भारतीय नौसेना का अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ कोलकाता में लॉन्च, जानें विशेषताएं और महत्व

Indian Navy’s ocean research vessel ‘Sagar Manthan’ launched at Kolkata port — labelled illustration

भारतीय नौसेना का अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ कोलकाता में लॉन्च, जानें विशेषताएं और महत्व

✎ 'सागर मंथन' भारत के 'डीप ओशन मिशन' के तहत गहरे समुद्र अन्वेषण और वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
  • Prelims: सागर मंथन, डीप ओशन मिशन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), समुद्री अनुसंधान पोत (ORV)
  • Essay: भारत की समुद्री क्षमता और आर्थिक विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का राष्ट्र निर्माण में योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘सागर मंथन’ भारत के ‘डीप ओशन मिशन’ के तहत गहरे समुद्र अन्वेषण और वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारतीय नौसेना के महासागरीय अनुसंधान पोत (Ocean Research Vessel – ORV) ‘सागर मंथन’ का कोलकाता बंदरगाह पर जलावतरण किया गया। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड द्वारा निर्मित यह स्वदेशी पोत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के लिए बनाया जा रहा है और यह भारत के ‘डीप ओशन मिशन’ को मजबूत करेगा।

पृष्ठभूमि

  • ‘सागर मंथन’ का निर्माण नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए किया जा रहा है।
  • यह पोत 840 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है और इसके 2028 की शुरुआत तक उपयोग के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
  • यह भारत की गहरे समुद्र की खोज और वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा।
  • पोत का जलावतरण GRSE के ऋषि बंकिम शिपयार्ड, कोलकाता में किया गया।
  • यह भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक क्षमताओं की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

‘सागर मंथन’ और इसका महत्व

  • ‘सागर मंथन’ एक 89.5 मीटर लंबा और 18.8 मीटर चौड़ा समुद्री अनुसंधान पोत है, जिसका सकल टन भार 5,900 टन है।
  • यह 90% अधिकतम निरंतर रेटिंग (MCR) पर 14 समुद्री मील तक की गति प्राप्त कर सकता है।
  • यह पोत तटीय समुद्रों और गहरे पानी में 6 किलोमीटर तक की अधिकतम गहराई पर अंडरवे स्वाथ मल्टीबीम (underway swath multibeam) के साथ-साथ भूभौतिकीय भूकंपीय सर्वेक्षण (geophysical seismic surveys) करने में सक्षम होगा।
  • यह चालकता, तापमान और गहराई (CTD) प्रोफाइलिंग और विभिन्न जालों के माध्यम से जैविक नमूनाकरण (biological sampling) जैसे जल नमूनाकरण संचालन भी कर सकेगा।
  • पोत सतह और गहरे समुद्र में मूरिंग (mooring) और डेटा बोय (data buoy) संचालन, कोरर (corers) और ग्रैब (grabs) का उपयोग करके समुद्री तल नमूनाकरण (seabed sampling) तथा चेन बैग ड्रेज (chain bag dredges) के साथ रॉक ड्रेजिंग (rock dredging) भी प्रभावी ढंग से करेगा।
  • यह पोत अंडरवे वायुमंडलीय अवलोकन (underway atmospheric observations), सतह मौसम विज्ञान और वर्तमान माप करेगा तथा ऊपरी वायु डेटा एकत्र करेगा।
  • वैज्ञानिक जहाज पर विश्लेषणात्मक कार्य और डेटा प्रसंस्करण (data processing) करने में सक्षम होंगे, साथ ही वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को प्रशिक्षण और शिक्षा भी प्रदान की जाएगी।
  • यह पोत ‘डीप ओशन मिशन’ के तहत स्वायत्त पानी के नीचे के वाहनों (Autonomous Underwater Vehicles – AUVs) और दूर से संचालित वाहनों (Remotely Operated Vehicles – ROVs) को लॉन्च और पुनर्प्राप्त करने में भी सक्षम होगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्वदेशी निर्माण यह भारत की आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) और इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।
गहराई क्षमता 6 किलोमीटर तक की गहराई पर सर्वेक्षण और अनुसंधान करने में सक्षम।
बहु-कार्यक्षमता समुद्री सर्वेक्षण, भूभौतिकीय सर्वेक्षण, जल नमूनाकरण और वायुमंडलीय अवलोकन जैसे कार्य कर सकता है।
AUV/ROV लॉन्च/रिकवरी स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (AUV) और दूर से संचालित वाहन (ROV) को लॉन्च और पुनः प्राप्त करने की क्षमता।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को जहाज पर प्रशिक्षण और शिक्षा प्रदान करेगा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह गहरे समुद्र में संसाधनों की खोज और उनके सतत उपयोग के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा, जिससे नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्वदेशी निर्माण से देश के जहाज निर्माण उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

सामरिक महत्व

  • हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करेगा, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और प्रभाव में वृद्धि होगी।
  • समुद्री डेटा संग्रह और विश्लेषण में आत्मनिर्भरता से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी।

वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय महत्व

  • समुद्री जीवन, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गहन शोध में सहायता करेगा।
  • समुद्र के नीचे के भूविज्ञान और भूभौतिकी का अध्ययन करने में मदद करेगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं की बेहतर समझ और भविष्यवाणी संभव हो सकेगी।

तकनीकी महत्व

  • यह भारत की उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकी और अनुसंधान क्षमताओं का प्रदर्शन है, जो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
  • गहरे समुद्र मिशन के तहत विकसित किए जा रहे AUV और ROV जैसी तकनीकों के परीक्षण और तैनाती के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण

  • गहरे समुद्र अनुसंधान के लिए उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।
  • जटिल उपकरणों के संचालन और डेटा विश्लेषण के लिए निरंतर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण महत्वपूर्ण है।

2. उच्च परिचालन लागत

  • गहरे समुद्र अनुसंधान पोत का संचालन और रखरखाव महंगा होता है, जिसमें ईंधन, उपकरण और कर्मियों की लागत शामिल है।
  • दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और डेटा साझाकरण

  • समुद्री अनुसंधान अक्सर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मांग करता है, लेकिन डेटा साझाकरण और बौद्धिक संपदा अधिकार एक चुनौती हो सकते हैं।
  • विभिन्न देशों के साथ समन्वय स्थापित करना आवश्यक है।

4. पर्यावरणीय स्थिरता

  • गहरे समुद्र में अनुसंधान करते समय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम करना महत्वपूर्ण है।
  • पर्यावरणीय नियमों का पालन और सतत अनुसंधान पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जटिल प्रौद्योगिकी का एकीकरण विभिन्न प्रकार के उन्नत सेंसर और उपकरणों को एक साथ प्रभावी ढंग से काम कराना।
मौसम और समुद्री परिस्थितियाँ गहरे समुद्र में प्रतिकूल मौसम और समुद्री स्थितियों में सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालन।
डेटा प्रबंधन और विश्लेषण एकत्रित विशाल मात्रा में डेटा का कुशल भंडारण, प्रसंस्करण और विश्लेषण।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में अनुसंधान करते समय समुद्री कानून (UNCLOS) का अनुपालन सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • गहरा सागर मिशन (Deep Ocean Mission)

आगे की राह

  • गहरे समुद्र अनुसंधान के लिए आवश्यक वैज्ञानिक और तकनीकी मानव संसाधन के विकास पर निरंतर निवेश करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना ताकि ज्ञान और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो सके।
  • अनुसंधान पोत के इष्टतम उपयोग के लिए एक व्यापक डेटा प्रबंधन और विश्लेषण ढांचा स्थापित करना।
  • समुद्री अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि नवाचार और दक्षता को बढ़ावा मिल सके।
  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सतत अनुसंधान पद्धतियों को अपनाना।
  • समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान और विकास को और मजबूत करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

गहरा महासागर मिशन · सागर मंथन · समुद्री अनुसंधान पोत · पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय · आत्मनिर्भर भारत · जहाज निर्माण क्षमता · समुद्री संसाधन · ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय केंद्र · समुद्री सर्वेक्षण · वैज्ञानिक अनुसंधान

अवधारणा प्रवाह

स्वदेशी अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ का जलावतरण  →  भारत की गहरे समुद्र अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि  →  गहरा सागर मिशन को गति  →  नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री संसाधनों की खोज को बढ़ावा  →  भारत की समुद्री सामरिक स्थिति और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता में मजबूती

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ‘सागर मंथन’ नामक महासागर अनुसंधान पोत का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड द्वारा किया गया है।
2. यह पोत विशेष रूप से भारतीय नौसेना के लिए गहरे समुद्र में सैन्य अभियानों हेतु बनाया गया है।
3. ‘गहरा महासागर मिशन’ का उद्देश्य भारत की समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग की क्षमताओं को बढ़ाना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘सागर मंथन’ का निर्माण GRSE द्वारा किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह पोत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान हेतु बनाया गया है, न कि सैन्य अभियानों के लिए। कथन 3 सही है क्योंकि ‘गहरा महासागर मिशन’ भारत की समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग की क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान ‘गहरा महासागर मिशन’ (Deep Ocean Mission) के तहत स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (AUVs) और दूर से संचालित वाहन (ROVs) विकसित कर रहा है?

  1. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
  2. राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT)
  3. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
  4. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)

उत्तर: राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) — राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) ‘गहरा महासागर मिशन’ के तहत स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (AUVs) और दूर से संचालित वाहन (ROVs) विकसित कर रहा है, जिनका उपयोग ‘सागर मंथन’ जैसे अनुसंधान पोत करेंगे।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के ‘गहरा महासागर मिशन’ के उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए और ‘सागर मंथन’ जैसे स्वदेशी अनुसंधान पोतों का निर्माण इस मिशन की सफलता में किस प्रकार योगदान देगा, इसका विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत ‘गहरा महासागर मिशन’ के परिचय से करें, जिसमें इसके प्रमुख उद्देश्यों जैसे समुद्री संसाधनों की खोज, जलवायु परिवर्तन अध्ययन और गहरे समुद्र प्रौद्योगिकी विकास शामिल हों। इसके बाद ‘सागर मंथन’ जैसे स्वदेशी अनुसंधान पोतों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण करें, जिसमें उनकी तकनीकी क्षमताएं (जैसे बहुबीम सर्वेक्षण, भूभौतिकीय सर्वेक्षण, जल नमूनाकरण, AUV/ROV लॉन्चिंग क्षमता) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला जाए। यह भी बताएं कि ये पोत भारत की वैज्ञानिक अनुसंधान और गहरे समुद्र अन्वेषण क्षमताओं को कैसे मजबूत करेंगे।

स्रोत: The Indian Express

West Bengal PCS (WBPSC / WBCS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में कोलकाता बंदरगाह से लॉन्च किए गए भारतीय नौसेना के महासागर अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह पोत स्वदेशी रूप से निर्मित है और इसका निर्माण ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE)’ द्वारा किया गया है। 2. ‘सागर मंथन’ का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री अनुसंधान और सर्वेक्षण करना है। 3. इस पोत का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया गया है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — ‘सागर मंथन’ स्वदेशी रूप से GRSE द्वारा निर्मित है, इसका उद्देश्य हिंद महासागर में अनुसंधान है, तथा इसका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत हुआ है।

Mains: भारतीय नौसेना के महासागर अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ के निर्माण एवं इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए, पश्चिम बंगाल में इसके निर्माण के महत्व का वर्णन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


No Comments

Post A Comment