पीएमएवाई-जी: 3.11 करोड़ घर पूरे, 1.06 करोड़ शेष लक्ष्य

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की प्रगति — concept mind map

पीएमएवाई-जी: 3.11 करोड़ घर पूरे, 1.06 करोड़ शेष लक्ष्य

✎ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) का लक्ष्य 2029 तक ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण के…

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पीएमएवाई-जी कार्यान्वयन प्रक्रिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास
  • Prelims: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), मनरेगा, जल जीवन मिशन (जेजेएम), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), ग्रामीण विकास मंत्रालय, आवास का अधिकार
  • Essay: समावेशी विकास के लिए सरकारी योजनाओं का अभिसरण, ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) का लक्ष्य 2029 तक ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से एक समग्र विकास मॉडल प्रस्तुत करती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की प्रगति पर नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक 2025-26 के लिए 33.54 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं और कुल 35.54 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। योजना के तहत कुल 4.18 करोड़ आवासों का संचयी लक्ष्य आवंटित किया गया है, जिसमें से 3.92 करोड़ स्वीकृत और 3.11 करोड़ पूर्ण हो चुके हैं। सरकार ने शेष 1.06 करोड़ आवासों के निर्माण में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे यह योजना एक बार फिर चर्चा में है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण आवास की समस्या एक दीर्घकालिक चुनौती रही है, जहाँ बड़ी संख्या में परिवार कच्चे या जीर्ण-शीर्ण घरों में रहते हैं।
  • स्वतंत्रता के बाद से विभिन्न सरकारों ने ग्रामीण आवास प्रदान करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) प्रमुख थी।
  • आईएवाई को अप्रैल 2016 में पुनर्गठित करके प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के रूप में लॉन्च किया गया, जिसका उद्देश्य ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को प्राप्त करना था।
  • यह योजना न केवल आवास निर्माण पर केंद्रित है, बल्कि स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली और एलपीजी कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ एक समग्र आवास समाधान प्रदान करने पर भी जोर देती है।
  • योजना का कार्यान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से किया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार वित्तीय सहायता और निगरानी प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) क्या है?

  • पीएमएवाई-जी ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है, जिसे 1 अप्रैल 2016 को इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) के पुनर्गठन के रूप में लॉन्च किया गया था।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य 2029 तक सभी बेघर परिवारों और कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराना है।
  • योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पूर्वोत्तर राज्यों, दो पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड) तथा जम्मू और कश्मीर व लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • यह योजना एक अभिसरण (Convergence) दृष्टिकोण अपनाती है, जिसके तहत लाभार्थियों को अन्य सरकारी योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) से शौचालय के लिए ₹12,000, मनरेगा से अकुशल मजदूरी, जल जीवन मिशन से नल से जल, और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) से एलपीजी कनेक्शन का लाभ मिलता है।
  • लाभार्थियों का चयन सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है, जिसमें ग्राम सभा द्वारा सत्यापन किया जाता है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
  • योजना महिला सशक्तिकरण पर भी जोर देती है, जिसमें लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ा जाता है।
  • योजना के कार्यान्वयन में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और केंद्र सरकार नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करती है तथा कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करती है।
  • पीएमएवाई-जी के चरण-2 की स्वीकृत अवधि मार्च 2029 तक है, जिसमें अतिरिक्त 2 करोड़ आवासों को पूर्ण करने का लक्ष्य है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वित्तीय सहायता मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1.30 लाख की इकाई सहायता, जो आवास निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
अभिसरण दृष्टिकोण शौचालय, पेयजल, बिजली और LPG कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं को अन्य योजनाओं (जैसे SBM-G, JJM, PMUY) के साथ जोड़कर समग्र विकास सुनिश्चित करना।
रोजगार सृजन मनरेगा के तहत अकुशल मजदूरी रोजगार प्रदान करके लाभार्थियों को आवास निर्माण में सहायता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
महिला सशक्तिकरण लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
चरण-2 का विस्तार मार्च 2029 तक अतिरिक्त 2 करोड़ आवासों को पूरा करने का लक्ष्य, जो ‘सभी के लिए आवास’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह योजना ग्रामीण गरीबों को सुरक्षित और गरिमापूर्ण आवास प्रदान करके सामाजिक समानता और न्याय को बढ़ावा देती है।
  • बुनियादी सुविधाओं (शौचालय, पेयजल, बिजली) के साथ आवास प्रदान करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती है और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता मानकों को बढ़ाती है।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ाव के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आर्थिक महत्व

  • आवास निर्माण गतिविधि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करती है, विशेषकर मनरेगा के अभिसरण के माध्यम से।
  • यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है और भवन निर्माण सामग्री उद्योग को प्रोत्साहन देती है।
  • गरीब परिवारों के लिए संपत्ति निर्माण का अवसर प्रदान करती है, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण है, जहां राज्य कार्यान्वयन में प्राथमिक भूमिका निभाते हैं।
  • विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं के बीच अभिसरण दृष्टिकोण सरकारी कार्यक्रमों की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाता है।
  • डैशबोर्ड निगरानी और नियमित समीक्षा के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।

चुनौतियाँ

1. लाभार्थियों की अनिच्छा/पलायन

  • कुछ लाभार्थी आवास निर्माण में रुचि नहीं दिखाते या स्थायी रूप से पलायन कर जाते हैं, जिससे परियोजना में देरी होती है।
  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों की कमी और शहरीकरण की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

2. भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में देरी

  • राज्य सरकारों द्वारा भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि उपलब्ध कराने में विलंब एक बड़ी बाधा है।
  • यह भूमि सुधारों और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की धीमी गति से संबंधित है।

3. मृतक लाभार्थियों का विवादित उत्तराधिकार

  • लाभार्थी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार संबंधी विवादों के कारण आवास निर्माण रुक जाता है।
  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता को उजागर करता है।

4. भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता

  • दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में या विशेष मौसमों में भवन निर्माण सामग्री की कमी या उच्च लागत एक चुनौती है।
  • यह आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और स्थानीय सामग्री उपलब्धता के मुद्दों से संबंधित है।

5. राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा रिपोर्टिंग में देरी

  • IFMIS से क्रेडिट पुष्टिकरण के अद्यतन में देरी और रिपोर्टिंग तंत्र में अक्षमता से प्रगति की निगरानी प्रभावित होती है।
  • यह ई-गवर्नेंस और डेटा प्रबंधन की चुनौतियों को दर्शाता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
लक्ष्यों के सापेक्ष लंबित आवास कुल 4.18 करोड़ आवंटित लक्ष्यों में से 1.06 करोड़ आवास अभी भी पूरे होने बाकी हैं, जो ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा है।
झारखंड में धीमी प्रगति झारखंड में स्वीकृत 1.48 लाख आवासों में से केवल 0.68 लाख ही पूरे हुए हैं, जो राज्य-विशिष्ट कार्यान्वयन चुनौतियों को दर्शाता है।
लाभार्थी-केंद्रित बाधाएँ लाभार्थियों की अनिच्छा, स्थायी प्रवास और मृतक लाभार्थियों के विवादित उत्तराधिकार जैसे मुद्दे व्यक्तिगत स्तर पर योजना की प्रगति को बाधित करते हैं।
प्रशासनिक और प्रणालीगत बाधाएँ भूमि आवंटन में देरी, IFMIS अद्यतन में विलंब और चुनाव के कारण कार्यान्वयन में रुकावटें प्रशासनिक अक्षमताओं को दर्शाती हैं।
संसाधन और आपूर्ति संबंधी मुद्दे भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता और लागत में उतार-चढ़ाव परियोजना की समय-सीमा और बजट को प्रभावित कर सकते हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G)
  • स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G)
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
  • जल जीवन मिशन (JJM)
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)

आगे की राह

  • राज्य सरकारों द्वारा भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और इसके लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए।
  • मृतक लाभार्थियों के उत्तराधिकार संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित कानूनी और प्रशासनिक तंत्र स्थापित किया जाए।
  • लाभार्थियों की अनिच्छा और पलायन के कारणों का विश्लेषण कर उन्हें योजना में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने हेतु जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • भवन निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने और लागत को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाए।
  • राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा प्रगति रिपोर्टिंग और IFMIS अद्यतन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और स्वचालित किया जाए ताकि वास्तविक समय की निगरानी संभव हो सके।
  • ग्रामीण मिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर कुशल श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
  • योजना के अभिसरण घटकों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि लाभार्थियों को सभी संबद्ध सुविधाओं का लाभ मिल सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण · आवास का अधिकार · ग्रामीण विकास · अभिसरण मॉडल · बहु-आयामी गरीबी · सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण · कल्याणकारी योजनाएँ · लक्ष्य-आधारित कार्यान्वयन · राज्यों की भूमिका · स्थानीय चुनौतियाँ

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।
  • अनुच्छेद 46: राज्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देगा।
  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं को लागू करने की शक्ति।

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण आवास की आवश्यकता की पहचान  →  प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) का शुभारंभ  →  लाभार्थियों का चयन और आवासों की स्वीकृति  →  वित्तीय सहायता और अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण  →  आवासों का निर्माण और सुविधाओं का प्रावधान  →  योजना की प्रगति की निगरानी और चुनौतियों का समाधान  →  ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर परिवारों और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है।
2. इस योजना के तहत, मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
3. पीएमएवाई-जी के लाभार्थियों को स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के तहत शौचालय निर्माण के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता नहीं मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि पीएमएवाई-जी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि मैदानी क्षेत्रों और पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वित्तीय सहायता की राशि क्रमशः ₹1.20 लाख और ₹1.30 लाख निर्धारित है। कथन 3 गलत है क्योंकि पीएमएवाई-जी के तहत लाभार्थियों को स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के साथ अभिसरण के माध्यम से शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

Q2. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के कार्यान्वयन में देरी के संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं:
1. लाभार्थियों द्वारा अनिच्छा या स्थायी प्रवास।
2. भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में देरी।
3. आम/विधानसभा/पंचायत चुनावों के कारण।
4. भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता।
उपर्युक्त में से कौन से कारण सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए समाचार के अनुसार, पीएमएवाई-जी के पूर्ण होने में विलंब के प्रमुख कारणों में लाभार्थियों द्वारा अनिच्छा जताने के मामले, स्थायी प्रवास, मृतक लाभार्थियों का विवादित उत्तराधिकार, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में विलंब, राज्य IFMIS से क्रेडिट पुष्टिकरण के अद्यतनीकरण में विलंब और समय-समय पर आम/विधानसभा/पंचायत चुनाव तथा भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता शामिल हैं। अतः सभी चार कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) एक बहु-आयामी दृष्टिकोण के माध्यम से ग्रामीण आवास की समस्या का समाधान करती है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों तथा उनके समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पीएमएवाई-जी का संक्षिप्त परिचय, इसके लक्ष्य और ग्रामीण आवास में इसकी भूमिका।
2. **बहु-आयामी दृष्टिकोण का परीक्षण:**
* **वित्तीय सहायता:** मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए निर्धारित इकाई सहायता (₹1.20 लाख/₹1.30 लाख)।
* **अभिसरण मॉडल:** विभिन्न योजनाओं के साथ तालमेल का उल्लेख करें:
* स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000)।
* मनरेगा (अकुशल मजदूरी रोजगार)।
* जल जीवन मिशन/हर घर नल से जल (नल से पेयजल)।
* विद्युत मंत्रालय की योजनाएं (बिजली कनेक्शन)।
* प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (एलपीजी कनेक्शन)।
* स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से महिला सदस्यों को जोड़ना (सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण)।
* **लाभार्थी केंद्रित दृष्टिकोण:** लक्षित समूहों (बेघर, कच्चे मकानों में रहने वाले) पर ध्यान।
3. **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:**
* लाभार्थियों की अनिच्छा/स्थायी प्रवास।
* मृतक लाभार्थियों का विवादित उत्तराधिकार।
* भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में विलंब।
* राज्य IFMIS से क्रेडिट पुष्टिकरण में देरी।
* चुनावों के कारण विलंब।
* भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता।
4. **समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम:**
* लक्ष्यों का समयबद्ध आवंटन और पर्याप्त निधि जारी करना।
* प्रगति की नियमित समीक्षा और डैशबोर्ड पर निगरानी।
* राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ नियमित कार्यशालाएं।
* ग्रामीण मिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम।
* लंबित आवासों के निर्माण में तेजी लाने के लिए विशेष प्रयास।
5. **निष्कर्ष:** योजना की समग्र सफलता, शेष चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता और ग्रामीण विकास में इसके दीर्घकालिक प्रभाव पर एक संतुलित दृष्टिकोण।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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