नौसेना ने लॉन्च किया स्वदेशी एएसडब्ल्यू जहाज मछलीपट्टनम, जानिए इसकी खासियतें

नौसेना ने लॉन्च किया स्वदेशी एएसडब्ल्यू जहाज मछलीपट्टनम, जानिए इसकी खासियतें

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (रक्षा प्रौद्योगिकी)  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत की समुद्री सुरक्षा)
  • Prelims: एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC), मछलीपट्टनम (युद्धपोत), कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया (रक्षा), भारतीय नौसेना, स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम, माहे-श्रेणी के जहाज
  • Essay: भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय सुरक्षा में इसकी भूमिका, समुद्री शक्ति और भारत के भू-राजनीतिक हित

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘मछलीपट्टनम’ भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित सातवां एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटरक्राफ्ट है, जो भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रतीक है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय नौसेना ने हाल ही में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC) में से सातवें, ‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) का जलावतरण किया। यह घटना भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाती है और देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।

पृष्ठभूमि

  • ‘मछलीपट्टनम’ माहे-श्रेणी के ASW SWC जहाजों का हिस्सा है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • यह जहाज आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है, जो इसकी समृद्ध समुद्री विरासत और व्यापारिक केंद्र के रूप में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को दर्शाता है।
  • ASW SWC परियोजना का उद्देश्य स्वदेशी प्लेटफार्मों के माध्यम से पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को बढ़ाना है।
  • इन जहाजों में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं और सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को रेखांकित करता है।
  • इन जहाजों को भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने की क्षमता में पर्याप्त सुधार करने की उम्मीद है।
  • यह जलावतरण भारत की तटीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा और समुद्री डोमेन जागरूकता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा।

एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटरक्राफ्ट (ASW SWC) क्या हैं?

  • ASW SWC छोटे युद्धपोत हैं जिन्हें विशेष रूप से उथले पानी (तटीय और लिटोरल क्षेत्रों) में पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इन जहाजों का मुख्य कार्य दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, ट्रैक करना और उन्हें नष्ट करना है।
  • ये जहाज पानी के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन (Low-Intensity Maritime Operations) और माइन वारफेयर (Mine Warfare) जैसे कार्यों को भी अंजाम देने में सक्षम हैं।
  • ASW SWC भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इन जहाजों को उन्नत सोनार (Sonar) प्रणालियों और पनडुब्बी रोधी हथियारों जैसे टॉरपीडो (Torpedoes) और डेप्थ चार्ज (Depth Charges) से लैस किया जाता है।
  • भारत में इन जहाजों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के तहत किया जा रहा है, जिससे रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।
  • ये जहाज भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को मजबूत करने में मदद करेंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मछलीपट्टनम (BY 529) यह माहे-श्रेणी का सातवाँ पनडुब्बी रोधी युद्धपोत है, जो कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित है।
उथले पानी के युद्धपोत (ASW SWC) तटीय और उथले पानी के संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया, पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमताओं को बढ़ाता है।
स्वदेशी निर्माण 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, यह भारत की आत्मनिर्भरता और रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को दर्शाता है।
बहु-मिशन क्षमता पानी के नीचे निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध, कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन और खदान युद्ध कार्य करने में सक्षम।
तटीय रक्षा भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा और समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) में वृद्धि करेगा।

महत्व

सामरिक महत्व

  • यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और नौसेना की परिचालन तत्परता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं में वृद्धि से भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, विशेषकर तटीय और उथले पानी के क्षेत्रों में।
  • यह भारत की रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।

आर्थिक महत्व

  • स्वदेशी निर्माण से भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार सृजन होता है और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलता है।
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से आयात बिल कम होता है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

तकनीकी महत्व

  • 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग भारत की उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।
  • यह परियोजना जटिल युद्धपोत प्रणालियों के डिजाइन और निर्माण में भारत की विशेषज्ञता को और विकसित करती है।

चुनौतियाँ

1. रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता

  • उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निरंतर निवेश की आवश्यकता है।
  • घरेलू रक्षा उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए तकनीकी उन्नयन और कौशल विकास महत्वपूर्ण है।

2. समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ

  • हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियाँ भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं।
  • तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र जागरूकता बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी और उन्नत प्लेटफार्मों की आवश्यकता है।

3. परियोजना कार्यान्वयन और समय-सीमा

  • बड़ी रक्षा परियोजनाओं में अक्सर देरी और लागत में वृद्धि की चुनौतियाँ होती हैं, जिन्हें प्रभावी परियोजना प्रबंधन से दूर किया जा सकता है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्वदेशीकरण का स्तर कुछ महत्वपूर्ण घटकों और प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी आयात पर निर्भरता बनी हुई है।
अनुसंधान और विकास रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के लिए पर्याप्त अनुसंधान और विकास निवेश की आवश्यकता है।
कौशल विकास जटिल रक्षा प्रणालियों के निर्माण और रखरखाव के लिए उच्च कुशल कार्यबल की कमी।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए लागत-प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat)

आगे की राह

  • रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना ताकि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में पूर्ण स्वदेशीकरण प्राप्त किया जा सके।
  • घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  • नौसेना के आधुनिकीकरण और बेड़े के विस्तार के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ बनाना और उनका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को बढ़ाने के लिए उन्नत निगरानी प्रणालियों और सूचना साझाकरण तंत्रों को विकसित करना।
  • रक्षा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना ताकि समय पर और लागत प्रभावी वितरण हो सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, जहाँ आवश्यक हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आत्मनिर्भर भारत · रक्षा विनिर्माण · स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम · पनडुब्बी रोधी युद्धपोत · तटीय सुरक्षा · समुद्री हित · कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड · मेक इन इंडिया · सामरिक स्वायत्तता · हिंद महासागर क्षेत्र

अवधारणा प्रवाह

नौसेना द्वारा युद्धपोत ‘मछलीपट्टनम’ का जलावतरण  →  स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहन  →  आत्मनिर्भर भारत पहल को बढ़ावा  →  भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता में वृद्धि  →  हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ‘मछलीपट्टनम’ भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (ASW SWC) में से सातवां है।
2. ये युद्धपोत केवल गहरे पानी के अभियानों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
3. इस परियोजना में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘मछलीपट्टनम’ सातवां ASW SWC है। कथन 2 गलत है क्योंकि ये युद्धपोत तटीय और उथले पानी के अभियानों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। कथन 3 सही है क्योंकि इस परियोजना में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।

Q2. अभिकथन (A): भारत का स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा देता है।
कारण (R): ‘मछलीपट्टनम’ जैसे युद्धपोतों के निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि उच्च स्वदेशी सामग्री आत्मनिर्भरता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में ‘मछलीपट्टनम’ जैसे पनडुब्बी रोधी उथले पानी के युद्धपोतों (ASW SWC) के प्रक्षेपण के महत्व पर चर्चा करें। यह भारत की समुद्री सुरक्षा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को कैसे सुदृढ़ करता है? (15 अंक)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** ‘मछलीपट्टनम’ के हालिया प्रक्षेपण का संक्षिप्त उल्लेख और यह भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है।
2. **ASW SWC का महत्व:**
* **तटीय और उथले पानी के संचालन:** इन युद्धपोतों की विशिष्ट क्षमताएं (पनडुब्बी रोधी युद्ध, पानी के भीतर निगरानी, ​​कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान, खदान युद्ध)।
* **समुद्री डोमेन जागरूकता:** तटीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को बढ़ाना।
* **हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भूमिका:** भारत के समुद्री हितों की रक्षा में योगदान।
3. **’आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशीकरण:**
* **80% से अधिक स्वदेशी सामग्री:** यह दर्शाता है कि यह परियोजना रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को कैसे बढ़ावा देती है।
* **भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग की क्षमताएं:** कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका।
* **आर्थिक लाभ:** रोजगार सृजन और घरेलू उद्योग को बढ़ावा।
* **सामरिक स्वायत्तता:** महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए विदेशी निर्भरता को कम करना।
4. **चुनौतियाँ और आगे का रास्ता:** स्वदेशीकरण में आने वाली संभावित चुनौतियाँ (जैसे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान एवं विकास निवेश) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव।
5. **निष्कर्ष:** भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की प्रतिबद्धता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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