11 Aug ‘मेक इन इंडिया’ से समुद्री ताकत: 10,000 करोड़ की कंटेनर योजना क्या है? UPSC के लिए महत्वपूर्ण
✎ कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) भारत की समुद्री व्यापार आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका लक्ष्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना और एक मजबूत…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — अवसंरचना | GS Paper III — निवेश मॉडल
- Prelims: कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS), बीस-फिट समतुल्य इकाइयाँ (TEUs), UNCTAD, मेक इन इंडिया, मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास, ISO मानक
- Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में लॉजिस्टिक्स और अवसंरचना की भूमिका, भारत की बढ़ती समुद्री अर्थव्यवस्था: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) भारत की समुद्री व्यापार आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका लक्ष्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना और एक मजबूत कंटेनर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य देश में एक मजबूत घरेलू कंटेनर विनिर्माण आधार स्थापित करना है। यह योजना 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पूरे कंटेनर पारिस्थितिकी तंत्र में विनिर्माण, निवेश और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देगी। यह पहल भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने, रोजगार सृजित करने और दीर्घकालिक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, विशेष रूप से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों और आयात पर निर्भरता को कम करने के संदर्भ में।
पृष्ठभूमि
- वैश्विक व्यापार का लगभग 80% समुद्री मार्ग से होता है, जिसमें कंटेनरीकृत कार्गो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मूल्य का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, जो कुशल कंटेनर लॉजिस्टिक्स के रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
- हाल के भू-राजनीतिक तनावों, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों और बदलते शिपिंग मार्गों ने वैश्विक माल ढुलाई में कमजोरियों को उजागर किया है, जिससे भाड़ा-दर की अस्थिरता बढ़ी है और समुद्री परिवहन नेटवर्क पर दबाव पड़ा है।
- भारत की बढ़ती विनिर्माण और व्यापार महत्वाकांक्षाओं ने कंटेनरीकृत कार्गो आवाजाही की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि की है, लेकिन देश खाली कंटेनरों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, प्रति वर्ष लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों का आयात करता है।
- यह आयात निर्भरता भारत को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव, भाड़ा की अस्थिरता और आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बनाती है, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई है।
- कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर और मूल्य श्रृंखला में निवेश को प्रोत्साहित करके भारत में एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
- यह योजना ‘मेक इन इंडिया’, ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ और ‘मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास’ जैसी सरकारी पहलों का पूरक है, जो भारत की दीर्घकालिक समुद्री और व्यापार महत्वाकांक्षाओं में योगदान करती है।
कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) क्या है?
- CMAS की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी, जिसका उद्देश्य वित्तीय और संस्थागत सहायता के माध्यम से एक प्रतिस्पर्धी घरेलू कंटेनर विनिर्माण उद्योग स्थापित करना है।
- इसका मुख्य उद्देश्य शिपिंग कंटेनरों की भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना है।
- इसका उद्देश्य आयात निर्भरता को कम करना और भारत की आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करना है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
- शिपिंग कंटेनर मानकीकृत स्टील मालवाहक कंटेनर होते हैं जो जहाजों, रेलवे और सड़क वाहनों में कार्गो ले जाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जो ISO (मानकीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन) विनिर्देशों के अनुसार निर्मित होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 10,000 करोड़ रुपये का परिव्यय | पांच वर्षों में घरेलू कंटेनर विनिर्माण उद्योग को वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान करेगा। |
| घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा | भारत में एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने का लक्ष्य। |
| आयात निर्भरता में कमी | लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों के वार्षिक आयात को कम करके आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करना। |
| क्षमता वृद्धि का लक्ष्य | वार्षिक घरेलू विनिर्माण क्षमता को मौजूदा क्षमता से लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEUs (बीस-फिट समतुल्य इकाइयाँ) तक पहुंचाना। |
| रोजगार सृजन | कंटेनर पारिस्थितिकी तंत्र में विनिर्माण और संबंधित गतिविधियों से नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देगा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करेगा।
- कंटेनर आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और व्यापार संतुलन में सुधार होगा।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी से भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
सामरिक महत्व
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा और भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न होने वाले व्यवधानों के प्रति लचीलापन प्रदान करेगा।
- समुद्री क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा, जो ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के लक्ष्यों के अनुरूप है।
- भारत को एक प्रमुख विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
रोजगार और विकास
- कंटेनर विनिर्माण, संबद्ध उद्योगों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
- प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देगा, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का समावेश होगा।
- लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के समग्र विकास को गति देगा, जिससे व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार होगा।
चुनौतियाँ
1. प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता का अभाव
- कंटेनर विनिर्माण के लिए आवश्यक उन्नत प्रौद्योगिकियों और कुशल श्रमशक्ति की कमी एक चुनौती हो सकती है।
- गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक नीति, कौशल विकास
2. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- चीन जैसे स्थापित वैश्विक खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जिनके पास बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत लाभ हैं।
- घरेलू विनिर्माताओं को वैश्विक मानकों और गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, औद्योगिक विकास
3. कच्चे माल की उपलब्धता और लागत
- कंटेनर विनिर्माण के लिए आवश्यक उच्च गुणवत्ता वाले स्टील और अन्य कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: विनिर्माण क्षेत्र, आपूर्ति श्रृंखला
4. बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स
- विनिर्मित कंटेनरों को बंदरगाहों और अंतर्देशीय कंटेनर डिपो तक कुशलतापूर्वक पहुंचाने के लिए मजबूत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स (Multimodal Logistics) नेटवर्क की आवश्यकता।
- बंदरगाहों पर पर्याप्त हैंडलिंग क्षमता और भंडारण सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, परिवहन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आयात पर अत्यधिक निर्भरता | भारत प्रति वर्ष लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों का आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है। |
| माल ढुलाई दर की अस्थिरता | वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के कारण माल ढुलाई दरों में अस्थिरता भारतीय व्यापार को प्रभावित करती है। |
| आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान | भू-राजनीतिक तनाव और अन्य वैश्विक घटनाओं के कारण आपूर्ति-श्रृंखला में होने वाले व्यवधानों से व्यापार प्रभावित होता है। |
| घरेलू विनिर्माण क्षमता की कमी | भारत की वर्तमान कंटेनर उत्पादन क्षमता उसकी बढ़ती व्यापारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। |
| लॉजिस्टिक्स लागत | कंटेनर की उपलब्धता और आवाजाही से जुड़ी उच्च लॉजिस्टिक्स लागत भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS)
- मेक इन इंडिया
- मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047
- मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास
आगे की राह
- घरेलू विनिर्माताओं को अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कंटेनर विनिर्माण के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल तैयार करना।
- कच्चे माल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए नीतियां बनाना।
- बंदरगाहों और अंतर्देशीय लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का आधुनिकीकरण और विस्तार करना।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों और गुणवत्ता प्रमाणन का पालन सुनिश्चित करके घरेलू उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना ताकि निवेश और विशेषज्ञता को आकर्षित किया जा सके।
- निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के साथ कंटेनर विनिर्माण को एकीकृत करना ताकि वैश्विक बाजारों में पहुंच बढ़ाई जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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अवधारणा प्रवाह
वैश्विक व्यापार में कंटेनरीकृत लॉजिस्टिक्स का बढ़ता महत्व → भारत की बढ़ती व्यापारिक महत्वाकांक्षाएँ और आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार में वृद्धि → घरेलू कंटेनर विनिर्माण क्षमता की कमी और आयात पर अत्यधिक निर्भरता → आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों और माल ढुलाई दर की अस्थिरता का जोखिम → कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) की घोषणा → घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, आयात निर्भरता में कमी और रोजगार सृजन → भारत की समुद्री क्षमताओं और व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी।
2. इसका उद्देश्य पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ घरेलू कंटेनर विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना है।
3. यह योजना मौजूदा कंटेनर उत्पादन क्षमता को लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEUs तक की वार्षिक घरेलू विनिर्माण क्षमता का लक्ष्य रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि CMAS की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का परिव्यय पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये है। कथन 3 भी सही है क्योंकि इसका लक्ष्य वार्षिक घरेलू विनिर्माण क्षमता को 7.5 लाख TEUs तक बढ़ाना है, जो मौजूदा क्षमता का लगभग 10 गुना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक भारत में घरेलू कंटेनर विनिर्माण की आवश्यकता को बढ़ावा देता/देते है/हैं?
1. वैश्विक व्यापार में कंटेनरीकृत लॉजिस्टिक्स की बढ़ती भूमिका।
2. भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के कारण भाड़ा-दर की अस्थिरता।
3. भारत की बढ़ती आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार और आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — वैश्विक व्यापार में कंटेनरीकृत लॉजिस्टिक्स की बढ़ती भूमिका, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के कारण भाड़ा-दर की अस्थिरता, और भारत की बढ़ती आयात-निर्यात व्यापार के साथ आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता, ये सभी कारक भारत में घरेलू कंटेनर विनिर्माण की आवश्यकता को बढ़ावा देते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की बढ़ती व्यापार और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) के रणनीतिक महत्व का परीक्षण कीजिए। यह योजना भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन को बढ़ाने में कैसे योगदान दे सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: पहला भाग: कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) के रणनीतिक महत्व का परीक्षण करें। इसमें वैश्विक व्यापार में कंटेनरीकृत लॉजिस्टिक्स की भूमिका, भारत की आयात निर्भरता, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों का उल्लेख करें। ‘मेक इन इंडिया’, ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ और ‘मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास’ जैसी सरकारी पहलों के साथ इसके तालमेल पर प्रकाश डालें।
दूसरा भाग: चर्चा करें कि CMAS भारत की समुद्री क्षमताओं को कैसे मजबूत कर सकती है। इसमें घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि, आयात निर्भरता में कमी, भाड़ा-दर की अस्थिरता से बचाव, और रोजगार सृजन व आर्थिक संवृद्धि में योगदान जैसे बिंदु शामिल करें। आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन को बढ़ाने में इसके योगदान पर विशेष ध्यान दें, जिसमें वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के प्रति देश की संवेदनशीलता को कम करना शामिल है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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