यूएन ने कोलंबिया को दिया समर्थन, भूकंप से 111+ लोगों की मौत

UN offers support to Colombia after magnitude 7.4 earthquake kills dozens — concept mind map

यूएन ने कोलंबिया को दिया समर्थन, भूकंप से 111+ लोगों की मौत

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✎ भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है, और इससे निपटने के लिए आपदा प्रबंधन महत्वपूर्ण है, जिसमें तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति शामिल है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भूकंप, प्राकृतिक आपदाएँ)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र की भूमिका)
  • Prelims: भूकंप, रिक्टर स्केल, आपदा प्रबंधन, संयुक्त राष्ट्र (UN), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), आपदा जोखिम न्यूनीकरण
  • Essay: प्राकृतिक आपदाएँ और मानव समाज: चुनौतियाँ एवं समाधान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आपदा प्रबंधन में उसकी भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है, और इससे निपटने के लिए आपदा प्रबंधन महत्वपूर्ण है, जिसमें तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति शामिल है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, कोलंबिया के पश्चिमी क्षेत्र में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हो गई और बड़े पैमाने पर क्षति हुई। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कोलंबिया को सहायता प्रदान करने की पेशकश की है और स्थिति की निगरानी के लिए अपनी टीमों को सक्रिय कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी आपदा प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

पृष्ठभूमि

  • भूकंप कोलंबिया के चोको विभाग में सैन जोस डेल पालमर के पास केंद्रित था, लेकिन इसका असर पनामा, इक्वाडोर और वेनेजुएला जैसे पड़ोसी देशों में भी महसूस किया गया।
  • इस भूकंप के कारण भूस्खलन हुए, कई इमारतें ढह गईं और घरों तथा बुनियादी ढाँचे को गंभीर क्षति पहुँची।
  • कोलंबिया सरकार ने अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत कार्य जारी हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की टीमें राष्ट्रीय अधिकारियों और देश की आपदा जोखिम प्रबंधन एजेंसी के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही हैं।
  • यह घटना कोलंबिया के नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के ठीक तीन दिन बाद हुई, जिन्होंने बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

भूकंप और आपदा प्रबंधन क्या है?

  • भूकंप पृथ्वी की सतह के अचानक हिलने को कहते हैं, जो भूगर्भीय प्लेटों के खिसकने या ज्वालामुखी गतिविधि के कारण उत्पन्न ऊर्जा के अचानक निकलने से होता है। इसकी तीव्रता को रिक्टर स्केल (Richter Scale) पर मापा जाता है।
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management) एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें आपदाओं के प्रभावों को कम करने, उनसे निपटने और उनसे उबरने के लिए योजनाएँ, नीतियाँ और रणनीतियाँ शामिल होती हैं।
  • इसमें आपदा से पहले की तैयारी (जैसे चेतावनी प्रणाली, भवन संहिता), आपदा के दौरान की प्रतिक्रिया (जैसे खोज और बचाव, राहत कार्य) और आपदा के बाद की पुनर्प्राप्ति (जैसे पुनर्वास, पुनर्निर्माण) शामिल है।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) का उद्देश्य आपदाओं के कारणों को समझना और उनके जोखिमों को कम करने के लिए उपाय करना है, जिसमें भेद्यता (Vulnerability) को कम करना और क्षमता निर्माण (Capacity Building) शामिल है।
  • भारत में, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) जैसे संस्थान स्थापित किए गए हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आपदाओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर उन देशों के लिए जिनकी अपनी क्षमताएँ सीमित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियाँ अक्सर ऐसे प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आपदा प्रबंधन की चुनौतियाँ और बढ़ गई हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.4 की तीव्रता एक गंभीर भूकंप को दर्शाती है, जिससे व्यापक क्षति और जनहानि की संभावना होती है।
प्रभावित क्षेत्र पश्चिमी कोलंबिया, विशेष रूप से सैन जोस डेल पालमार के पास, भूकंप का केंद्र था, लेकिन इसके झटके पनामा, इक्वाडोर और वेनेजुएला जैसे पड़ोसी देशों में भी महसूस किए गए।
मानवीय क्षति कम से कम 111 लोगों की मौत और 87 से अधिक घायल होने की प्रारंभिक रिपोर्टें, साथ ही कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका, मानवीय संकट की गंभीरता को उजागर करती हैं।
बुनियादी ढाँचे को नुकसान घरों, इमारतों, स्वास्थ्य केंद्रों और शैक्षणिक सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, साथ ही परिवहन अवसंरचना भी प्रभावित हुई है, जिससे बचाव और राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कोलंबिया को सहायता की पेशकश की है, जिसमें स्थिति की निगरानी और राष्ट्रीय प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिए टीमें शामिल हैं, जो आपदा प्रबंधन में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को दर्शाता है।

महत्व

आपदा प्रबंधन और तैयारी

  • यह घटना प्राकृतिक आपदाओं के लिए प्रभावी आपदा जोखिम प्रबंधन (Disaster Risk Management) और तैयारी तंत्र की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
  • बचाव और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए मजबूत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों का महत्व स्पष्ट होता है।

बुनियादी ढाँचा और शहरी नियोजन

  • भूकंप-रोधी निर्माण तकनीकों और शहरी नियोजन में उनके एकीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
  • महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे जैसे अस्पताल, स्कूल और परिवहन नेटवर्क की सुदृढ़ता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

  • आपदाओं से निपटने में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की भूमिका को दर्शाता है, जो प्रभावित देशों को तकनीकी और मानवीय सहायता प्रदान करती हैं।
  • पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय सहयोग का महत्व भी उजागर होता है, क्योंकि भूकंप के झटके कई देशों में महसूस किए गए।

चुनौतियाँ

1. बचाव और राहत कार्य

  • मलबे में फंसे लोगों को निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है।
  • भूस्खलन और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, जिससे बचाव प्रयासों में देरी हो सकती है।

2. बुनियादी ढाँचे की बहाली

  • क्षतिग्रस्त घरों, अस्पतालों, स्कूलों और परिवहन नेटवर्क की मरम्मत और पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कनेक्टिविटी से नुकसान का पूरा आकलन करना और सहायता पहुंचाना कठिन हो रहा है।

3. मानवीय सहायता

  • विस्थापित लोगों के लिए आश्रय, भोजन, पानी और स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था करना एक तत्काल आवश्यकता है।
  • बच्चों सहित प्रभावित आबादी के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता और दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।

4. भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन

  • भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में भविष्य के जोखिमों का सटीक आकलन करना और उसके अनुसार शमन रणनीतियाँ विकसित करना महत्वपूर्ण है।
  • सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने के तरीके सिखाना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमित कनेक्टिविटी कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में संचार की कमी से नुकसान का पूरा आकलन करना और प्रभावी ढंग से सहायता पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
भूस्खलन भूकंप के कारण हुए भूस्खलन बचाव कार्यों में बाधा डाल रहे हैं और कुछ क्षेत्रों तक पहुंच को अवरुद्ध कर रहे हैं।
क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचा सड़कें, हवाई अड्डे और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे राहत सामग्री और कर्मियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
बढ़ती मृत्यु दर मलबे के नीचे फंसे लोगों और घायलों की संख्या बढ़ने से मृत्यु दर में वृद्धि की आशंका है, जिससे मानवीय संकट गहरा सकता है।
दीर्घकालिक पुनर्वास प्रभावित समुदायों के लिए घरों के पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और मनोवैज्ञानिक सहायता सहित दीर्घकालिक पुनर्वास एक बड़ी चुनौती होगी।

आगे की राह

  • बचाव और राहत कार्यों में तेजी लाना, जिसमें मलबे से लोगों को निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करना शामिल है।
  • प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक मानवीय सहायता (भोजन, पानी, आश्रय) की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे (सड़कें, पुल, संचार नेटवर्क) की तेजी से मरम्मत और बहाली करना ताकि राहत प्रयासों को सुगम बनाया जा सके।
  • भूकंप-रोधी निर्माण मानकों को लागू करना और भविष्य के जोखिमों को कम करने के लिए शहरी नियोजन में उनका एकीकरण करना।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) रणनीतियों को मजबूत करना और समुदाय-आधारित तैयारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाना ताकि संसाधनों और विशेषज्ञता को प्रभावी ढंग से जुटाया जा सके।
  • दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं को विकसित करना जिसमें आवास, आजीविका और प्रभावित आबादी के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता शामिल हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आपदा जोखिम न्यूनीकरण · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण · आपदा प्रतिक्रिया बल · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · संयुक्त राष्ट्र आपदा सहायता · भूकंपीय ज़ोनिंग · आपदा पूर्व तैयारी · पुनर्निर्माण और पुनर्वास · शहरी नियोजन · जलवायु परिवर्तन और आपदाएँ

अवधारणा प्रवाह

तीव्र भूकंप  →  व्यापक क्षति और जनहानि  →  बुनियादी ढाँचे का पतन  →  बचाव और राहत कार्यों की आवश्यकता  →  अंतर्राष्ट्रीय सहायता और सहयोग

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया था।
2. NDMA का अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है।
3. संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) आपदाओं के बाद राहत कार्यों के लिए सीधे धन उपलब्ध कराता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया था और इसका अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि UNDRR मुख्य रूप से आपदा जोखिम न्यूनीकरण नीतियों और रणनीतियों के समन्वय पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि सीधे राहत कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराने पर।

Q2. भूकंप के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है, जो एक रैखिक पैमाना है।
  2. भूकंप का अधिकेंद्र (Epicentre) वह बिंदु होता है जहाँ से भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के भीतर उत्पन्न होती हैं।
  3. भूकंपीय तरंगों में P-तरंगें, S-तरंगें और L-तरंगें शामिल होती हैं, जिनमें से P-तरंगें सबसे धीमी होती हैं।
  4. प्रशांत ‘अग्नि वलय’ (Pacific ‘Ring of Fire’) विश्व के अधिकांश भूकंपों और ज्वालामुखियों का क्षेत्र है।

उत्तर: प्रशांत ‘अग्नि वलय’ (Pacific ‘Ring of Fire’) विश्व के अधिकांश भूकंपों और ज्वालामुखियों का क्षेत्र है। — विकल्प (D) सही है। प्रशांत ‘अग्नि वलय’ विश्व का एक प्रमुख भूकंपीय और ज्वालामुखी क्षेत्र है। विकल्प (A) गलत है क्योंकि रिक्टर स्केल एक लघुगणकीय पैमाना है, रैखिक नहीं। विकल्प (B) गलत है क्योंकि अधिकेंद्र पृथ्वी की सतह पर वह बिंदु होता है जो भूकंप के उद्गम केंद्र (Hypocentre) के ठीक ऊपर होता है। उद्गम केंद्र वह बिंदु है जहाँ से भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के भीतर उत्पन्न होती हैं। विकल्प (C) गलत है क्योंकि P-तरंगें (प्राथमिक तरंगें) सबसे तेज़ होती हैं, न कि सबसे धीमी।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के लिए ‘सेंदाई फ्रेमवर्क’ (Sendai Framework) के प्रमुख उद्देश्यों और प्राथमिकताओं की विवेचना कीजिए। भारत में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में इस फ्रेमवर्क का क्या महत्व है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘सेंदाई फ्रेमवर्क’ का संक्षिप्त परिचय (कब और क्यों अपनाया गया)।
2. प्रमुख उद्देश्य: फ्रेमवर्क के मुख्य लक्ष्यों को सूचीबद्ध करें (जैसे आपदाओं से होने वाली मौतों, प्रभावित लोगों और आर्थिक नुकसान को कम करना)।
3. चार प्राथमिकताएँ: फ्रेमवर्क द्वारा निर्धारित चार प्राथमिकताओं का विस्तार से वर्णन करें:
क. आपदा जोखिम को समझना।
ख. आपदा जोखिम शासन को मजबूत करना।
ग. लचीलेपन के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश करना।
घ. प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए आपदा तैयारी को बढ़ाना और ‘बिल्ड बैक बेटर’ (Build Back Better) में सुधार करना।
4. भारत में भूकंप प्रबंधन में महत्व: भारत के संदर्भ में, विशेषकर भूकंप जैसी आपदाओं के लिए, ‘सेंदाई फ्रेमवर्क’ के सिद्धांतों को कैसे लागू किया जा सकता है, इस पर चर्चा करें। इसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, भवन संहिता, सामुदायिक भागीदारी, क्षमता निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हो सकते हैं।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: भारत में फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों और उन्हें दूर करने के उपायों पर संक्षिप्त चर्चा।
6. निष्कर्ष: आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए ‘सेंदाई फ्रेमवर्क’ के समग्र महत्व को रेखांकित करें।

स्रोत: news.un.org


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