पिचावरम मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्य: ₹2,485.38 करोड़, जानिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?

How valuable are mangroves? Study on Pichavaram ecosystem pegs it at ₹2,485.38 crore — labelled illustration

पिचावरम मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्य: ₹2,485.38 करोड़, जानिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?

✎ मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र तटीय सुरक्षा, जैव-विविधता संरक्षण और जलवायु विनियमन के लिए आवश्यक हैं, और उनके आर्थिक मूल्य को समझना सतत विकास और प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन
  • Prelims: मैंग्रोव वन, पिचावरम मैंग्रोव, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ, ब्लू कार्बन, कार्बन पृथक्करण, तटीय संरक्षण, जैव-विविधता, IUCN रेड लिस्ट ऑफ़ इकोसिस्टम्स
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र तटीय सुरक्षा, जैव-विविधता संरक्षण और जलवायु विनियमन के लिए आवश्यक हैं, और उनके आर्थिक मूल्य को समझना सतत विकास और प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, पिचावरम मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र (Pichavaram Mangrove Ecosystem) के एक अध्ययन ने इसके कुल आर्थिक मूल्य (Total Economic Value – TEV) का अनुमान ₹2,485.38 करोड़ लगाया है। यह अध्ययन मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली पारिस्थितिकी, आर्थिक और सामाजिक सेवाओं के महत्त्व को रेखांकित करता है, जिससे नीति-निर्माण और संरक्षण प्रयासों में इनके मूल्य को शामिल करने की आवश्यकता पर बल मिलता है।

पृष्ठभूमि

  • पिचावरम मैंग्रोव वन को भारत के सबसे पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण तटीय आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक माना जाता है।
  • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र भोजन, विनियमन, समर्थन और सांस्कृतिक सहित कई प्रकार की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करते हैं, जो पारिस्थितिक स्थिरता और मानव कल्याण में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं।
  • पारंपरिक विकास योजना में कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को अक्सर कम करके आंका जाता है, क्योंकि उनके कई पारिस्थितिक लाभ गैर-बाजार प्रकृति के होते हैं और बाजार लेनदेन में परिलक्षित नहीं होते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, जैव-विविधता हानि और तटीय भेद्यता ने मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों के पारिस्थितिक और आर्थिक योगदान के व्यापक मूल्यांकन की आवश्यकता पर और अधिक जोर दिया है।
  • इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (International Union for Conservation of Nature – IUCN) के 2024 के आकलन के अनुसार, दुनिया के 50% मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र पतन के जोखिम में हैं।
  • अध्ययन ने पिचावरम मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक कार्बन सिंक (Carbon Sink) और एक मूल्यवान जलवायु विनियमन संपत्ति के रूप में उजागर किया है।

मैंग्रोव और उनकी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ क्या हैं?

  • मैंग्रोव उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के तटीय खारे पानी में उगने वाले झाड़ियों और पेड़ों का एक समूह है। ये अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र समुद्री और स्थलीय वातावरण के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाते हैं।
  • ये तटीय क्षेत्रों को चक्रवातों, सुनामी और कटाव से बचाकर प्राकृतिक बाधा के रूप में कार्य करते हैं, जिससे तटीय समुदायों और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा होती है।
  • मैंग्रोव कई समुद्री प्रजातियों के लिए नर्सरी मैदान और आवास प्रदान करते हैं, जिससे मत्स्य पालन उत्पादकता बढ़ती है और तटीय समुदायों के लिए आजीविका सुरक्षित होती है।
  • ये ‘ब्लू कार्बन’ (Blue Carbon) के महत्त्वपूर्ण भंडार हैं, जो वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित और संग्रहीत करते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद मिलती है।
  • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र पोषक तत्वों के चक्रण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जल की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों के लिए आवास प्रदान करके जैव-विविधता का समर्थन करते हैं।
  • ये पारिस्थितिकी तंत्र स्थानीय समुदायों के लिए लकड़ी, ईंधन और औषधीय पौधों जैसे प्रावधान सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
  • मैंग्रोव क्षेत्र पर्यटन और मनोरंजन के अवसर भी प्रदान करते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होता है।
  • पिचावरम मैंग्रोव वन तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में स्थित है और भारत के सबसे बड़े मैंग्रोव वनों में से एक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ मैंग्रोव विभिन्न प्रकार की प्रावधानिक (provisioning), नियामक (regulating), सहायक (supporting) और सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करते हैं।
तटीय सुरक्षा ये तटीय क्षेत्रों को तूफानों, सुनामी और समुद्र के स्तर में वृद्धि से बचाते हैं।
जैव विविधता संरक्षण मैंग्रोव कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं, जिनमें मछली, केकड़े और झींगे शामिल हैं।
ब्लू कार्बन पृथक्करण ये कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित और संग्रहीत करके जलवायु विनियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसे ‘ब्लू कार्बन’ कहा जाता है।
आजीविका सुरक्षा तटीय समुदायों के लिए मत्स्य पालन और पर्यटन के माध्यम से आजीविका के अवसर प्रदान करते हैं।

महत्व

पारिस्थितिकीय महत्व

  • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र भारत में सबसे महत्वपूर्ण तटीय आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं, जो जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • ये समुद्री जीवों के लिए प्रजनन और नर्सरी स्थल प्रदान करते हैं, जिससे मत्स्य उत्पादकता बढ़ती है।
  • मैंग्रोव ऑक्सीजन विनियमन और पोषक तत्व चक्रण में योगदान करते हैं, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

आर्थिक महत्व

  • पिचावरम मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का कुल आर्थिक मूल्य (Total Economic Value – TEV) ₹2,485.38 करोड़ अनुमानित किया गया है, जो इसके बहुआयामी लाभों को दर्शाता है।
  • यह तटीय समुदायों के लिए मत्स्य पालन, केकड़ा पालन और झींगा पालन के माध्यम से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्रदान करता है।
  • मैंग्रोव पर्यटन और मनोरंजन के माध्यम से महत्वपूर्ण राजस्व उत्पन्न करते हैं, जैसा कि पिचावरम के मामले में ₹484.25 करोड़ का मूल्य दर्शाता है।

जलवायु परिवर्तन शमन

  • मैंग्रोव महत्वपूर्ण प्राकृतिक कार्बन सिंक (carbon sink) के रूप में कार्य करते हैं, जो बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित और संग्रहीत करते हैं (ब्लू कार्बन)।
  • इनका कार्बन स्टॉक मूल्य (वनस्पति और मृदा कार्बन) जलवायु विनियमन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।
  • समुद्र के स्तर में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मैंग्रोव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का अवमूल्यन

  • मैंग्रोव की कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ गैर-बाजार प्रकृति की होती हैं, जिससे पारंपरिक विकास योजना में उनका मूल्य कम आंका जाता है।
  • इनके कई पारिस्थितिकीय लाभों को बाजार लेनदेन में परिलक्षित नहीं किया जाता है, जिससे उनके संरक्षण के लिए निवेश कम होता है।

2. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • समुद्र के स्तर में वृद्धि मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे उनके अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, जैसे चरम मौसमी घटनाएँ, मैंग्रोव वनों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

3. जैव विविधता का नुकसान

  • IUCN के अनुसार, विश्व के 50% मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र पतन के जोखिम में हैं, जिससे वैश्विक जैव विविधता को खतरा है।
  • मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण मैंग्रोव आवासों का क्षरण हो रहा है, जिससे कई प्रजातियाँ प्रभावित हो रही हैं।

4. माइक्रोप्लास्टिक संदूषण

  • मैंग्रोव मछली में माइक्रोप्लास्टिक संदूषण की उच्च दर पाई गई है, जो खाद्य श्रृंखला और मानव स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।
  • यह प्रदूषण मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्वास्थ्य और उसकी सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का अवमूल्यन विकास योजनाओं में मैंग्रोव के गैर-बाजार लाभों की अनदेखी।
समुद्र के स्तर में वृद्धि मैंग्रोव आवासों का डूबना और उनके कार्य में बाधा।
जैव विविधता हानि मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों का पतन और प्रजातियों का विलुप्त होना।
माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण खाद्य श्रृंखला में प्रवेश और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव।
तटीय विकास दबाव शहरीकरण, कृषि और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण मैंग्रोव क्षेत्रों का अतिक्रमण।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मैंग्रोव पहल के लिए मिष्टी योजना (MISHTI Scheme for Mangrove Initiative)

आगे की राह

  • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों के आर्थिक मूल्यांकन को विकास योजना में एकीकृत करना।
  • मैंग्रोव संरक्षण और बहाली परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाना।
  • समुद्र के स्तर में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए अनुकूलन रणनीतियाँ विकसित करना।
  • मैंग्रोव-निर्भर समुदायों को स्थायी आजीविका विकल्पों के साथ सशक्त बनाना।
  • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों में माइक्रोप्लास्टिक संदूषण को कम करने के लिए उपाय करना।
  • मैंग्रोव के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  • मैंग्रोव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र · पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ · कुल आर्थिक मूल्य (TEV) · नीला कार्बन · तटीय संरक्षण · जैव विविधता संरक्षण · जलवायु विनियमन · आजीविका सुरक्षा · सतत विकास · रामसर स्थल · पर्यावरण मूल्यांकन · जलवायु परिवर्तन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन
  • अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार

अवधारणा प्रवाह

मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का अस्तित्व  →  पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का प्रावधान (तटीय सुरक्षा, कार्बन पृथक्करण)  →  आर्थिक मूल्य का सृजन (मत्स्य पालन, पर्यटन)  →  मानव कल्याण और पारिस्थितिकीय स्थिरता में योगदान  →  जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से खतरा  →  संरक्षण और सतत प्रबंधन की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
2. पिचावरम मैंग्रोव वन भारत के सबसे महत्वपूर्ण तटीय आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है।
3. मैंग्रोव ‘नीले कार्बन’ के महत्वपूर्ण भंडार के रूप में कार्य करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि मैंग्रोव उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय दोनों क्षेत्रों में पाए जाते हैं। कथन 2 सही है, पिचावरम मैंग्रोव भारत के महत्वपूर्ण तटीय आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है। कथन 3 सही है, मैंग्रोव नीले कार्बन के महत्वपूर्ण सिंक हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित और संग्रहीत करते हैं।

Q2. मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली ‘पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं’ (Ecosystem Services) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्य शामिल है/हैं?
1. तटीय सुरक्षा
2. मछली पकड़ने की उत्पादकता
3. पोषक तत्व चक्रण
4. ऑक्सीजन विनियमन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र तटीय सुरक्षा, मछली पकड़ने की उत्पादकता, पोषक तत्व चक्रण और ऑक्सीजन विनियमन सहित कई महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करते हैं। ये सभी कार्य मैंग्रोव के पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का हिस्सा हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों के ‘कुल आर्थिक मूल्य’ (Total Economic Value – TEV) का मूल्यांकन क्यों महत्वपूर्ण है? भारत में मैंग्रोव संरक्षण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों का संक्षिप्त परिचय और उनके महत्व पर प्रकाश डालें।
2. कुल आर्थिक मूल्य (TEV) का महत्व: बताएं कि TEV का मूल्यांकन क्यों आवश्यक है, जिसमें गैर-बाजार लाभों को शामिल करना, नीति निर्माण में सहायता, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना और सतत विकास को बढ़ावा देना शामिल है। पिचावरम मैंग्रोव अध्ययन के निष्कर्षों का उल्लेख करें।
3. भारत में मैंग्रोव संरक्षण के लिए सरकारी पहलें: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे अप्रत्यक्ष प्रयासों के साथ-साथ सीधे मैंग्रोव संरक्षण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों का उल्लेख करें। उदाहरण के लिए, ‘मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम्स’ (MISHTI) योजना, राष्ट्रीय तटीय मिशन कार्यक्रम, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचनाएँ, आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017।
4. चुनौतियाँ: मैंग्रोव संरक्षण में आने वाली चुनौतियों पर संक्षिप्त चर्चा करें (जैसे शहरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन)।
5. निष्कर्ष: मैंग्रोव संरक्षण के महत्व और सतत विकास के लिए उनके बहुआयामी योगदान को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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