पीएम-एसईटीयू योजना: आईटीआई उन्नयन से कौशल विकास में क्रांतिकारी बदलाव

पीएम-एसईटीयू योजना: आईटीआई उन्नयन से कौशल विकास में क्रांतिकारी बदलाव

Map of Andhra Pradesh, Gujarat, Odisha, Telangana highlighted on the map of India — PM-SEETU scheme UPSCMind map of PM-SETu Scheme concept mind map — PM-SEETU scheme UPSC

मानचित्र व माइंड-मैप: PM-SEETU: Upgraded ITIs across India

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, मानव संसाधन  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास, रोजगार
  • Prelims: पीएम-एसईटीयू योजना, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई), हब एवं स्पोक मॉडल, राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी), राज्य संचालन समिति (एसएससी)
  • Essay: कौशल भारत: जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना, भारत में रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि

त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-एसईटीयू योजना का लक्ष्य उन्नत प्रयोगशालाओं, आधुनिक मशीनों और उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से आईटीआई और एनएसटीआई का उन्नयन करके भारत में व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना के तहत की गई प्रगति की जानकारी साझा की है। इस योजना का उद्देश्य देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता और प्रासंगिकता को सुदृढ़ करना है, जिसमें उन्नत प्रयोगशालाओं, आधुनिक मशीनों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से आईटीआई का उन्नयन शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कौशल विकास एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, विशेषकर युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने के लिए।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) भारत में व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थान हैं, जो विभिन्न शिल्पों में कुशल कार्यबल तैयार करते हैं।
  • वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य में तेजी से बदलते तकनीकी विकास और उद्योग की मांगों के कारण पारंपरिक प्रशिक्षण विधियों और पाठ्यक्रमों में आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस की गई है।
  • सरकार ने ‘स्किल इंडिया’ मिशन के तहत विभिन्न पहलों की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करना है।
  • प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और संस्थानों के आधुनिकीकरण के बिना कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।
  • कोविड-19 महामारी के बाद से रोजगार के पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे नए और उभरते क्षेत्रों में कौशल की मांग बढ़ी है।

पीएम-एसईटीयू योजना क्या है?

  • प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना का उद्देश्य देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाना है।
  • यह योजना औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) में प्रशिक्षण प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार पर केंद्रित है।
  • योजना के तहत उद्योग मानकों के अनुरूप अवसंरचना और उपकरणों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसमें स्मार्ट कक्षाएं और आधुनिक प्रयोगशालाएं शामिल हैं।
  • यह विशेष रूप से नवोन्मेषी एवं उभरते क्षेत्रों में उद्योग-अनुरूप दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रम शुरू करने पर जोर देती है।
  • मांग-आधारित कौशल विकास और बेहतर रोजगार परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों के साथ संपर्क को मजबूत करना योजना का एक प्रमुख उद्देश्य है।
  • योजना में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु एनएसटीआई की क्षमता में वृद्धि करना भी शामिल है, जिसमें वैश्विक सहभागिता के साथ क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
  • इसके दो प्रमुख घटक हैं: घटक-I में 1,000 राजकीय आईटीआई (200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई) का हब एवं स्पोक मॉडल के अंतर्गत उन्नयन शामिल है; घटक-II में भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर एवं लुधियाना स्थित पाँच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) की क्षमता में वृद्धि शामिल है।
  • योजना के कार्यान्वयन का मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा उद्योग भागीदारों के प्रतिनिधियों से गठित राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) और राज्य स्तर पर राज्य संचालन समितियों (एसएससी) द्वारा किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आईटीआई और एनएसटीआई का उन्नयन व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में सुधार
उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम नवोन्मेषी और उभरते क्षेत्रों में कौशल विकास
हब एवं स्पोक मॉडल 1,000 राजकीय आईटीआई (200 हब, 800 स्पोक) का उन्नयन
राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण और वैश्विक सहभागिता को बढ़ावा
उद्योग-संचालित विशेष प्रयोजन साधन (SVP) स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम पुनर्रचना
राज्य संचालन समितियाँ (SSC) राज्य स्तर पर योजना के कार्यान्वयन का मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण

महत्व

आर्थिक महत्व

  • बेहतर कौशल से रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कार्यबल की उपलब्धता से उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
  • उद्यमिता (Entrepreneurship) को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे नए व्यवसायों का सृजन होगा।

सामाजिक महत्व

  • युवाओं को गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) बढ़ेगा।
  • कौशल अंतर को कम करके आय असमानता को दूर करने में मदद मिलेगी।
  • महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

रणनीतिक महत्व

  • भारत को वैश्विक कौशल केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
  • उद्योग 4.0 (Industry 4.0) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए कुशल कार्यबल तैयार होगा।
  • आत्मनिर्भर भारत (Self-Reliant India) के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

चुनौतियाँ

1. गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों की कमी

  • आधुनिक तकनीकों और उद्योग मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
  • प्रशिक्षकों के लिए नियमित पुनश्चर्या प्रशिक्षण (Refresher Training) और कौशल उन्नयन की आवश्यकता है।

2. उद्योग-संस्थान अंतर

  • उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं और प्रशिक्षण संस्थानों में प्रदान किए जा रहे कौशल के बीच अंतर को पाटना।
  • उद्योग के साथ प्रभावी जुड़ाव और पाठ्यक्रम को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता।

3. अवसंरचना और उपकरण आधुनिकीकरण

  • कई आईटीआई में पुरानी मशीनरी और अपर्याप्त अवसंरचना एक बाधा है।
  • आधुनिक प्रयोगशालाओं और स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना के लिए पर्याप्त वित्तपोषण और रखरखाव सुनिश्चित करना।

4. निगरानी और मूल्यांकन

  • योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और परिणामों की निरंतर निगरानी तथा मूल्यांकन तंत्र को मजबूत करना।
  • तृतीय पक्ष प्रभाव आकलन (Third Party Impact Assessment) की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रशिक्षण प्रदायगी में एकरूपता और उद्योग मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
रोजगार योग्यता प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षुओं के लिए बेहतर रोजगार परिणामों की गारंटी।
तकनीकी उन्नयन तेजी से बदलते औद्योगिक परिदृश्य के साथ तालमेल बिठाने के लिए उपकरणों और पाठ्यक्रमों का निरंतर आधुनिकीकरण।
राज्य-उद्योग समन्वय राज्यों और उद्योग भागीदारों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करना।
वित्तपोषण और स्थिरता योजना के लिए पर्याप्त और दीर्घकालिक वित्तपोषण तथा संस्थानों की वित्तीय स्थिरता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (Craftsmen Training Scheme)

आगे की राह

  • उद्योग और शिक्षाविदों के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित की जाए ताकि पाठ्यक्रम को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन किया जा सके।
  • प्रशिक्षकों के लिए नियमित और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें नई तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों को शामिल किया जाए।
  • आईटीआई और एनएसटीआई में अत्याधुनिक अवसंरचना और उपकरणों के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन और कुशल रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
  • प्रशिक्षुओं के लिए ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण (On-the-Job Training) और इंटर्नशिप (Internship) के अवसरों को बढ़ाया जाए ताकि उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
  • योजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें नियमित प्रभाव आकलन शामिल हो।
  • स्थानीय उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल मानचित्रण (Skill Mapping) किया जाए और तदनुसार विशिष्ट पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं।
  • प्रशिक्षुओं के लिए करियर परामर्श (Career Counselling) और प्लेसमेंट सहायता (Placement Assistance) सेवाओं को मजबूत किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कौशल विकास · रोजगार योग्यता · औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) · राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) · उद्योग-अकादमिक सहयोग · हब एवं स्पोक मॉडल · प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण · उभरते क्षेत्र · कौशल भारत मिशन · आत्मनिर्भर भारत

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}

अवधारणा प्रवाह

उद्योग की बदलती आवश्यकताएँ  →  कौशल अंतर की पहचान  →  पीएम-सेतु योजना का शुभारंभ  →  आईटीआई/एनएसटीआई का उन्नयन और पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण  →  कुशल कार्यबल का निर्माण  →  बेहतर रोजगार और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का उद्देश्य देश में उन्नत प्रयोगशालाओं और आधुनिक मशीनों के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना है।
2. यह योजना केवल राजकीय ITI के उन्नयन पर केंद्रित है, निजी ITI इसमें शामिल नहीं हैं।
3. योजना के अंतर्गत प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) की क्षमता में वृद्धि का प्रावधान है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत प्रयोगशालाओं, आधुनिक मशीनों और उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को मजबूत करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना में राजकीय ITI के उन्नयन का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से निजी ITI को बाहर नहीं करता है, बल्कि ‘ITI’ का व्यापक संदर्भ देता है। हालांकि, घटक-I में ‘1,000 राजकीय आईटीआई’ का उल्लेख है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना के उद्देश्यों में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु NSTI की क्षमता में वृद्धि करना शामिल है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से पीएम-एसईटीयू योजना का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) में प्रशिक्षण प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार करना।
2. विशेष रूप से नवोन्मेषी एवं उभरते क्षेत्रों में उद्योग-अनुरूप दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रम शुरू करना।
3. मांग-आधारित कौशल विकास सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों के साथ संपर्क को मजबूत करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए तीनों कथन पीएम-एसईटीयू योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं। योजना का लक्ष्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना, उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम शुरू करना और उद्योग के साथ संपर्क मजबूत करना है ताकि बेहतर रोजगार परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना का उद्देश्य भारत में व्यावसायिक प्रशिक्षण परिदृश्य को कैसे नया आकार देना है? इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** पीएम-एसईटीयू योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके मुख्य लक्ष्य (व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को सुदृढ़ करना) पर प्रकाश डालते हुए।
2. **योजना का उद्देश्य और नया आकार देना:**
* ITI और NSTI में प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार।
* अवसंरचना और उपकरणों का आधुनिकीकरण।
* नवोन्मेषी एवं उभरते क्षेत्रों में उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम।
* उद्योगों के साथ मजबूत संपर्क और मांग-आधारित कौशल विकास।
* प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु NSTI की क्षमता वृद्धि।
* हब एवं स्पोक मॉडल (1000 राजकीय ITI) और NSTI में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र।
3. **राज्य सरकारों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक भूमिका:** ITI का चयन (स्थानीय औद्योगिक क्षमता के अनुरूप), उद्योग भागीदारों के सहयोग से प्रस्ताव प्रस्तुत करना, राज्य संचालन समितियों (SSC) का गठन और अध्यक्षता (मुख्य सचिव), राज्य स्तर पर योजना की प्रगति की निगरानी।
* **चुनौतियाँ/आलोचना:** राज्यों के बीच कार्यान्वयन में असमानता (जैसे 23 राज्यों द्वारा ही प्रस्ताव जारी करना), स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, प्रशासनिक क्षमता और समन्वय की चुनौतियाँ।
4. **उद्योग भागीदारों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक भूमिका:** उद्योग मानकों के अनुरूप अवसंरचना और उपकरण आधुनिकीकरण में परामर्श, उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम डिजाइन, मांग-आधारित कौशल विकास में भागीदारी, एंकर उद्योग भागीदारों (AIP) द्वारा रणनीतिक निवेश योजनाएँ (SIP) प्रस्तुत करना, उद्योग-संचालित विशेष प्रयोजन साधन (SPV) की भूमिका (पाठ्यक्रम पुनर्रचना, प्रशिक्षण मॉडल, व्यावहारिक अनुभव)।
* **चुनौतियाँ/आलोचना:** उद्योग की वास्तविक प्रतिबद्धता और निवेश का स्तर, छोटे और मध्यम उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करना, कौशल अंतराल की पहचान में संभावित पूर्वाग्रह, निरंतर जुड़ाव और निगरानी की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** योजना की क्षमता को रेखांकित करते हुए, प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र, राज्य और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय, निरंतर मूल्यांकन और लचीलेपन की आवश्यकता पर बल देना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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