मिशन कर्मयोगी: सरकारी विभागों में AI कौशल विकास की नई पहल

मिशन कर्मयोगी: सरकारी विभागों में AI कौशल विकास की नई पहल

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय।  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं उनके अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव; सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता।
  • Prelims: मिशन कर्मयोगी, iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, ई-गवर्नेंस, क्षमता निर्माण
  • Essay: भारत में शासन में प्रौद्योगिकी का एकीकरण: अवसर और चुनौतियाँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भविष्य के भारत के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित कर रही है, ताकि शासन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके, जबकि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत सरकार प्रशासनिक अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित करने को उच्च प्राथमिकता दे रही है। ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। यह जानकारी सरकारी मंत्रालयों और विभागों में AI के बढ़ते उपयोग और इससे संबंधित क्षमता निर्माण के प्रयासों को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण के लिए ‘मिशन कर्मयोगी’ की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है।
  • इस मिशन के तहत, iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म एक एकीकृत ऑनलाइन प्रशिक्षण मंच है जो विभिन्न सरकारी कर्मचारियों को कौशल और ज्ञान प्रदान करता है।
  • वर्तमान में, iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी पंजीकृत हैं।
  • AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण को सार्वजनिक कार्यबल को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
  • सरकार का उद्देश्य AI को शासन में एकीकृत करके दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार करना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या है?

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) कंप्यूटर विज्ञान का एक क्षेत्र है जो मशीनों को मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है।
  • इसमें सीखने (learning), समस्या-समाधान (problem-solving), निर्णय लेने (decision-making) और पैटर्न पहचानने (pattern recognition) जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
  • AI प्रणालियाँ डेटा का विश्लेषण करती हैं, पैटर्न की पहचान करती हैं और उन पैटर्न के आधार पर भविष्यवाणियां या कार्य करती हैं।
  • यह मशीन लर्निंग (Machine Learning), डीप लर्निंग (Deep Learning), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (Natural Language Processing – NLP) और कंप्यूटर विजन (Computer Vision) जैसे उप-क्षेत्रों को समाहित करता है।
  • शासन में AI का उपयोग डेटा विश्लेषण, नीति निर्माण में सहायता, सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में सुधार और दक्षता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
  • भारत में, AI का उपयोग स्मार्ट शहरों, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है।
  • AI के नैतिक और सामाजिक निहितार्थों पर भी विचार किया जा रहा है, विशेष रूप से डेटा गोपनीयता और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह के संबंध में।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मिशन कर्मयोगी प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण का प्रमुख कार्यक्रम, भविष्य के लिए तैयार करने हेतु कौशल प्रदान करना।
आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को जोड़ता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती प्रौद्योगिकियों पर पाठ्यक्रम प्लेटफॉर्म पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पूर्ण किए हैं।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत डेटा के वैध प्रसंस्करण और सहमति सुनिश्चित करता है।
AI में क्षमता निर्माण को उच्च प्राथमिकता सार्वजनिक कार्यबल को कौशल और ज्ञान से सशक्त बनाना।

महत्व

प्रशासनिक दक्षता और सुशासन

  • सरकारी कर्मचारियों को AI और डिजिटल कौशल से लैस करना प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगा, जिससे निर्णय लेने में तेजी आएगी और दक्षता बढ़ेगी।
  • AI-आधारित उपकरण डेटा विश्लेषण में सहायता कर सकते हैं, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और बेहतर सेवा वितरण संभव होगा।
  • डिजिटल साक्षरता और AI का उपयोग नागरिकों के साथ सरकारी इंटरफेस को बेहतर बना सकता है, जिससे सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा मिलेगा।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

  • AI के उपयोग से सरकारी सेवाओं की लागत कम हो सकती है, जिससे सार्वजनिक संसाधनों का अधिक कुशल आवंटन होगा।
  • डिजिटल कौशल से लैस कार्यबल भारत को चौथी औद्योगिक क्रांति (Fourth Industrial Revolution) में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
  • AI-आधारित समाधानों का उपयोग सामाजिक कल्याण योजनाओं के लक्षित वितरण और भ्रष्टाचार को कम करने में सहायक हो सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता

  • AI में क्षमता निर्माण साइबर सुरक्षा (Cyber Security) खतरों से निपटने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्वदेशी AI क्षमताओं का विकास बाहरी निर्भरता को कम करेगा और भारत की तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करेगा।
  • सरकारी कार्यों में AI का सुरक्षित और नैतिक उपयोग डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक होगा।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल डिवाइड और पहुंच

  • देश के विभिन्न हिस्सों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी में असमानता AI प्रशिक्षण तक समान पहुंच में बाधा बन सकती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए उन्नत डिजिटल प्रशिक्षण तक पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

2. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • सरकारी कार्यों में AI के बढ़ते उपयोग से व्यक्तिगत और संवेदनशील डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रभावी कार्यान्वयन और डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) को रोकने के लिए मजबूत तंत्र की आवश्यकता है।

3. नैतिक और जवाबदेही के मुद्दे

  • AI-आधारित निर्णय लेने में पूर्वाग्रह (Bias) की संभावना है, जिससे भेदभाव और अन्याय हो सकता है।
  • AI प्रणालियों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित करती हों।

4. तकनीकी बुनियादी ढाँचा और विशेषज्ञता

  • AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने और बनाए रखने के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढाँचे और विशेषज्ञता की आवश्यकता है, जो सभी सरकारी विभागों में समान रूप से उपलब्ध नहीं हो सकती है।
  • AI विशेषज्ञों की कमी और सरकारी क्षेत्र में उन्हें आकर्षित करने और बनाए रखने की चुनौती।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
AI कौशल अंतराल सरकारी कर्मचारियों के बीच AI और डिजिटल कौशल की कमी।
डेटा सुरक्षा AI के उपयोग में व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
नैतिक विचार AI-आधारित निर्णयों में पूर्वाग्रह और जवाबदेही की कमी।
बुनियादी ढाँचा AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढाँचे का अभाव।
कानूनी ढाँचा AI के नैतिक और सुरक्षित उपयोग के लिए स्पष्ट कानूनी और नियामक ढांचे की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन कर्मयोगी
  • आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म

आगे की राह

  • AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सरकारी कर्मचारियों के लिए निरंतर और अद्यतन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना।
  • AI के नैतिक उपयोग के लिए एक स्पष्ट नीति और दिशानिर्देश विकसित करना, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और पूर्वाग्रह को कम करने पर जोर दिया जाए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) के माध्यम से AI विशेषज्ञता और तकनीकी बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना।
  • सरकारी सेवाओं में AI के उपयोग के लिए पायलट परियोजनाओं (Pilot Projects) को बढ़ावा देना और उनके परिणामों का मूल्यांकन करना।
  • डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और AI प्रशिक्षण तक पहुंच बढ़ाने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना।
  • AI के संभावित सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर नियमित शोध और मूल्यांकन करना ताकि नीतिगत समायोजन किए जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन कर्मयोगी · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ · क्षमता निर्माण · सरकारी कर्मचारी · आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 · डेटा गोपनीयता · ई-शासन · प्रशासनिक सुधार

अवधारणा प्रवाह

मिशन कर्मयोगी का शुभारंभ  →  सरकारी अधिकारियों के क्षमता निर्माण पर ध्यान  →  AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षण को प्राथमिकता  →  आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर पाठ्यक्रम उपलब्ध  →  सरकारी कर्मचारियों द्वारा AI कौशल का अधिग्रहण  →  प्रशासनिक दक्षता और सुशासन में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य भारत में प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है।
2. आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 200 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
3. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए व्यक्ति की स्पष्ट सहमति को अनिवार्य करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि प्लेटफॉर्म पर AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर 218 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि अधिनियम व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए व्यक्ति की स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट सहमति को अनिवार्य करता है।

Q2. मिशन कर्मयोगी के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है।
2. इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को डिजिटल कौशल से सशक्त बनाना है।
3. आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म इसका एक अभिन्न अंग है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि मिशन कर्मयोगी केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों दोनों के सरकारी कर्मचारियों के लिए है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि इसका उद्देश्य डिजिटल कौशल प्रदान करना है और आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म इसका केंद्रीय मंच है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी मंत्रालयों/विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षमता निर्माण के महत्व का परीक्षण करें। साथ ही, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, इस संदर्भ में डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने में कैसे सहायक है, चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मिशन कर्मयोगी और सरकारी सेवाओं में AI के बढ़ते महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. **AI क्षमता निर्माण का महत्व:**
* **दक्षता और पारदर्शिता:** सरकारी प्रक्रियाओं में सुधार।
* **नीति निर्माण:** डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता।
* **नागरिक-केंद्रित सेवाएँ:** सेवाओं की बेहतर डिलीवरी।
* **भविष्य के लिए तैयारी:** प्रशासनिक अधिकारियों को आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार करना।
* **आई-गोट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म:** AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों का उल्लेख।
3. **डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की भूमिका:**
* **अधिनियम का उद्देश्य:** व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को विनियमित करना।
* **सहमति का सिद्धांत:** व्यक्ति की स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट सहमति की अनिवार्यता।
* **डेटा फिड्यूशियरी के दायित्व:** डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना।
* **AI के संदर्भ में:** AI प्रणालियों द्वारा डेटा के उपयोग में नैतिक और कानूनी मानकों का पालन।
* **विश्वास निर्माण:** नागरिकों का डिजिटल सेवाओं में विश्वास बढ़ाना।
4. **निष्कर्ष:** AI और डेटा संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह ई-शासन की दिशा में आगे बढ़ने का महत्व।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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