नासा ने इसरो को चंद्रमा आधार कार्यक्रम में शामिल होने का दिया न्योता

NASA invites ISRO to join Moon Base programme — concept mind map

नासा ने इसरो को चंद्रमा आधार कार्यक्रम में शामिल होने का दिया न्योता

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NASA-ISRO Moon Base

✎ NASA का ISRO को चंद्र बेस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भारत-अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को गहरा करता है, जो आर्टेमिस समझौता और NISAR जैसे सफल मिशनों पर आधारित है, और यह वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती भूमिका…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)
  • Prelims: NASA, ISRO, चंद्र बेस कार्यक्रम, आर्टेमिस समझौता (Artemis Accords), भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (India-U.S. Civil Space Joint Working Group), NISAR मिशन, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति (United Nations Committee on the Peaceful Uses of Outer Space – COPUOS)
  • Essay: अंतरिक्ष कूटनीति और वैश्विक सहयोग: भारत के लिए अवसर और चुनौतियाँ, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर इसका प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: NASA का ISRO को चंद्र बेस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भारत-अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को गहरा करता है, जो आर्टेमिस समझौता और NISAR जैसे सफल मिशनों पर आधारित है, और यह वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (India-U.S. Civil Space Joint Working Group) की नौवीं बैठक के दौरान, नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने महत्वाकांक्षी चंद्र बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है, विशेष रूप से आर्टेमिस समझौता (Artemis Accords) के तहत साझेदारी को मजबूत करते हुए।

पृष्ठभूमि

  • भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • आर्टेमिस समझौता, जिसका भारत एक हस्ताक्षरकर्ता है, चंद्रमा की खोज और उपयोग के लिए सिद्धांतों का एक गैर-बाध्यकारी सेट है, जो शांतिपूर्ण और स्थायी अंतरिक्ष अन्वेषण को बढ़ावा देता है।
  • पिछले वर्ष NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन का सफल प्रक्षेपण दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है।
  • दोनों पक्ष बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति (COPUOS) के बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता पर दिशानिर्देशों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • NASA का चंद्र बेस कार्यक्रम मानव जाति की पहली चौकी को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थापित करने की परिकल्पना करता है, जिसे तीन चरणों में निष्पादित किया जाएगा।

चंद्र बेस कार्यक्रम और भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग

  • चंद्र बेस कार्यक्रम NASA की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानव जाति की पहली स्थायी चौकी स्थापित करना है।
  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य दीर्घकालिक चंद्र अन्वेषण और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए एक आधार प्रदान करना है।
  • ISRO को इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
  • यह सहयोग आर्टेमिस समझौता के तहत भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत करेगा, जिसमें खुले वैज्ञानिक डेटा साझाकरण पर चर्चा भी शामिल है।
  • NISAR मिशन, जो पृथ्वी अवलोकन के लिए एक संयुक्त प्रयास है, दोनों देशों के बीच तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान का प्रतीक है।
  • यह साझेदारी भविष्य के विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए नए रास्ते खोलेगी।
  • यह पहल संयुक्त राष्ट्र के बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर समिति (COPUOS) के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जो बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चौकी यह मानव जाति की किसी अन्य खगोलीय पिंड पर पहली चौकी होगी, जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक आधार प्रदान करेगी।
तीन-चरणों में क्रियान्वयन यह कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा, जिससे जटिल तकनीकी और परिचालन चुनौतियों का व्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) के तहत साझेदारी यह सहयोग अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देगा, जिससे बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को बल मिलेगा।
खुले वैज्ञानिक डेटा साझाकरण पर चर्चा यह वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा देगा और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए नए अवसर खोलेगा।
भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (Civil Space Joint Working Group – CSJWG) यह दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को संस्थागत रूप देगा और भविष्य की साझेदारियों के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

महत्व

सामरिक महत्व

  • यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करेगा, जिससे भू-राजनीतिक परिदृश्य में इसकी स्थिति मजबूत होगी।
  • यह बाहरी अंतरिक्ष में दीर्घकालिक स्थिरता (long-term sustainability) के लिए संयुक्त राष्ट्र समिति (United Nations Committee on the Peaceful Uses of Outer Space – COPUOS) के दिशानिर्देशों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जो अंतरिक्ष कूटनीति में भारत की भूमिका को बढ़ाएगा।

वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व

  • यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाने के नए अवसर प्रदान करेगा, जो मूल्यवान वैज्ञानिक डेटा उत्पन्न कर सकता है।
  • यह भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान (human spaceflight) और उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में अपनी क्षमताओं को विकसित करने में मदद करेगा, जिससे ISRO की तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ेगी।
  • NISAR मिशन जैसी सफल साझेदारियों के बाद, यह भविष्य के विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

आर्थिक महत्व

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और सहयोग से उच्च-तकनीकी उद्योगों में नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेगा, जिससे वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी चुनौतियाँ

  • चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्थायी चौकी स्थापित करने के लिए अत्यधिक उन्नत जीवन समर्थन प्रणालियों, ऊर्जा उत्पादन और विकिरण सुरक्षा प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता होगी।
  • चंद्रमा पर अत्यधिक तापमान भिन्नता और धूल भरे वातावरण में उपकरणों का संचालन और रखरखाव एक बड़ी चुनौती होगी।

2. वित्तीय चुनौतियाँ

  • इस तरह के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी, जो राष्ट्रीय बजट पर दबाव डाल सकता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में लागत-साझाकरण और संसाधन आवंटन के जटिल मुद्दे शामिल होते हैं।

3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शासन

  • विभिन्न देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, डेटा साझाकरण और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित जटिल मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं।
  • बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और दीर्घकालिक स्थिरता के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा, विशेषकर चंद्रमा पर संसाधनों के उपयोग के संबंध में।

4. मानव सुरक्षा और स्वास्थ्य

  • अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर लंबे समय तक रहने के दौरान विकिरण, गुरुत्वाकर्षण की कमी और मनोवैज्ञानिक तनाव जैसे स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ेगा।
  • आपातकालीन स्थिति में बचाव और वापसी की क्षमताओं का विकास करना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च तकनीकी जटिलता चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में अत्यधिक ठंडे तापमान, स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों और संचार बाधाओं के कारण जटिल इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता।
पर्याप्त वित्तपोषण दीर्घकालिक और महंगे कार्यक्रम के लिए निरंतर बजटीय आवंटन और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के बीच लागत-साझाकरण की व्यवस्था।
अंतर्राष्ट्रीय कानून और शासन चंद्रमा पर संसाधनों के उपयोग, क्षेत्र के दावों और बाहरी अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) के सिद्धांतों के अनुपालन से संबंधित कानूनी और नैतिक प्रश्न।
मानव सुरक्षा अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विकिरण जोखिम, सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का प्रबंधन।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा सहयोगी देशों के बीच संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के साझाकरण और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दे।

आगे की राह

  • भारत को इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और रणनीतिक उद्देश्य निर्धारित करने चाहिए, जिसमें तकनीकी योगदान और अपेक्षित लाभ शामिल हों।
  • ISRO को अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को और विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, विशेष रूप से दीर्घकालिक मिशनों के लिए आवश्यक जीवन समर्थन प्रणालियों और विकिरण सुरक्षा प्रौद्योगिकियों में।
  • भारत को आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) के तहत खुले वैज्ञानिक डेटा साझाकरण और बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के सिद्धांतों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देना चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मजबूत कानूनी और नियामक ढाँचा स्थापित किया जाना चाहिए, जो बौद्धिक संपदा अधिकारों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करे।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए आवश्यक नवाचार और वित्तीय संसाधनों को जुटाया जा सके।
  • भारत को चंद्रमा पर भविष्य की गतिविधियों के लिए एक व्यापक संसाधन उपयोग नीति विकसित करनी चाहिए, जो अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और स्थिरता के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

NASA द्वारा ISRO को चंद्रमा आधार कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण  →  भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह की बैठक में औपचारिक निमंत्रण  →  आर्टेमिस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच साझेदारी का विस्तार  →  चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मानव जाति की पहली चौकी स्थापित करने की परिकल्पना  →  अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक डेटा साझाकरण और मानव अंतरिक्ष उड़ान में सहयोग को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नासा (NASA) ने ISRO को अपने चंद्रमा आधार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानव की पहली चौकी स्थापित करना है।
2. यह आमंत्रण भारत-अमेरिका सिविल स्पेस संयुक्त कार्य समूह (Civil Space Joint Working Group) की नौवीं बैठक के दौरान दिया गया था।
3. NISAR मिशन, नासा और ISRO का एक संयुक्त उद्यम है, जिसे हाल ही में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। नासा का चंद्रमा आधार कार्यक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानव की पहली चौकी स्थापित करने की परिकल्पना करता है और ISRO को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। कथन 2 सही है। यह आमंत्रण बेंगलुरु में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस संयुक्त कार्य समूह की नौवीं बैठक में दिया गया था। कथन 3 सही है। NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन, नासा और ISRO का एक संयुक्त मिशन है, जिसे हाल ही में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।

Q2. आर्टेमिस समझौता (Artemis Accords) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह चंद्रमा, मंगल और धूमकेतुओं के शांतिपूर्ण अन्वेषण के लिए सिद्धांतों का एक समूह है।
2. भारत आर्टेमिस समझौते का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है। आर्टेमिस समझौता चंद्रमा, मंगल और धूमकेतुओं के शांतिपूर्ण अन्वेषण के लिए सिद्धांतों का एक समूह है, जो बाहरी अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) पर आधारित है। कथन 2 सही है। भारत ने जून 2023 में आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो बाहरी अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के प्रमुख आयामों पर चर्चा कीजिए और बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने में इसके महत्व का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें हालिया नासा-ISRO चंद्रमा आधार कार्यक्रम आमंत्रण का उल्लेख हो।
2. प्रमुख आयाम: सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों का विस्तार से वर्णन करें:
* संयुक्त मिशन: NISAR जैसे सफल संयुक्त मिशनों का उल्लेख।
* मानव अंतरिक्ष उड़ान: भविष्य की संभावनाएँ और प्रौद्योगिकी साझाकरण।
* आर्टेमिस समझौता: भारत की भागीदारी और इसके निहितार्थ।
* सिविल स्पेस संयुक्त कार्य समूह: इसकी भूमिका और उपलब्धियाँ।
* प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण।
3. बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में महत्व:
* अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विश्वास निर्माण।
* अंतरिक्ष मलबे (space debris) और स्थिरता के मुद्दों का समाधान।
* वैज्ञानिक अनुसंधान और ज्ञान साझाकरण।
* अंतरिक्ष संसाधनों का नैतिक और टिकाऊ उपयोग।
* संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी समिति (COPUOS) के दिशानिर्देशों का पालन।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: संभावित चुनौतियों (जैसे प्रौद्योगिकी सुरक्षा, फंडिंग) का संक्षिप्त उल्लेख और सहयोग को और मजबूत करने के लिए सुझाव।
5. निष्कर्ष: भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के रणनीतिक और वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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