26 Sep भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को ‘कठपुतली शासन’ कहा, आतंकवाद के परिणामों की चेतावनी दी
✎ भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक बताते हुए जम्मू और कश्मीर पर अपनी संप्रभुता दोहराई।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), आतंकवाद, जम्मू और कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), भारत की संप्रभुता, आतंकवाद-रोधी नीतियाँ
- Essay: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आतंकवाद की चुनौती, भारत की विदेश नीति के निर्धारक तत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक बताते हुए जम्मू और कश्मीर पर अपनी संप्रभुता दोहराई।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा कश्मीर मुद्दे और 2025 के संघर्ष के संबंध में दिए गए बयानों का कड़ा जवाब दिया। भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक बताते हुए चेतावनी दी कि उसके लगातार आतंकवादी कृत्यों के गंभीर परिणाम होंगे। भारत ने पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक हालात और सेना के प्रभुत्व पर भी प्रकाश डाला।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में प्रत्येक वर्ष सदस्य देशों के प्रमुख अपने देशों के दृष्टिकोण और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं।
- जम्मू और कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है, और भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस स्थिति को दृढ़ता से दोहराता रहा है।
- भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है और उसने पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाया है।
- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भारत का वह क्षेत्र है जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, और भारत इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और सुसंगत नीति का पालन करता है, जिसमें किसी भी रूप में आतंकवाद को अस्वीकार करना शामिल है।
- भारत ने 9/11 जैसे वैश्विक आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का भी उल्लेख किया, जो आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान के दोहरे रवैये को दर्शाता है।
भारत की ‘जवाब देने का अधिकार’ (Right of Reply) नीति
- ‘जवाब देने का अधिकार’ (Right of Reply) संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक प्रक्रियागत उपकरण है।
- यह किसी भी सदस्य देश को दूसरे देश द्वारा लगाए गए आरोपों, गलत बयानों या भ्रामक सूचनाओं का खंडन करने का अवसर प्रदान करता है।
- इसका उपयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब किसी देश के प्रतिनिधि को लगता है कि उसके देश, उसकी नीतियों या उसकी संप्रभुता के खिलाफ अनुचित टिप्पणी की गई है।
- भारत ने इस अधिकार का प्रयोग पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के उन बयानों का खंडन करने के लिए किया जिनमें कश्मीर मुद्दे को उठाया गया था और भारत के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए थे।
- यह नीति देशों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने तथ्यों को प्रस्तुत करने का एक वैध मंच प्रदान करती है।
- यह कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी देश को अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम बनाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रत्युत्तर | अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की संप्रभुता और आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति को दर्शाता है। |
| आतंकवाद पर पाकिस्तान को चेतावनी | वैश्विक आतंकवाद के वित्तपोषण और समर्थन के खिलाफ भारत की दृढ़ स्थिति को रेखांकित करता है। |
| जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख | यह दोहराता है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के दावों को खारिज करता है। |
| पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों का मुद्दा | पाकिस्तान द्वारा PoK में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करने का प्रयास। |
महत्व
कूटनीतिक महत्व
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रमुख वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के आतंकवाद के समर्थन और उसके आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया है।
- यह भारत की ‘आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता’ (Zero-Tolerance to Terrorism) की नीति को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से प्रस्तुत करता है।
सुरक्षा महत्व
- यह क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खतरों को रेखांकित करता है, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ में।
- भारत ने 9/11 जैसे वैश्विक आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का उल्लेख कर, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की दोहरी नीति पर सवाल उठाया है।
क्षेत्रीय स्थिरता
- जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत की स्पष्ट स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाकर, भारत ने इस क्षेत्र में पाकिस्तान की भूमिका पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।
चुनौतियाँ
1. सीमा पार आतंकवाद
- पाकिस्तान से लगातार होने वाला सीमा पार आतंकवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
- आतंकी समूहों को मिलने वाला समर्थन क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को बाधित करता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन
2. अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर गलत सूचना का प्रसार
- पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर कश्मीर मुद्दे पर गलत जानकारी और झूठे दावे प्रस्तुत करना।
- यह भारत की छवि को धूमिल करने और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का प्रयास है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति
3. पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता
- पाकिस्तान में सेना के प्रभुत्व और राजनीतिक अस्थिरता का क्षेत्रीय सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- यह आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करता है।
यूपीएससी लिंक: भारत के पड़ोसी संबंध, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आतंकवाद का समर्थन | पाकिस्तान द्वारा आतंकी समूहों को लगातार समर्थन देना वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। |
| जम्मू-कश्मीर पर गलत दावे | पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। |
| PoK में मानवाधिकार उल्लंघन | पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नागरिकों के अधिकारों का हनन और हिंसा की घटनाएं। |
| अंतर्राष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग | संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों का उपयोग भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए करना। |
आगे की राह
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ स्थिति को लगातार बनाए रखना।
- पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के समर्थन के ठोस सबूतों को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत करना।
- आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) और समर्थन पर अंकुश लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
- जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता और अखंडता को लेकर कोई समझौता न करने की नीति बनाए रखना।
- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाना।
- क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना, बशर्ते आतंकवाद का समर्थन बंद हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आतंकवाद · संयुक्त राष्ट्र · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · भारत-पाकिस्तान संबंध · राष्ट्रीय सुरक्षा · कूटनीति · सीमा पार आतंकवाद · जम्मू-कश्मीर · पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर · संयुक्त राष्ट्र महासभा
अवधारणा प्रवाह
पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाना → भारत द्वारा प्रत्युत्तर का अधिकार (Right of Reply) का प्रयोग → भारत द्वारा पाकिस्तान के आतंकवाद के समर्थन को उजागर करना → जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभु स्थिति को दोहराना → पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान आकर्षित करना → वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि अंग है।
2. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विपरीत, UNGA के प्रस्ताव सदस्य देशों पर बाध्यकारी नहीं होते हैं।
3. भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘जवाब के अधिकार’ (Right of Reply) का प्रयोग किया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। UNGA संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है और यह विचार-विमर्श और नीति-निर्माण के लिए एक मंच प्रदान करता है। कथन 2 सही है। UNGA के प्रस्तावों को ‘सिफारिशों’ के रूप में देखा जाता है और वे सदस्य देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते हैं, जबकि UNSC के प्रस्ताव बाध्यकारी हो सकते हैं। कथन 3 सही है। भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के कश्मीर मुद्दे पर दिए गए बयान के जवाब में ‘जवाब के अधिकार’ का प्रयोग किया, जैसा कि समाचार में बताया गया है।
Q2. अभिकथन (A): भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को उठाता रहा है।
कारण (R): भारत का मानना है कि आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है और इसे किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है। भारत विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को लगातार उठाता रहा है। कारण (R) भी सत्य है। भारत की विदेश नीति आतंकवाद को अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा मानती है और इस पर शून्य-सहिष्णुता (zero-tolerance) की नीति अपनाती है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है, क्योंकि भारत इसी विश्वास के कारण आतंकवाद के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाने में भारत की कूटनीति के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, भारत-पाकिस्तान संबंधों में जम्मू-कश्मीर के विशेष संदर्भ में सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाने में भारत की कूटनीति का संक्षिप्त परिचय दें।
2. भारत की कूटनीति का महत्व:
क. वैश्विक जनमत निर्माण: आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और समर्थन जुटाना।
ख. पाकिस्तान को अलग-थलग करना: सीमा पार आतंकवाद में उसकी भूमिका को उजागर करना।
ग. अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानदंडों को सुदृढ़ करना: आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना।
घ. राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा: भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरों को उजागर करना।
ङ. बहुपक्षीय मंचों का उपयोग: संयुक्त राष्ट्र, FATF, SCO जैसे मंचों पर सक्रिय भागीदारी।
3. भारत-पाकिस्तान संबंधों में सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियाँ:
क. जम्मू-कश्मीर का मुद्दा: पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को ‘विवादित क्षेत्र’ के रूप में प्रस्तुत करना और आतंकवाद को ‘स्वतंत्रता संग्राम’ के रूप में महिमामंडित करना।
ख. प्रॉक्सी युद्ध: पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को प्रशिक्षण, वित्तपोषण और घुसपैठ में सहायता।
ग. अस्थिरता और संघर्ष: सीमा पर लगातार तनाव, युद्धविराम उल्लंघन और आतंकी हमले।
घ. क्षेत्रीय विकास में बाधा: आतंकवाद के कारण आर्थिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव।
ङ. अविश्वास और संवादहीनता: आतंकवाद के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और सार्थक बातचीत का अभाव।
4. निष्कर्ष: आतंकवाद से निपटने के लिए भारत की दृढ़ कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दें, साथ ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सीमा पार आतंकवाद के समाधान की अनिवार्यता को भी रेखांकित करें।
स्रोत: orissapost.com
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