25 Sep परमाणु ऊर्जा: जलवायु संकट का नया समाधान बन रही है?
✎ भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए SHANTI अधिनियम, 2025 और परमाणु ऊर्जा मिशन जैसी पहलों के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें निजी भागीदारी और लघु…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन
- Prelims: परमाणु ऊर्जा, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, SHANTI अधिनियम, 2025, परमाणु ऊर्जा मिशन, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), नागरिक दायित्व, तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, गैर-प्रसार संधि (NPT)
- Essay: ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने में प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए SHANTI अधिनियम, 2025 और परमाणु ऊर्जा मिशन जैसी पहलों के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें निजी भागीदारी और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए SHANTI अधिनियम, 2025 और परमाणु ऊर्जा मिशन जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए गए हैं। ये कदम भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, जिससे यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है।
पृष्ठभूमि
- परमाणु ऊर्जा वैश्विक बिजली का लगभग दसवां हिस्सा प्रदान करती है और जलविद्युत के बाद कम कार्बन वाली बिजली का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
- भारत में परमाणु ऊर्जा वर्तमान में कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3.1% है, जिसकी स्थापित क्षमता 8.78 GW है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2047 तक इसे 100 GW तक बढ़ाना है।
- भारत के परमाणु परीक्षणों और गैर-प्रसार संधि (NPT) से बाहर होने के कारण दशकों तक प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा, जिसने देश को आत्मनिर्भरता और अपने तीन-चरणीय कार्यक्रम (Three-Stage Programme) की ओर धकेला।
- वर्ष 2008 के भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (India-US Civil Nuclear Deal) ने वैश्विक वाणिज्य तक पहुंच फिर से खोल दी, लेकिन भारत का नागरिक दायित्व (Civil Liability) व्यवस्था आपूर्तिकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी रही।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए परमाणु ऊर्जा को कम कार्बन उत्सर्जन वाला और मौसम से स्वतंत्र रूप से बड़ी मात्रा में बिजली उत्पन्न करने वाला एक महत्वपूर्ण साधन माना जा रहा है।
- चेरनोबिल और फुकुशिमा जैसी दुर्घटनाओं के कारण सार्वजनिक स्मृति में विकिरण जोखिम की चिंताएँ अभी भी बनी हुई हैं, जिससे सार्वजनिक विश्वास निर्माण एक चुनौती है।
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और संबंधित पहलें
- भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: यह थोरियम (Thorium) के विशाल भंडार का उपयोग करने पर केंद्रित है, जो भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
- SHANTI अधिनियम, 2025: यह भारत के परमाणु कानूनों का पुनर्गठन करता है, लाइसेंसिंग के तहत चुनिंदा गतिविधियों में निजी भागीदारी की अनुमति देता है, जबकि संवर्धन (Enrichment), खर्च किए गए ईंधन प्रबंधन (Spent-Fuel Management) और भारी जल उत्पादन (Heavy-Water Production) को केंद्र सरकार के नियंत्रण में रखता है। यह एकल दायित्व सीमा को एक श्रेणीबद्ध ढांचे (Graded Framework) से बदलता है।
- परमाणु ऊर्जा मिशन: इस मिशन के तहत लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors – SMRs) के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी इकाइयों का निर्माण करना है।
- लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs): ये छोटे, मॉड्यूलर रिएक्टर होते हैं जिन्हें कारखाने में बनाया जा सकता है और साइट पर स्थापित किया जा सकता है, जिससे निर्माण लागत और समय कम हो सकता है।
- नागरिक दायित्व व्यवस्था: भारत में परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं की जवाबदेही से संबंधित प्रावधान हैं, जो पहले विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक चिंता का विषय था।
- परमाणु ऊर्जा का महत्व: यह कम कार्बन उत्सर्जन वाली, ऊर्जा-सघन और चौबीसों घंटे बिजली उत्पादन में सक्षम है, जो सौर और पवन ऊर्जा जैसे परिवर्तनशील नवीकरणीय स्रोतों के पूरक के रूप में कार्य करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कम कार्बन उत्सर्जन | जलवायु परिवर्तन से निपटने और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक। |
| मौसम-स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादन | सौर और पवन ऊर्जा जैसे परिवर्तनशील नवीकरणीय स्रोतों के पूरक के रूप में ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करता है। |
| उच्च ऊर्जा घनत्व | कम स्थान में बड़ी मात्रा में बिजली उत्पन्न करने की क्षमता। |
| निरंतर बिजली आपूर्ति | चौबीसों घंटे ऊर्जा उपलब्ध कराता है, जो औद्योगिक और घरेलू आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है। |
| ऊर्जा सुरक्षा | आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- भारत के 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए आवश्यक बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देकर निवेश आकर्षित करना और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना।
- दीर्घकालिक ऊर्जा लागतों को स्थिर करने में मदद, क्योंकि परमाणु ईंधन की कीमतें जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम अस्थिर होती हैं।
सामरिक महत्व
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, जिससे आयातित ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव होगा।
- स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देना, विशेषकर तीन-चरणीय कार्यक्रम और थोरियम भंडार के उपयोग के माध्यम से।
- भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना।
पर्यावरणीय महत्व
- भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net-Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान, क्योंकि परमाणु ऊर्जा कार्बन-मुक्त बिजली उत्पन्न करती है।
- जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करके वायु प्रदूषण और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं को कम करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ मिलकर एक विविध और लचीले ऊर्जा मिश्रण का निर्माण करना, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक होगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च पूंजी लागत और लंबी निर्माण अवधि
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में भारी निवेश और कई वर्षों का समय लगता है, जिससे परियोजना लागत में वृद्धि हो सकती है।
- लागत में वृद्धि (Cost Overruns) और निर्माण में देरी अक्सर देखी जाती है, जिससे वित्तीय नियोजन जटिल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना
2. सार्वजनिक विश्वास और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- चेरनोबिल और फुकुशिमा जैसी दुर्घटनाओं के कारण विकिरण जोखिमों के बारे में सार्वजनिक स्मृति में डर बना हुआ है।
- परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित संचालन और अपशिष्ट निपटान के संबंध में जनता का विश्वास जीतना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन
3. तकनीकी और नियामक पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार
- 100 GW के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियामक निकायों और कुशल श्रमिकों के एक बड़े पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है।
- परमाणु प्रतिभा की कमी (Shortage of Nuclear Talent) एक चिंता का विषय है, जिसे दूर करने के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन
4. देयता व्यवस्था और आपूर्तिकर्ता संबंध
- भारत की परमाणु देयता व्यवस्था (Liability Regime) ने अतीत में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को हतोत्साहित किया है।
- SHANTI अधिनियम, 2025 के तहत नई श्रेणीबद्ध देयता व्यवस्था का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था
5. ईंधन चक्र प्रबंधन
- परमाणु ईंधन के संवर्धन (Enrichment) और खर्च किए गए ईंधन (Spent-Fuel) के प्रबंधन जैसी गतिविधियों को केंद्रीय नियंत्रण में रखना।
- दीर्घकालिक और सुरक्षित अपशिष्ट निपटान समाधानों का विकास और कार्यान्वयन।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| लागत और समय | परियोजनाओं की उच्च पूंजी लागत और लंबी निर्माण अवधि। |
| सुरक्षा | परमाणु दुर्घटनाओं का जोखिम और सार्वजनिक धारणा। |
| नियामक क्षमता | विस्तारित परमाणु कार्यक्रम के लिए पर्याप्त नियामक और मानव संसाधन की कमी। |
| देयता | आपूर्तिकर्ताओं के लिए देयता व्यवस्था का प्रभाव। |
| अपशिष्ट प्रबंधन | खर्च किए गए परमाणु ईंधन के सुरक्षित निपटान की चुनौती। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- परमाणु ऊर्जा मिशन (Nuclear Energy Mission)
आगे की राह
- परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण मॉडल में नवाचार करना, जिसमें निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना शामिल है।
- परमाणु सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करना और स्वतंत्र, पारदर्शी संस्थानों के माध्यम से सुरक्षा आकलन और सार्वजनिक प्रकटीकरण (Public Disclosure) सुनिश्चित करना।
- परमाणु क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना।
- SHANTI अधिनियम, 2025 के तहत श्रेणीबद्ध देयता व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना और घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक अनुकूल कारोबारी माहौल बनाना।
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors – SMRs) जैसी नई प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में तेजी लाना, जो लागत प्रभावी और लचीले समाधान प्रदान कर सकते हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ परमाणु ऊर्जा को एकीकृत करने के लिए ग्रिड अवसंरचना को मजबूत करना, जिससे एक स्थिर और डीकार्बोनाइज्ड ऊर्जा मिश्रण प्राप्त हो सके।
- परमाणु ऊर्जा के लाभों और सुरक्षा उपायों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता और विश्वास बढ़ाने के लिए व्यापक संचार अभियान चलाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
परमाणु ऊर्जा · कार्बन उत्सर्जन में कमी · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · SHANTI अधिनियम, 2025 · लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) · नागरिक दायित्व · तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम · गैर-प्रसार संधि (NPT) · ऊर्जा सुरक्षा · शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में परमाणु ऊर्जा का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
जलवायु परिवर्तन और डीकार्बोनाइजेशन की आवश्यकता → कम कार्बन ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती मांग → परमाणु ऊर्जा का महत्व (कम उत्सर्जन, निरंतर आपूर्ति) → भारत का 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य (2047 तक) → SHANTI अधिनियम, 2025 और परमाणु ऊर्जा मिशन → निजी भागीदारी और SMRs का विकास → ऊर्जा सुरक्षा और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन-चरणीय कार्यक्रम पर आधारित है जिसका उद्देश्य देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना है।
2. SHANTI अधिनियम, 2025 भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की अनुमति देता है, लेकिन संवर्धन और भारी जल उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को केंद्रीय नियंत्रण में रखता है।
3. भारत गैर-प्रसार संधि (NPT) का एक हस्ताक्षरकर्ता है, जिसने उसके परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच को आसान बनाया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम देश के थोरियम भंडार का उपयोग करने के लिए तीन-चरणीय दृष्टिकोण पर केंद्रित है। कथन 2 सही है। SHANTI अधिनियम, 2025 निजी भागीदारी की अनुमति देता है, लेकिन संवर्धन और भारी जल उत्पादन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर सरकारी नियंत्रण बनाए रखता है। कथन 3 गलत है। भारत गैर-प्रसार संधि (NPT) का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, जिसने ऐतिहासिक रूप से उसकी परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच को प्रतिबंधित किया है।
Q2. कथन (A): भारत अपने शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने और बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहा है।
कारण (R): परमाणु ऊर्जा कम कार्बन उत्सर्जन वाली है और मौसम की स्थिति से स्वतंत्र होकर चौबीसों घंटे बिजली उत्पन्न करने में सक्षम है, जिससे यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का एक पूरक बन जाती है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि भारत अपने शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने और बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कारण (R) भी सही है क्योंकि परमाणु ऊर्जा कम कार्बन उत्सर्जन वाली है और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की परिवर्तनशीलता को संतुलित करते हुए स्थिर बिजली प्रदान करती है। कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के विकास में SHANTI अधिनियम, 2025 और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) की भूमिका का परीक्षण करें। साथ ही, देश के शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा के महत्व पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों के संदर्भ में परमाणु ऊर्जा के महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. **SHANTI अधिनियम, 2025:**
* अधिनियम के मुख्य प्रावधान: परमाणु कानूनों का पुनर्गठन, चुनिंदा गतिविधियों में निजी भागीदारी की अनुमति (लाइसेंसिंग के तहत)।
* केंद्रीय नियंत्रण वाले क्षेत्र: संवर्धन, खर्च किए गए ईंधन का प्रबंधन, भारी जल उत्पादन।
* नागरिक दायित्व व्यवस्था में परिवर्तन: एकल दायित्व सीमा को श्रेणीबद्ध ढांचे से बदलना।
* अधिनियम का महत्व: वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत को अधिक आकर्षक बनाना, निवेश आकर्षित करना, क्षमता विस्तार को गति देना।
3. **लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs):**
* अवधारणा: छोटे, मॉड्यूलर डिजाइन वाले रिएक्टर, जो कारखाने में निर्मित हो सकते हैं और साइट पर असेंबल किए जा सकते हैं।
* भारत की ‘परमाणु ऊर्जा मिशन’ पहल: SMRs के लिए ₹20,000 करोड़ का आवंटन, 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी इकाइयों का लक्ष्य।
* लाभ: कम निर्माण समय, कम लागत, सुरक्षा में सुधार, दूरस्थ स्थानों के लिए उपयुक्तता, लचीलापन।
* चुनौतियाँ: प्रारंभिक निवेश, नियामक ढांचा, सार्वजनिक स्वीकृति।
4. **शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों में परमाणु ऊर्जा का महत्व:**
* कम कार्बन उत्सर्जन: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना।
* स्थिर और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत: सौर और पवन ऊर्जा जैसे परिवर्तनशील नवीकरणीय स्रोतों का पूरक।
* ऊर्जा सुरक्षा: आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना।
* भारत का लक्ष्य: 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन, 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** सार्वजनिक विश्वास, नियामक पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार, कुशल कार्यबल की कमी, वित्तीय व्यवहार्यता।
6. **निष्कर्ष:** भारत के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका, विशेष रूप से SHANTI अधिनियम और SMRs के माध्यम से क्षमता विस्तार, जो देश के जलवायु लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
स्रोत: orissapost.com
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