25 Sep बुजुर्गों की देखभाल में मास्टर ट्रेनर्स के लिए 11-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

✎ राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) द्वारा आयोजित 'ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनers' (ToT) कार्यक्रम का लक्ष्य बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित और प्रमाणित मास्टर ट्रेनर्स का एक राष्ट्रीय पूल तैयार कर इस क्षेत्र में गुणवत्ता और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज और सामाजिक मुद्दे | GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ और मानव संसाधन | GS Paper III — कौशल विकास और रोज़गार
- Prelims: राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, बुजुर्गों की देखभाल (Geriatric Care), ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स (ToT), कौशल विकास, राष्ट्रीय वयोश्री योजना
- Essay: बदलते सामाजिक परिवेश में बुजुर्गों की देखभाल की चुनौतियाँ और समाधान, भारत में कौशल विकास और मानव संसाधन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) द्वारा आयोजित ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनers’ (ToT) कार्यक्रम का लक्ष्य बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित और प्रमाणित मास्टर ट्रेनर्स का एक राष्ट्रीय पूल तैयार कर इस क्षेत्र में गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) ने राष्ट्रीय राजधानी में बुजुर्गों की देखभाल संबंधी (‘जेरियाट्रिक केयर प्रोवाइडर’) जॉब रोल के लिए मास्टर ट्रेनर्स के वास्ते 11-दिवसीय ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों की देखभाल के प्रशिक्षण में गुणवत्ता, मानकीकरण और पेशेवर क्षमता को मजबूत करना तथा देश भर में उच्च-गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण देने में सक्षम प्रशिक्षित और प्रमाणित मास्टर ट्रेनर्स का एक राष्ट्रीय पूल तैयार करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में बुजुर्गों की आबादी लगातार बढ़ रही है, जिससे उनकी देखभाल और सहायता की आवश्यकता भी बढ़ रही है।
- पारंपरिक संयुक्त परिवार प्रणाली के विघटन और शहरीकरण के कारण बुजुर्गों को अक्सर उचित देखभाल नहीं मिल पाती है।
- बुजुर्गों की देखभाल एक विशिष्ट क्षेत्र है जिसके लिए विशेष कौशल और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है।
- वर्तमान में, बुजुर्गों की देखभाल करने वाले पेशेवरों की कमी है और उपलब्ध प्रशिक्षण में मानकीकरण का अभाव है।
- गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, जो बुजुर्गों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रख सकें।
राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) और ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम
- राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (National Institute of Social Defence – NISD) केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
- इसका मुख्य कार्य सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और दस्तावेज़ीकरण करना है, जिसमें बुजुर्गों का कल्याण भी शामिल है।
- NISD का सीनियर सिटिज़न डिवीज़न (Sr.CD) बुजुर्गों से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों का समन्वय करता है।
- ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना है जो आगे चलकर देश भर में बुजुर्गों की देखभाल करने वालों को प्रशिक्षित कर सकें।
- इस कार्यक्रम में डोमेन स्किल्स (बुजुर्गों की देखभाल से संबंधित पेशेवर क्षमताएँ) और प्लेटफॉर्म स्किल्स (प्रशिक्षण देने, संवाद करने और मूल्यांकन करने की क्षमताएँ) दोनों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- शारीरिक प्रणाली में उम्र से जुड़े बदलाव, स्वस्थ बुढ़ापा, डिमेंशिया की देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों का प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा और योग जैसे महत्वपूर्ण विषय इसमें शामिल थे।
- इस पहल से बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में गुणवत्ता, मानकीकरण और पेशेवर क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बुजुर्गों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित हो सकेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण | बुजुर्गों की देखभाल प्रशिक्षण में गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित करना। |
| 11-दिवसीय ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (टीओटी) कार्यक्रम | प्रशिक्षित और प्रमाणित मास्टर ट्रेनर्स का राष्ट्रीय पूल तैयार करना। |
| डोमेन स्किल्स और प्लेटफॉर्म स्किल्स पर ध्यान | बुजुर्गों की देखभाल के लिए आवश्यक पेशेवर क्षमताओं और प्रशिक्षण देने के कौशल का विकास। |
| विभिन्न पेशेवर पृष्ठभूमि के प्रतिभागी | बुजुर्गों की देखभाल, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े कई क्षेत्रों को मिलाकर सीखने का वातावरण। |
| व्यापक पाठ्यक्रम | शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, डिमेंशिया देखभाल, प्राथमिक उपचार और रोजगार कौशल जैसे विषयों को शामिल करना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करना।
- बुजुर्गों के सम्मानजनक और सक्रिय बुढ़ापे को बढ़ावा देना।
- देखभाल करने वालों के लिए पेशेवर कौशल और रोजगार के अवसर पैदा करना।
आर्थिक महत्व
- बुजुर्गों की देखभाल क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
- प्रशिक्षित देखभाल प्रदाताओं की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बोझ कम करना।
- देखभाल अर्थव्यवस्था में वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
शासन और नीतिगत महत्व
- बुजुर्गों की देखभाल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत प्रशिक्षण प्रणाली स्थापित करना।
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता।
- नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करना।
चुनौतियाँ
1. बढ़ती बुजुर्ग आबादी
- भारत में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनकी देखभाल की मांग में वृद्धि हो रही है।
- इस बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुविधाओं का अभाव।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: जनसंख्या और संबंधित मुद्दे
2. प्रशिक्षित देखभाल प्रदाताओं की कमी
- बुजुर्गों की देखभाल के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित पेशेवरों की उपलब्धता कम है।
- अकुशल देखभाल से बुजुर्गों के स्वास्थ्य और कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: स्वास्थ्य
3. मानकीकरण और गुणवत्ता का अभाव
- बुजुर्गों की देखभाल के प्रशिक्षण और सेवाओं में एकरूपता और गुणवत्ता की कमी।
- विभिन्न क्षेत्रों में देखभाल के मानकों में भिन्नता।
यूपीएससी लिंक: शासन: नीतियों और हस्तक्षेपों का डिजाइन और कार्यान्वयन
4. देखभाल करने वालों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य
- देखभाल करने वालों पर अक्सर शारीरिक और मानसिक तनाव का बोझ होता है।
- उनकी अपनी देखभाल और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए समर्थन प्रणालियों का अभाव।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का कल्याण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जनसांख्यिकीय बदलाव | बुजुर्गों की बढ़ती संख्या के लिए पर्याप्त देखभाल संसाधनों की आवश्यकता। |
| कौशल अंतराल | बुजुर्गों की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी। |
| वित्तीय पहुंच | गुणवत्तापूर्ण बुजुर्ग देखभाल सेवाओं की उच्च लागत और सभी के लिए उनकी पहुंच सुनिश्चित करना। |
| सामाजिक कलंक | बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े सामाजिक कलंक और जागरूकता की कमी। |
| ग्रामीण-शहरी विभाजन | ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की देखभाल सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी। |
आगे की राह
- राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) जैसे संस्थानों को मजबूत करना और उनकी क्षमता का विस्तार करना।
- बुजुर्गों की देखभाल के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित करना जो प्रशिक्षण, सेवा वितरण और वित्तीय सहायता को कवर करे।
- प्रशिक्षित देखभाल प्रदाताओं के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
- बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना ताकि बुजुर्गों की देखभाल सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार हो सके।
- देखभाल करने वालों के लिए नियमित प्रशिक्षण, परामर्श और सहायता कार्यक्रमों का आयोजन करना।
- बुजुर्गों के अधिकारों और सम्मानजनक जीवन के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बुजुर्गों की देखभाल · जेरियाट्रिक केयर प्रोवाइडर · राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान · प्रशिक्षण कार्यक्रम · मास्टर ट्रेनर्स · कौशल विकास · सामाजिक न्याय · वृद्धावस्था स्वास्थ्य · गैर-संचारी रोग · मानसिक स्वास्थ्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम, शिक्षा, सार्वजनिक सहायता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक, आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
बुजुर्ग आबादी में वृद्धि → गुणवत्तापूर्ण देखभाल की बढ़ती मांग → प्रशिक्षित देखभाल प्रदाताओं की कमी → मास्टर ट्रेनर्स के लिए ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (टीओटी) कार्यक्रम → प्रशिक्षित देखभाल प्रदाताओं का राष्ट्रीय पूल → बुजुर्गों के लिए बेहतर और मानकीकृत देखभाल
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और प्रलेखन को बढ़ावा देना है।
3. यह बुजुर्गों की देखभाल के लिए ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम आयोजित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1: राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है। यह कथन सही है।
कथन 2: NISD का मुख्य उद्देश्य सामाजिक रक्षा के विभिन्न क्षेत्रों जैसे नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम, बुजुर्गों की देखभाल और भिक्षावृत्ति के उन्मूलन में प्रशिक्षण, अनुसंधान और प्रलेखन को बढ़ावा देना है। यह कथन सही है।
कथन 3: NISD ने हाल ही में बुजुर्गों की देखभाल संबंधी जॉब रोल के लिए मास्टर ट्रेनर्स के वास्ते ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम आयोजित किया है। यह कथन सही है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्यक्रम राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) द्वारा संचालित किए जाते हैं?
1. नशा मुक्त भारत अभियान
2. गरिमा गृह योजना
3. अटल वयो अभ्युदय योजना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत काम करता है और विभिन्न सामाजिक रक्षा कार्यक्रमों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ और ‘गरिमा गृह योजना’ (ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आश्रय गृह) NISD द्वारा संचालित प्रमुख कार्यक्रम हैं। ‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ (AVYAY) भी बुजुर्गों के कल्याण से संबंधित एक अम्ब्रेला योजना है जिसमें NISD की भूमिका है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के मद्देनजर, उनके लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने हेतु ‘जेरियाट्रिक केयर प्रोवाइडर’ जैसे प्रशिक्षित पेशेवरों का महत्व स्पष्ट कीजिए। साथ ही, इस दिशा में राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में बुजुर्गों की बढ़ती जनसंख्या और इससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. जेरियाट्रिक केयर प्रोवाइडर का महत्व:
– बुजुर्गों की विशिष्ट शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करना।
– डिमेंशिया, गैर-संचारी रोगों और अन्य उम्र-संबंधी समस्याओं का प्रबंधन।
– सम्मानजनक और सक्रिय बुढ़ापे को बढ़ावा देना।
– परिवार के सदस्यों पर देखभाल के बोझ को कम करना।
– रोजगार सृजन और कौशल विकास का अवसर।
3. राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (NISD) की भूमिका का मूल्यांकन:
– ‘ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम का आयोजन: गुणवत्ता, मानकीकरण और पेशेवर क्षमता को मजबूत करना।
– प्रशिक्षित और प्रमाणित मास्टर ट्रेनर्स का राष्ट्रीय पूल तैयार करना।
– डोमेन स्किल्स (जेरियाट्रिक केयर) और प्लेटफॉर्म स्किल्स (प्रशिक्षण पद्धति) पर जोर।
– व्यापक पाठ्यक्रम: शारीरिक बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, प्राथमिक उपचार, योग आदि।
– ‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ (AVYAY) जैसे कार्यक्रमों में योगदान।
– सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रलेखन।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी, जागरूकता का अभाव, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच का विस्तार, सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय।
5. निष्कर्ष: बुजुर्गों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरंतरता और विस्तार की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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