30 Oct पीएम मोदी कल गुजरात में पीएम-किसान की 24वीं किस्त जारी करेंगे, जानें पूरा विवरण
✎ PM-KISAN प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से किसानों को सीधी आय सहायता देता है, जबकि कृषि अवसंरचना कोष कटाई-उपरांत हानि घटाकर भंडारण, प्रसंस्करण और बाज़ार-संपर्क को सुदृढ़ करता है; दोनों का लक्ष्य किसान की आय बढ़ाना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि विपणन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) | GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य संबंध, कल्याणकारी योजनाएँ, सामाजिक सुरक्षा, लक्षित हस्तांतरण)
- Prelims: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): ₹6,000 वार्षिक, तीन समान किस्तों में, कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund): 2020 में आरंभ, ₹1 लाख करोड़ का corpus, ब्याज सहायता और ऋण गारंटी, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT), मध्यम अवधि में बागवानी विकास: एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पर ड्रॉप मोर क्रॉप: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का सूक्ष्म सिंचाई घटक, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) और भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति, संविधान की सातवीं अनुसूची: कृषि राज्य सूची का विषय (प्रविष्टि 14), अनुच्छेद 48: कृषि एवं पशुपालन को आधुनिक वैज्ञानिक ढंग से संगठित करना (राज्य नीति के निदेशक तत्व)
- Essay: सीधी आय सहायता बनाम अवसंरचना निवेश: किसानों की आय बढ़ाने का उपयुक्त मार्ग क्या है?, कटाई-उपरांत नुकसान में कमी और मूल्य शृंखला का सुदृढ़ीकरण: भारतीय कृषि की संरचनात्मक चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: PM-KISAN प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से किसानों को सीधी आय सहायता देता है, जबकि कृषि अवसंरचना कोष कटाई-उपरांत हानि घटाकर भंडारण, प्रसंस्करण और बाज़ार-संपर्क को सुदृढ़ करता है; दोनों का लक्ष्य किसान की आय बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 24वीं किस्त जारी करेंगे, जिसके तहत 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,690 करोड़ रुपये से अधिक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजे जाएँगे। इसी अवसर पर कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत विकसित 521 भंडारण, प्रसंस्करण और संबंधित इकाइयों का लोकार्पण तथा उच्च-मूल्य वाली बागवानी फसलों के लिए 12 बागवानी क्लस्टरों का उद्घाटन होगा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि नीति अब केवल आय सहायता तक सीमित न रहकर भंडारण, प्रसंस्करण और बाज़ार-संपर्क जैसी अवसंरचना के विकास की ओर बढ़ रही है।
पृष्ठभूमि
- PM-KISAN की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई। इसके अंतर्गत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है। यह केंद्र प्रायोजित पूर्णतः केंद्रीय वित्तपोषित योजना है। अब तक पहली 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं।
- कृषि एक राज्य सूची का विषय है (संविधान की सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 14), इसलिए केंद्र की योजनाएँ प्रायः वित्तीय सहायता, दिशा-निर्देश और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों के साथ मिलकर लागू होती हैं।
- कटाई-उपरांत हानि (Post-harvest Loss) भारत में उत्पादन के बाद की एक प्रमुख समस्या रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि अवसंरचना कोष वर्ष 2020 में आरंभ किया गया, जिसमें गोदाम, शीत भंडारण (Cold Storage), प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और सामुदायिक कृषि संपत्ति जैसी परियोजनाओं के लिए मध्यम-दीर्घकालिक ऋण पर ब्याज सहायता और ऋण गारंटी का प्रावधान है।
- भारत में बागवानी (Horticulture) फसलें खाद्यान्न की तुलना में अधिक मूल्य देती हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (Mission for Integrated Development of Horticulture, MIDH) के अंतर्गत क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- सरकार की अन्य पहलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) शामिल हैं।
पीएम-किसान और कृषि अवसंरचना कोष क्या हैं?
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) एक प्रत्यक्ष आय सहायता योजना है। इसके तहत पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में सीधे राशि अंतरित होती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और लाभार्थियों की पहचान व भुगतान में पारदर्शिता बढ़ती है।
- पात्रता मुख्यतः भूमिधारक किसान परिवारों तक सीमित है। संस्थागत भूमिधारक, संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति, आयकरदाता तथा कुछ अन्य श्रेणियाँ योजना से बाहर रखी गई हैं।
- कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) केंद्र सरकार की मध्यम-दीर्घकालिक वित्तपोषण सुविधा है। इसका उद्देश्य कटाई-उपरांत प्रबंधन की अवसंरचना को सुदृढ़ करना है, ताकि किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
- इस कोष में ब्याज सहायता (Interest Subvention) और क्रेडिट गारंटी का प्रावधान है, जिससे परियोजना-स्तर पर वित्तीय जोखिम घटता है और निजी तथा सहकारी निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।
- पर ड्रॉप मोर क्रॉप (Per Drop More Crop) प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का घटक है, जो सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देकर ‘प्रति बूंद अधिक उपज’ का लक्ष्य रखता है।
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) रासायनिक आदान-मुक्त, स्थानीय संसाधनों पर आधारित कृषि को क्लस्टर विकास के माध्यम से प्रोत्साहित करता है।
- इन योजनाओं का नीतिगत आधार यह है कि आय सहायता (आय-समर्थन) और उत्पादन-पश्चात अवसंरचना (संरचनात्मक सुधार) दोनों मिलकर किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) के माध्यम से राशि | 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,690 करोड़ रुपये से अधिक सीधे अंतरित किए जाएंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका घटती है और लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित होती है। |
| पीएम-किसान (PM-KISAN) की 24वीं किस्त | योजना की पहली 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित हो चुके हैं। यह योजना सीधी आय-सहायता का स्वरूप रखती है, जो उत्पादन से स्वतंत्र है। |
| कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) की 521 इकाइयों का समर्पण | गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र जैसी कटाई-उपरांत सुविधाओं में निवेश से भंडारण क्षमता और मूल्य-संवर्धन बढ़ता है। |
| 12 बागवानी क्लस्टरों का उद्घाटन | उच्च-मूल्य वाली बागवानी फसलों को क्षेत्र-आधारित क्लस्टर के रूप में विकसित करने से उत्पादन, विपणन और आय में विविधता लाने का उद्देश्य पूरा होता है। |
| कृषि अवसंरचना कोष के अंतर्गत 2.28 लाख से अधिक परियोजनाएं | लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये के निवेश से कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी और बाजार तक पहुंच में सुधार की अपेक्षा है। |
| आयोजन स्थल का चयन (बनासकांठा, गुजरात और रायसेन, मध्य प्रदेश) | केंद्र और राज्य स्तर पर सहभागिता दिखाती है कि कृषि एक राज्य-विषय होने के बावजूद केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन सहकारी संघवाद के ढांचे में होता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- प्रत्यक्ष आय-सहायता से ग्रामीण क्रय-शक्ति बढ़ती है, जिससे कृषि और गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों में मांग को सहारा मिलता है।
- कृषि अवसंरचना में निवेश से उपज की बर्बादी घटती है और मूल्य-श्रृंखला (Value Chain) मजबूत होती है, जो आर्थिक संवृद्धि में कृषि के योगदान को बढ़ा सकती है।
- बागवानी जैसी उच्च-मूल्य फसलों पर बल देने से कृषि-सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product – GDP) में उच्च-मूल्य उत्पादों का हिस्सा बढ़ने की संभावना रहती है।
सामाजिक और कल्याणकारी महत्व
- पात्र किसान परिवारों को कृषि और घरेलू खर्चों के लिए नियमित सहायता मिलती है, जिससे आजीविका सुरक्षा को संबल मिलता है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से लाभार्थी की पहचान और भुगतान की पारदर्शिता बढ़ती है।
खाद्य एवं पोषण सुरक्षा से संबंध
- कृषि भंडारण और प्रसंस्करण की मजबूती से खाद्यान्न और बागवानी उपज की हानि घटती है, जिससे खाद्य उपलब्धता और पोषण सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- बागवानी फसलें (फल, सब्जी) पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, इसलिए उनका क्लस्टर-आधारित विकास आहार-विविधता में योगदान दे सकता है।
संघीय और प्रशासनिक महत्व
- केंद्र-प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों के साथ साझेदारी में कृषि-विकास का ढांचा विकसित होता है।
- रायसेन और बनासकांठा जैसे भिन्न कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित करना योजनाओं की राष्ट्रीय पहुंच को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. लाभार्थी पहचान और समावेशन
- भूमि-स्वामित्व के आधार पर पात्रता तय होने से भूमिहीन कृषि-श्रमिक, बटाईदार और किरायेदार किसान अक्सर योजना से बाहर रह जाते हैं।
- भूमि-अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधार-सीडिंग के बावजूद त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड से भुगतान रुक सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; सरकारी योजनाएं और उनका क्रियान्वयन (जीएस-2)
2. कृषि अवसंरचना का उपयोग और रखरखाव
- निर्मित गोदामों और कोल्ड स्टोरेज का वास्तविक उपयोग स्थानीय उत्पादन, परिवहन और बाजार-संपर्क पर निर्भर करता है; कम उपयोग होने पर निवेश का प्रतिफल घटता है।
- परियोजनाओं के संचालन, रखरखाव और ऋण-चुकौती की क्षमता को सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण; भंडारण और विपणन की समस्याएं (जीएस-3)
3. बागवानी क्लस्टरों की बाजार-संबद्धता
- उच्च-मूल्य बागवानी उपज अत्यधिक नाशवान होती है, इसलिए शीत-शृंखला, परिवहन और प्रसंस्करण के बिना मूल्य-लाभ सीमित रहता है।
- मांग के अनुरूप फसल-चयन न होने पर बाजार में मूल्य-उतार-चढ़ाव से किसानों की आय अस्थिर हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन और न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़े मुद्दे (जीएस-3)
4. जोखिम प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन
- सीधी आय-सहायता फसल-हानि के जोखिम का पूर्ण समाधान नहीं करती; मौसमी आपदाओं में बीमा-कवरेज की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने में संक्रमण-लागत किसानों के लिए बाधा बनती है।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव; पर्यावरण और सतत विकास (जीएस-3)
5. राज्य-केंद्र समन्वय
- कृषि राज्य-सूची का विषय होने से योजनाओं के क्रियान्वयन, राज्य-अंश और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में अंतर आ सकता है।
- आंकड़ों के समयबद्ध साझाकरण और शिकायत-निवारण तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध (जीएस-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| लाभार्थी बहिष्करण | भूमिहीन और बटाईदार किसान पात्रता-मानदंड के कारण सहायता से बाहर रह सकते हैं। |
| अवसंरचना का कम उपयोग | गोदाम और कोल्ड स्टोरेज का पर्याप्त उपयोग न होने से निवेश का प्रतिफल घट सकता है। |
| उपज की नाशवानता | बागवानी उपज के लिए शीत-शृंखला और परिवहन के अभाव में मूल्य-लाभ सीमित रहता है। |
| बाजार-मूल्य जोखिम | मांग-आपूर्ति के असंतुलन से क्लस्टर-आधारित उपज के दाम अस्थिर हो सकते हैं। |
| जलवायु जोखिम | मौसमी आपदाएं फसल-हानि करती हैं, जिसकी भरपाई केवल नकद सहायता से पूरी नहीं होती। |
| केंद्र-राज्य समन्वय | राज्य-विषय होने के कारण क्रियान्वयन में एकरूपता और समयबद्धता चुनौतीपूर्ण रहती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
- कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana – PMFBY)
आगे की राह
- लाभार्थी-सूची के नियमित सामाजिक अंकेक्षण और शिकायत-निवारण तंत्र से बहिष्करण की समस्या को कम करना चाहिए।
- भूमिहीन कृषि-श्रमिकों और बटाईदार किसानों की पहचान के लिए समावेशी और अद्यतन रिकॉर्ड-प्रणाली विकसित करनी चाहिए।
- कृषि अवसंरचना कोष की परियोजनाओं के उपयोग-दर, रखरखाव और ऋण-चुकौती की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
- बागवानी क्लस्टरों को शीत-शृंखला, परिवहन और प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़कर मूल्य-श्रृंखला को पूरा करना चाहिए।
- उत्पादन से पूर्व बाजार-मांग का आकलन कर फसल-चयन में सहायता देनी चाहिए, ताकि मूल्य-जोखिम घटे।
- फसल बीमा कवरेज और आय-सहायता को जलवायु-अनुकूल पद्धतियों के साथ जोड़कर जोखिम-प्रबंधन को सुदृढ़ करना चाहिए।
- केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय-बैठकों और साझा डिजिटल डैशबोर्ड से क्रियान्वयन में एकरूपता लानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT) · कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund, AIF) · कटाई-उपरांत प्रबंधन · उच्च-मूल्य बागवानी · न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price, MSP) · आय सहायता बनाम मूल्य समर्थन · प्राकृतिक खेती · कृषि ऋण और ब्याज अनुदान · राज्य सूची की प्रविष्टि 14 (कृषि) · राज्य और संघ की साझी भूमिका · खाद्य और पोषण सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 282: केंद्र द्वारा राज्यों को सार्वजनिक उद्देश्य हेतु अनुदान
- सातवीं अनुसूची, राज्य-सूची की प्रविष्टि 14: कृषि राज्य-विषय है
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार ने पीएम-किसान की 24वीं किस्त जारी करने का निर्णय लिया। → प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 9.34 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के खातों में राशि अंतरित होती है। → आय-सहायता से किसानों की कृषि और घरेलू खर्च की क्षमता बढ़ती है और आजीविका-सुरक्षा मजबूत होती है। → कृषि अवसंरचना कोष के तहत 521 इकाइयों के समर्पण से भंडारण, प्रसंस्करण और कटाई-उपरांत प्रबंधन की क्षमता बढ़ती है। → 12 बागवानी क्लस्टरों से उच्च-मूल्य फसलों का उत्पादन और विपणन संगठित होता है। → बेहतर भंडारण और बाजार-संपर्क से कटाई-उपरांत नुकसान घटता है और उपज का प्रतिफल बढ़ता है। → इन सभी उपायों का अंतिम परिणाम किसानों की आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता तथा सतत विकास के रूप में अपेक्षित है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की आय सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है।
2. इस योजना की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
3. कृषि संघ सूची (Union List) का विषय है, इसलिए इससे संबंधित सभी योजनाएँ केवल संसद द्वारा बनाए गए कानून से चलती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। PM-KISAN में प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में दी जाती है और राशि DBT से जाती है। कथन 3 गलत है, क्योंकि कृषि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 14) का विषय है; संघ की भूमिका मुख्यतः वित्तीय सहायता और केंद्र प्रायोजित/केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के माध्यम से होती है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के अंतर्गत गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र जैसी परियोजनाओं के लिए ऋण पर ब्याज अनुदान (Interest Subvention) और ऋण गारंटी की सुविधा दी जाती है।
कारण (R): कटाई-उपरांत भंडारण की अवसंरचना में भारी पूँजी लागत और लंबी अवधि की वापसी होती है, जिसके कारण मध्यम अवधि का सस्ता ऋण इसके विकास के लिए आवश्यक होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — AIF एक वित्तपोषण सुविधा है, जिसमें ब्याज अनुदान और ऋण गारंटी दी जाती है। कटाई-उपरांत अवसंरचना की उच्च पूँजी लागत और लंबी वापसी अवधि ही इस सहायता की आवश्यकता का कारण है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची I (योजना/मिशन/कोष)
A. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
B. कृषि अवसंरचना कोष
C. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन
D. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
सूची II (मुख्य विशेषता)
1. क्लस्टर-आधारित टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन
2. फसल-हानि के विरुद्ध जोखिम सुरक्षा
3. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से आय सहायता
4. कटाई-उपरांत अवसंरचना के लिए ब्याज अनुदान और ऋण गारंटी
सही कूट चुनिए:
- A-3, B-4, C-1, D-2
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-4, B-3, C-2, D-1
- A-3, B-1, C-4, D-2
उत्तर: A-3, B-4, C-1, D-2 — PM-KISAN प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से आय सहायता देती है (A-3)। AIF ब्याज अनुदान और ऋण गारंटी से कटाई-उपरांत अवसंरचना को बढ़ाता है (B-4)। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन क्लस्टर-आधारित टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है (C-1)। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना फसल-हानि से जोखिम सुरक्षा देती है (D-2)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृषि-समर्थन के दो मॉडल साथ-साथ चल रहे हैं: प्रत्यक्ष आय सहायता और अवसंरचना-आधारित निवेश। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और कृषि अवसंरचना कोष के संदर्भ में इन दोनों मॉडलों की समीक्षात्मक जाँच कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या इनमें से कोई एक मॉडल किसानों की दीर्घकालिक आय-वृद्धि के लिए पर्याप्त है, और यदि नहीं, तो नीति को किस दिशा में संतुलित किया जाना चाहिए। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. संवैधानिक आधार: कृषि सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 14 का विषय है; अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर और जन-स्वास्थ्य का दायित्व) और अनुच्छेद 48 (कृषि और पशुपालन का आधुनिक ढंग से संगठन) राज्य के नीति-निदेशक तत्व हैं; केंद्र की भूमिका अनुच्छेद 282 के अंतर्गत अनुदान और केंद्र प्रायोजित/केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के माध्यम से है। संघवाद की दृष्टि से यह सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण है।
2. PM-KISAN: 2019 में शुरू, प्रति वर्ष 6,000 रुपये तीन किस्तों में, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से; अब तक 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित (प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार)। गुण: तात्कालिक नकद सहायता, लक्षित वितरण, बिचौलियों की कमी, उपभोग और आजीविका सुरक्षा। सीमाएँ: राशि प्रति एकड़ या उत्पादन से नहीं जुड़ी, भूमिहीन कृषि-श्रमिक बाहर, उत्पादकता या संरचनात्मक सुधार पर सीधा प्रभाव सीमित।
3. AIF: 2020 में शुरू, लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का कोष, मध्यम अवधि के ऋण पर ब्याज अनुदान और ऋण गारंटी; प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 2.28 लाख से अधिक परियोजनाओं में लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये का निवेश। गुण: कटाई-उपरांत नुकसान में कमी, बाज़ार तक पहुँच, मूल्य-संवर्धन, संपत्ति-निर्माण। सीमाएँ: लाभ मुख्यतः संगठित उद्यमियों और सहकारी समितियों तक; छोटे और सीमांत किसानों की भागीदारी सीमित; क्षेत्रीय असंतुलन।
4. बहस के पक्ष-विपक्ष: कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाती जैसे विद्वान आय सहायता बनाम मूल्य समर्थन के विकल्प पर चर्चा करते हैं; स्वामीनाथन आयोग (2004-06) ने C2+50% लागत के आधार पर MSP की सिफारिश की थी; अमर्त्य सेन का क्षमता और अधिकार (Entitlement) का दृष्टिकोण आय-सुरक्षा के पक्ष में तर्क देता है। खाद्य भंडारण की व्यवस्था पर शांता कुमार समिति (2015) की सिफारिशें भी प्रासंगिक हैं।
5. समग्र निष्कर्ष: आय सहायता अल्पकालिक जोखिम कम करती है और अवसंरचना दीर्घकालिक उत्पादकता बढ़ाती है; दोनों पूरक हैं। संतुलित नीति में भूमि-रिकॉर्ड डिजिटलीकरण, कृषक-उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से सामूहिक भंडारण और बाज़ार-संपर्क, तथा प्राकृतिक खेती जैसे टिकाऊ उपायों का समावेश हो।
6. उत्तर की संरचना: परिचय (दोनों मॉडल), पीएम-किसान का मूल्यांकन, AIF का मूल्यांकन, संघीय और संवैधानिक आयाम, आलोचना और प्रति-तर्क, निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के बनासकांठा जिले में पीएम-किसान योजना की 24वीं किस्त जारी करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करना
- B. कृषि उत्पादन में वृद्धि करना
- C. ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना
- D. कृषि ऋण माफी की घोषणा करना
उत्तर: A. किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करना — पीएम-किसान योजना का उद्देश्य पात्र किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
Mains: पीएम-किसान योजना के माध्यम से गुजरात सरकार किसानों को दी जाने वाली प्रत्यक्ष आय सहायता किस प्रकार राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास में योगदान कर रही है? अपने उत्तर में राज्य के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- विशेष अभियान 6.0: वस्त्र समिति की उपलब्धियाँ और संस्थागत सुधार - October 30, 2026
- Supreme Court Directs Parties to Submit Documents in Dhar Bhojshala Case - October 30, 2026
- पीएम मोदी कल गुजरात में पीएम-किसान की 24वीं किस्त जारी करेंगे, जानें पूरा विवरण - October 30, 2026

No Comments