भारत बना जहाज रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेता: नियामकीय बदलाव और उपलब्धियां

भारत में जहाज रीसाइक्लिंग: नियामकीय रूपातंरण और वैश्विक नेतृत्व — concept mind map

भारत बना जहाज रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेता: नियामकीय बदलाव और उपलब्धियां

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जहाज रीसाइक्लिंग प्रक्रिया

✎ भारत ने मजबूत नियामक ढांचे और यार्ड आधुनिकीकरण के माध्यम से जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय स्थिरता के लक्ष्यों को बढ़ावा देता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (मानव भूगोल: उद्योग)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, औद्योगिक नीति, चक्रीय अर्थव्यवस्था), पर्यावरण (प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (नवीकरणीय संसाधन, सामग्री विज्ञान)
  • Prelims: जहाज रीसाइक्लिंग, हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौता, अलंग-सोसिया क्लस्टर, चक्रीय अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, UNCTAD, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: चक्रीय अर्थव्यवस्था: भारत के आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में इसकी भूमिका, भारत का समुद्री क्षेत्र: आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने मजबूत नियामक ढांचे और यार्ड आधुनिकीकरण के माध्यम से जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय स्थिरता के लक्ष्यों को बढ़ावा देता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत का जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र हाल के वर्षों में एक आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग के रूप में विकसित हुआ है। 2025 में, भारत वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग में अग्रणी राष्ट्र बन गया, जिसकी वैश्विक बाजार में भागीदारी 2024 के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई। इस उल्लेखनीय वृद्धि ने देश के समुद्री और औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है, जो मजबूत नियामक ढांचे, यार्ड आधुनिकीकरण और हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते के साथ संयोजन का परिणाम है।

पृष्ठभूमि

  • जहाज रीसाइक्लिंग समुद्री जीवनचक्र का एक अभिन्न अंग है, जो जहाजों को उनके परिचालन जीवन के अंत में सुरक्षित, पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत और संसाधन-कुशल विनष्टीकरण में सक्षम बनाती है।
  • यह क्षेत्र स्टील और अन्य पुन: प्रयोज्य सामग्रियों की रिकवरी के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के उद्देश्यों में सहायता करता है, साथ ही श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण की भी रक्षा करता है।
  • भारत में अलंग-सोसिया क्लस्टर देश की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग यार्डों में से एक है।
  • मजबूत कानून और बढ़ी हुई संस्थागत निगरानी ने पारंपरिक विनष्टीकरण कार्यप्रणालियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग में परिवर्तन को प्रेरित किया है, जिसमें अनुपालन, स्थिरता और श्रमिक सुरक्षा अब इसके प्रचालन के केंद्र में हैं।
  • रीसाइक्लिंग की मात्रा भी 2024 में 1.86 मिलियन सकल टन (GT) से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन GT हो गई, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि है।

जहाज रीसाइक्लिंग क्या है?

  • जहाज रीसाइक्लिंग वह प्रक्रिया है जिसमें जहाजों को उनके परिचालन जीवन के अंत में सुरक्षित, पर्यावरण की दृष्टि से सुदृढ़ और संसाधन-कुशल तरीके से तोड़ा जाता है।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य जहाजों से स्टील, धातु और अन्य उपयोगी सामग्रियों को पुनर्प्राप्त करना है ताकि उन्हें नए उत्पादों के निर्माण में पुन: उपयोग किया जा सके।
  • यह प्रक्रिया घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है, जिससे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम होती है और आपूर्ति सुरक्षा मजबूत होती है।
  • पुनर्नवीकृत स्टील को प्राथमिक इस्पात उत्पादन की तुलना में बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होता है, जो भारत की स्थिरता और डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) उद्देश्यों में सहायता करता है।
  • विनियमित जहाज रीसाइक्लिंग जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है, जिससे समुद्री और तटीय प्रदूषण के जोखिम को कम किया जा सकता है।
  • यह क्षेत्र व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित करता है और परिवहन, री-रोलिंग मिल, उपकरण आपूर्तिकर्ता और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं जैसे संबद्ध उद्योगों के एक विस्तृत नेटवर्क को बनाए रखता है।
  • भारत ने जहाज रीसाइक्लिंग विधेयक, 2019 (Ship Recycling Bill, 2019) जैसे व्यापक कानून और हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते (Hong Kong International Convention) के अनुपालन के माध्यम से इस क्षेत्र में सुरक्षा, अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वैश्विक नेतृत्व 2025 में भारत जहाज रीसाइक्लिंग में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बन गया, वैश्विक बाजार में 35.4% हिस्सेदारी के साथ।
मात्रा में वृद्धि जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा 2024 में 1.86 मिलियन सकल टन से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन सकल टन हो गई, जो लगभग 60% की वृद्धि है।
नियामकीय ढाँचा व्यापक कानून और हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते (Hong Kong International Agreement) के साथ संयोजन ने सुरक्षा, अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया है।
अलंग-सोसिया क्लस्टर यह भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ बना हुआ है, जो इस क्षेत्र के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा स्टील और अन्य पुन: प्रयोज्य सामग्रियों की रिकवरी के माध्यम से संसाधन-कुशल उपयोग और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के उद्देश्यों में सहायता।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • विनियमित जहाज रीसाइक्लिंग जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है, जिससे समुद्री और तटीय प्रदूषण का जोखिम कम होता है।
  • खतरनाक सामग्रियों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती है, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा होती है।
  • पुनर्नवीकृत स्टील के उपयोग से प्राथमिक इस्पात उत्पादन की तुलना में बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है।

संसाधन महत्व

  • घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है, जिससे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम होती है।
  • आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करती है और कुशल संसाधन उपयोग में सहायता करती है, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

आर्थिक और औद्योगिक महत्व

  • जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित करता है, जिससे श्रमिकों की आजीविका में सहायता मिलती है।
  • परिवहन, री-रोलिंग मिल, उपकरण आपूर्तिकर्ता और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं सहित संबद्ध उद्योगों के एक विस्तृत नेटवर्क को बनाए रखता है।
  • रिकवर किया गया स्टील और पुन: प्रयोज्य कंपोनेंट घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन में सहायता करते हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है।

रणनीतिक महत्व

  • भारत की संसाधन सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
  • समुद्री जीवनचक्र का एक अभिन्न अंग है, जो जहाजों के जिम्मेदार प्रबंधन को सुनिश्चित करती है।

चुनौतियाँ

1. सुरक्षा और स्वास्थ्य जोखिम

  • जहाज रीसाइक्लिंग में खतरनाक सामग्रियों (जैसे एस्बेस्टस, भारी धातुएँ, तेल अवशेष) का प्रबंधन शामिल होता है, जिससे श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न होते हैं।
  • पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) और कठोर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, खासकर अनौपचारिक क्षेत्रों में।

2. पर्यावरणीय अनुपालन

  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों (जैसे हांगकांग कन्वेंशन) का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना, विशेष रूप से अपशिष्ट निपटान और प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में, एक सतत चुनौती है।
  • जहाज रीसाइक्लिंग गतिविधियों से होने वाले समुद्री और तटीय प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना।

3. प्रौद्योगिकी और आधुनिकीकरण

  • रीसाइक्लिंग प्रक्रियाओं में उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाना, विशेष रूप से छोटे यार्डों में, पूंजी-गहन हो सकता है।
  • यार्ड आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए निरंतर निवेश की आवश्यकता।

4. कौशल विकास और प्रशिक्षण

  • जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के लिए विशेष कौशल और सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करना ताकि वे आधुनिक और सुरक्षित प्रक्रियाओं का पालन कर सकें।
  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यबल तैयार करना।

5. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा

  • अन्य जहाज रीसाइक्लिंग देशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना, विशेषकर लागत-प्रभावशीलता और नियामक वातावरण के संदर्भ में।
  • वैश्विक बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने के लिए निरंतर नवाचार और दक्षता में सुधार की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन जहाजों में मौजूद विषैले पदार्थों का सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से निपटान।
श्रमिक सुरक्षा रीसाइक्लिंग प्रक्रियाओं के दौरान श्रमिकों के लिए दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना।
प्रौद्योगिकी अंतराल आधुनिक और कुशल रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने में धीमी गति।
नियामकीय प्रवर्तन कठोर कानूनों और विनियमों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करना।
बुनियादी ढाँचा रीसाइक्लिंग यार्डों के आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार के लिए पर्याप्त निवेश।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मेक इन इंडिया (Make in India)
  • आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat)

आगे की राह

  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों, विशेषकर हांगकांग कन्वेंशन, के पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे को और मजबूत करना और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र स्थापित करना।
  • जहाज रीसाइक्लिंग यार्डों में उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना, जिससे दक्षता और सुरक्षा में सुधार हो।
  • श्रमिकों के लिए व्यापक सुरक्षा प्रशिक्षण और स्वास्थ्य निगरानी कार्यक्रम लागू करना, साथ ही व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • खतरनाक अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन और निपटान के लिए समर्पित अवसंरचना और सुविधाओं का विकास करना।
  • घरेलू इस्पात उद्योग के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना ताकि रीसाइक्लिंग से प्राप्त स्क्रैप स्टील का अधिकतम उपयोग हो सके और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले।
  • जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना ताकि नई और अधिक टिकाऊ रीसाइक्लिंग विधियों का पता लगाया जा सके।
  • वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए लागत-प्रभावशीलता और परिचालन दक्षता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जहाज रीसाइक्लिंग · चक्रीय अर्थव्यवस्था · हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौता · संसाधन सुरक्षा · पर्यावरण स्थिरता · आर्थिक संवृद्धि · अलंग-सोसिया क्लस्टर · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · समुद्री औद्योगिक परिदृश्य · ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन · श्रम सुरक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति का संरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

जहाजों का परिचालन जीवन समाप्त होना  →  जिम्मेदार और सुरक्षित रीसाइक्लिंग की आवश्यकता  →  भारत द्वारा नियामक सुधार और आधुनिकीकरण  →  हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते का अनुपालन  →  वैश्विक बाजार में भारत का नेतृत्व और हिस्सेदारी में वृद्धि  →  संसाधन पुनर्प्राप्ति, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय लाभ

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जहाज रीसाइक्लिंग घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है।
2. पुनर्नवीकृत इस्पात को प्राथमिक इस्पात उत्पादन की तुलना में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. भारत 2025 में जहाज रीसाइक्लिंग में विश्व स्तर पर पहले स्थान पर रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि जहाज रीसाइक्लिंग से प्राप्त लौह स्क्रैप घरेलू इस्पात उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। कथन 2 गलत है क्योंकि पुनर्नवीकृत इस्पात को प्राथमिक इस्पात उत्पादन की तुलना में बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। कथन 3 सही है क्योंकि UNCTAD की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025 में जहाज रीसाइक्लिंग में विश्व स्तर पर पहले स्थान पर रहा।

Q2. भारत में जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र के संदर्भ में, ‘अलंग-सोसिया क्लस्टर’ का क्या महत्व है?

  1. यह भारत का सबसे बड़ा जहाज निर्माण केंद्र है।
  2. यह भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है।
  3. यह एक प्रमुख समुद्री अनुसंधान संस्थान है।
  4. यह भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट है।

उत्तर: यह भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है। — अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है, जो देश के जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र के बढ़ते महत्व और वैश्विक नेतृत्व पर चर्चा कीजिए। यह क्षेत्र किस प्रकार चक्रीय अर्थव्यवस्था, संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के उद्देश्यों में सहायता करता है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: भारत में जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र के वर्तमान परिदृश्य और वैश्विक स्थिति का संक्षिप्त विवरण (जैसे 2025 में वैश्विक नेतृत्व, 35.4% बाजार हिस्सेदारी)।
मुख्य भाग 1: जहाज रीसाइक्लिंग के महत्व पर चर्चा करें:
• पर्यावरणीय महत्व: असुरक्षित निपटान की रोकथाम, समुद्री और तटीय प्रदूषण में कमी, खतरनाक सामग्रियों का सुरक्षित संचालन।
• संसाधन महत्व: घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का स्रोत, आयात पर निर्भरता में कमी, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, कम ऊर्जा खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन।
• आर्थिक और औद्योगिक महत्व: व्यापक रोजगार सृजन, संबद्ध उद्योगों का समर्थन (परिवहन, री-रोलिंग मिल), ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप।
मुख्य भाग 2: भारत के वैश्विक नेतृत्व और नियामक रूपांतरण पर प्रकाश डालें:
• UNCTAD रिपोर्ट के अनुसार 2025 में प्रथम स्थान, 2024 से 2025 तक बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि (30.1% से 35.4%)।
• नियामक सुधार: व्यापक कानून, हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते के साथ संयोजन, यार्ड आधुनिकीकरण, सुरक्षा, अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना।
• अलंग-सोसिया क्लस्टर की भूमिका।
निष्कर्ष: भारत के समुद्री औद्योगिक परिदृश्य में जहाज रीसाइक्लिंग के अभिन्न अंग के रूप में भविष्य की संभावनाओं और सतत विकास लक्ष्यों में इसके योगदान पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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