21 Jul पीएलआई योजना: वस्त्र क्षेत्र में 8,117 करोड़ निवेश, 33,427 रोजगार सृजन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — औद्योगिक नीतियाँ | GS Paper III — रोज़गार सृजन
- Prelims: उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना, वस्त्र मंत्रालय, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, विनिर्माण क्षेत्र, रोजगार सृजन, निर्यात प्रोत्साहन
- Essay: भारत में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, सरकारी नीतियों का औद्योगिक विकास पर प्रभाव: एक आलोचनात्मक विश्लेषण
त्वरित पुनरावृत्ति: वस्त्रों के लिए PLI योजना का उद्देश्य मानव निर्मित फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा देकर घरेलू विनिर्माण, निवेश और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्र मार्घेरिटा ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में जानकारी दी है कि वस्त्रों के लिए उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत कुल 170 कंपनियों को मंजूरी दी गई है। 31 मार्च, 2026 तक, इन कंपनियों द्वारा 8,117.64 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और 33,427 नए रोजगार सृजित किए गए हैं। यह योजना के कार्यान्वयन में हुई प्रगति को दर्शाता है और इसके उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना को भारत सरकार ने विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू किया था।
- इस योजना का लक्ष्य भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, निवेश आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
- वस्त्र क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है और देश के कुल निर्यात में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
- वस्त्रों के लिए PLI योजना विशेष रूप से मानव निर्मित फाइबर (MMF) परिधान, MMF फैब्रिक्स और तकनीकी वस्त्रों (Technical Textiles) जैसे उच्च मूल्य वाले खंडों पर केंद्रित है।
- इस योजना को 2021 में ₹10,683 करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देना था।
- यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी सरकारी पहलों का एक अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
वस्त्रों के लिए उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?
- यह योजना भारत में वस्त्र उद्योग के विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई है।
- इसका मुख्य उद्देश्य उच्च मूल्य वाले मानव निर्मित फाइबर (MMF) खंड और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिनमें भारत की वैश्विक हिस्सेदारी कम है।
- योजना के तहत, पात्र कंपनियों को वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है, जो उनके निवेश और उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने पर आधारित होता है।
- यह योजना दो प्रकार के निवेशों को कवर करती है: पहला, न्यूनतम 300 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनियां जो 400 करोड़ रुपये का न्यूनतम कारोबार हासिल करती हैं; दूसरा, न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनियां जो 200 करोड़ रुपये का न्यूनतम कारोबार हासिल करती हैं।
- प्रोत्साहन दरें पहले चार वर्षों के लिए 15% से शुरू होकर पांचवें वर्ष में 11% तक कम हो जाती हैं, जो निवेश और कारोबार के स्तर पर निर्भर करती हैं।
- इस योजना से वस्त्र क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन होने और भारत को वैश्विक वस्त्र आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना | घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने हेतु एक सरकारी पहल। |
| वस्त्र क्षेत्र पर केंद्रित | भारत के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक, वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात क्षमता को बढ़ाना। |
| कुल 170 कंपनियों को मंजूरी | योजना की व्यापक पहुंच और उद्योग के विभिन्न हितधारकों की भागीदारी को दर्शाता है। |
| ₹8,117.64 करोड़ का निवेश | वस्त्र क्षेत्र में महत्वपूर्ण पूंजी प्रवाह और क्षमता विस्तार का संकेत। |
| 33,427 नए रोजगार सृजित | योजना का प्रत्यक्ष सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- PLI योजना वस्त्र क्षेत्र में निवेश को आकर्षित कर रही है, जिससे विनिर्माण क्षमता में वृद्धि हो रही है।
- यह योजना भारत को वैश्विक वस्त्र आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद कर रही है।
- रोजगार सृजन से आय में वृद्धि और गरीबी उन्मूलन में सहायता मिलती है, जिससे समग्र आर्थिक विकास को गति मिलती है।
सामाजिक महत्व
- वस्त्र उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार मिलता है, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
- नए रोजगार के अवसर विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आजीविका के साधन प्रदान करते हैं।
रणनीतिक महत्व
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर, योजना आयात पर निर्भरता कम करती है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान करती है।
- यह भारतीय वस्त्र उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाकर निर्यात को बढ़ावा देती है।
चुनौतियाँ
1. राज्यों के बीच असमान विकास
- कुछ राज्यों में निवेश और रोजगार सृजन बहुत अधिक है (जैसे गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक) जबकि अन्य में बहुत कम या शून्य है (जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल)।
- यह क्षेत्रीय असंतुलन को बढ़ा सकता है और देश के कुछ हिस्सों में विकास के लाभों को सीमित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
2. लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) की सीमित भागीदारी
- PLI योजना की शर्तें बड़े खिलाड़ियों के लिए अधिक अनुकूल हो सकती हैं, जिससे MSMEs की भागीदारी सीमित हो सकती है।
- MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके बिना समावेशी विकास मुश्किल है।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक संवृद्धि पर इनके प्रभाव
3. कौशल विकास और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता
- नए निवेश से उत्पन्न रोजगार के लिए अकुशल श्रमिकों के बजाय कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी।
- वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए निरंतर तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन का विकास, कौशल विकास
4. पर्यावरण संबंधी चिंताएँ
- वस्त्र उद्योग जल और ऊर्जा का गहन उपयोग करता है और प्रदूषण का एक स्रोत हो सकता है।
- उत्पादन में वृद्धि के साथ, स्थायी विनिर्माण प्रथाओं को सुनिश्चित करना एक चुनौती होगी।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| क्षेत्रीय असंतुलन | कुछ राज्यों में निवेश और रोजगार सृजन की कमी, जिससे समग्र विकास में असमानता। |
| MSMEs की भागीदारी | बड़े उद्योगों पर अधिक ध्यान, छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए अवसरों की कमी। |
| कौशल अंतराल | नए उद्योगों की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कुशल कार्यबल की अनुपलब्धता। |
| तकनीकी पिछड़ापन | वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाने की धीमी गति। |
| पर्यावरण स्थिरता | बढ़ते उत्पादन के साथ जल उपयोग, रसायन और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना
आगे की राह
- राज्यों के बीच निवेश और रोजगार सृजन में समानता लाने के लिए लक्षित प्रोत्साहन और नीतिगत हस्तक्षेप किए जाने चाहिए।
- MSMEs को PLI योजना का लाभ उठाने के लिए विशेष सहायता और सरल प्रक्रियाएं प्रदान की जानी चाहिए।
- वस्त्र उद्योग के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाना चाहिए, जिसमें आधुनिक मशीनरी और प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण शामिल हो।
- अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देकर तकनीकी उन्नयन और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- स्थायी विनिर्माण प्रथाओं को अनिवार्य किया जाना चाहिए, जिसमें जल पुनर्चक्रण, ऊर्जा दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हों।
- वस्त्र उद्योग के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जानी चाहिए, जो कच्चे माल की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI) · वस्त्र उद्योग · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · विनिर्माण क्षेत्र · रोजगार सृजन · निवेश प्रोत्साहन · निर्यात संवर्धन · आर्थिक संवृद्धि · वस्त्र मंत्रालय · मानव निर्मित फाइबर (MMF) · तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा PLI योजना की घोषणा → वस्त्र क्षेत्र में कंपनियों को प्रोत्साहन → कंपनियों द्वारा निवेश और उत्पादन में वृद्धि → नए रोजगारों का सृजन → आर्थिक विकास और निर्यात में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल भारत में निर्मित वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए है।
2. यह योजना केवल कुछ विशिष्ट क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल तक ही सीमित है।
3. वस्त्रों के लिए PLI योजना का उद्देश्य मानव निर्मित फाइबर (MMF) परिधान और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि PLI योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात निर्भरता को कम करना भी है, न कि केवल निर्यात। कथन 2 गलत है क्योंकि PLI योजना कई क्षेत्रों में लागू की गई है, जिसमें वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य उत्पाद आदि शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि वस्त्रों के लिए PLI योजना विशेष रूप से MMF परिधान और तकनीकी वस्त्रों पर केंद्रित है।
Q2. भारत में उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के कार्यान्वयन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. PLI योजना के तहत प्रोत्साहन राशि सीधे कंपनियों को उनके उत्पादन में वृद्धि के आधार पर दी जाती है।
2. इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अभिन्न अंग बनाना है।
3. PLI योजना के तहत निवेश और रोजगार सृजन का राज्यवार विवरण केंद्र सरकार द्वारा नियमित रूप से जारी किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि PLI योजना उत्पादन में वृद्धि और बिक्री के आधार पर प्रोत्साहन प्रदान करती है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करना है। कथन 3 भी सही है, जैसा कि PIB विज्ञप्ति में दिए गए राज्यवार विवरण से स्पष्ट है, सरकार नियमित रूप से इन आंकड़ों को जारी करती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में कैसे सहायक सिद्ध हुई है? वस्त्र उद्योग के संदर्भ में इसके महत्व और चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में PLI योजना की अवधारणा, उसके उद्देश्यों और भारत में विनिर्माण तथा रोजगार सृजन पर उसके समग्र प्रभाव पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, विशेष रूप से वस्त्र उद्योग के लिए PLI योजना के महत्व को उजागर करें, जैसे मानव निर्मित फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार सृजित करना। साथ ही, इस योजना के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों, जैसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता और छोटे तथा मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए पहुंच, का भी आलोचनात्मक विश्लेषण करें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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