21 Jul पीएम विकास योजना से अल्पसंख्यकों का समावेशी विकास: जानिए पूरी प्रक्रिया
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था और शासन: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों का उत्थान | GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप: विकास प्रक्रियाएं और विकास उद्योग — गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका
- Prelims: पीएम विकास योजना, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, केंद्रीय क्षेत्र की योजना, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992, अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदाय, परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां (PIAs)
- Essay: समावेशी विकास: चुनौतियाँ और समाधान, भारत में अल्पसंख्यक समुदायों का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम विकास योजना अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के माध्यम से अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों का समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की पीएम विकास योजना (PM VIKAS Yojana) अल्पसंख्यक समुदायों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है और इसके अंतर्गत परियोजनाओं का आवंटन परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) को राज्यों की परवाह किए बिना किया जाता है, इसलिए राज्यवार आवंटन का विवरण नहीं रखा जाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत का संविधान अपने नागरिकों को समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार प्रदान करता है, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय भी शामिल हैं।
- अल्पसंख्यक समुदायों को मुख्यधारा में लाने और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ लागू की गई हैं।
- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 (National Commission for Minorities Act, 1992) के तहत केंद्र सरकार ने छह समुदायों – मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी – को अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया है।
- अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) का गठन 2006 में किया गया था, जिसका उद्देश्य अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना और उनके समग्र विकास को बढ़ावा देना है।
- समावेशी विकास (Inclusive Development) का सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें, विशेषकर उन वर्गों तक जो ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे हैं।
- शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास के प्रमुख स्तंभों के रूप में देखा जाता है।
पीएम विकास योजना क्या है?
- पीएम विकास योजना अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
- इसका मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करना है, जिससे उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्रों में समान अवसर मिल सकें।
- यह योजना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों (बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम, जैन, पारसी और सिख) से संबंधित भारतीय नागरिकों के लिए है।
- योजना के तहत परियोजनाएँ सीधे परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) को आवंटित की जाती हैं, न कि राज्यों को, जिससे राज्य-विशिष्ट आवंटन का विवरण नहीं रखा जाता है।
- यह योजना उन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होती है जहाँ संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा अन्य अल्पसंख्यक समुदाय अधिसूचित किए गए हैं, बशर्ते पीएम विकास योजना में उनकी कुल सीटें 5% से अधिक न हों।
- इसका लक्ष्य अल्पसंख्यकों के बीच कौशल उन्नयन, पारंपरिक कलाओं और शिल्प को बढ़ावा देना, शिक्षा तक पहुँच बढ़ाना और आजीविका के अवसरों का सृजन करना है।
- यह योजना अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| केंद्रीय क्षेत्र की योजना | यह योजना केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है, जिससे इसके कार्यान्वयन में एकरूपता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है। |
| समावेशी विकास का लक्ष्य | अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करके उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास। |
| परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) के माध्यम से आवंटन | राज्यों की परवाह किए बिना सीधे PIAs को परियोजनाएं आवंटित की जाती हैं, जिससे कार्यान्वयन में दक्षता और लक्ष्य-उन्मुख दृष्टिकोण आता है। |
| राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत अधिसूचित समुदाय | बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम, जैन, पारसी और सिख समुदायों के भारतीय नागरिक इसके लिए पात्र हैं, जिससे व्यापक कवरेज सुनिश्चित होता है। |
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित अन्य अल्पसंख्यक समुदाय | राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित अन्य समुदायों को भी पात्रता मिलती है, बशर्ते उनकी कुल सीटें 5% से अधिक न हों, जिससे क्षेत्रीय आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है। |
महत्व
सामाजिक समावेशन
- यह योजना अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर प्रदान करके सामाजिक मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास करती है, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
- यह विभिन्न समुदायों के बीच समानता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देती है, जिससे सामाजिक समरसता मजबूत होती है।
आर्थिक सशक्तिकरण
- कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करके, यह योजना अल्पसंख्यक व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाती है और उनकी आय क्षमता बढ़ाती है।
- यह गरीबी उन्मूलन और आर्थिक असमानता को कम करने में योगदान करती है, जिससे राष्ट्रीय विकास में उनका योगदान बढ़ता है।
शासन और नीति
- यह योजना केंद्र सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की नीति को दर्शाती है, जो समावेशी शासन पर केंद्रित है।
- राज्यों की परवाह किए बिना सीधे PIAs को परियोजनाएं आवंटित करने का मॉडल कार्यान्वयन में दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और पहुंच का अभाव
- दूरदराज के क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच योजना के बारे में जागरूकता की कमी हो सकती है।
- योजना के लाभों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी संचार और आउटरीच कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों का उत्थान
2. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) की क्षमता और दक्षता भिन्न हो सकती है, जिससे योजना के परिणामों पर असर पड़ सकता है।
- परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धन का प्रभावी ढंग से उपयोग हो रहा है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं
3. राज्य-विशिष्ट आवश्यकताओं की उपेक्षा
- राज्यवार आवंटन का विवरण न रखने से कुछ राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों को संबोधित करने में कमी आ सकती है।
- स्थानीय संदर्भों और आवश्यकताओं के अनुरूप योजना को अनुकूलित करने के लिए अधिक लचीलेपन की आवश्यकता हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
4. सीटों का 5% प्रतिबंध
- राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए 5% सीटों की सीमा कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त नहीं हो सकती है।
- यह प्रतिबंध उन समुदायों के लिए अवसर सीमित कर सकता है जिन्हें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक अधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्यवार आवंटन का अभाव | विभिन्न राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी की विशिष्ट आवश्यकताओं और भौगोलिक वितरण को संबोधित करने में कठिनाई। |
| परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) की गुणवत्ता | PIAs की क्षमता और जवाबदेही में भिन्नता से योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति प्रभावित हो सकती है। |
| जागरूकता और पहुंच | योजना के लाभों के बारे में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, पर्याप्त जागरूकता न होना। |
| राज्य-अधिसूचित अल्पसंख्यकों के लिए 5% सीमा | यह सीमा उन राज्यों में पर्याप्त नहीं हो सकती है जहां राज्य-अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी अधिक है, जिससे कुछ समूहों को बाहर रखा जा सकता है। |
| निगरानी और मूल्यांकन | योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की आवश्यकता। |
आगे की राह
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यापक आउटरीच कार्यक्रम चलाए जाएं।
- परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) की क्षमता निर्माण और उनके प्रदर्शन की नियमित निगरानी की जाए।
- राज्य-विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना के कार्यान्वयन में अधिक लचीलापन लाया जाए, संभवतः राज्य-स्तरीय परामर्श तंत्र के माध्यम से।
- राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए 5% सीटों की सीमा की समीक्षा की जाए, ताकि वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
- योजना के परिणामों और प्रभाव का नियमित, स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए ताकि सुधार के क्षेत्रों की पहचान की जा सके।
- अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों और हितधारकों को योजना के डिजाइन और कार्यान्वयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम विकास योजना · अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय · समावेशी विकास · केंद्रीय क्षेत्र की योजना · शिक्षा और कौशल विकास · राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 · अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदाय · परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां (PIA)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 29’, ‘note’: ‘अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 30’, ‘note’: ‘अल्पसंख्यकों का शिक्षा संस्थान स्थापित करने का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान (राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992) → अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा पीएम विकास योजना का शुभारंभ → शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करना → परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) के माध्यम से परियोजनाओं का आवंटन → अल्पसंख्यक समुदायों का समावेशी विकास और सशक्तिकरण → सामाजिक-आर्थिक असमानता में कमी और राष्ट्रीय विकास में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम विकास योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
2. इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
3. इस योजना के अंतर्गत परियोजनाएँ केवल उन्हीं राज्यों को आवंटित की जाती हैं जहाँ अल्पसंख्यक आबादी अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। पीएम विकास योजना अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि इस योजना के अंतर्गत परियोजनाएँ राज्यों की परवाह किए बिना परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIA) को आवंटित की जाती हैं।
Q2. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों में निम्नलिखित में से कौन-सा समुदाय शामिल नहीं है?
- बौद्ध
- जैन
- सिख
- हिंदू
उत्तर: हिंदू — राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम, जैन, पारसी और सिख समुदायों को अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया गया है। हिंदू समुदाय इस सूची में शामिल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम विकास योजना अल्पसंख्यक समुदायों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में किस प्रकार सहायक है? इस योजना की प्रमुख विशेषताओं और इसके कार्यान्वयन तंत्र पर प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत पीएम विकास योजना के परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य (अल्पसंख्यक समुदायों का समावेशी विकास) से करें। इसके बाद, योजना की प्रमुख विशेषताओं का विस्तार से वर्णन करें, जैसे कि यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करती है। फिर, इसके कार्यान्वयन तंत्र पर चर्चा करें, जिसमें परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIA) की भूमिका और राज्यवार आवंटन न होने का उल्लेख हो। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत अधिसूचित समुदायों की पात्रता और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए 5% सीटों की सीमा का भी उल्लेख करें। अंत में, योजना के महत्व और समावेशी विकास में इसकी भूमिका को संक्षेप में बताएं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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