19 Oct डीओपीटी ने स्वच्छ भारत दिवस पर शुरू किया विशेष अभियान 6: स्वच्छता, ई-कचरा और लंबित मामलों पर ध्यान
✎ विशेष स्वच्छता अभियान 6 (2 से 31 अक्टूबर 2026) में DoPT और उसके कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों का निपटान, अभिलेख प्रबंधन और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन पर बल है, जिसका नोडल विभाग DARPG है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (Governance): लोक प्रशासन में सुधार, लोक शिकायत निवारण और सिविल सेवा क्षमता निर्माण | GS Paper III — पर्यावरण (Environment): ई-कचरा (E-waste) प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022
- Prelims: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986), प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG), केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS), लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993), राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India), मिशन कर्मयोगी और आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल (iGOT Karmayogi Portal)
- Essay: सुशासन की नींव के रूप में कार्यस्थल की स्वच्छता और संस्थागत कार्यकुशलता, प्रशासनिक तंत्र में डिजिटलीकरण और अभिलेख प्रबंधन: अवसर और चुनौतियां
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष स्वच्छता अभियान 6 (2 से 31 अक्टूबर 2026) में DoPT और उसके कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों का निपटान, अभिलेख प्रबंधन और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन पर बल है, जिसका नोडल विभाग DARPG है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 2 अक्टूबर 2026 को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर विशेष स्वच्छता अभियान 6 का कार्यान्वयन चरण औपचारिक रूप से आरंभ किया। इसका तैयारी चरण 16 से 30 सितंबर 2026 तक चला, जिसमें वीआईपी संदर्भों, सार्वजनिक शिकायतों, संसदीय आश्वासनों और समयबद्ध कार्रवाई वाले अन्य मामलों का मूल्यांकन किया गया। कार्यान्वयन चरण 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा और इसका नोडल विभाग प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) है। अभियान में स्वच्छता, लंबित मामलों का निपटान, अभिलेखों का डिजिटलीकरण, कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग और ई-कचरे का उचित संग्रहण, पृथक्करण तथा निपटान शामिल है। ई-कचरे के मामले में विभाग ने ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन पर विशेष बल दिया है। प्रगति की निगरानी DARPG के एससीडीपीएम 6 पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। यह समाचार परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लोक प्रशासन में कार्यकुशलता, अभिलेख प्रबंधन और पर्यावरणीय अनुपालन को एक ही प्रशासनिक पहल में जोड़ता है।
पृष्ठभूमि
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) का आरंभ 2 अक्टूबर 2014 को हुआ था, जिसके बाद केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय और विभाग अपने कार्यालयों में स्वच्छता के लिए विशेष अभियान चलाते रहे हैं। विशेष अभियान 6 इसी श्रृंखला का अगला चरण है।
- भारत में कार्यालयों में वर्षों से जमा होने वाले भौतिक अभिलेख और कबाड़ की समस्या रही है। लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अंतर्गत केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन, संरक्षण और निपटान के नियम निर्धारित हैं।
- ई-कचरे के प्रबंधन के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू हैं, जो 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हुए। इन नियमों में उत्पादकों, उपभोक्ताओं और पुनर्चक्रणकर्ताओं सभी की भूमिका तय की गई है।
- लोक शिकायतों और संसदीय आश्वासनों के निपटान में विलंब प्रशासनिक सुधार का प्रमुख विषय रहा है। इसी कारण केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) और समय-समय पर चलाए जाने वाले विशेष अभियान प्रशासनिक तंत्र में लागू किए गए हैं।
- मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) के अंतर्गत सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के लिए iGOT Karmayogi पोर्टल विकसित किया गया है, जो योग्यता-आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देता है।
विशेष स्वच्छता अभियान 6 क्या है?
- विशेष स्वच्छता अभियान 6 केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और उसके संबद्ध तथा अधीनस्थ कार्यालयों में चलाया जा रहा एक समयबद्ध प्रशासनिक अभियान है। इसका उद्देश्य कार्यस्थलों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और उत्पादक बनाना है।
- अभियान दो चरणों में चलता है: तैयारी चरण (16 से 30 सितंबर 2026) और कार्यान्वयन चरण (2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026)। तैयारी चरण में प्राथमिकता वाले मामलों की पहचान की जाती है।
- लंबित मामलों के निपटान में वीआईपी संदर्भ, सार्वजनिक शिकायतें, संसदीय आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता वाले मामले प्राथमिकता में रखे जाते हैं।
- अभिलेख प्रबंधन के अंतर्गत भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की समीक्षा, अप्रचलित दस्तावेजों को हटाना, अभिलेखों का डिजिटलीकरण और कार्यालय कबाड़ का निपटान शामिल है।
- ई-कचरे के संदर्भ में उसकी पहचान, पृथक्करण और निपटान ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार सुनिश्चित करने पर बल है। इसमें विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) की अवधारणा केंद्रीय है, जिसके अनुसार उत्पादक अपने उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक ई-कचरे के संग्रहण और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी लेता है।
- अभियान की प्रगति की निगरानी डीएआरपीजी के एससीडीपीएम 6 पोर्टल पर की जाती है, जिस पर लक्ष्य अपलोड किए गए हैं।
- iGOT Karmayogi पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों की योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण को इस अभियान के साथ जोड़ा गया है, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा मिले।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभियान की अवधि | तैयारी चरण 16 से 30 सितंबर 2026 तक और कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चला |
| नोडल विभाग | प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) इस अभियान का नोडल विभाग है और SCDPM 6 पोर्टल के माध्यम से प्रगति की निगरानी करता है |
| मुख्य घटक | स्वच्छता, लंबित मामलों का निपटान, अभिलेख प्रबंधन, कार्यालय स्थान का पुनर्उपयोग और ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित कार्य |
| ई-कचरे का विधिक आधार | ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप ई-कचरे की पहचान, पृथक्करण और निपटान अनिवार्य है |
| क्षमता निर्माण | आईजीओटी कर्मयोगी (iGOT Karmayogi) पोर्टल के माध्यम से योग्यता-आधारित प्रशिक्षण को अभियान का अंग बनाया गया है |
| लक्षित दायरा | डीओपीटी, उसके संबद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों में वीआईपी संदर्भों, सार्वजनिक शिकायतों और संसदीय आश्वासनों के मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की गई |
महत्व
प्रशासनिक महत्व
- सार्वजनिक शिकायतों, संसदीय आश्वासनों और वीआईपी संदर्भों के समयबद्ध निपटान से लोक प्रशासन में उत्तरदायित्व बढ़ता है
- प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान से संसाधनों का लक्षित उपयोग संभव होता है
- कार्यस्थल की कार्यकुशलता और संस्थागत कार्य-संस्कृति में सुधार की दिशा में कदम है
पर्यावरणीय महत्व
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के पालन से इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के असुरक्षित निपटान पर रोक लगाने में सहायता मिलती है
- सरकारी कार्यालय स्वयं अनुपालन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जिससे नागरिक और निजी क्षेत्र को भी प्रेरणा मिलती है
- वृक्षारोपण और स्वच्छता गतिविधियाँ पर्यावरण संरक्षण के मौलिक कर्तव्य की व्यावहारिक अभिव्यक्ति हैं
डिजिटल शासन और अभिलेख प्रबंधन
- भौतिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण और अप्रचलित दस्तावेजों की छंटाई से फ़ाइल-आधारित कार्यप्रणाली कम होती है
- सुव्यवस्थित अभिलेख प्रशासनिक पारदर्शिता और सूचना तक पहुँच को सुदृढ़ करते हैं
- डिजिटल प्रणाली में साइबर सुरक्षा के सिद्धांतों को संस्थागत ढाँचे में समाहित करने का लक्ष्य है
संसाधन प्रबंधन
- कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग और कबाड़ की निकासी सार्वजनिक संसाधनों की बचत में सहायक है
- सरकारी संसाधनों के कुशल उपयोग से शासन की लागत-प्रभावशीलता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है
चुनौतियाँ
1. लंबित मामलों का दबाव
- विभिन्न स्तरों पर लंबित शिकायतों और संसदीय आश्वासनों का निपटान अक्सर अंतर-विभागीय समन्वय पर निर्भर होता है
- अभियान-आधारित निपटान से आगे चलकर नियमित प्रणाली में स्थायी सुधार सुनिश्चित करना कठिन होता है
- समयबद्ध कार्रवाई की निगरानी के लिए स्पष्ट मानक और डेटा की आवश्यकता होती है
यूपीएससी लिंक: शासन में जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन (GS-2)
2. ई-कचरे का अनौपचारिक प्रसंस्करण
- ई-कचरे का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में पृथक्करण के दौरान असुरक्षित तरीकों से संसाधित होता है
- भारी धातुओं और विषैले पदार्थों से मिट्टी, जल और श्रमिकों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता है
- उत्पादक विस्तारित उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) के प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती बनी रहती है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन (GS-3)
3. अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण की चुनौतियाँ
- अभिलेखों को नष्ट करने से पहले विधिक धारण-अवधि और ऐतिहासिक महत्व का निर्धारण आवश्यक है
- डिजिटल अभिलेखों की प्रामाणिकता, संरक्षण और दीर्घकालिक पठनीयता सुनिश्चित करना तकनीकी रूप से जटिल है
- डिजिटल प्रणालियों में डेटा सुरक्षा और साइबर जोखिम का प्रबंधन आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा (GS-3 एवं GS-2)
4. अभियान-मोड बनाम नियमित कार्य-संस्कृति
- समयबद्ध अभियानों से तात्कालिक परिणाम मिलते हैं, परंतु व्यवहार परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयास चाहिए
- स्वच्छता और कार्य-वातावरण में सुधार कर्मचारियों की मानसिकता पर निर्भर करता है
- प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को वास्तविक प्रदर्शन-मूल्यांकन से जोड़ना चुनौतीपूर्ण रहता है
यूपीएससी लिंक: सिविल सेवा सुधार और लोक सेवकों का क्षमता निर्माण (GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| लंबित मामलों का स्थायी निपटान | अभियान समाप्ति के बाद भी समयबद्ध निपटान की व्यवस्था बनी रहे, यह सुनिश्चित करना |
| ई-कचरे का सुरक्षित पृथक्करण | अधिकृत पुनर्चक्रण इकाइयों के बाहर होने वाले असुरक्षित निपटान से स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा |
| अभिलेखों की छंटाई | विधिक और ऐतिहासिक महत्व वाले दस्तावेज़ों के अनुचित विनाश का जोखिम |
| डिजिटल डेटा की सुरक्षा | डिजिटलीकृत अभिलेखों में साइबर सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी कमजोरियाँ |
| व्यवहार परिवर्तन | स्वच्छता और कार्य-संस्कृति में स्थायी बदलाव के लिए निरंतर निगरानी और प्रोत्साहन की कमी |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)
- आईजीओटी कर्मयोगी (iGOT Karmayogi)
आगे की राह
- लंबित मामलों के निपटान को अभियान-अवधि से आगे बढ़ाकर नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया में समाहित किया जाए और SCDPM 6 पोर्टल के आंकड़ों की नियमित समीक्षा हो
- शिकायत और आश्वासन-निपटान के लिए स्पष्ट समय-सीमा और उत्तरदायी अधिकारी का निर्धारण हो
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत अधिकृत पुनर्चक्रण इकाइयों के माध्यम से निपटान को प्राथमिकता दी जाए
- अभिलेखों की छंटाई से पहले धारण-अवधि और ऐतिहासिक महत्व के मानदंड स्पष्ट किए जाएँ, ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज़ नष्ट न हों
- डिजिटलीकरण के साथ साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और पहुँच-नियंत्रण के उपाय सुनिश्चित किए जाएँ
- आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण को कार्य-प्रदर्शन और पदोन्नति-मूल्यांकन से जोड़ने पर विचार किया जाए
- कार्यालय स्थान-प्रबंधन की सफलता के मापदंड तय कर उन्हें अन्य मंत्रालयों के साथ साझा किया जाए
- अभियान के परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन कर सर्वोत्तम प्रथाओं को संस्थागत रूप दिया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता अभियान (Swachhta Abhiyan) · विशेष अभियान 6 (Special Campaign 6) · लंबित मामलों का निपटान · अभिलेख प्रबंधन (Record Management) · ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) · विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) · सार्वजनिक शिकायत निवारण (Public Grievance Redressal) · iGOT कर्मयोगी पोर्टल (iGOT Karmayogi Portal) · 5S पद्धति (5S Method) · मिशन मोड (Mission Mode) · संस्थागत क्षमता निर्माण (Institutional Capacity Building) · सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51A(g) — पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 77 — सरकारी कार्य-संचालन और कार्य-आवंटन
- अनुच्छेद 309 — लोक सेवकों की भर्ती और सेवा-शर्तें
अवधारणा प्रवाह
तैयारी चरण (16 से 30 सितंबर 2026): लंबित मामलों, वीआईपी संदर्भों और संसदीय आश्वासनों का मूल्यांकन → प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान और कार्यान्वयन के लिए लक्षित कार्य-योजनाओं का निर्माण → कार्यान्वयन चरण का आरंभ (2 अक्टूबर 2026): स्वच्छता, अभिलेख छंटाई और कार्यालय स्थान-प्रबंधन → ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप पृथक्करण और निपटान तथा अभिलेखों का डिजिटलीकरण → SCDPM 6 पोर्टल पर प्रगति की निगरानी और आईजीओटी कर्मयोगी के माध्यम से क्षमता निर्माण → कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार, जो सुशासन के लक्ष्य की ओर ले जाता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) की अवधारणा को अपनाया गया है।
2. इन नियमों के अंतर्गत उत्पादकों पर ई-कचरे के संग्रहण और पुनर्चक्रण के लक्ष्य पूरे करने की जिम्मेदारी डाली गई है।
3. ये नियम केवल सरकारी कार्यालयों के उपकरणों पर लागू होते हैं, निजी उपभोक्ताओं पर नहीं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में EPR का प्रावधान है, जिसके तहत उत्पादकों को संग्रहण और पुनर्चक्रण के लक्ष्य पूरे करने होते हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि ये नियम उत्पादकों, उपभोक्ताओं और बल्क उपभोक्ताओं सहित सभी हितधारकों पर लागू होते हैं।
Q2. निम्नलिखित युग्मों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (मंच/व्यवस्था)
A. iGOT कर्मयोगी पोर्टल
B. CPGRAMS
C. सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993
D. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022
सूची-II (विवरण)
1. ऑनलाइन क्षमता निर्माण का मंच
2. केंद्रीकृत ऑनलाइन सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली
3. केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन से संबंधित विधि
4. इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के निपटान हेतु विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व लागू करने वाले नियम
सही कूट चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-3, B-2, C-1, D-4
- A-1, B-3, C-2, D-4
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — iGOT कर्मयोगी पोर्टल सिविल सेवकों के लिए ऑनलाइन क्षमता निर्माण मंच है (A-1)। CPGRAMS केंद्रीकृत शिकायत प्रणाली है (B-2)। सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्र सरकार के अभिलेखों से संबंधित है (C-3)। ई-कचरा नियम, 2022 में EPR लागू होता है (D-4)।
Q3. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): सरकारी कार्यालयों में अभिलेखों के डिजिटलीकरण से भौतिक भंडारण की आवश्यकता घटती है।
कारण (R): डिजिटल रूप में संग्रहीत अभिलेखों को बिना भौतिक स्थान घेरे संग्रहित और पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — डिजिटलीकरण से अभिलेख इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं, इसलिए भौतिक अलमारियों और कमरों की आवश्यकता घटती है। यही कारण कथन (A) की सही व्याख्या है। यह स्वच्छता एवं स्थान-प्रबंधन के उद्देश्य से भी जुड़ा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटान और अभिलेख प्रबंधन जैसे उद्देश्यों के लिए प्रायः अभियान-आधारित (मिशन मोड) दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जिसकी सफलता प्रायः अभियान की समय-सीमा तक सीमित रहती है। इस दृष्टिकोण की उपयोगिता और सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ऐसी पहलें कार्य-संस्कृति में स्थायी परिवर्तन ला सकती हैं? यदि नहीं, तो उन्हें संस्थागत बनाने के लिए कौन-से उपाय आवश्यक हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा विशेष अभियान 6 का तैयारी चरण 16–30 सितंबर 2026 तक और कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक; नोडल विभाग DARPG; लक्ष्य SCDPM 6 पोर्टल पर अपलोड; स्वच्छ भारत मिशन (2 अक्टूबर 2014) को इसका व्यापक संदर्भ मानें। बिंदु 1 (अभियान की उपयोगिता): अल्पकालिक समय-सीमा, दृश्य परिणाम, विभागीय ध्यान और जनशक्ति की एकत्रीकरण क्षमता; जापानी 5S पद्धति (Seiri, Seiton, Seiso, Seiketsu, Shitsuke) का कार्यस्थल-सुधार में उपयोग। बिंदु 2 (लंबित मामले): VIP संदर्भ, सार्वजनिक शिकायतें, संसदीय आश्वासन (Committee on Government Assurances) और समयबद्ध कार्रवाई की प्राथमिकता-निर्धारण; CPGRAMS जैसी प्रणालियों का डेटा-आधारित निगरानी में उपयोग; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2008) की ‘Citizen Centric Administration’ रिपोर्ट के सिद्धांत। बिंदु 3 (अभिलेख प्रबंधन): सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993; राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India); मैक्स वेबर की नौकरशाही में लिखित नियमों और अभिलेखों की केंद्रीय भूमिका तथा जवाबदेही; RTI अधिनियम, 2005 के तहत अभिलेखों की उपलब्धता; अभिलेखों को हटाने में प्रतिधारण-अनुसूची (retention schedule) के बिना जल्दबाज़ी का जोखिम। बिंदु 4 (ई-कचरा): ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में EPR; उत्पादकों के संग्रहण लक्ष्य; बल्क उपभोक्ता के रूप में सरकारी कार्यालयों की जिम्मेदारी; CPCB की निगरानी; अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं को अपशिष्ट सौंपना; चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy)। बिंदु 5 (सीमाएँ): अभियान-थकान, दिखावटी सफाई, मानव-व्यवहार में स्थायी बदलाव की कठिनाई; थेलर और सनस्टीन की ‘नज’ (nudge) अवधारणा से व्यवहार-परिवर्तन; डिजिटलीकरण में तकनीकी दक्षता और डिजिटल विभाजन। बिंदु 6 (संस्थागतकरण के उपाय): मिशन कर्मयोगी (2020) और राष्ट्रीय क्षमता ढांचा (NCFG) से जुड़ा iGOT कर्मयोगी पोर्टल द्वारा योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण; कार्य-निष्पादन मूल्यांकन में स्वच्छता और अभिलेख-सूचकांक को शामिल करना; नियमित आंतरिक ऑडिट; नियमित (सतत) समीक्षा तंत्र। संतुलित मत: अभियान ‘प्रारंभिक धक्का’ देते हैं, जबकि स्थायित्व नियमों, प्रोत्साहन-प्रणाली और जवाबदेही-तंत्र से आता है। निष्कर्ष: अभियान को प्रक्रिया-सुधार और नियमित निगरानी से जोड़कर ही कार्य-संस्कृति में स्थायी परिवर्तन संभव है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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