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण शामिल है।
- यह मिशन किसानों को वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करके पोल्ट्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
- एनएलएम का एक प्रमुख लक्ष्य कम लागत वाली तकनीकों को बढ़ावा देना और स्वदेशी पोल्ट्री नस्लों का संरक्षण करना भी है।
- इन संगठनों और योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण आय में वृद्धि करना, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और पोल्ट्री क्षेत्र को आधुनिक बनाना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पोल्ट्री बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण | उत्पादन क्षमता में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और किसानों की आय बढ़ाना। |
| जैव-सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करना | पशुधन रोगों के प्रसार को रोकना, किसानों के नुकसान को कम करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना। |
| किसान-केंद्रित प्रशिक्षण | किसानों को आधुनिक तकनीकों से लैस करना, उद्यमिता को बढ़ावा देना और पोल्ट्री क्षेत्र में रोजगार सृजन करना। |
| स्वदेशी पोल्ट्री नस्लों का संरक्षण | आनुवंशिक विविधता बनाए रखना, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नस्लों को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना। |
| कम लागत वाली तकनीक से पाले जाने वाले पक्षियों को बढ़ावा देना | छोटे और सीमांत किसानों के लिए पोल्ट्री पालन को सुलभ और लाभदायक बनाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- पोल्ट्री क्षेत्र भारत में कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो लाखों ग्रामीण परिवारों को आजीविका प्रदान करता है।
- अंडे और चिकन मांस की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता करता है, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- निर्यात क्षमता को बढ़ाता है और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद करता है।
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करता है, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए।
- किसानों की आय में वृद्धि करके गरीबी उन्मूलन में योगदान देता है।
- पोषक तत्वों से भरपूर प्रोटीन स्रोत प्रदान करके कुपोषण से लड़ने में मदद करता है।
रणनीतिक महत्व
- पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत की कृषि नीति का एक अभिन्न अंग है।
- जैव-सुरक्षा उपायों को मजबूत करके पशुधन रोगों के अंतरराष्ट्रीय प्रसार को रोकने में मदद करता है।
- अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देकर पोल्ट्री क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढांचे की कमी
- आधुनिक हैचरी, ब्रूडर हाउस और फीड प्लांट जैसी सुविधाओं की अपर्याप्तता।
- शीत भंडारण और परिवहन सुविधाओं की कमी, जिससे उत्पादों की बर्बादी होती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि अवसंरचना; पशुधन क्षेत्र की चुनौतियाँ
2. रोग नियंत्रण और जैव-सुरक्षा
- बर्ड फ्लू (Avian Influenza) जैसे रोगों का प्रकोप, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान होता है।
- छोटे पैमाने के किसानों के बीच जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जागरूकता और पालन की कमी।
यूपीएससी लिंक: पशुधन स्वास्थ्य; आपदा प्रबंधन
3. प्रशिक्षण और कौशल विकास
- आधुनिक पोल्ट्री प्रबंधन तकनीकों में प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी।
- किसानों तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान की पहुंच का अभाव।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास; ग्रामीण विकास
4. बाजार पहुंच और मूल्य अस्थिरता
- किसानों के लिए उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई और मध्यस्थों पर निर्भरता।
- मांग और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के कारण पोल्ट्री उत्पादों की कीमतों में अस्थिरता।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन; किसानों की आय
5. स्वदेशी नस्लों का संरक्षण
- उच्च उपज वाली विदेशी नस्लों के पक्ष में स्वदेशी नस्लों की उपेक्षा।
- स्वदेशी नस्लों के आनुवंशिक पूल के क्षरण का जोखिम।
यूपीएससी लिंक: जैव विविधता संरक्षण; पशुधन आनुवंशिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आधुनिक प्रौद्योगिकी का सीमित उपयोग | उत्पादकता और दक्षता में कमी, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना। |
| पशुधन रोगों का लगातार खतरा | आर्थिक नुकसान, खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम। |
| प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पहुंच | किसानों के लिए नवीनतम ज्ञान और कौशल तक पहुंच में बाधा, उद्यमिता का अभाव। |
| स्वदेशी नस्लों का घटता महत्व | आनुवंशिक विविधता का नुकसान, स्थानीय जलवायु के अनुकूलन क्षमता में कमी। |
| पर्यावरणीय स्थिरता | पोल्ट्री अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission)
आगे की राह
- पोल्ट्री बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना।
- जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के सख्त कार्यान्वयन और किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर जोर देना।
- क्षेत्रीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सामग्री और कार्यक्रमों को विकसित करना और उन्हें सुलभ बनाना।
- स्वदेशी पोल्ट्री नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू करना।
- कम लागत वाली और टिकाऊ पोल्ट्री पालन तकनीकों को बढ़ावा देना ताकि छोटे किसानों को लाभ मिल सके।
- पोल्ट्री उत्पादों के लिए एक कुशल आपूर्ति श्रृंखला और विपणन नेटवर्क विकसित करना।
- पशु चिकित्सा और पोल्ट्री क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) · केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) · राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) · पोल्ट्री उद्यमिता · जैव-सुरक्षा उपाय · स्वदेशी पोल्ट्री नस्लें · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · किसान आय दोगुनी करना · पशुधन क्षेत्र · खाद्य सुरक्षा · प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण · तकनीकी प्रसार
अवधारणा प्रवाह
डीएएचडी सचिव का दौरा → पोल्ट्री क्षेत्र की समीक्षा → बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण, जैव-सुरक्षा पर जोर → किसानों और छात्रों से बातचीत → पोल्ट्री विकास और उद्यमिता को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
2. राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) का उद्देश्य पोल्ट्री सहित पशुधन क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देना है।
3. भारत में पोल्ट्री क्षेत्र का विकास ग्रामीण आय और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि CPDO, DAHD के तहत आता है, जो मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का एक हिस्सा है। कथन 2 सही है क्योंकि NLM का एक प्रमुख उद्देश्य पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है, जिसमें पोल्ट्री भी शामिल है। कथन 3 भी सही है क्योंकि पोल्ट्री क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आय वृद्धि और प्रोटीन युक्त भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करके खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Q2. कथन (A): पशुधन क्षेत्र में जैव-सुरक्षा उपायों को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कारण (R): यह पशुधन रोगों के प्रसार को रोकने और देश की जैव-सुरक्षा बनाए रखने में मदद करता है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि पशुधन क्षेत्र में रोगों की रोकथाम के लिए जैव-सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। कारण (R) भी सही है और यह कथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि जैव-सुरक्षा उपाय ही पशु रोगों के प्रवेश और प्रसार को रोककर देश की जैव-सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के उद्देश्यों पर चर्चा करें और पोल्ट्री क्षेत्र के विकास में केंद्रीय पोल्ट्री विकास संगठन (CPDO) जैसी संस्थाओं की भूमिका का मूल्यांकन करें। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) और पोल्ट्री क्षेत्र के महत्व का संक्षिप्त उल्लेख करें। NLM के प्रमुख उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे कि पशुधन उत्पादन में वृद्धि, उद्यमिता विकास, चारा और चारे का विकास, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण। CPDO जैसी संस्थाओं की भूमिका का मूल्यांकन करें, जिसमें प्रजनन, चूजों का पालन-पोषण, प्रशिक्षण, जैव-सुरक्षा उपायों को मजबूत करना, स्वदेशी नस्लों का संरक्षण और तकनीकी प्रसार शामिल हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान आय दोगुनी करने और खाद्य सुरक्षा में इन प्रयासों के योगदान पर प्रकाश डालें। चुनौतियों और आगे की राह पर भी संक्षेप में चर्चा करें, जैसे कि आधुनिकीकरण, कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग और क्षेत्रीय भाषाओं में ज्ञान का प्रसार। निष्कर्ष में पोल्ट्री क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: डीएएचडी (डेयरी और पशुपालन विभाग) सचिव द्वारा हाल ही में मुंबई स्थित सीपीडीओ (पश्चिमी क्षेत्र) के दौरे के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा उद्देश्य उनके दौरे का प्रमुख रहा था?
- पोल्ट्री बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और जैव-सुरक्षा को मजबूत करना
- मुंबई में पशु चिकित्सा महाविद्यालयों का निरीक्षण करना
- पशुपालन क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करना
- राज्य में डेयरी सहकारी समितियों का पुनर्गठन करना
उत्तर: पोल्ट्री बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और जैव-सुरक्षा को मजबूत करना — डीएएचडी सचिव ने मुंबई स्थित सीपीडीओ (पश्चिमी क्षेत्र) के दौरे के दौरान पोल्ट्री बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और जैव-सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया था।
Mains: महाराष्ट्र में पोल्ट्री उद्योग के विकास और जैव-सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों का विश्लेषण कीजिए। राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार पर इसके प्रभाव पर भी प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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