16 Jul नोएडा सीवर सफाईकर्मी की मौत: NHRC का स्वतः संज्ञान, मानवाधिकार उल्लंघन पर नोटिस
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय | GS Paper I — भारतीय समाज
- Prelims: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993, स्वच्छता कर्मी, मैनुअल स्कैवेंजिंग, सफाई कर्मचारी आंदोलन, स्वच्छता, मौलिक अधिकार, अनुच्छेद 21, संवैधानिक निकाय
- Essay: भारत में मानवाधिकारों की चुनौतियाँ और समाधान, विकास की दौड़ में हाशिए पर खड़े समाज का स्थान: एक नैतिक विश्लेषण
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) एक वैधानिक निकाय है जो मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करता है, और इसने नोएडा में सीवर सफाई के दौरान हुई मृत्यु का स्वतः संज्ञान लेकर मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़े गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दों को उजागर किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गौतम बुद्ध नगर जिले, उत्तर प्रदेश में नोएडा अथॉरिटी द्वारा किए गए सीवर सफाई अभियान के दौरान एक स्वच्छता कर्मी की विषैली गैस श्वसन से हुई मृत्यु की मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए नोएडा अथॉरिटी के अध्यक्ष और गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह घटना भारत में स्वच्छता कर्मियों के जीवन और गरिमा से जुड़े गंभीर मुद्दों को उजागर करती है।
पृष्ठभूमि
- 14 जुलाई 2026 को नोएडा के सेक्टर-93 में नोएडा प्राधिकरण द्वारा संचालित सीवर सफाई अभियान के दौरान एक 28 वर्षीय स्वच्छता कर्मी की विषैली गैस के संपर्क में आने से मृत्यु हो गई।
- मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि स्वच्छता कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण प्रदान किए बिना सीवर में उतारा गया था, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
- यह घटना भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोना) और सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है, जो दशकों से एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक और मानवाधिकार चुनौती बनी हुई है।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।
- भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग को कानूनी रूप से प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद यह प्रथा विभिन्न रूपों में जारी है, विशेषकर सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई में।
- इस तरह की घटनाएँ ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘स्वच्छता’ के व्यापक लक्ष्यों के साथ-साथ ‘सभी के लिए गरिमापूर्ण जीवन’ के संवैधानिक आदर्शों पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वैधानिक (Statutory) निकाय है, जिसकी स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी।
- यह आयोग देश में मानवाधिकारों का प्रहरी है, जो संविधान द्वारा गारंटीकृत या अंतर्राष्ट्रीय संधियों में निहित जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकारों के उल्लंघन की जाँच करता है।
- NHRC के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होते हैं, और इसमें चार अन्य सदस्य होते हैं, जिनमें से एक सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश और एक उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होता है।
- आयोग को मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जाँच करने, पीड़ितों को राहत की सिफारिश करने और सरकार को मानवाधिकारों के बेहतर संरक्षण के लिए सुझाव देने का अधिकार है।
- यह स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की शक्ति रखता है, जैसा कि प्रस्तुत समाचार में देखा गया है, जहाँ आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वयं कार्रवाई शुरू की।
- NHRC की सिफारिशें प्रकृति में बाध्यकारी नहीं होती हैं, लेकिन सरकार से उन पर विचार करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने की अपेक्षा की जाती है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों और उपकरणों का अध्ययन करता है और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें करता है।
- आयोग मानवाधिकार शिक्षा को बढ़ावा देने और विभिन्न हितधारकों के बीच जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैधानिक निकाय | मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 द्वारा स्थापित, इसे कानूनी वैधता और कार्य करने की शक्ति प्रदान करता है। |
| स्वतः संज्ञान की शक्ति | मीडिया रिपोर्टों या किसी अन्य स्रोत से जानकारी के आधार पर स्वयं मामलों की जाँच शुरू कर सकता है, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। |
| जाँच की शक्ति | मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जाँच के लिए सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिसमें गवाहों को बुलाना और दस्तावेज़ प्रस्तुत करवाना शामिल है। |
| सलाहकारी प्रकृति | इसकी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन नैतिक और सार्वजनिक दबाव के कारण उन्हें गंभीरता से लिया जाता है। |
| अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन | पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करता है, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारित करते हैं। |
| जागरूकता और शिक्षा | मानवाधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने और शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। |
महत्व
मानवाधिकारों का संरक्षण
- NHRC जैसे निकाय यह सुनिश्चित करते हैं कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न हो, विशेषकर हाशिए पर पड़े और कमजोर वर्गों के लिए।
- यह राज्य और गैर-राज्य अभिकर्ताओं द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
जवाबदेही सुनिश्चित करना
- सरकारी अधिकारियों और संस्थानों को उनकी लापरवाही या मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराने में मदद करता है।
- यह सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है, जिससे सुशासन को बल मिलता है।
सामाजिक न्याय को बढ़ावा
- मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करके, NHRC सामाजिक न्याय और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार को बढ़ावा देता है।
- यह उन समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है जो ऐतिहासिक रूप से भेदभाव और शोषण का शिकार रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन
- भारत एक लोकतांत्रिक देश के रूप में कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का हस्ताक्षरकर्ता है, और NHRC इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को बेहतर बनाने में मदद करता है, यह दर्शाता है कि देश मानवाधिकारों के प्रति गंभीर है।
चुनौतियाँ
1. मैनुअल स्कैवेंजिंग का निरंतर प्रचलन
- कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद, सीवर और सेप्टिक टैंकों की हाथ से सफाई अभी भी जारी है, विशेषकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
- स्थानीय निकायों और ठेकेदारों द्वारा नियमों का उल्लंघन आम है, जिससे श्रमिकों का जीवन खतरे में पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS Paper II — सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग
2. सुरक्षा उपकरणों का अभाव
- स्वच्छता कर्मियों को अक्सर आवश्यक सुरक्षा उपकरण (जैसे मास्क, दस्ताने, ऑक्सीजन सिलेंडर) प्रदान नहीं किए जाते हैं।
- प्रशिक्षण की कमी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना भी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है।
यूपीएससी लिंक: GS Paper II — स्वास्थ्य, सुरक्षा
3. सामाजिक-आर्थिक असमानता
- अधिकांश स्वच्छता कर्मी हाशिए पर पड़े समुदायों से आते हैं, जिनके पास अन्य रोजगार के अवसर सीमित होते हैं।
- यह उन्हें जोखिम भरे और अमानवीय काम करने के लिए मजबूर करता है, जिससे गरीबी और शोषण का दुष्चक्र बना रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS Paper I — भारतीय समाज, गरीबी
4. NHRC की सीमित शक्तियाँ
- NHRC की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होती हैं, जिससे कई बार उनकी प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।
- आयोग के पास उल्लंघनकर्ताओं को सीधे दंडित करने की शक्ति नहीं है, बल्कि वह केवल सिफारिशें कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS Paper II — संवैधानिक निकाय, शासन
5. न्यायिक प्रक्रिया में देरी
- मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में न्याय मिलने में अक्सर लंबा समय लगता है, जिससे पीड़ितों और उनके परिवारों को और अधिक पीड़ा झेलनी पड़ती है।
- जाँच और कानूनी कार्यवाही में नौकरशाही बाधाएँ भी एक चुनौती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS Paper II — न्यायपालिका, शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मैनुअल स्कैवेंजिंग का निरंतर प्रचलन | कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद, यह अमानवीय प्रथा जारी है, जो गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करती है। |
| सुरक्षा उपकरणों का अभाव | स्वच्छता कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण न मिलने से जानलेवा दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। |
| सामाजिक-आर्थिक भेद्यता | हाशिए पर पड़े समुदायों के लोग इस काम को करने के लिए मजबूर होते हैं, जिससे शोषण और गरीबी का दुष्चक्र बना रहता है। |
| जवाबदेही की कमी | स्थानीय निकायों और ठेकेदारों द्वारा नियमों के उल्लंघन के लिए अक्सर कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की जाती। |
| NHRC की सिफारिशों की बाध्यकारी प्रकृति का अभाव | आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी होती हैं, जिससे उनके कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है। |
| पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार का अभाव | मैनुअल स्कैवेंजिंग से मुक्त हुए लोगों के लिए पर्याप्त पुनर्वास और सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार के अवसरों की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मैनुअल स्कैवेंजर्स के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (PEMSR Act, 2013)
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी और ग्रामीण)
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC)
- स्वच्छता उद्यमी योजना
- क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (CLSS) फॉर मैनुअल स्कैवेंजर्स
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) – कौशल प्रशिक्षण के लिए
- राष्ट्रीय गरिमा अभियान
- नमस्ते (NAMASTE) योजना (राष्ट्रीय कार्य योजना फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम)
आगे की राह
- मैनुअल स्कैवेंजिंग के पूर्ण उन्मूलन के लिए ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ का सख्ती से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
- सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए मशीनीकृत समाधानों को बढ़ावा दिया जाए और मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम किया जाए।
- स्वच्छता कर्मियों को अनिवार्य रूप से पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और नियमित स्वास्थ्य जाँच प्रदान की जाए।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों और स्थानीय निकायों के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और जवाबदेही तय की जाए।
- मैनुअल स्कैवेंजिंग में लगे व्यक्तियों के लिए सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार के अवसर और प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रम सुनिश्चित किए जाएँ।
- NHRC की सिफारिशों को अधिक बाध्यकारी बनाने के लिए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।
- जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि समाज में मैनुअल स्कैवेंजिंग के प्रति संवेदनशीलता बढ़े और इस अमानवीय प्रथा को समाप्त करने में मदद मिले।
- राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों द्वारा स्वच्छता कर्मियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और बीमा कवर का विस्तार किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानवाधिकार उल्लंघन · राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग · मैनुअल स्कैवेंजिंग · गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार · सामाजिक न्याय · जवाबदेही · सुरक्षा प्रोटोकॉल · हाशिए पर पड़े समुदाय · संवैधानिक नैतिकता · स्वच्छता कर्मी · मशीनीकृत सफाई · पुनर्वास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (गरिमापूर्ण जीवन)
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत (सामाजिक भेदभाव के खिलाफ)
- अनुच्छेद 23: मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध
- अनुच्छेद 39(a): आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार
- अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाएँ
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि
- मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993: NHRC की स्थापना और कार्यप्रणाली
अवधारणा प्रवाह
सीवर सफाई में मानव हस्तक्षेप → सुरक्षा उपकरणों का अभाव → विषैली गैसों का श्वसन → स्वच्छता कर्मी की मृत्यु → मानवाधिकारों का उल्लंघन (अनुच्छेद 21) → NHRC द्वारा स्वतः संज्ञान → जवाबदेही और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. NHRC एक संवैधानिक निकाय है।
2. इसके अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होते हैं।
3. इसकी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2
- C. केवल 2 और 3
- D. केवल 1, 2 और 3
उत्तर: B. केवल 2 — कथन 1 गलत है। NHRC एक वैधानिक निकाय है, संवैधानिक नहीं। इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी। कथन 2 सही है। NHRC के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होते हैं। कथन 3 गलत है। NHRC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं, बल्कि सलाहकारी प्रकृति की होती हैं।
Q2. भारत में ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- A. केवल सफाई कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना।
- B. हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना और संबंधित व्यक्तियों का पुनर्वास करना।
- C. सीवर सफाई के लिए केवल मशीनीकृत उपकरणों के आयात को बढ़ावा देना।
- D. शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं के निर्माण को अनिवार्य करना।
उत्तर: B. हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना और संबंधित व्यक्तियों का पुनर्वास करना। — यह अधिनियम हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है और इसमें लगे व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए प्रावधान करता है, ताकि उन्हें गरिमापूर्ण जीवन और वैकल्पिक रोजगार के अवसर मिल सकें। अन्य विकल्प अधिनियम के व्यापक उद्देश्य को पूरी तरह से कवर नहीं करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग की निरंतरता एक गंभीर मानवाधिकार चुनौती है, जो संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और इस अमानवीय प्रथा को समाप्त करने के लिए आवश्यक उपायों पर प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में मैनुअल स्कैवेंजिंग को एक मानवाधिकार चुनौती के रूप में परिभाषित करें और संवैधानिक मूल्यों व सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन को स्पष्ट करें। दूसरे भाग में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण करें, जिसमें उसकी शक्तियों, सीमाओं और स्वतः संज्ञान लेने की क्षमता का उल्लेख हो। अंत में, इस प्रथा को समाप्त करने के लिए ठोस और व्यावहारिक उपायों, जैसे कि मशीनीकरण, पुनर्वास, सख्त कानून प्रवर्तन और जागरूकता पर प्रकाश डालते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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