तेलंगाना-केंद्र सरकार की बैठक: दलहन खरीद, ऑयल पाम और कृषि योजनाओं पर चर्चा

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से तेलंगाना के कृषि मंत्री श्री टी. नागेश्वर राव की मुलाकात, खेती-किसानी पर — diagram

तेलंगाना-केंद्र सरकार की बैठक: दलहन खरीद, ऑयल पाम और कृषि योजनाओं पर चर्चा

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केंद्र-राज्य कृषि सहयोग

✎ केंद्र-राज्य समन्वय भारतीय कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें MSP पर दलहन खरीद, ऑयल पाम संवर्धन और SATHI Portal जैसी पहलें शामिल हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि, न्यूनतम समर्थन मूल्य, खाद्य प्रसंस्करण
  • Prelims: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), दलहन खरीद, ऑयल पाम, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना (KY), SATHI Portal, दलहन मिशन, ऑयलसीड मिशन
  • Essay: भारत में कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण और किसानों की आय दोगुनी करना, केंद्र-राज्य संबंधों में सहयोगात्मक संघवाद की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य समन्वय भारतीय कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें MSP पर दलहन खरीद, ऑयल पाम संवर्धन और SATHI Portal जैसी पहलें शामिल हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय कृषि मंत्री और तेलंगाना के कृषि मंत्री के बीच हाल ही में हुई बैठक में दलहन खरीद, ऑयल पाम की खेती, विभिन्न कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन और बीज क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इस बैठक ने कृषि क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है, विशेषकर किसानों के हितों की रक्षा और कृषि विकास को गति देने के संदर्भ में।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कृषि एक राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से राज्यों को सहायता प्रदान करती है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) किसानों को उनकी उपज के लिए एक सुनिश्चित मूल्य प्रदान करने हेतु भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है, जिससे उन्हें बाजार की अस्थिरता से बचाया जा सके।
  • दलहन और तिलहन (ऑयलसीड) भारत की खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए महत्वपूर्ण फसलें हैं, और इनके उत्पादन को बढ़ावा देना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
  • ऑयल पाम की खेती खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता रखती है।
  • बीज क्षेत्र कृषि उत्पादन की नींव है, और गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं जैसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना के माध्यम से राज्यों को कृषि विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

कृषि क्षेत्र में केंद्र-राज्य समन्वय के प्रमुख बिंदु

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दलहन खरीद: केंद्र सरकार तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद MSP पर सुनिश्चित करती है। अन्य दलहन फसलों की 25 प्रतिशत तक खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत की जाती है।
  • ऑयल पाम विकास: तेलंगाना ने राज्य में ऑयल पाम के लिए रिसर्च स्टेशन स्थापित करने और इसके लिए MSP निर्धारित करने का अनुरोध किया है। केंद्र सरकार ने दलहन मिशन और ऑयलसीड मिशन के क्रियान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया है।
  • कृषि योजनाओं का क्रियान्वयन: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तेलंगाना को 100 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है, जबकि कृषोन्नति योजना (KY) के तहत 329 करोड़ रुपये राज्य को जारी किए गए हैं।
  • SATHI Portal: यह पोर्टल बीज के पूरे जीवन चक्र को एकीकृत करता है, जिसमें बीज उत्पादन से लेकर प्रमाणन, लाइसेंसिंग, इन्वेंट्री और किसानों तक बिक्री तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल और स्वचालित किया जाता है। यह बीजों की ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करता है।
  • सहयोगात्मक संघवाद: बैठक में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा किसानों के हित में केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का प्रभावी और तेज क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
  • कृषि अनुसंधान और विकास: ऑयल पाम के लिए रिसर्च स्टेशन की मांग कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के महत्व को दर्शाती है, जो उत्पादकता बढ़ाने और नई तकनीकों को अपनाने में सहायक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
दलहन खरीद केंद्र सरकार द्वारा तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
ऑयल पाम तेलंगाना में ऑयल पाम के लिए अनुसंधान केंद्र स्थापित करने और इसके लिए MSP निर्धारित करने का अनुरोध किया गया है, जो खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है।
SATHI पोर्टल यह बीज के पूरे जीवन चक्र को एकीकृत करता है, बीज उत्पादन से लेकर बिक्री तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल और स्वचालित करता है, जिससे बीजों की पता लगाने की क्षमता (traceability) सुनिश्चित होती है।
केंद्र-राज्य समन्वय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया, जो सहकारी संघवाद का उदाहरण है।
कृषि योजनाओं का क्रियान्वयन राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्यों को धनराशि जारी की जाती है, जिससे कृषि क्षेत्र का विकास सुनिश्चित हो सके।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन की खरीद किसानों की आय को स्थिर करती है और उन्हें बाजार की अस्थिरता से बचाती है।
  • ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने और उसके लिए MSP निर्धारित करने से खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • कृषि क्षेत्र में डिजिटल समाधान जैसे SATHI पोर्टल से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होंगे, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।

सामाजिक महत्व

  • किसानों की आय में वृद्धि होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होता है और गरीबी कम होती है।
  • गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता से फसल की पैदावार बढ़ती है, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है और कुपोषण से लड़ने में मदद मिलती है।

प्रशासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य के कृषि मंत्रियों की बैठकें सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देती हैं, जिससे राष्ट्रीय कृषि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होता है।
  • SATHI पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक दक्षता बढ़ाते हैं और भ्रष्टाचार को कम करने में मदद करते हैं।

पर्यावरण महत्व

  • दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने से फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को प्रोत्साहन मिलता है, जो मृदा स्वास्थ्य और जैव विविधता के लिए लाभकारी है।

चुनौतियाँ

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रभावी क्रियान्वयन

  • सभी फसलों के लिए MSP की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • छोटे और सीमांत किसानों तक MSP का लाभ पहुंचाना और खरीद केंद्रों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करना।

2. ऑयल पाम की खेती का विस्तार

  • ऑयल पाम के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान, जल संसाधनों का प्रबंधन और किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • ऑयल पाम की खेती के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना।

3. बीज क्षेत्र में सुधार

  • नकली बीजों की समस्या से निपटना और किसानों को प्रमाणित बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • SATHI पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के बारे में किसानों में जागरूकता बढ़ाना और उनके उपयोग को प्रोत्साहित करना।

4. केंद्र-राज्य समन्वय में चुनौतियाँ

  • केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना और वित्तीय आवंटन के उपयोग में जवाबदेही तय करना।
  • कृषि जैसे राज्य सूची के विषय पर केंद्र और राज्य के बीच नीतियों में सामंजस्य स्थापित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
दलहन खरीद में असमानता कुछ दलहन फसलों की 100% खरीद MSP पर होती है, जबकि अन्य की केवल 25% तक, जिससे किसानों के बीच असंतोष हो सकता है।
ऑयल पाम के लिए MSP का अभाव ऑयल पाम के लिए MSP निर्धारित न होने से किसानों को मूल्य अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है और वे इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित नहीं होंगे।
SATHI पोर्टल का धीमा क्रियान्वयन यदि पोर्टल का क्रियान्वयन प्राथमिकता से नहीं किया जाता है, तो बीज क्षेत्र में पारदर्शिता और पता लगाने की क्षमता के लाभ प्राप्त नहीं होंगे।
मिशनों के क्रियान्वयन में देरी दलहन मिशन और ऑयलसीड मिशन के धीमे क्रियान्वयन से देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्रीय योजनाओं के धन का उपयोग राज्यों को जारी की गई धनराशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना एक चुनौती है, ताकि योजनाओं के उद्देश्य पूरे हो सकें।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA)
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
  • कृषोन्नति योजना (KY)
  • दलहन मिशन
  • ऑयलसीड मिशन

आगे की राह

  • सभी प्रमुख दलहन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए ताकि अधिक किसानों को लाभ मिल सके।
  • ऑयल पाम के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी MSP नीति विकसित की जानी चाहिए, साथ ही अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  • SATHI पोर्टल के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और किसानों को इसके उपयोग के लिए व्यापक प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • दलहन मिशन और ऑयलसीड मिशन के तहत राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता में वृद्धि की जाए ताकि वे लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नियमित संवाद और समन्वय तंत्र को मजबूत किया जाए ताकि कृषि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
  • कृषि क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिसमें ड्रोन, AI और IoT जैसी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
  • किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो और आय के स्रोत बढ़ें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) · दलहन खरीद · ऑयल पाम · कृषि योजनाएं · बीज क्षेत्र · राष्ट्रीय कृषि विकास योजना · कृषोन्नति योजना · SATHI पोर्टल · केंद्र-राज्य समन्वय · कृषि विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची में विषयों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘कृषि राज्य सूची का विषय है’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्रीय कृषि मंत्री से राज्य कृषि मंत्री की मुलाकात  →  राज्य की कृषि संबंधी समस्याओं और मांगों पर चर्चा  →  केंद्र सरकार द्वारा MSP और योजनाओं का आश्वासन  →  राज्यों से योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन का आग्रह  →  केंद्र-राज्य समन्वय से कृषि विकास को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करती है।
2. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत सभी दलहन फसलों की 25 प्रतिशत तक खरीद की जाती है।
3. SATHI पोर्टल का उद्देश्य बीज उत्पादन से लेकर किसानों तक बिक्री तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल बनाना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है क्योंकि सरकार तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद MSP पर करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि PM-AASHA के तहत अन्य दलहन फसलों की 25% तक खरीद की जाती है, न कि सभी दलहन फसलों की। कथन 3 सही है क्योंकि SATHI पोर्टल बीज के पूरे जीवन चक्र को एकीकृत करता है, जिसमें उत्पादन से लेकर बिक्री तक शामिल है।

Q2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाना है।
2. कृषोन्नति योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समग्र विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें विभिन्न उप-योजनाएं शामिल हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: 1 और 2 दोनों — राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) राज्यों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे उन्हें अपनी कृषि विकास रणनीतियों को तैयार करने में लचीलापन मिलता है। कृषोन्नति योजना (KY) एक अम्ब्रेला योजना है जिसमें विभिन्न उप-योजनाएं शामिल हैं, जैसे एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) आदि, जो कृषि के समग्र विकास पर केंद्रित हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि क्षेत्र के विकास में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, कृषि में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने में SATHI पोर्टल जैसी पहलों की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** भारत में कृषि के महत्व और केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **केंद्र-राज्य समन्वय का महत्व:**
* **योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन:** राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्यों की भागीदारी आवश्यक।
* **संसाधनों का इष्टतम उपयोग:** वित्तीय संसाधनों (जैसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जारी राशि) और तकनीकी विशेषज्ञता का साझाकरण।
* **स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां:** राज्यों की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों और फसल पैटर्न के अनुसार नीतियों का निर्माण।
* **न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद:** दलहन जैसी फसलों की खरीद में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय।
* **आपदा प्रबंधन और कृषि संकट:** सूखे, बाढ़ जैसी स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और राहत कार्यों में सहयोग।
3. **SATHI पोर्टल की भूमिका:**
* **बीज गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी:** बीज के पूरे जीवन चक्र (उत्पादन, प्रमाणन, लाइसेंसिंग, बिक्री) को डिजिटल और स्वचालित करना।
* **किसानों तक पहुंच:** प्रमाणित विक्रेताओं के माध्यम से किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
* **पारदर्शिता और जवाबदेही:** बीज आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाना और धोखाधड़ी को कम करना।
* **कृषि में डिजिटलीकरण:** कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना।
4. **निष्कर्ष:** कृषि क्षेत्र के सतत विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय और प्रौद्योगिकी के प्रभावी एकीकरण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में तेलंगाना के कृषि मंत्री टी. नागेश्वर राव ने केंद्र सरकार के किस केंद्रीय मंत्री से खेती-किसानी पर व्यापक चर्चा की?

  1. श्री शिवराज सिंह चौहान
  2. श्री नरेंद्र सिंह तोमर
  3. श्री पुरुषोत्तम रूपाला
  4. श्री कैलाश चौधरी

उत्तर: श्री शिवराज सिंह चौहान — तेलंगाना के कृषि मंत्री टी. नागेश्वर राव ने केंद्र सरकार के केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से खेती-किसानी पर व्यापक चर्चा की।

Mains: तेलंगाना राज्य में कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों और केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही संबंधित योजनाओं के प्रभाव पर एक निबंध लिखिए। (250 शब्द)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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