02 Nov देवभूमि परिवार पोर्टल और विकसित उत्तराखंड विजन-2047: सुशासन की नई पहल
✎ देवभूमि परिवार पोर्टल पात्र परिवारों तक योजना-लाभ पहुंचाने का डिजिटल माध्यम है, जबकि विकसित उत्तराखंड विजन-2047 राज्य के दीर्घकालिक विकास-लक्ष्यों का संकेतक-आधारित दस्तावेज़ है जो विकसित भारत @2047 से जुड़ा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था (ई-गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित सेवाएं, कल्याणकारी योजनाओं का लक्षित वितरण) | GS Paper II — संघवाद और राज्य सरकारों की भूमिका | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (दीर्घकालिक नियोजन, आर्थिक संवृद्धि के लक्ष्य, संकेतक-आधारित विकास)
- Prelims: देवभूमि परिवार पोर्टल, विकसित उत्तराखंड विजन-2047, विकसित भारत (Viksit Bharat) @2047 दृष्टिकोण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT — Direct Benefit Transfer), ई-गवर्नेंस (e-Governance), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023), नीति आयोग (NITI Aayog) और सतत विकास लक्ष्य (SDG) संकेतक, उत्तराखंड लोक सेवा अधिकार अधिनियम (Uttarakhand Right to Service Act)
- Essay: सुशासन में सेवा-वितरण की पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित शासन की भूमिका, दीर्घकालिक विकास-दृष्टि (Vision Document) और संकेतक-आधारित नियोजन: राज्य और राष्ट्र के संदर्भ में
त्वरित पुनरावृत्ति: देवभूमि परिवार पोर्टल पात्र परिवारों तक योजना-लाभ पहुंचाने का डिजिटल माध्यम है, जबकि विकसित उत्तराखंड विजन-2047 राज्य के दीर्घकालिक विकास-लक्ष्यों का संकेतक-आधारित दस्तावेज़ है जो विकसित भारत @2047 से जुड़ा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड सरकार ने सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में दो पहल की हैं। पहली, देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ, जिसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना, बार-बार दस्तावेज देने की आवश्यकता कम करना और विभागों के बीच सेवाओं को सरल, पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित बनाना बताया गया है। दूसरी, ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ का विमोचन, जिसमें लगभग 440 संकेतकों के आधार पर राज्य के विकास-लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यह विजन विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प के साथ तालमेल में प्रस्तुत किया गया है। समाचार-स्रोत में पोर्टल की तकनीकी संरचना, पात्रता-मानदंड या किन योजनाओं को इससे जोड़ा जाएगा, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
पृष्ठभूमि
- उत्तराखंड 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों को अलग करके भारत का 27वां राज्य बना। पर्वतीय भूगोल, सीमित कृषि-योग्य भूमि और दूरस्थ बसावट के कारण यहां सेवा-वितरण की चुनौतियां अपेक्षाकृत अधिक हैं।
- भारत में ई-गवर्नेंस को डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से गति मिली है। आधार-आधारित पहचान, डिजिलॉकर जैसे मंच और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ने योजनाओं में दोहराव और रिसाव कम करने का प्रयास किया है।
- भारत में नागरिक-अधिकार के रूप में समयबद्ध सेवा-वितरण की व्यवस्था राज्य-स्तर के सेवा अधिकार कानूनों द्वारा लागू की गई है। उत्तराखंड में इसका आधार उत्तराखंड लोक सेवा अधिकार अधिनियम है।
- राष्ट्रीय स्तर पर नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) पर आधारित राज्यों के प्रदर्शन-सूचकांक तैयार किए हैं, जिससे संकेतक-आधारित तुलना और लक्ष्य-निर्धारण की परंपरा विकसित हुई है।
- केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष के रूप में विकसित भारत का लक्ष्य-वर्ष घोषित किया है, जिसके बाद राज्य भी अपने-अपने दीर्घकालिक विजन-दस्तावेज तैयार कर रहे हैं।
देवभूमि परिवार पोर्टल और विकसित उत्तराखंड विजन-2047 क्या हैं?
- देवभूमि परिवार पोर्टल एक डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य परिवार-स्तर पर सरकारी योजनाओं की पात्रता की पहचान कर लाभ-वितरण को सरल बनाना बताया गया है।
- इसका मूल उद्देश्य एक ही जानकारी के लिए बार-बार दस्तावेज़ मांगने की प्रवृत्ति को कम करना और अलग-अलग विभागों के बीच सूचना-साझाकरण को बेहतर बनाना है।
- ऐसे मंचों में व्यक्तिगत और पारिवारिक डेटा का संग्रह होता है, इसलिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधान, सहमति और डेटा सुरक्षा के प्रश्न प्रासंगिक हो जाते हैं।
- विकसित उत्तराखंड विजन-2047 एक दीर्घकालिक नीति-दस्तावेज़ है, जिसमें लगभग 440 संकेतकों के आधार पर वर्ष 2047 तक के विकास-लक्ष्य तय किए गए हैं।
- संकेतक-आधारित नियोजन का लाभ यह है कि लक्ष्य मापने योग्य होते हैं और प्रगति की वार्षिक समीक्षा संभव होती है।
- यह विजन विकसित भारत (Viksit Bharat) के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप बताया गया है, जिससे केंद्र और राज्य की नीतियों में समन्वय की अपेक्षा रहती है।
- संविधान के अनुच्छेद 243ZD के अंतर्गत जिला योजना समिति का प्रावधान है, और राज्य स्तर पर विकास-नियोजन में पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी को संवैधानिक आधार प्राप्त है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| देवभूमि परिवार पोर्टल (Devbhoomi Parivar Portal) का परिवार-केंद्रित डिजिटल मंच | सरकारी योजनाओं के पात्र परिवारों की पहचान और सेवाओं की पहुँच को एक ही मंच से जोड़ने का प्रयास, जिससे लाभ से वंचित रहने की स्थिति कम हो |
| एक बार दस्तावेज़ देने का सिद्धांत (Once-only Principle) | एक ही जानकारी के लिए बार-बार दस्तावेज़ माँगने और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की प्रक्रिया घटाना, जिससे नागरिक-केंद्रित शासन को बल मिलता है |
| विकसित उत्तराखंड विजन-2047 (Viksit Uttarakhand Vision-2047) | राज्य के विकास के लिए 2047 तक का दीर्घकालिक दिशा-दस्तावेज़, जो लगभग 440 संकेतकों के आधार पर लक्ष्य तय करता है |
| संकेतक-आधारित लक्ष्य निर्धारण (Indicator-based Target Setting) | विकास को मापने योग्य इकाइयों में बाँटकर प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन को वस्तुनिष्ठ बनाना |
| राष्ट्रीय संकल्प से राज्य स्तरीय संरेखण | राज्य का विजन विकसित भारत के संकल्प से जुड़ता है, जिससे केंद्र और राज्य के लक्ष्यों में तालमेल बनता है |
महत्व
प्रशासनिक (Administrative)
- सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने से सुशासन (Good Governance) को मजबूती मिलने की अपेक्षा है।
- एक ही परिवार से जुड़े आँकड़े एक मंच पर होने से विभागों के बीच समन्वय सुधर सकता है।
- दस्तावेज़ों की बार-बार माँग घटने से नागरिक और प्रशासन, दोनों का समय और संसाधन बचते हैं।
सामाजिक-कल्याण (Social Welfare)
- पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुँचना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के उद्देश्य से जुड़ता है।
- जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित रहने वाले परिवारों की पहचान से लक्षित हस्तक्षेप (Targeted Intervention) संभव होता है।
आर्थिक (Economic)
- विकास लक्ष्यों का स्पष्ट निर्धारण निवेश और योजना निर्माण के लिए दिशा प्रदान करता है।
- पर्वतीय राज्य में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को संतुलित और सतत बनाने के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य उपयोगी होते हैं।
विकास-नियोजन (Development Planning)
- 2047 तक का विजन राज्य स्तर पर दीर्घकालिक नियोजन की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
- संकेतक-आधारित ढाँचा प्रगति के आकलन और नीति-समीक्षा की वैज्ञानिक पद्धति को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. डेटा की गुणवत्ता और एकीकरण
- पोर्टल की सफलता परिवार-स्तरीय आँकड़ों की सटीकता और अद्यतन रहने पर निर्भर करती है।
- अलग-अलग विभागों के पुराने डेटाबेस को जोड़ना तकनीकी और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर कठिन होता है।
- गलत या अधूरी जानकारी से पात्र परिवार बाहर रह सकते हैं और अपात्र को लाभ मिल सकता है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस और सूचना प्रौद्योगिकी का शासन में प्रयोग (GS-2)
2. डिजिटल विभाजन और पहुँच की समस्या
- पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट संपर्क और डिजिटल साक्षरता सीमित हो सकती है।
- बुजुर्ग तथा वंचित वर्ग के लिए ऑनलाइन प्रक्रियाएँ कठिन हो सकती हैं, जिससे बहिष्करण (Exclusion) का खतरा रहता है।
- सहायता केंद्रों और सामुदायिक सुविधा-केंद्रों के बिना डिजिटल मंच का लाभ सीमित रह जाता है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल विभाजन और समावेशी विकास (GS-2 एवं GS-3)
3. गोपनीयता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा
- परिवार-स्तरीय व्यक्तिगत डेटा का संग्रह और भंडारण गोपनीयता के प्रश्न उठाता है।
- डेटा सुरक्षा के लिए स्पष्ट वैधानिक ढाँचे, पहुँच-नियंत्रण और उत्तरदायित्व की व्यवस्था आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और नागरिक अधिकार (GS-3 एवं GS-2)
4. दीर्घकालिक लक्ष्यों का क्रियान्वयन और निगरानी
- 2047 तक के लक्ष्य लंबी अवधि के हैं, इसलिए सरकारों के बदलने पर भी निरंतरता बनाए रखना चुनौती है।
- 440 संकेतकों की निगरानी के लिए नियमित मूल्यांकन, विश्वसनीय आँकड़े और जवाबदेह तंत्र आवश्यक है।
- लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच अंतर को पाटने के लिए बजट और क्षमता-निर्माण का समन्वय ज़रूरी है।
यूपीएससी लिंक: नियोजन, निगरानी और मूल्यांकन तंत्र (GS-2 एवं GS-3)
5. पर्वतीय राज्य की भौगोलिक और आर्थिक बाधाएँ
- दुर्गम भूगोल, बिखरी बसावट और पलायन की समस्या सेवाओं की समान पहुँच में बाधा डालती है।
- सीमित राजस्व-आधार और निर्भरता के कारण विकास-लक्ष्यों की वित्तीय व्यवस्था चुनौतीपूर्ण रहती है।
यूपीएससी लिंक: पर्वतीय क्षेत्रों का विकास और क्षेत्रीय असंतुलन (GS-1 एवं GS-3)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| डेटा की सटीकता | पुराने या अधूरे आँकड़ों से गलत पात्रता-निर्धारण और लाभ से वंचना का खतरा |
| डिजिटल पहुँच | इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी से दूरस्थ तथा वंचित परिवार पीछे रह सकते हैं |
| डेटा गोपनीयता | व्यक्तिगत और परिवारिक जानकारी के दुरुपयोग या रिसाव की आशंका |
| विभागीय समन्वय | अलग-अलग विभागों की प्रणालियों को जोड़ने में प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएँ |
| लक्ष्यों की निरंतरता | 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए नीतिगत स्थिरता और नियमित मूल्यांकन की आवश्यकता |
| वित्तीय संसाधन | लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पर्याप्त बजट और संसाधनों का सुनिश्चित होना |
आगे की राह
- पोर्टल पर दर्ज परिवार-स्तरीय आँकड़ों का नियमित सत्यापन और अद्यतन करने की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए।
- सभी संबंधित विभागों के डेटाबेस के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) सुनिश्चित की जाए।
- डेटा संरक्षण के लिए गोपनीयता मानक, पहुँच-नियंत्रण और शिकायत निवारण तंत्र स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएँ।
- दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में सामुदायिक सहायता-केंद्र स्थापित कर डिजिटल प्रक्रियाओं में सहायता दी जाए।
- विजन-2047 के 440 संकेतकों के लिए आधारभूत आँकड़े (Baseline Data), समय-सीमा और जिम्मेदार विभाग तय किए जाएँ।
- वार्षिक प्रगति-प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाए, ताकि नागरिक और विधायी संस्थाएँ लक्ष्यों की समीक्षा कर सकें।
- जिला और ग्राम स्तर पर योजना-निर्माण में स्थानीय निकायों की भागीदारी बढ़ाकर विजन को जमीनी आवश्यकताओं से जोड़ा जाए।
- पोर्टल की उपयोगिता और लाभार्थी-संतुष्टि का स्वतंत्र मूल्यांकन कराकर सुधार के निर्णय साक्ष्य के आधार पर लिए जाएँ।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सुशासन (Good Governance) · नागरिक-केंद्रित प्रशासन (Citizen-centric Administration) · राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan – NeGP) · डिजिटल इंडिया (Digital India) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) · बहिष्करण त्रुटि (Exclusion Error) · निजता का अधिकार (Right to Privacy) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · आधार अधिनियम, 2016 (Aadhaar Act, 2016) · विकसित भारत@2047 (Viksit Bharat@2047) · डिजिटल विभाजन (Digital Divide) · सेवा प्रदान की समयबद्धता (Time-bound Service Delivery)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 38: लोक कल्याण बढ़ाने का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 246: राज्य सूची के विषयों पर राज्य विधानमंडल की शक्ति
अवधारणा प्रवाह
योजनाओं की जानकारी का अभाव और बार-बार दस्तावेज़ों की माँग से पात्र परिवार लाभ से वंचित रहते हैं। → देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से परिवार-स्तरीय जानकारी को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाता है। → एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से विभागों के बीच समन्वय बढ़ता है और प्रक्रियाएँ सरल होती हैं। → सेवाएँ अधिक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनने से पात्र परिवारों तक लाभ पहुँचने की संभावना बढ़ती है। → विकसित उत्तराखंड विजन-2047 के माध्यम से लगभग 440 संकेतकों पर आधारित दीर्घकालिक लक्ष्य तय होते हैं। → लक्ष्यों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन से राज्य का विकास राष्ट्रीय विकसित भारत के संकल्प से जुड़ता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम वर्ष 2015 में आरंभ किया गया था।
2. डिजीलॉकर (DigiLocker) नागरिकों को सरकार द्वारा जारी दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में संग्रहीत करने की सुविधा देता है।
3. आधार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत प्रत्येक निवासी के लिए सभी उद्देश्यों हेतु आधार संख्या अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: डिजिटल इंडिया की शुरुआत जुलाई 2015 में हुई थी। कथन 2 सही है: डिजीलॉकर इसी कार्यक्रम का एक प्रमुख मंच है। कथन 3 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2018) में आधार की संवैधानिक वैधता को मान्यता दी, पर सभी उद्देश्यों के लिए इसकी अनिवार्यता को अस्वीकार किया और धारा 57 को निरस्त किया।
Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से कल्याणकारी योजनाओं में रिसाव (Leakage) में कमी आई है।
कारण (R): लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँचता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — DBT में धनराशि सीधे खाते में जाने से मध्यवर्ती स्तरों पर होने वाला रिसाव घटता है, इसलिए कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। फिर भी व्यवहार में बहिष्करण त्रुटि और खाता-आधार-जुड़ाव की समस्याएँ बनी रहती हैं, जिन्हें परीक्षा में सतर्कता से देखा जाना चाहिए।
Q3. निम्नलिखित सूची-I (व्यक्ति/प्रसंग) को सूची-II (विवरण) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
A. डीजीलॉकर (DigiLocker)
B. राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP)
C. के.एस. पुट्टस्वामी प्रकरण
सूची-II
1. निजता को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता
2. दस्तावेज़ों का डिजिटल संग्रहण और साझाकरण
3. वर्ष 2006 में स्वीकृत ई-शासन के मिशन-मोड परियोजनाओं का ढाँचा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही सुमेलन चुनिए:
- A-2, B-3, C-1
- A-1, B-2, C-3
- A-3, B-1, C-2
- A-2, B-1, C-3
उत्तर: A-2, B-3, C-1 — डीजीलॉकर दस्तावेज़ों के डिजिटल संग्रहण से जुड़ा मंच है (A-2)। NeGP वर्ष 2006 में स्वीकृत ई-शासन ढाँचा है (B-3)। पुट्टस्वामी प्रकरण (2017 में नौ-न्यायाधीशों की पीठ) ने निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार माना (C-1)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सरकारी योजनाओं के लाभ को पात्र परिवारों तक पहुँचाने के लिए परिवार-आधारित डिजिटल पोर्टल और दीर्घकालिक विकास-दृष्टि (Vision Document) जैसी पहलें अपनाई जा रही हैं। इस नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसे पोर्टलों में नागरिकों की निजता और बहिष्करण त्रुटि के जोखिमों से निपटने के लिए कौन-से संवैधानिक और विधिक सुरक्षा-उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर-कंकाल (Model-answer skeleton):
1. भूमिका: विकसित उत्तराखंड विजन-2047 में लगभग 440 संकेतकों के आधार पर लक्ष्य तय किए गए हैं; इसे राष्ट्रीय विकसित भारत@2047 के संकल्प से जोड़ना। देवभूमि परिवार पोर्टल का उद्देश्य योजनाओं के लाभ-पहुँच में सुधार और बार-बार दस्तावेज़ देने की समस्या को घटाना बताया गया है।
2. नागरिक-केंद्रित प्रशासन का आधार: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005-09) की नागरिक-केंद्रित प्रशासन संबंधी सिफारिशें; राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (2006); डिजिटल इंडिया (2015); प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से रिसाव में कमी।
3. आलोचनात्मक पक्ष (लाभ): एक ही सूचना का बार-बार न माँगा जाना (once-only principle); विभागों के बीच डेटा साझाकरण से सेवा-समयबद्धता; पारदर्शिता और जवाबदेही।
4. आलोचनात्मक पक्ष (जोखिम): (क) निजता: के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017, नौ-न्यायाधीश पीठ) में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार माना गया; आनुपातिकता (Proportionality) की कसौटी आवश्यक। (ख) विधिक ढाँचा: आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 और पुट्टस्वामी (2018) का निर्णय, जिसमें धारा 57 निरस्त हुई; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत सहमति, उद्देश्य-सीमा और डेटा-न्यासी (Data Fiduciary) की बाध्यताएँ। (ग) बहिष्करण त्रुटि: तकनीकी विफलता, खाता/आधार-जुड़ाव की समस्या से पात्र व्यक्ति वंचित हो सकते हैं; 2017 में झारखंड में राशन-आधार जुड़ाव से जुड़ी शिकायतें इसका उदाहरण हैं। (घ) डिजिटल विभाजन: पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट संपर्क, बिजली और डिजिटल साक्षरता की कमी।
5. संतुलित दृष्टिकोण: विकास-लक्ष्यों की मापनीयता और डेटा-आधारित नीति निर्माण बनाम गोपनीयता और समावेशन की चिंता; सक्षम विकल्प के रूप में ऑफ़लाइन/सहायता-केंद्र (Assisted Services) और शिकायत-निवारण तंत्र।
6. सुरक्षा-उपाय: डेटा संरक्षण प्राधिकरण (Data Protection Board) की भूमिका; उद्देश्य-सीमा और न्यूनतम डेटा संग्रह के सिद्धांत; स्वतंत्र ऑडिट; सामाजिक लेखापरीक्षा; अनुच्छेद 14 के अंतर्गत मनमानी से बचाव; सेवा-समयबद्धता के लिए सेवा का अधिकार (Right to Public Services) कानूनों से जोड़ना।
7. निष्कर्ष: प्रशासनिक दक्षता और संवैधानिक मूल्यों (निजता, समानता) में सामंजस्य; ‘समावेशी डिजिटल शासन’ को विकसित भारत के संदर्भ में स्वीकारना।
स्रोत: amarujala.com
Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना।
- प्रवासी उत्तराखंडियों को राज्य से जोड़ना और उनकी समस्याओं का समाधान करना।
- सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची तैयार करना।
- राज्य के भीतर रोजगार के अवसर सृजित करना।
उत्तर: प्रवासी उत्तराखंडियों को राज्य से जोड़ना और उनकी समस्याओं का समाधान करना। — देवभूमि परिवार पोर्टल का मुख्य उद्देश्य प्रवासी उत्तराखंडियों को राज्य से जोड़ना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।
Mains: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा विमोचित ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ के प्रमुख लक्ष्यों और राज्य के विकास में इसकी संभावित भूमिका का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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