भारतीय तटरक्षक बल ने गुजरात-दमन में 170 लोगों को बचाया: जानिए कैसे!

भारतीय तटरक्षक बल ने गुजरात-दमन में 170 लोगों को बचाया: जानिए कैसे!

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आपदा प्रबंधन  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: भारतीय तटरक्षक बल, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बाढ़ राहत अभियान, तटीय सुरक्षा
  • Essay: आपदा प्रबंधन में नागरिक-सैन्य समन्वय का महत्व, भारत में प्राकृतिक आपदाएँ और उनसे निपटने की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय तटरक्षक बल रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सशस्त्र बल है जो भारत के समुद्री हितों की रक्षा करता है और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण बचाव एवं राहत अभियान चलाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 22 जुलाई 2026 से दमन, दादरा और नगर हवेली तथा दक्षिण गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक बचाव अभियान चलाए हैं। लगातार बारिश और भीषण बाढ़ के कारण उत्पन्न हुई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, तटरक्षक बल ने नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए 11 बचाव अभियानों में 170 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया, जिनमें गर्भवती महिलाएँ और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाले लोग भी शामिल थे।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक आपदा-प्रवण देश है, जहाँ बाढ़, चक्रवात, भूकंप और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ अक्सर आती रहती हैं।
  • बाढ़ भारत में सबसे आम प्राकृतिक आपदाओं में से एक है, जो हर साल जान-माल का भारी नुकसान करती है, खासकर मानसून के मौसम में।
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management) भारत में एक बहु-एजेंसी दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें, सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और नागरिक समाज संगठन शामिल होते हैं।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) भारत में आपदा प्रबंधन के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचा प्रदान करता है।
  • भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF) जैसी एजेंसियाँ बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • नागरिक प्रशासन के साथ विभिन्न सुरक्षा बलों का समन्वय आपदा राहत अभियानों की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • तटीय क्षेत्रों में, तटरक्षक बल न केवल समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी अग्रिम पंक्ति के प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करता है।

भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) क्या है?

  • भारतीय तटरक्षक बल भारत की एक सशस्त्र बल, समुद्री खोज और बचाव तथा कानून प्रवर्तन एजेंसी है।
  • यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अधीन कार्य करता है।
  • इसकी स्थापना 1 फरवरी 1977 को हुई थी और इसे तटरक्षक अधिनियम, 1978 (Coast Guard Act, 1978) द्वारा औपचारिक रूप दिया गया था।
  • भारतीय तटरक्षक बल का आदर्श वाक्य ‘वयम रक्षामः’ (We Protect) है।
  • इसके प्रमुख कार्यों में भारत के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना, समुद्री पर्यावरण की रक्षा करना, समुद्री प्रदूषण को नियंत्रित करना, तस्करी रोकना और समुद्री जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा करना शामिल है।
  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, तटरक्षक बल तटीय क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें बाढ़, चक्रवात और अन्य समुद्री आपात स्थितियाँ शामिल हैं।
  • यह नागरिक प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है ताकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बचाया जा सके और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके।
  • तटरक्षक बल के पास जहाजों, विमानों और हेलीकॉप्टरों का एक बेड़ा है जो खोज और बचाव अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
व्यापक बचाव अभियान भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) द्वारा 11 अभियानों में 170 लोगों को बचाया गया, जो आपदा प्रबंधन में उनकी दक्षता को दर्शाता है।
नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय तटरक्षक बल ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्य किया, जो आपदा प्रतिक्रिया में एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देता है।
चुनौतीपूर्ण मौसम में संचालन लगातार बारिश, भीषण बाढ़ और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बचाव कार्य जारी रहा, जो तटरक्षक कर्मियों के समर्पण को दर्शाता है।
विभिन्न क्षेत्रों से बचाव खानवेल, कदैय्या, वेल्सपन औद्योगिक क्षेत्र, डोंगरी, वलसाद-पर्डी और नवसारी जैसे विभिन्न स्थानों से लोगों को निकाला गया, जो बाढ़ के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
विशेष चिकित्सा सहायता गर्भवती महिला, सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित महिला और सीने में दर्द वाले व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई, जो मानवीय दृष्टिकोण को उजागर करता है।

महत्व

आपदा प्रबंधन

  • यह घटना भारतीय तटरक्षक बल की आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं और नागरिक प्रशासन के साथ उनके प्रभावी समन्वय को प्रदर्शित करती है।
  • बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में त्वरित और कुशल बचाव अभियानों का महत्व उजागर होता है।

सामाजिक महत्व

  • संकट के समय कमजोर वर्गों, जैसे गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को प्राथमिकता देना मानवीय मूल्यों और प्रभावी आपदा प्रबंधन का अभिन्न अंग है।
  • समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकारी एजेंसियों की भूमिका को मजबूत करता है।

सुरक्षा और रक्षा

  • भारतीय तटरक्षक बल न केवल समुद्री सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आंतरिक सुरक्षा और मानवीय सहायता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह ‘वयम रक्षामः’ (हम रक्षा करते हैं) के आदर्श वाक्य को सार्थक करता है, जो राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. तीव्र शहरीकरण और अनियोजित विकास

  • शहरी क्षेत्रों में जल निकासी प्रणालियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
  • नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानों पर अतिक्रमण से बाढ़ का पानी फैलने की जगह कम हो जाती है।

2. जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाएँ

  • लगातार भारी बारिश और अप्रत्याशित मौसम पैटर्न बाढ़ की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ाते हैं।
  • समुद्र स्तर में वृद्धि तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम को बढ़ाती है।

3. बुनियादी ढाँचे की कमी

  • पुरानी और अपर्याप्त जल निकासी प्रणालियाँ भारी वर्षा को संभालने में विफल रहती हैं।
  • बाढ़ प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे का अभाव सड़कों और पुलों को नुकसान पहुँचाता है, जिससे बचाव कार्य बाधित होते हैं।

4. प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और प्रतिक्रिया

  • कुछ क्षेत्रों में प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की कमी से लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में बाधा आती है।
  • आपदा प्रतिक्रिया तंत्र में स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अत्यधिक वर्षा जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव, जिससे अचानक और तीव्र बाढ़ आती है।
तटीय क्षेत्रों में भेद्यता तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व और औद्योगिक विकास, जिससे बाढ़ का प्रभाव बढ़ जाता है।
बुनियादी ढाँचे का लचीलापन सड़क संपर्क बाधित होना और औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव, जो आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है।
स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता।
समन्वय की चुनौतियाँ विभिन्न एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management Plan)
  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF) बटालियनों का गठन

आगे की राह

  • शहरी नियोजन में जल निकासी प्रणालियों को मजबूत करना और बाढ़ के मैदानों पर अतिक्रमण को रोकना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और चरम मौसमी घटनाओं के लिए तैयारी हेतु नीतियों को लागू करना।
  • बाढ़ प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे का विकास करना, जिसमें ऊँची सड़कें और मजबूत पुल शामिल हों।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को उन्नत करना और स्थानीय समुदायों को आपदा तैयारी के लिए प्रशिक्षित करना।
  • आपदा प्रतिक्रिया और बचाव अभियानों में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत करना।
  • तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव और अन्य प्राकृतिक बाधाओं को बढ़ावा देना ताकि बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारतीय तटरक्षक बल · आपदा प्रबंधन · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल · राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल · नागरिक प्रशासन · तटीय सुरक्षा · मानवीय सहायता · जलवायु परिवर्तन · आपदा जोखिम न्यूनीकरण · बहु-एजेंसी समन्वय

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 256: संघ और राज्यों के बीच प्रशासनिक संबंध
  • अनुच्छेद 257: संघ का राज्यों पर नियंत्रण

अवधारणा प्रवाह

लगातार भारी बारिश और चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति  →  दमन, दादरा और नगर हवेली तथा दक्षिण गुजरात में भीषण बाढ़  →  लोगों का विभिन्न क्षेत्रों में फँसना और सड़क संपर्क बाधित होना  →  भारतीय तटरक्षक बल द्वारा नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय में बचाव अभियान  →  170 लोगों को सुरक्षित निकाला गया और तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई  →  आपदा प्रबंधन में तटरक्षक बल की दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण का प्रदर्शन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. इसका प्राथमिक कार्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सुनिश्चित करना है।
3. यह केवल युद्धकाल में ही मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। भारतीय तटरक्षक बल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है। इसका प्राथमिक कार्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, समुद्री पर्यावरण संरक्षण और खोज एवं बचाव अभियान चलाना है। कथन 3 गलत है। भारतीय तटरक्षक बल शांति और युद्धकाल दोनों में मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्य करता है, जैसा कि हाल की बाढ़ राहत गतिविधियों से स्पष्ट है।

Q2. भारत में आपदा प्रबंधन (Disaster Management) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 देश में आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
2. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
3. राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) केवल प्राकृतिक आपदाओं के लिए ही प्रतिक्रिया करता है, मानव निर्मित आपदाओं के लिए नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढाँचा प्रदान करता है। कथन 2 सही है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है, जो आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष निकाय है। कथन 3 गलत है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों प्रकार की आपदाओं के लिए प्रतिक्रिया करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में आपदा प्रबंधन में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के महत्व का मूल्यांकन कीजिए। हाल ही में दमन, दादरा और नगर हवेली तथा दक्षिण गुजरात में भारतीय तटरक्षक बल द्वारा चलाए गए बाढ़ राहत अभियानों के आलोक में, ऐसी स्थितियों में बहु-एजेंसी दृष्टिकोण की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारत में आपदा प्रबंधन में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के महत्व पर प्रकाश डालना है। इसमें राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर विभिन्न सरकारी विभागों, सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका को रेखांकित किया जा सकता है। दूसरे भाग में, दमन, दादरा और नगर हवेली तथा दक्षिण गुजरात में भारतीय तटरक्षक बल द्वारा चलाए गए बाढ़ राहत अभियानों का उदाहरण देते हुए, बहु-एजेंसी दृष्टिकोण की प्रभावशीलता और आवश्यकता पर चर्चा करनी है। इसमें नागरिक प्रशासन के साथ तटरक्षक बल के समन्वय और इसके सकारात्मक परिणामों को शामिल किया जा सकता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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