ओडिशा में चक्रवात प्रभावितों हेतु विशेष राहत पैकेज की घोषणा

ओडिशा में चक्रवात प्रभावितों हेतु विशेष राहत पैकेज की घोषणा

ओडिशा में चक्रवात प्रभावितों हेतु विशेष राहत पैकेज की घोषणा

Map of Ganjam, Gajapati, Kandhamala highlighted on the map of India — चक्रवात अर्णब ओडिशा राहत पैकेज
मानचित्र: चक्रवात प्रभावित ओडिशा में राहत पैकेज

✎ आपदा-राहत का वैधानिक आधार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, राहत-धन का मुख्य स्रोत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) है, और केंद्रीय सहायता की सिफारिश अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) की क्षति-रिपोर्ट के आधार पर होती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management)  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: कृषि और कृषि ऋण (Agriculture and Agricultural Credit)  |  GS Paper II — संघवाद और केंद्र-राज्य समन्वय (Federalism and Centre-State Coordination)
  • Prelims: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (National Disaster Management Act, 2005), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA), अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team – IMCT), खरीफ फसल और इनपुट सब्सिडी (Input Subsidy), फसल ऋण का मध्यम अवधि ऋण में रूपांतरण (Conversion of Crop Loan into Term Loan), संयुक्त देयता समूह (Joint Liability Group – JLG), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), बंगाल की खाड़ी में चक्रवात (Bay of Bengal Cyclones)
  • Essay: प्राकृतिक आपदा से पुनर्वास: राहत से लचीलापन (Resilience) तक का सफर, तटीय राज्यों में जलवायु-जनित आपदाएँ और संस्थागत तैयारी की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: आपदा-राहत का वैधानिक आधार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, राहत-धन का मुख्य स्रोत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) है, और केंद्रीय सहायता की सिफारिश अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) की क्षति-रिपोर्ट के आधार पर होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) से प्रभावित परिवारों, किसानों, मछुआरों, पशुपालकों और व्यापारियों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है। यह घोषणा 2 नवंबर 2026 को विशेष राहत आयुक्त के कार्यालय में हुई उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद की गई। पैकेज में प्रति परिवार 50 किलोग्राम चावल और 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता, 33 प्रतिशत या अधिक फसल क्षति पर इनपुट सब्सिडी, 1.75 लाख विशेष बीज मिनी-किट, खरीफ अल्पावधि ऋणों के मध्यम अवधि ऋण में रूपांतरण, पूर्णतः या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मैदानी क्षेत्र में 1.2 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्र में 1.3 लाख रुपये की सहायता तथा प्रभावित एमएसएमई व दुकानदारों के लिए ऋण व सब्सिडी शामिल हैं। अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल 2 नवंबर को गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में क्षति का आकलन करने पहुँच रहा है। साथ ही, आगामी चक्रवात मुरासु की संभावना को देखते हुए राहत और निगरानी में लगे दलों को अपने निर्धारित क्षेत्रों में बने रहने के निर्देश दिए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • ओडिशा लगभग 480 किलोमीटर लंबी समुद्री तट-रेखा वाला राज्य है, जहाँ बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवात बार-बार तटीय जिलों को प्रभावित करते हैं। वर्ष 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद राज्य ने चक्रवात-पूर्व चेतावनी और आश्रय-स्थलों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है।
  • भारत में आपदा प्रबंधन का वैधानिक आधार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, जिसके तहत राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर प्राधिकरण बने हैं। राज्य स्तर पर राहत-कार्य का संचालन सामान्यतः राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और विशेष राहत आयुक्त के माध्यम से होता है।
  • राहत-कार्यों के लिए धन का मुख्य स्रोत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) है, जिसमें केंद्र और राज्य का अंशदान वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होता है। राहत-मानदंड (Relief Norms) भी इन्हीं सिफारिशों और भारत सरकार के दिशा-निर्देशों से निर्धारित होते हैं।
  • गंभीर आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भेजती है, जो क्षति का आकलन करके राज्य की माँग के आधार पर अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की सिफारिश करता है। राज्य द्वारा केंद्र के साथ निरंतर समन्वय इस प्रक्रिया की अनिवार्य कड़ी है।
  • कृषि-आपदाओं में किसानों के लिए ऋण-पुनर्निर्धारण (Loan Rescheduling) और फसल ऋण को मध्यम अवधि ऋण में बदलने की व्यवस्था भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बैंकों द्वारा लागू की जाती है, जिससे किसानों पर तत्काल ऋण-भार कम होता है।

आपदा-राहत पैकेज क्या है और इसकी संस्थागत संरचना कैसी है?

  • आपदा-राहत पैकेज ऐसी वित्तीय और भौतिक सहायता का समूह है जो प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की तत्काल आजीविका, आवास और उत्पादन-क्षमता की बहाली के लिए दिया जाता है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आपदा प्रबंधन की नीति, योजना और समन्वय की संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है, जिसके शीर्ष पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) है।
  • राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) राहत-नीति लागू करता है, जबकि जिला स्तर पर जिलाधिकारी (Collector) राहत-वितरण का प्रमुख अधिकारी होता है।
  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से तत्काल राहत, मकान-मरम्मत और आजीविका-पुनर्वास के लिए धन दिया जाता है। आपदा-मानदंड राहत के प्रकार और राशि तय करते हैं।
  • अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) क्षति के आकलन के लिए भेजा जाता है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र अतिरिक्त राष्ट्रीय आपदा राहत सहायता पर निर्णय लेता है।
  • कृषि-क्षति में इनपुट सब्सिडी बीज, खाद और सिंचाई जैसे उत्पादन-आदानों की लागत का आंशिक भुगतान है, जबकि फसल ऋण-पुनर्निर्धारण से किसानों की अगली बुवाई सुनिश्चित होती है।
  • संयुक्त देयता समूह (JLG) ऐसे किसानों के लिए ऋण सुविधा का माध्यम है जो बटाईदार, भूमिहीन या मौखिक अनुबंध पर खेती करते हैं और जिनके पास भूमि-स्वामित्व का लिखित प्रमाण नहीं होता।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
राहत पैकेज का दायरा परिवार, किसान, मछुआरे, पशुपालक और व्यापारी, सभी प्रभावित वर्गों को एक साथ सम्मिलित किया गया है, जिससे आपदा-पश्चात सहायता बहु-क्षेत्रीय बनती है।
परिवार स्तर की सहायता प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल और 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो तात्कालिक उपभोग की आवश्यकता पूरी करती है।
फसल क्षति पर इनपुट सब्सिडी (Input Subsidy) 33 प्रतिशत या अधिक फसल क्षति पर दो हेक्टेयर तक सहायता: असिंचित भूमि पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि पर 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बहुवर्षीय फसलों पर 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
अल्पकालिक ऋण का पुनर्निर्धारण 33 प्रतिशत या अधिक क्षति वाले क्षेत्रों में खरीफ (Kharif) के अल्पकालिक ऋण को मध्यकालिक ऋण में बदलने की व्यवस्था, जिससे किसानों पर तत्काल पुनर्भुगतान का दबाव घटता है।
आवास सहायता पूर्णतः या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 1.2 लाख रुपये (समतल क्षेत्र) और 1.3 लाख रुपये (पहाड़ी क्षेत्र); आंशिक क्षति, झोपड़ियों और पशु-शालाओं को भी सम्मिलित।
MSME और छोटे व्यवसाय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) तथा व्यापारियों को 12 लाख रुपये तक ऋण, जिस पर 25 प्रतिशत सब्सिडी अधिकतम 3 लाख रुपये तक मिलेगी; फड़ी-ठेले वालों को 10,000 रुपये और दुकानों को 25,000 रुपये।

महत्व

आर्थिक

  • फसल, पशुधन, नाव और जाल जैसी उत्पादक परिसंपत्तियों की पुनर्स्थापना से ग्रामीण आय और स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना बनती है।
  • खरीफ ऋण के मध्यकालिक ऋण में परिवर्तन से किसानों की ऋण-चक्र में फँसने की आशंका कम होती है और संस्थागत ऋण व्यवस्था बनी रहती है।
  • MSME और दुकानदारों के लिए रियायती ऋण व सब्सिडी से स्थानीय बाज़ार की गतिविधि जल्द बहाल हो सकती है।

सामाजिक

  • बटाईदारों, भूमिहीन किसानों और मौखिक समझौते पर खेती करने वालों को संयुक्त देयता समूहों (Joint Liability Groups) के माध्यम से ऋण से जोड़ने का प्रावधान सीमांत वर्ग की औपचारिक ऋण पहुँच बढ़ाता है।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group – SHG) को अतिरिक्त 5,000 रुपये बीज धन देने से महिलाओं की आजीविका और सामुदायिक संगठन को सहारा मिलता है।
  • पहाड़ी और समतल क्षेत्रों के लिए आवास सहायता में अंतर रखना भौगोलिक लागत-भिन्नता की मान्यता को दर्शाता है।

प्रशासनिक और संघीय

  • विशेष राहत आयुक्त (Special Relief Commissioner) के कार्यालय में उच्च-स्तरीय समीक्षा से आपदा प्रबंधन की राज्य-स्तरीय समन्वय संरचना सक्रिय होती है।
  • केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल (Central Inter-Ministerial Committee) द्वारा क्षति का आकलन केंद्र-राज्य सहयोग का व्यावहारिक रूप है, जिससे केंद्रीय सहायता के लिए आधार तैयार होता है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत स्थापित ढाँचे का उपयोग, राहत-वितरण में प्रक्रियात्मक एकरूपता लाने में सहायक है।

चुनौतियाँ

1. सत्यापन और लक्षित वितरण की चुनौती

  • क्षति का आकलन और लाभार्थी की पहचान गाँव-स्तर पर होती है; इसमें समावेशन और बहिष्करण दोनों तरह की त्रुटियाँ संभव हैं।
  • एक ही परिवार के कई सदस्यों या किरायेदारों के दावे, और वास्तविक क्षति की सीमा तय करना, विवाद का कारण बन सकते हैं।
  • आंशिक क्षति और कुटीर-पशुशाला जैसी छोटी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन मानकीकृत करना कठिन होता है।

2. बटाईदार और मौखिक करार वाले किसान

  • बटाईदारों के पास भूमि-अभिलेख में औपचारिक अधिकार नहीं होते, इसलिए सहायता और ऋण की पात्रता सिद्ध करना कठिन होता है।
  • संयुक्त देयता समूह जैसे उपाय औपचारिक ऋण तक पहुँच बढ़ाते हैं, पर उनकी सफलता सामूहिक विश्वास और बैंकों की भागीदारी पर निर्भर है।

3. बार-बार आने वाले चक्रवात और जलवायु जोखिम

  • एक चक्रवात के बाद दूसरे (स्रोत में उल्लिखित मुरासु) के संभावित आगमन से पुनर्वास की प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है।
  • तटीय क्षेत्रों में चक्रवातों की तीव्रता और आवृत्ति पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सामान्य विचार-विमर्श का विषय है, जिससे दीर्घकालिक नियोजन की आवश्यकता बढ़ती है।

4. राजकोषीय दबाव और केंद्रीय सहायता की प्रतीक्षा

  • एक साथ कई क्षेत्रों में सहायता देने से राज्य के आपदा कोष पर दबाव बढ़ता है और अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ते हैं।
  • केंद्रीय सहायता का निर्धारण अंतर-मंत्रालयी दल की रिपोर्ट और मानकों पर निर्भर होता है, जिससे राहत में विलंब हो सकता है।

5. भूमि की उत्पादकता और खेत से बालू-गाद हटाना

  • खेतों में बालू और गाद जमा होने से मृदा की उर्वरता और जल-निकास प्रभावित होते हैं, जिसकी पुनर्स्थापना में समय लगता है।
  • बालू-गाद हटाने के लिए दी जाने वाली सहायता की दर और तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता अक्सर अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न होती है।

6. पहाड़ी क्षेत्रों में आवास निर्माण की लागत

  • पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन और निर्माण सामग्री की लागत अधिक होती है, इसलिए 1.3 लाख रुपये की सहायता भी पर्याप्त नहीं पड़ सकती।
  • क्षतिग्रस्त आवास के पुनर्निर्माण में भवन-मानकों और आपदा-रोधी तकनीक का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
लाभार्थी सत्यापन समावेशन और बहिष्करण दोनों त्रुटियों से सहायता का सही व्यक्ति तक न पहुँचना
बटाईदार और मौखिक करार औपचारिक अभिलेख के अभाव में पात्रता और ऋण-पहुँच सीमित होना
बार-बार आने वाले चक्रवात पुनर्वास के दौरान नई क्षति, जिससे सहायता की लागत और समय दोनों बढ़ना
राजकोषीय दबाव राज्य आपदा कोष पर भार और केंद्रीय सहायता में विलंब की संभावना
मृदा और भूमि की क्षति बालू-गाद जमा होने से उत्पादकता में दीर्घकालिक गिरावट का खतरा
पहाड़ी क्षेत्र में आवास लागत निर्माण सामग्री और परिवहन की ऊँची लागत से सहायता राशि का अपर्याप्त होना

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF)

आगे की राह

  • लाभार्थी सूची के लिए ग्राम-स्तरीय सत्यापन और सार्वजनिक प्रदर्शन की व्यवस्था की जाए, ताकि समावेशन और बहिष्करण की शिकायतों का समय पर निवारण हो।
  • बटाईदारों और मौखिक करार वाले किसानों के लिए सहभागी अभिलेख तैयार किए जाएँ और संयुक्त देयता समूहों को बैंकों से जोड़ा जाए।
  • फसल क्षति के आकलन में उपग्रह और ड्रोन जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए, ताकि मूल्यांकन तेज़ और वस्तुनिष्ठ हो।
  • चक्रवात-पूर्व चेतावनी और तटीय समुदायों के लिए आश्रय-स्थल का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
  • बालू-गाद हटाने और मृदा-पुनर्स्थापना के लिए कृषि विभाग तथा स्थानीय निकायों के बीच तकनीकी मानक तय किए जाएँ।
  • पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आपदा-रोधी भवन-मानकों और स्थानीय निर्माण सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
  • केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल की रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त केंद्रीय सहायता का समयबद्ध निर्धारण हो, ताकि राज्य कोष पर अनावश्यक भार न पड़े।
  • आपदा के बाद की जोखिम-मूल्यांकन रिपोर्ट को जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि अगली आपदा में तैयारी बेहतर हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आपदा प्रबंधन · चक्रवात · राहत पैकेज · पुनर्वास · कृषि सहायता · आवास सब्सिडी · सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 275 — केंद्र से राज्यों को सहायता अनुदान का संवैधानिक आधार
  • अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग की सिफारिशों से SDRF का ढाँचा तय

अवधारणा प्रवाह

चक्रवात (Cyclone Arnab) से घरों, फसलों, मछली पकड़ने के साधनों और दुकानों को क्षति  →  राज्य स्तर पर विशेष राहत आयुक्त के माध्यम से उच्च-स्तरीय समीक्षा और क्षति का प्रारंभिक आकलन  →  राहत पैकेज की घोषणा: परिवार, किसान, पशुपालक, मछुआरे और व्यापारियों के लिए अलग-अलग सहायता  →  सहायता के वित्तीय साधन: राज्य आपदा कोष से भुगतान, खरीफ ऋण का पुनर्निर्धारण और MSME ऋण-सब्सिडी  →  केंद्र-राज्य समन्वय के तहत केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल द्वारा क्षति का सत्यापन और अतिरिक्त केंद्रीय सहायता का निर्धारण  →  लाभार्थियों तक वितरण, साथ ही मृदा-पुनर्स्थापना और आवास-पुनर्निर्माण से दीर्घकालिक आजीविका की बहाली

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना की गई थी।
2. राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) प्राथमिक प्रतिक्रिया कोष है जो राज्यों के पास आपदाओं के लिए उपलब्ध होता है।
3. चक्रवात ‘अर्नाब’ और ‘मुरसु’ हिंद महासागर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत की गई थी। कथन 2 सही है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) राज्यों के पास उपलब्ध प्राथमिक कोष है। कथन 3 सही है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात ‘अर्नाब’ और ‘मुरसु’ हिंद महासागर क्षेत्र में उत्पन्न हुए हैं, जैसा कि समाचार में बताया गया है।

Q2. आपदा प्रबंधन के संदर्भ में, ‘इनपुट सब्सिडी’ शब्द का सबसे अच्छा वर्णन क्या करता है?

  1. यह किसानों को फसल के नुकसान के लिए सीधे नकद भुगतान है।
  2. यह कृषि आदानों (जैसे बीज, उर्वरक) की खरीद के लिए प्रदान की गई वित्तीय सहायता है।
  3. यह किसानों को उनकी क्षतिग्रस्त भूमि को साफ करने के लिए दिया गया मुआवजा है।
  4. यह उन किसानों के लिए ऋण माफी योजना है जिनकी फसलें नष्ट हो गई हैं।

उत्तर: यह कृषि आदानों (जैसे बीज, उर्वरक) की खरीद के लिए प्रदान की गई वित्तीय सहायता है। — इनपुट सब्सिडी कृषि आदानों जैसे बीज, उर्वरक, कीटनाशक आदि की खरीद के लिए किसानों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता है, ताकि वे नई फसलें बो सकें। समाचार में भी इसका उल्लेख है कि फसल के नुकसान वाले किसानों को इनपुट सब्सिडी मिलेगी।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, ऐसी आपदाओं के बाद प्रभावित समुदायों के लिए राहत और पुनर्वास उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर चक्रवातों की आवृत्ति और उनके प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और इसके तहत स्थापित NDMA, SDRF आदि का संदर्भ।
2. आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की भूमिका (मुख्य निकाय): NDMA, SDMA और DDMA की भूमिकाओं का विस्तृत वर्णन। इसमें शामिल होंगे:
क. पूर्व-आपदा चरण: जोखिम मूल्यांकन, चेतावनी प्रणाली, तैयारी योजनाएँ (जैसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना), क्षमता निर्माण, मॉक ड्रिल।
ख. आपदा के दौरान: त्वरित प्रतिक्रिया, खोज और बचाव अभियान, निकासी, अस्थायी आश्रय।
ग. आपदा के बाद: क्षति आकलन, राहत सामग्री का वितरण, पुनर्वास योजनाएँ।
3. राहत और पुनर्वास उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन (दूसरा भाग):
क. सकारात्मक पहलू: त्वरित वित्तीय सहायता, आवास सब्सिडी, कृषि इनपुट सब्सिडी, ऋण पुनर्गठन, आजीविका सहायता (जैसा कि ओडिशा पैकेज में है)। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय।
ख. चुनौतियाँ और सीमाएँ: वितरण में देरी, भ्रष्टाचार, अपर्याप्त क्षतिपूर्ति, स्थायी समाधानों का अभाव, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती तीव्रता, संवेदनशील समूहों तक पहुँच का अभाव।
ग. सुधार के सुझाव: बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणाली, जलवायु-लचीले बुनियादी ढाँचे, समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन, बीमा योजनाओं का विस्तार, प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र।
4. निष्कर्ष: आपदा प्रबंधन में एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास तीनों शामिल हों, ताकि भविष्य की आपदाओं के प्रति लचीलापन बढ़ाया जा सके।

स्रोत: orissapost.com

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: ओडिशा के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में घोषित चक्रवात प्रभावितों के लिए वित्तीय सहायता, बीज किट और आवास सब्सिडी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

1. यह सहायता केवल तटीय जिलों के मछुआरों के लिए है।
2. बीज किट का उद्देश्य किसानों को अगली फसल के लिए तैयार करना है।
3. आवास सब्सिडी केवल उन लोगों के लिए है जिनके घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 — मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सहायता में वित्तीय सहायता, बीज किट और आवास सब्सिडी शामिल है, जो चक्रवात प्रभावित सभी पीड़ितों के लिए है, न कि केवल मछुआरों या पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों वालों के लिए।

Mains: ओडिशा के मुख्यमंत्री द्वारा चक्रवात प्रभावितों के लिए घोषित वित्तीय सहायता, बीज किट और आवास सब्सिडी के महत्व और संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें। राज्य में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास प्रयासों में इस तरह के उपायों की भूमिका पर चर्चा करें।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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