20 Jul पंप स्टोरेज परियोजनाओं से ऊर्जा भंडारण में क्रांति: UPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अपडेट
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | GS Paper III — आधारभूत संरचना (ऊर्जा)
- Prelims: पंप स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP), नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), ग्रिड स्थिरता, टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB)
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण और चुनौतियाँ, सतत विकास के लिए आधारभूत संरचना का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: पंप स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP) नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, ग्रिड स्थिरता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण समाधान हैं, जिनके विकास को सरकार विभिन्न नीतिगत उपायों से प्रोत्साहित कर रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार, विशेष रूप से विद्युत मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, देश में पंप स्टोरेज परियोजनाओं (PSP) के विकास को गति देने के लिए सक्रिय रूप से कई नीतिगत उपाय कर रहे हैं। वर्तमान में, 15,870 मेगावाट क्षमता वाली 11 परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जबकि 8,140 मेगावाट क्षमता वाली 6 अन्य परियोजनाओं को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा मंजूरी मिल चुकी है। इन उपायों में नियामक प्रक्रियाओं का सरलीकरण, पर्यावरणीय मंजूरियों में तेजी लाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना शामिल है, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emission) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों का बड़े पैमाने पर एकीकरण आवश्यक है।
- सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत आंतरायिक (Intermittent) प्रकृति के होते हैं, जिससे ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए ऊर्जा भंडारण समाधानों की आवश्यकता होती है।
- पंप स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP) नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और ग्रिड संतुलन के लिए सबसे विश्वसनीय और सिद्ध दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण समाधानों में से एक हैं।
- सरकार ने निजी क्षेत्र को इन परियोजनाओं में निवेश के लिए आकर्षित करने हेतु कई प्रोत्साहन और नियामक सुधार किए हैं।
- पर्यावरणीय और वैधानिक मंजूरियों में लगने वाले समय को कम करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है।
- भारत सरकार ने जलविद्युत उत्पादन केंद्रों की स्थापना से संबंधित योजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय सीमा को संशोधित कर 3,000 करोड़ रुपए कर दिया है, जिसके लिए CEA की सहमति अनिवार्य है।
पंप स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP) क्या हैं?
- पंप स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP) एक प्रकार की जलविद्युत ऊर्जा भंडारण प्रणाली हैं जो दो जलाशयों का उपयोग करती हैं, एक ऊँचाई पर और दूसरा निचले स्तर पर।
- जब बिजली की मांग कम होती है (और बिजली सस्ती होती है), तो निचले जलाशय से पानी को पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुँचाया जाता है, जिससे ऊर्जा का भंडारण होता है।
- जब बिजली की मांग अधिक होती है, तो ऊपरी जलाशय से पानी को टर्बाइनों के माध्यम से निचले जलाशय में छोड़ा जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है, ठीक वैसे ही जैसे पारंपरिक जलविद्युत संयंत्रों में होता है।
- ये परियोजनाएँ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा के आंतरायिक उत्पादन को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- PSP दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण प्रदान करती हैं, ग्रिड की स्थिरता बनाए रखती हैं, और आवृत्ति विनियमन (Frequency Regulation), वोल्टेज समर्थन (Voltage Support) तथा ब्लैक स्टार्ट क्षमता (Black Start Capability) जैसी सहायक सेवाएँ प्रदान करती हैं।
- भारत में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने PSP के मूल्यांकन को B2 श्रेणी के अंतर्गत सक्षम किया है और ऑफस्ट्रीम PSP के लिए विशिष्ट संदर्भ शर्तें (ToR) जारी की हैं।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने PSP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की स्वीकृति की समय सीमा को 90 दिनों से घटाकर 50 दिन कर दिया है और अंतर-राज्यीय पहलुओं की मंजूरी को अनावश्यक बना दिया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण | अतिरिक्त ऊर्जा को संग्रहीत कर ग्रिड को स्थिरता प्रदान करता है। |
| संतुलनकारी बिजली आपूर्ति | मांग बढ़ने पर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करता है, जिससे ग्रिड का संतुलन बना रहता है। |
| ग्रिड सहायक सेवाएं | आवृत्ति विनियमन, वोल्टेज समर्थन और ब्लैक स्टार्ट क्षमता जैसी सेवाएं प्रदान करता है। |
| नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण | सौर और पवन ऊर्जा जैसे परिवर्तनशील नवीकरणीय स्रोतों को ग्रिड में एकीकृत करने में सहायक। |
| पर्यावरण और वैधानिक मंजूरी में सरलीकरण | पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया है। |
| निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन | सरकार द्वारा बजटीय सहायता और खरीद ढांचे में सुधार के माध्यम से निजी निवेश को बढ़ावा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- पंप स्टोरेज परियोजनाएं (PSP) नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है।
- ये परियोजनाएं ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती हैं, जिससे औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव होती है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए बजटीय सहायता और टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) दिशानिर्देशों से निवेश आकर्षित होगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- PSP कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करती हैं, क्योंकि ये नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण और उपयोग को सुगम बनाती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने में सहायता मिलती है।
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा मंजूरी प्रक्रियाओं का सरलीकरण परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आएगी।
सामरिक महत्व
- PSP दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण समाधान प्रदान करती हैं, जो भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने और ऊर्जा स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- ग्रिड की सहायक सेवाएं जैसे आवृत्ति विनियमन और वोल्टेज समर्थन, राष्ट्रीय ग्रिड को अधिक लचीला और बाहरी झटकों के प्रति प्रतिरोधी बनाती हैं, जो सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
शासनिक महत्व
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की स्वीकृति के लिए समय सीमा को कम करना और अंतर-राज्यीय पहलुओं की मंजूरी को समाप्त करना परियोजनाओं के कार्यान्वयन में दक्षता लाता है।
- सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय सीमा में संशोधन और कुछ परियोजनाओं को CEA की सहमति से छूट देना, नियामक बोझ को कम करता है और विकास को गति देता है।
चुनौतियाँ
1. पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव
- बड़ी PSP परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और विस्थापन एक चुनौती हो सकती है, जिससे स्थानीय समुदायों पर सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है।
- जलाशयों के निर्माण से पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता (Biodiversity) पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसके लिए उचित शमन उपायों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन, सतत विकास
2. उच्च प्रारंभिक पूंजीगत लागत
- PSP परियोजनाओं की प्रारंभिक पूंजीगत लागत काफी अधिक होती है, जिससे वित्तपोषण एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
- हालांकि सरकार प्रोत्साहन दे रही है, निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय मॉडल और जोखिम-साझाकरण तंत्र की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा वित्तपोषण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
3. तकनीकी और भूवैज्ञानिक चुनौतियां
- उपयुक्त स्थलों की पहचान, जहां पर्याप्त जल स्रोत और भूवैज्ञानिक स्थिरता हो, एक जटिल कार्य है।
- परियोजनाओं के डिजाइन और निर्माण में उन्नत इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा अवसंरचना, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
4. अंतर-राज्यीय जल विवाद
- कुछ PSP परियोजनाओं के लिए जल संसाधनों का उपयोग अंतर-राज्यीय जल विवादों को जन्म दे सकता है, भले ही अंतर-राज्यीय मंजूरी की आवश्यकता न हो।
- जल के बंटवारे और उपयोग से संबंधित मुद्दों को सुलझाना महत्वपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, जल संसाधन प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | स्थानीय समुदायों का विस्थापन और पुनर्वास। |
| पारिस्थितिक प्रभाव | जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित नकारात्मक प्रभाव। |
| उच्च पूंजीगत लागत | परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तपोषण जुटाना। |
| तकनीकी जटिलता | उपयुक्त स्थलों का चयन और उन्नत इंजीनियरिंग की आवश्यकता। |
| नियामक बाधाएं | विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से कई मंजूरियां प्राप्त करने में समय लगना। |
| ग्रिड एकीकरण | नवीकरणीय ऊर्जा के साथ PSP का इष्टतम एकीकरण सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
आगे की राह
- PSP परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रियाओं को और सुव्यवस्थित करना, जबकि पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों से समझौता न हो।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों, कर छूटों और आसान ऋण सुविधाओं का विस्तार करना।
- अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना ताकि PSP प्रौद्योगिकी में नवाचार और लागत-दक्षता लाई जा सके।
- PSP परियोजनाओं के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय मास्टर प्लान विकसित करना, जिसमें संभावित स्थलों की पहचान और प्राथमिकता शामिल हो।
- अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र को मजबूत करना ताकि जल संसाधनों के उपयोग से संबंधित किसी भी संभावित विवाद को समय पर सुलझाया जा सके।
- स्थानीय समुदायों के साथ प्रभावी जुड़ाव और परामर्श सुनिश्चित करना ताकि भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से संबंधित चिंताओं को दूर किया जा सके।
- ग्रिड आधुनिकीकरण और स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों में निवेश करना ताकि PSP को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ बेहतर ढंग से एकीकृत किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पंप स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP) · नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण · ग्रिड स्थिरता · दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण · पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ · नियामक ढाँचा · निजी क्षेत्र की भागीदारी · केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) · केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) · टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) · अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (ISTS) · ऊर्जा सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदियों के जल संबंधी विवादों का न्यायनिर्णयन’}
अवधारणा प्रवाह
नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि → ग्रिड स्थिरता और संतुलन की आवश्यकता → पंप स्टोरेज परियोजनाओं का विकास → ऊर्जा भंडारण और ग्रिड एकीकरण → स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पंप स्टोरेज परियोजनाओं (PSP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. PSPs नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे अतिरिक्त ऊर्जा का भंडारण करते हैं और मांग बढ़ने पर बिजली की आपूर्ति करते हैं।
2. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप PSPs के लिए एक मौसम के बेसलाइन डेटा संग्रह को अनिवार्य किया है।
3. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने PSPs के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (ISTS) शुल्क में 100% छूट का प्रावधान किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि PSPs नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में सहायक होते हैं, कम मांग वाले समय में ऊर्जा का भंडारण करते हैं और मांग बढ़ने पर आपूर्ति करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि मंत्रालय ने ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप PSPs के लिए एक मौसम (मानसून के अलावा) के लिए बेसलाइन डेटा संग्रह निर्धारित किया है। कथन 3 भी सही है क्योंकि CERC ने वाणिज्यिक संचालन तिथि से 25 वर्षों के लिए PSPs हेतु ISTS शुल्क में 100% छूट प्रदान की है।
Q2. भारत में पंप स्टोरेज परियोजनाओं (PSP) के विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने सभी प्रकार के PSPs के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की स्वीकृति की समय सीमा को 90 दिनों से घटाकर 50 दिन कर दिया है।
2. सरकार ने जल विद्युत उत्पादन केंद्रों की स्थापना से संबंधित योजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय सीमा को संशोधित करके 3,000 करोड़ रुपए कर दिया है, जिसके लिए CEA की सहमति अनिवार्य है।
3. ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप PSPs को CEA की सहमति की आवश्यकता से पूरी तरह छूट दी गई है, भले ही वे पूंजीगत व्यय सीमा से अधिक हों।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। CEA ने PSPs की DPR स्वीकृति की समय सीमा 90 से घटाकर 50 दिन कर दी है। कथन 2 भी सही है। सरकार ने जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय सीमा 3,000 करोड़ रुपए की है, जिसके लिए CEA की सहमति अनिवार्य है। कथन 3 गलत है। ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप PSPs को पूंजीगत व्यय की राशि के अलावा CEA की सहमति से छूट दी गई है, लेकिन यह पूरी तरह से छूट नहीं है और विकासकर्ता तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में पंप स्टोरेज परियोजनाओं (PSP) के महत्व पर चर्चा कीजिए और उनके विकास को गति देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न नियामक और नीतिगत उपायों का विश्लेषण कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पंप स्टोरेज परियोजनाओं के महत्व को स्पष्ट करें, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, ग्रिड स्थिरता, ऊर्जा भंडारण और सहायक सेवाओं के संदर्भ में। दूसरे भाग में, सरकार द्वारा PSPs के विकास को बढ़ावा देने के लिए किए गए नियामक और नीतिगत उपायों का विस्तार से विश्लेषण करें, जिसमें पर्यावरणीय स्वीकृतियों में सरलीकरण, DPR स्वीकृति समय में कमी, पूंजीगत व्यय सीमा का संशोधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन और वित्तीय प्रोत्साहन (जैसे ISTS शुल्क में छूट) शामिल हों। निष्कर्ष में, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में PSPs की भूमिका को रेखांकित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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