06 Aug नीति आयोग ने विकसित भारत 2047 के लिए देखभाल रणनीति पर रिपोर्ट जारी की
✎ नीति आयोग की 'देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना' रिपोर्ट भारत में एक संगठित, पेशेवर और सुलभ देखभाल प्रणाली विकसित करने, देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाने तथा भारत को वैश्विक देखभाल सेवाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने का मार्ग…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, शासन | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, मानव संसाधन
- Prelims: नीति आयोग, विकसित भारत@2047, देखभाल अर्थव्यवस्था, केयरगिवर्स, जनसांख्यिकीय लाभांश, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास
- Essay: विकसित भारत@2047: सामाजिक समावेशन और मानव संसाधन का महत्व, भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था में देखभाल क्षेत्र की भूमिका और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: नीति आयोग की ‘देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना’ रिपोर्ट भारत में एक संगठित, पेशेवर और सुलभ देखभाल प्रणाली विकसित करने, देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाने तथा भारत को वैश्विक देखभाल सेवाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने हाल ही में “विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने के लिए देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना” शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट भारत की वर्तमान देखभाल व्यवस्था का आकलन करती है और एक संगठित, पेशेवर, सुलभ तथा भविष्य के लिए तैयार देखभाल प्रणाली विकसित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत करती है। इस रिपोर्ट में देखभालकर्ताओं (caregivers) को व्यवस्था के केंद्र में रखा गया है और उन्हें एक कुशल, सम्मानजनक तथा मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता देने पर जोर दिया गया है।
पृष्ठभूमि
- भारत एक युवा आबादी वाला देश है, लेकिन बढ़ती उम्रदराज़ आबादी और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के कारण देखभाल सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।
- पारंपरिक रूप से, भारत में देखभाल की भूमिका परिवारों, विशेषकर महिलाओं द्वारा निभाई जाती रही है, जिसे अक्सर अनौपचारिक और अवैतनिक कार्य माना जाता है।
- वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की मांग बढ़ रही है, जो भारत के लिए अपने जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) का उपयोग करने का एक अवसर प्रस्तुत करता है।
- विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक समावेशी और सतत विकास मॉडल आवश्यक है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा और मानव संसाधन विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वर्तमान देखभाल प्रणाली में पेशेवर प्रशिक्षण, मानकीकरण, सामाजिक सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं तक पहुंच की कमी जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं।
- यह रिपोर्ट विभिन्न हितधारकों, जैसे केंद्रीय मंत्रालयों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जारी की गई, जो इसके व्यापक महत्व को दर्शाता है।
नीति आयोग की ‘देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना’ रिपोर्ट क्या है?
- यह रिपोर्ट भारत की देखभाल व्यवस्था की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य एक संगठित, पेशेवर, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार देखभाल प्रणाली विकसित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करना है।
- रिपोर्ट देखभालकर्ताओं को देखभाल व्यवस्था के केंद्र में रखती है और देखभाल को एक कुशल, सम्मानजनक तथा मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता देने की वकालत करती है।
- यह उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल, पेशेवर मान्यता, देखभाल कार्यबल के कल्याण, संस्थागत सहयोग तथा परिवारों और समुदायों को विश्वसनीय एवं किफायती देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर देती है।
- रिपोर्ट प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं का एक सक्षम समूह (cadre) विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है ताकि देश में वर्तमान और भविष्य की देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
- यह भारतीय देखभालकर्ता पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध संभावित रोजगार एवं अवसरों को भी सामने लाती है, जिससे भारत पारंपरिक देखभाल सेवाओं में वैश्विक अग्रणी बन सकता है।
- रिपोर्ट संस्थागत समन्वय को मजबूत करने, पारिवारिक एवं पेशेवर देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाने तथा भारत को कुशल देखभाल सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना प्रदान करती है।
- यह देखभाल को भारत के सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानती है तथा विकसित भारत@2047 की यात्रा में इसे समावेशी एवं सतत विकास का एक आवश्यक आधार के रूप में स्थापित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| देखभाल व्यवस्था का पुनर्गठन | वर्तमान देखभाल प्रणाली की कमियों को दूर कर एक संगठित, पेशेवर और सुलभ व्यवस्था का निर्माण। |
| देखभालकर्ताओं का सशक्तिकरण | देखभाल को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता देना तथा उनके कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना। |
| प्रशिक्षित कार्यबल का विकास | देश में देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं का एक सक्षम समूह (कैडर) तैयार करना। |
| वैश्विक अवसरों का लाभ | भारतीय देखभालकर्ता पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध रोजगार और अवसरों की पहचान करना तथा भारत को वैश्विक अग्रणी बनाना। |
| संस्थागत समन्वय | विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत कर देखभाल व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- देखभाल सेवाओं में वैश्विक अग्रणी बनकर महत्वपूर्ण आर्थिक मूल्य सृजित करना।
- देखभाल क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- प्रशिक्षित भारतीय देखभालकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार दिलाकर विदेशी मुद्रा अर्जित करने की क्षमता।
सामाजिक महत्व
- देखभालकर्ताओं को अधिक मान्यता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार।
- उच्च गुणवत्ता वाली, विश्वसनीय और किफायती देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराकर परिवारों और समुदायों को सशक्त बनाना।
- सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को मजबूत करना और एक देखभाल-प्रधान एवं संवेदनशील समाज का निर्माण करना।
रणनीतिक महत्व
- भारत को कुशल देखभाल सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना।
- भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान-आधारित सॉफ्ट पावर को सुदृढ़ करना, क्योंकि सेवा और संवेदना भारत की सभ्यतागत विरासत के मूल मूल्य हैं।
- जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का प्रभावी उपयोग कर वैश्विक अवसरों का लाभ उठाना।
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में योगदान
- देखभाल को भारत के सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानना।
- विकसित भारत@2047 की यात्रा में देखभाल को समावेशी एवं सतत विकास (Sustainable Development) का एक आवश्यक आधार बनाना।
चुनौतियाँ
1. देखभालकर्ताओं की पहचान और प्रशिक्षण
- भारत में देखभालकर्ताओं की एक स्पष्ट परिभाषा और पहचान का अभाव।
- देखभालकर्ताओं के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रमाणन प्रणालियों की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: मानव संसाधन का विकास
2. पेशेवर मान्यता और सामाजिक सुरक्षा
- देखभाल के कार्य को अक्सर अनौपचारिक और कम वेतन वाला माना जाता है, जिससे पेशेवर मान्यता का अभाव है।
- देखभालकर्ताओं के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा लाभों (जैसे पेंशन, स्वास्थ्य बीमा) की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का कल्याण
3. गुणवत्ता और पहुंच
- देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण देखभाल सेवाओं की सीमित पहुंच।
- किफायती देखभाल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के लिए।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और शिक्षा
4. संस्थागत और नीतिगत ढांचा
- देखभाल क्षेत्र के लिए एक व्यापक और एकीकृत नीतिगत ढांचे का अभाव।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय की कमी, जिससे नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन बाधित होता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नीतियों का निर्माण एवं कार्यान्वयन
5. जनसांख्यिकीय परिवर्तन
- बढ़ती बुजुर्ग आबादी और एकल परिवारों के कारण देखभाल सेवाओं की मांग में वृद्धि।
- बच्चों और दिव्यांगजनों की देखभाल के लिए भी प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| असंगठित क्षेत्र | अधिकांश देखभालकर्ता असंगठित क्षेत्र में कार्य करते हैं, जिससे उनके अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाते। |
| कम वेतन और कार्य की स्थितियाँ | देखभालकर्ताओं को अक्सर कम वेतन मिलता है और कार्य की स्थितियाँ चुनौतीपूर्ण होती हैं, जिससे पेशे की आकर्षण क्षमता कम होती है। |
| लैंगिक असमानता | देखभाल का कार्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है, जिससे लैंगिक असमानता और उनके सशक्तिकरण में बाधा आती है। |
| मानसिक और शारीरिक बोझ | देखभालकर्ताओं पर भावनात्मक और शारीरिक रूप से भारी बोझ पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। |
| प्रौद्योगिकी का सीमित उपयोग | देखभाल सेवाओं में प्रौद्योगिकी (जैसे टेली-केयर, स्मार्ट मॉनिटरिंग) का सीमित उपयोग, जिससे दक्षता प्रभावित होती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की योजनाएं (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship schemes)
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की योजनाएं (Ministry of Social Justice and Empowerment schemes)
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की योजनाएं (Ministry of Health and Family Welfare schemes)
आगे की राह
- देखभालकर्ताओं के लिए एक राष्ट्रीय नीति और नियामक ढांचा विकसित करना, जिसमें उनकी परिभाषा, भूमिकाएं, प्रशिक्षण और प्रमाणन शामिल हों।
- देखभालकर्ताओं के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम और कौशल विकास पहल शुरू करना, जिसमें आधुनिक देखभाल तकनीकों और भावनात्मक समर्थन को शामिल किया जाए।
- देखभाल को एक मान्यता प्राप्त पेशे के रूप में बढ़ावा देना, जिसमें उचित वेतन, कार्य की बेहतर स्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा लाभ (जैसे पेंशन, स्वास्थ्य बीमा) सुनिश्चित किए जाएं।
- देखभाल सेवाओं में प्रौद्योगिकी (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीमेडिसिन) का उपयोग बढ़ाना, जिससे दक्षता और पहुंच में सुधार हो।
- परिवारों और समुदायों को देखभाल के महत्व के बारे में शिक्षित करना तथा उन्हें विश्वसनीय और किफायती देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्रदान करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना ताकि भारतीय देखभालकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें और वे वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित हो सकें।
- विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय को मजबूत करना ताकि एक एकीकृत देखभाल व्यवस्था का निर्माण हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
देखभाल अर्थव्यवस्था · देखभालकर्ता सशक्तिकरण · विकसित भारत@2047 · नीति आयोग रिपोर्ट · सामाजिक समावेशन · कौशल विकास · जनसांख्यिकीय लाभांश · वैश्विक रोजगार · सार्वजनिक स्वास्थ्य · सामाजिक सुरक्षा · लिंग समानता · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (क)’, ‘note’: ‘नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 42’, ‘note’: ‘काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाएं’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करना’}
अवधारणा प्रवाह
जनसांख्यिकीय परिवर्तन और बढ़ती मांग → देखभालकर्ताओं की आवश्यकता और महत्व → नीति आयोग की रिपोर्ट और सिफारिशें → प्रशिक्षित कार्यबल का विकास और सशक्तिकरण → वैश्विक अवसरों का लाभ और आर्थिक संवृद्धि → सामाजिक समावेशन और विकसित भारत@2047
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. नीति आयोग द्वारा हाल ही में जारी ‘विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने के लिए देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना’ रिपोर्ट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह रिपोर्ट भारत की देखभाल व्यवस्था की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करती है और एक संगठित देखभाल प्रणाली के विकास पर जोर देती है।
2. रिपोर्ट में देखभालकर्ताओं को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता दी गई है।
3. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं का एक सक्षम समूह विकसित करने की आवश्यकता है ताकि वर्तमान और भविष्य की देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। रिपोर्ट भारत की देखभाल व्यवस्था की वर्तमान स्थिति का आकलन करती है, देखभालकर्ताओं को एक कुशल पेशे के रूप में मान्यता देती है और प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं के एक सक्षम समूह के विकास की आवश्यकता पर बल देती है।
Q2. अभिकथन (A): नीति आयोग की रिपोर्ट ‘विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने के लिए देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना’ भारत के लिए पारंपरिक देखभाल सेवाओं में वैश्विक अग्रणी बनने का एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करती है।
कारण (R): भारत के पास करुणामय देखभाल की समृद्ध पारंपरिक संस्कृति है और वैश्विक स्तर पर देखभालकर्ताओं की मांग बढ़ रही है, जिससे भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठा सकता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वैश्विक मांग और भारत की पारंपरिक संस्कृति भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नीति आयोग द्वारा जारी ‘विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने के लिए देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना’ रिपोर्ट के प्रमुख उद्देश्यों और सिफारिशों पर चर्चा करें। यह रिपोर्ट ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** नीति आयोग की रिपोर्ट का संदर्भ और उसका शीर्षक बताते हुए शुरुआत करें।
2. **रिपोर्ट के प्रमुख उद्देश्य:**
* भारत की वर्तमान देखभाल व्यवस्था का आकलन।
* एक संगठित, पेशेवर, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार देखभाल प्रणाली का विकास।
* देखभालकर्ताओं को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता देना।
* उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल, पेशेवर मान्यता, कार्यबल के कल्याण और संस्थागत सहयोग पर जोर।
* प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं का एक सक्षम समूह विकसित करना।
* भारतीय देखभालकर्ता पेशेवरों के लिए वैश्विक रोजगार अवसरों की पहचान।
3. **रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें (विस्तार से):**
* देखभाल व्यवस्था के केंद्र में देखभालकर्ताओं को रखना।
* परिवारों और समुदायों को विश्वसनीय एवं किफायती देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराना।
* संस्थागत समन्वय को मजबूत करना।
* पारिवारिक एवं पेशेवर देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाना।
* भारत को कुशल देखभाल सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना।
* कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर बल।
4. **’विकसित भारत@2047′ के लक्ष्य में सहायक:**
* **आर्थिक मूल्य सृजन:** नए रोजगार के अवसर, देखभाल अर्थव्यवस्था का विस्तार।
* **सामाजिक समावेशन:** सुदृढ़ देखभाल व्यवस्था से सामाजिक समावेशन को मजबूती।
* **मानव पूंजी विकास:** प्रशिक्षित कार्यबल से स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार।
* **सॉफ्ट पावर:** भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान-आधारित सॉफ्ट पावर को सुदृढ़ करना।
* **जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग:** युवा कार्यबल को वैश्विक मांग के अनुरूप प्रशिक्षित करना।
* **लिंग समानता:** देखभाल क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण।
* **सतत विकास लक्ष्य (SDGs) से जुड़ाव:** स्वास्थ्य, शिक्षा और लैंगिक समानता जैसे लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान।
5. **निष्कर्ष:** रिपोर्ट के महत्व को दोहराते हुए कि यह भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, और समावेशी एवं सतत विकास का आधार है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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