21 Jul भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘मालवन’: चीन-पाकिस्तान की पनडुब्बी चुनौती से निपटने की तैयारी
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (रक्षा) | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत के हित और सुरक्षा)
- Prelims: एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC), ‘मालवन’, ‘माहे’ श्रेणी के पोत, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, भारतीय नौसेना, हिंद महासागर क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत (रक्षा), RBU-6000 रॉकेट लॉन्चर
- Essay: भारत की समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ और समाधान, आत्मनिर्भर भारत अभियान: रक्षा क्षेत्र में प्रगति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन और भारत की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘मालवन’ का जलावतरण भारत की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करता है, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री चुनौतियों के बीच, और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा स्वदेशीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना ने हाल ही में एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘मालवन’ को कारवार में कमीशन किया है। यह स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी-रोधी जहाजों के बेड़े में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों के मद्देनजर। ‘मालवन’ आठ ‘माहे’ श्रेणी के ASW-SWC में से दूसरा है, जिसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ किया गया है।
पृष्ठभूमि
- हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान दोनों अपनी पनडुब्बी क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ बढ़ गई हैं।
- ASW-SWC कार्यक्रम का उद्देश्य तटीय जल (littoral waters) में पानी के भीतर के खतरों का मुकाबला करने की भारत की क्षमता को मजबूत करना है।
- कुल 16 जहाजों का निर्माण किया जा रहा है: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा पूर्वी बेड़े के लिए आठ ‘अरनाला’ श्रेणी के जहाज और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा पश्चिमी बेड़े के लिए आठ ‘माहे’ श्रेणी के जहाज।
- ये जहाज सतह के नीचे निगरानी, खोज-और-हमला मिशन और नौसेना विमानों के साथ समन्वित पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभियानों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
- इनकी माध्यमिक भूमिकाओं में माइन बिछाना (minelaying) और खोज एवं बचाव (search-and-rescue) भी शामिल हैं।
एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) क्या हैं?
- ASW-SWC विशेष रूप से उथले पानी में शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किए गए छोटे युद्धपोत हैं।
- ये जहाज तटीय क्षेत्रों की रक्षा और बंदरगाहों को पनडुब्बी खतरों से अधिक प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखने में सक्षम हैं।
- ‘मालवन’ ‘माहे’ श्रेणी का दूसरा ASW-SWC है, जिसका नाम महाराष्ट्र के तटीय किले शहर के नाम पर रखा गया है।
- इन जहाजों में उन्नत सेंसर और हथियार प्रणालियाँ शामिल हैं, जैसे कि RBU-6000 रॉकेट लॉन्चर, 324 मिमी हल्के टॉरपीडो ट्यूब और पनडुब्बी-रोधी माइन बिछाने वाली रेलें।
- रक्षात्मक उपायों के लिए, ये जहाज एकीकृत पनडुब्बी-रोधी युद्ध रक्षा सूट (Integrated Anti-Submarine Warfare Defence Suite) के हिस्से के रूप में टॉरपीडो डिकॉय लॉन्चिंग सिस्टम से लैस हैं।
- सतह युद्ध क्षमता के लिए इनमें 30 मिमी नौसैनिक बंदूक और दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोट-नियंत्रित बंदूकें शामिल हैं।
- ये जहाज स्टील्थ सुविधाओं (stealth features) से लैस हैं, जिनमें कम रडार क्रॉस-सेक्शन, कम ध्वनिक हस्ताक्षर और कम इन्फ्रारेड हस्ताक्षर शामिल हैं, जो उन्हें शत्रु के लिए पता लगाना मुश्किल बनाते हैं।
- माहे-श्रेणी के जहाजों में पंप-जेट प्रोपल्शन का उपयोग किया गया है, जो उन्हें भारतीय नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोत बनाता है जो इस प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘मालवन’ | भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमताओं में वृद्धि, विशेषकर तटीय जल में। |
| स्वदेशी निर्माण (80% से अधिक स्वदेशी सामग्री) | रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) को बढ़ावा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन। |
| माहे-श्रेणी का दूसरा पोत | पश्चिमी बेड़े की शक्ति में वृद्धि और भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण का प्रतीक। |
| उन्नत सेंसर और हथियार प्रणाली | शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने की क्षमता। |
| स्टील्थ विशेषताएँ (कम रडार क्रॉस-सेक्शन, कम ध्वनिक और इन्फ्रारेड सिग्नेचर) | दुश्मन की पहचान से बचने और परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक। |
महत्व
सामरिक महत्व
- हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए भारत की क्षमता को मजबूत करना।
- तटीय जल और महत्वपूर्ण बंदरगाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जिससे समुद्री सुरक्षा में वृद्धि होगी।
- भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) क्षमताओं को बढ़ाना, विशेषकर उथले पानी (Shallow Waters) में।
आर्थिक महत्व
- घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर पैदा करना, क्योंकि इन जहाजों में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
- रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी।
भू-राजनीतिक महत्व
- हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद करना।
- भारत को एक विश्वसनीय समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करना, जो क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा में योगदान दे सकता है।
चुनौतियाँ
1. बढ़ती क्षेत्रीय समुद्री चुनौतियाँ
- चीन और पाकिस्तान द्वारा अपनी पनडुब्बी बेड़े का लगातार विस्तार किया जा रहा है, जिससे भारतीय नौसेना पर दबाव बढ़ रहा है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, जिसमें विभिन्न देशों की नौसेनाओं की उपस्थिति बढ़ रही है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, रक्षा
2. तकनीकी उन्नयन और आधुनिकीकरण
- लगातार विकसित हो रही पनडुब्बी प्रौद्योगिकियों का मुकाबला करने के लिए भारतीय नौसेना को अपने बेड़े का निरंतर आधुनिकीकरण करना होगा।
- उन्नत सेंसर, हथियार प्रणालियों और स्टील्थ तकनीकों को एकीकृत करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: रक्षा प्रौद्योगिकी, आधुनिकीकरण
3. स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता
- रक्षा उत्पादन में पूरी तरह से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना।
- घरेलू आपूर्तिकर्ताओं की क्षमता और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: रक्षा विनिर्माण, आत्मनिर्भर भारत
4. मानव संसाधन और प्रशिक्षण
- इन उन्नत जहाजों को संचालित करने और बनाए रखने के लिए कुशल कर्मियों की आवश्यकता।
- विशेषज्ञ पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विकास और कार्यान्वयन।
यूपीएससी लिंक: रक्षा कार्मिक, कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चीन और पाकिस्तान का पनडुब्बी बेड़ा विस्तार | हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बढ़ता खतरा। |
| भारत की पारंपरिक पनडुब्बी शक्ति में निकट भविष्य में वृद्धि नहीं | समुद्री निरोध (Undersea Deterrence) बनाए रखने में संभावित अंतर। |
| तटीय जल में पनडुब्बी रोधी युद्ध की जटिलता | उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें बेअसर करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। |
| रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता | उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास और स्वदेशीकरण के लिए निरंतर निवेश की मांग। |
आगे की राह
- भारतीय नौसेना के लिए पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए ASW-SWC कार्यक्रम को तेजी से पूरा करना।
- घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और स्वदेशीकरण के स्तर को बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना।
- हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को बढ़ाने के लिए निगरानी प्रणालियों और खुफिया जानकारी साझाकरण को मजबूत करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संयुक्त अभ्यास के माध्यम से सहयोगी देशों के साथ पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं का आदान-प्रदान करना।
- नौसेना कर्मियों के लिए उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना ताकि वे नई प्रौद्योगिकियों और युद्ध प्रणालियों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
- भारत की पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े की कमी को दूर करने के लिए नई पनडुब्बियों के अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पनडुब्बी रोधी युद्धपोत · उथले पानी के क्राफ्ट · भारतीय नौसेना · हिंद महासागर क्षेत्र · स्वदेशी रक्षा उत्पादन · आत्मनिर्भर भारत · समुद्री सुरक्षा · तटीय सुरक्षा · चीन-पाकिस्तान नौसेना विस्तार · रणनीतिक महत्व
अवधारणा प्रवाह
चीन और पाकिस्तान द्वारा पनडुब्बी बेड़े का विस्तार → हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री चुनौतियाँ → भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता → स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘मालवन’ का कमीशनिंग → भारत की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘मालवन’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ‘मालवन’ कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आठ ‘माहे’ श्रेणी के ASW-SWC में से दूसरा है।
2. इन जहाजों का प्राथमिक उद्देश्य गहरे समुद्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देना है।
3. ‘मालवन’ में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘मालवन’ कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘माहे’ श्रेणी का दूसरा जहाज है। कथन 2 गलत है क्योंकि इन जहाजों का प्राथमिक उद्देश्य उथले पानी (लिटोरल वाटर्स) में पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देना है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘मालवन’ में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक उदाहरण है।
Q2. एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्यक्रम के तहत निम्नलिखित में से कौन सी जहाज निर्माण कंपनियां शामिल हैं?
1. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
2. गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स
3. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — ASW-SWC कार्यक्रम के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ‘माहे’ श्रेणी के जहाजों का निर्माण कर रहा है, जबकि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ‘अरनाला’ श्रेणी के जहाजों का निर्माण कर रहा है। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड इस कार्यक्रम में शामिल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चीनी और पाकिस्तानी पनडुब्बी गतिविधियों के संदर्भ में, भारतीय नौसेना के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) जैसे स्वदेशी जहाजों का प्रेरण कितना महत्वपूर्ण है? भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में ये जहाज किस प्रकार योगदान करते हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी क्षमताओं का उल्लेख करते हुए ASW-SWC के प्रेरण की तात्कालिकता और महत्व पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, इन जहाजों की क्षमताओं (उथले पानी में पनडुब्बी का पता लगाना, ट्रैक करना और बेअसर करना, तटीय और बंदरगाह सुरक्षा) और भारतीय नौसेना की समग्र समुद्री सुरक्षा रणनीति में उनके योगदान (जैसे स्वदेशीकरण, लागत-प्रभावशीलता, लचीलापन) का विश्लेषण करें। निष्कर्ष में, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में इनके महत्व को रेखांकित करें।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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