डीपफेक से निपटने के लिए सरकार ने उठाए कड़े कदम: जानिए नए नियम और कानून

सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित डीपफेक से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया — concept mind map

डीपफेक से निपटने के लिए सरकार ने उठाए कड़े कदम: जानिए नए नियम और कानून

✎ भारत सरकार ने डीपफेक से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और आईटी नियमों के तहत नियामक ढांचे को मजबूत किया है, जिसमें AI-जनित सामग्री पर लेबल लगाना और अवैध सामग्री हटाने की समय सीमा को 3 घंटे करना…

डीपफेक नियंत्रण प्रक्रियाAI दुर्पयोगडीपफेक सामग्री निर्माणनियामक ढांचाकानूनों को सुदृढ़ करनालेबल अनिवार्यAI-जनित सामग्री पहचानगैरकानूनी हटाना36 घंटे से 3 घंटेसुरक्षित साइबरस्पेसविश्वास एवं जवाबदेही
डीपफेक नियंत्रण प्रक्रिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: डीपफेक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, निजता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • Essay: डिजिटल युग में निजता और सुरक्षा के बीच संतुलन: डीपफेक का बढ़ता खतरा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दोहरा पहलू: अवसर और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार ने डीपफेक से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और आईटी नियमों के तहत नियामक ढांचे को मजबूत किया है, जिसमें AI-जनित सामग्री पर लेबल लगाना और अवैध सामग्री हटाने की समय सीमा को 3 घंटे करना शामिल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित डीपफेक से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए अपने नियामक ढांचे को मजबूत किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने आईटी नियमों के अंतर्गत AI-जनित सामग्री पर लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है और गैरकानूनी सामग्री को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी है, ताकि उपयोगकर्ताओं के लिए एक खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह साइबरस्पेस सुनिश्चित किया जा सके।

पृष्ठभूमि

  • डीपफेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बनाई गई ऐसी सामग्री है जो किसी व्यक्ति को कुछ ऐसा कहते या करते हुए दिखाती है जो उसने वास्तव में नहीं किया है। इसमें कृत्रिम ऑडियो, वीडियो और लिखित सामग्री शामिल हो सकती है।
  • डीपफेक का उपयोग गलत सूचना, दुष्प्रचार, पहचान की चोरी, धोखाधड़ी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने जैसे विभिन्न दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
  • इनके माध्यम से व्यक्तियों, संगठनों और यहाँ तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी गंभीर खतरा हो सकता है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और विश्वास में कमी आ सकती है।
  • भारत में साइबरस्पेस को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के माध्यम से एक कानूनी ढाँचा पहले से मौजूद है।
  • बढ़ते डिजिटल उपयोग और AI प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ, डीपफेक की चुनौती अधिक जटिल हो गई है, जिसके लिए मौजूदा कानूनों और नियमों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता महसूस की गई।
  • सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें कानूनी प्रावधानों को मजबूत करना और मध्यस्थों की जवाबदेही बढ़ाना शामिल है।

डीपफेक और संबंधित नियामक ढाँचा

  • डीपफेक (Deepfake): यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तकनीकों का उपयोग करके बनाई गई सिंथेटिक मीडिया सामग्री है, जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे या आवाज को किसी अन्य व्यक्ति के शरीर या आवाज पर इस तरह से आरोपित किया जाता है कि वह वास्तविक लगे।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000): यह अधिनियम कंप्यूटर संबंधी अपराधों जैसे पहचान की चोरी (धारा 66C), प्रतिरूपण (धारा 66D), निजता का उल्लंघन (धारा 66E), और अश्लील सामग्री के प्रकाशन (धारा 67, 67A) के लिए दंड का प्रावधान करता है। यह मध्यस्थों को गैरकानूनी सामग्री हटाने के नोटिस जारी करने और विशिष्ट सूचना तक पहुँच को अवरुद्ध करने का अधिकार भी देता है।
  • भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS, 2023): इस नए कानून में प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी (धारा 319), सामान्य धोखाधड़ी (धारा 336), और गलत या भ्रामक बयान, अफवाहें या रिपोर्ट बनाने के कृत्य को दंडित करके गलत सूचना के प्रसार पर अंकुश लगाने (धारा 353) के प्रावधान शामिल हैं। डीपफेक से जुड़े संगठित साइबर अपराधों पर भी धारा 111 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सकता है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (IT Rules, 2021): ये नियम मध्यस्थों पर उचित सावधानी बरतने का दायित्व डालते हैं। उन्हें उपयोगकर्ताओं को ऐसी जानकारी साझा न करने के लिए सूचित करना होगा जो अश्लील, निजता का उल्लंघन करने वाली, गलत सूचना देने वाली, या AI के माध्यम से अन्य लोगों का रूप धारण करने वाली हो।
  • मध्यस्थों की बढ़ी हुई जवाबदेही: इन नियमों के तहत, मध्यस्थों को अब AI-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाना होगा। गैरकानूनी सामग्री को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
  • सोशल मीडिया मध्यस्थों के अतिरिक्त दायित्व: 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार वाले सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMIs) को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गंभीर सामग्री के मूल रचनाकारों का पता लगाने में मदद करनी होगी, स्वचालित उपकरणों का उपयोग करना होगा, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी, और भारत में स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी।
  • शिकायत निवारण तंत्र: मध्यस्थों के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करना और निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायतों का समाधान करना अनिवार्य है। यदि मध्यस्थ शिकायत का समाधान नहीं करते हैं, तो उपयोगकर्ता अपीलीय समिति में अपील कर सकते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
AI कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य उपयोगकर्ताओं को डीपफेक सामग्री की पहचान करने में मदद करेगा और पारदर्शिता बढ़ाएगा।
गैरकानूनी सामग्री हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे डीपफेक और अन्य गैरकानूनी सामग्री के तेजी से प्रसार को रोकेगा, जिससे संभावित नुकसान कम होगा।
आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 66C, 66D, 66E पहचान की चोरी, प्रतिरूपण और निजता के उल्लंघन जैसे साइबर अपराधों के लिए दंड का प्रावधान।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 336 और 353 धोखाधड़ी और गलत सूचना/दुष्प्रचार के प्रसार को रोकने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करती है।
आईटी नियम, 2021 के तहत मध्यस्थों के दायित्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गैरकानूनी सामग्री को नियंत्रित करने और उपयोगकर्ताओं को सूचित करने के लिए जवाबदेह बनाता है।
शिकायत निवारण तंत्र उपयोगकर्ताओं को गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करने और समयबद्ध समाधान प्राप्त करने का अवसर देता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह कदम व्यक्तियों की निजता (Privacy) और प्रतिष्ठा की रक्षा करेगा, जो डीपफेक के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
  • गलत सूचना और दुष्प्रचार (Disinformation and Misinformation) के प्रसार पर अंकुश लगाकर सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद करेगा।
  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों, जैसे अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन, को रोकने में सहायक होगा।

आर्थिक महत्व

  • पहचान की चोरी और धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों से होने वाले वित्तीय नुकसान को कम करने में सहायक।
  • साइबरस्पेस में विश्वास और सुरक्षा बढ़ाकर डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा देगा।
  • व्यवसायों और व्यक्तियों को डीपफेक-आधारित ब्लैकमेल या मानहानि से बचाने में मदद करेगा, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी।

शासनिक महत्व

  • सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय ऑनलाइन वातावरण प्रदान करेगा।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों को डीपफेक से संबंधित अपराधों की जांच और अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए सशक्त करेगा।
  • यह नियामक ढाँचा भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में अग्रणी बनाएगा।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी चुनौतियाँ

  • डीपफेक तकनीकें लगातार विकसित हो रही हैं, जिससे उन्हें पहचानना और हटाना अधिक कठिन हो जाता है।
  • AI-आधारित सामग्री का पता लगाने और उसे लेबल करने के लिए उन्नत तकनीकी समाधानों की आवश्यकता है।

2. कार्यान्वयन चुनौतियाँ

  • मध्यस्थों (Intermediaries) द्वारा नए नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना एक चुनौती है, खासकर छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए।
  • शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ और सुलभ बनाना ताकि उपयोगकर्ता आसानी से अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें।

3. निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संतुलन

  • गैरकानूनी सामग्री को हटाने और व्यक्तियों की निजता की रक्षा के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन न हो।
  • यह सुनिश्चित करना कि नियामक उपाय सेंसरशिप का कारण न बनें।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव

  • डीपफेक एक वैश्विक समस्या है, और प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानकीकृत नियामक दृष्टिकोणों की आवश्यकता है।
  • विभिन्न देशों के कानूनों में सामंजस्य स्थापित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डीपफेक का तेजी से विकास AI तकनीकें इतनी तेजी से विकसित हो रही हैं कि नियामक ढाँचा उनके साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष कर सकता है।
छोटे मध्यस्थों पर बोझ छोटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियमों का पालन करना और आवश्यक तकनीकी व मानव संसाधन जुटाना मुश्किल हो सकता है।
गलत सकारात्मक (False Positives) AI-आधारित पहचान प्रणालियाँ कभी-कभी वैध सामग्री को भी डीपफेक के रूप में गलत तरीके से चिह्नित कर सकती हैं, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
सीमा-पार डीपफेक विदेशी सर्वरों से उत्पन्न होने वाले डीपफेक को नियंत्रित करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उपयोगकर्ता जागरूकता का अभाव कई उपयोगकर्ताओं को डीपफेक के खतरों और नए नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, जिससे वे आसानी से शिकार बन सकते हैं।

आगे की राह

  • डीपफेक का पता लगाने और उन्हें हटाने के लिए AI-आधारित उपकरणों में निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
  • सोशल मीडिया मध्यस्थों के साथ मिलकर काम करना ताकि नए नियमों का प्रभावी ढंग से और समयबद्ध तरीके से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
  • डीपफेक के खतरों और उन्हें पहचानने के तरीकों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर डीपफेक से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और मानकीकृत नियामक ढाँचे के विकास की वकालत करना।
  • शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक सुलभ, कुशल और पारदर्शी बनाना।
  • नियमित अंतराल पर नियामक ढाँचे की समीक्षा करना और उसे उभरती तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप अद्यतन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

डीपफेक · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 · भारतीय न्याय संहिता, 2023 · आईटी नियम, 2021 · साइबर सुरक्षा · डिजिटल इंडिया · मध्यस्थ दायित्व · निजता का अधिकार · गलत सूचना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘निजता के अधिकार की सुरक्षा’}

अवधारणा प्रवाह

AI तकनीक का दुरुपयोग  →  डीपफेक सामग्री का निर्माण  →  गलत सूचना/धोखाधड़ी का प्रसार  →  व्यक्तिगत/सामाजिक/आर्थिक नुकसान  →  सरकार द्वारा नियामक ढाँचा मजबूत करना  →  सुरक्षित साइबरस्पेस सुनिश्चित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 कंप्यूटर संबंधी अपराधों के लिए दंड निर्धारित करती है।
2. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 319 प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के लिए दंड का प्रावधान करती है।
3. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत, मध्यस्थों को गैरकानूनी सामग्री को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 और 2 सही हैं। आईटी अधिनियम की धारा 66 कंप्यूटर संबंधी अपराधों के लिए दंड निर्धारित करती है, और बीएनएस की धारा 319 प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के लिए दंड का प्रावधान करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि 36 घंटे से 3 घंटे की समय सीमा मध्यस्थों के लिए एक नया दायित्व है, न कि आईटी नियमों का सीधा प्रावधान।

Q2. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से दायित्व सामाजिक मीडिया मध्यस्थों (SSMIs) पर लागू होता/होते है?
1. संदेश सेवाओं के मूल रचनाकारों का पता लगाने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करना।
2. गैरकानूनी सामग्री के प्रसार का पता लगाने और उसे सीमित करने के लिए स्वचालित उपकरणों का उपयोग करना।
3. अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारत में स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी तीनों दायित्व सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार वाले सामाजिक मीडिया मध्यस्थों (SSMIs) पर लागू होते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ डीपफेक (Deepfake) से उत्पन्न खतरों का विश्लेषण करें और भारत सरकार द्वारा इनसे निपटने के लिए अपनाए गए नियामक ढांचे और कानूनी प्रावधानों की विस्तार से चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में डीपफेक की परिभाषा और इसके संभावित खतरों (जैसे पहचान की चोरी, गलत सूचना, मानहानि, राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव) का उल्लेख करें। इसके बाद, भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को निम्नलिखित शीर्षकों के तहत विस्तार से बताएं:
1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 43, 66, 66C, 66D, 66E, 67, 67A, 69A, 79, 78 और 80 का उल्लेख करें।
2. भारतीय न्याय संहिता, 2023: धारा 319, 336, 353, और 111 के प्रावधानों को स्पष्ट करें।
3. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: मध्यस्थों के सामान्य दायित्वों, गैरकानूनी सामग्री के प्रकार, और सामाजिक मीडिया मध्यस्थों (SSMIs) के अतिरिक्त दायित्वों (जैसे मूल रचनाकारों का पता लगाना, स्वचालित उपकरण, अनुपालन रिपोर्ट, शिकायत निवारण तंत्र) पर प्रकाश डालें।
निष्कर्ष में, इन उपायों की प्रभावशीलता और आगे की चुनौतियों पर संक्षिप्त टिप्पणी करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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