27 Sep राजस्थान में सीबीएन के प्रवर्तन अभियान: 4 टन तस्करी सामग्री जब्त, 4 गिरफ्तार
✎ केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के तहत एक प्रमुख एजेंसी है जो NDPS अधिनियम, 1985 को लागू करके मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और खेती को नियंत्रित करती है, जिसका उद्देश्य 'नशा मुक्त भारत' के दृष्टिकोण को प्राप्त करना…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (नशीले पदार्थों का दुरुपयोग) | GS Paper II — शासन (कानून प्रवर्तन और नियामक संस्थाएँ)
- Prelims: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, पॉपी स्ट्रॉ (डोडा चूरा), अफीम, हाइड्रोपोनिक कैनबिस (गांजा), मादक पदार्थों की तस्करी, नशा मुक्त भारत अभियान
- Essay: भारत में नशीले पदार्थों की समस्या और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के तहत एक प्रमुख एजेंसी है जो NDPS अधिनियम, 1985 को लागू करके मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और खेती को नियंत्रित करती है, जिसका उद्देश्य ‘नशा मुक्त भारत’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) की राजस्थान इकाई ने राज्य भर में चलाए गए गहन प्रवर्तन अभियानों में लगभग चार टन तस्करी की सामग्री जब्त की है। इन अभियानों के परिणामस्वरूप 3,937 किलोग्राम पॉपी स्ट्रॉ (डोडा चूरा), 9.6 किलोग्राम अफीम और 1.9 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक कैनबिस (गांजा) सहित ₹18.42 लाख नकद, छह वाहन और एक देसी पिस्तौल जब्त की गई। इस संबंध में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जो भारत में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ चल रहे प्रयासों को उजागर करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में मादक पदार्थों की तस्करी एक गंभीर समस्या है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा पैदा करती है।
- भारत ‘गोल्डन क्रिसेंट’ (ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान) और ‘गोल्डन ट्रायंगल’ (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के बीच स्थित है, जो इसे मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक संवेदनशील मार्ग बनाता है।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, भारत में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत एक प्रमुख केंद्रीय एजेंसी है, जो मादक पदार्थों की खेती और तस्करी को रोकने के लिए जिम्मेदार है।
- सरकार द्वारा ‘नशा मुक्त भारत’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना और जागरूकता बढ़ाना है।
- मादक पदार्थों की तस्करी अक्सर संगठित अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद जैसी गतिविधियों से जुड़ी होती है, जिससे यह एक बहुआयामी चुनौती बन जाती है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) क्या है?
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत एक केंद्रीय एजेंसी है।
- इसका मुख्य कार्य नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों को लागू करना है।
- CBN अफीम, पोस्ता (poppy) और कैनबिस (cannabis) की वैध खेती की निगरानी और विनियमन करता है, ताकि इनका अवैध उपयोग रोका जा सके।
- यह भारत में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए खुफिया जानकारी एकत्र करता है और प्रवर्तन अभियान चलाता है।
- CBN विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों के तहत भारत के दायित्वों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे कि नारकोटिक ड्रग्स पर एकल अभिसमय, 1961।
- यह अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों, जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), सीमा शुल्क विभाग और राज्य पुलिस बलों के साथ समन्वय स्थापित करता है।
- CBN का मुख्यालय ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में है और इसकी विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयाँ देश भर में फैली हुई हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मादक पदार्थों की बड़ी खेप की बरामदगी | राजस्थान में अवैध मादक पदार्थों के व्यापार के बड़े नेटवर्क पर प्रहार। |
| विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थ | पॉपी स्ट्रॉ (डोडा चूरा), अफीम और हाइड्रोपोनिक कैनबिस (गांजा) की बरामदगी अवैध व्यापार की विविधता को दर्शाती है। |
| नकद और वाहनों की जब्ती | अवैध व्यापार से अर्जित धन और परिवहन में प्रयुक्त साधनों पर रोक, आर्थिक रीढ़ तोड़ने का प्रयास। |
| अंतर्राष्ट्रीय पार्सल से बरामदगी | मादक पदार्थों की तस्करी में अंतर्राष्ट्रीय मार्गों और तरीकों के उपयोग का संकेत। |
| NDPS अधिनियम, 1985 के तहत कार्रवाई | कानूनी ढांचे के तहत प्रवर्तन एजेंसियों की शक्तियों का प्रभावी उपयोग। |
महत्व
सुरक्षा और कानून व्यवस्था
- मादक पदार्थों की तस्करी समाज में अपराध और हिंसा को बढ़ावा देती है। इन अभियानों से कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
- युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन से बचाने और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका।
सामाजिक प्रभाव
- मादक पदार्थों का सेवन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- अवैध मादक पदार्थों के व्यापार से उत्पन्न धन का उपयोग अक्सर अन्य आपराधिक गतिविधियों और आतंकवाद के वित्तपोषण में किया जाता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है।
आर्थिक प्रभाव
- अवैध मादक पदार्थों का व्यापार समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है।
- प्रवर्तन अभियानों से जब्त की गई संपत्ति और नकदी अवैध आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश लगाती है।
चुनौतियाँ
1. सीमा पार तस्करी
- राजस्थान की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील मार्ग प्रदान करती हैं।
- तस्करों द्वारा नए और परिष्कृत तरीकों का उपयोग, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय पार्सल और गुप्त खेप।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ
2. वित्तीय नेटवर्क का विघटन
- मादक पदार्थों के व्यापार से जुड़े जटिल वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का पता लगाना और उन्हें बाधित करना मुश्किल होता है।
- डिजिटल मुद्राओं और हवाला (Hawala) जैसे माध्यमों का उपयोग प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा करता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: मनी लॉन्ड्रिंग और इसके निहितार्थ
3. प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष चुनौतियाँ
- कर्मचारियों की कमी, उन्नत तकनीक का अभाव और अंतर-एजेंसी समन्वय की चुनौतियाँ।
- तस्करों द्वारा स्थानीय आबादी का उपयोग और सूचना नेटवर्क का निर्माण।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियां
4. पुनर्वास और जागरूकता
- मादक पदार्थों के आदी व्यक्तियों के लिए पर्याप्त पुनर्वास सुविधाओं और सामाजिक एकीकरण कार्यक्रमों की कमी।
- जनता में मादक पदार्थों के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और शिक्षा के मानवीय संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अवैध खेती | अफीम और गांजे जैसी फसलों की अवैध खेती, विशेषकर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | सीमा पार तस्करी से निपटने के लिए पड़ोसी देशों के साथ प्रभावी सहयोग की कमी। |
| तकनीकी उन्नयन | तस्करों द्वारा उपयोग की जाने वाली उन्नत तकनीकों का मुकाबला करने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षण की आवश्यकता। |
| न्यायिक प्रक्रिया | मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया और दोषियों को सजा दिलाने में देरी। |
| भ्रष्टाचार | प्रवर्तन तंत्र में भ्रष्टाचार की संभावना, जो मादक पदार्थों के व्यापार को बढ़ावा दे सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan)
आगे की राह
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और गश्त को मजबूत करना, साथ ही तकनीकी उपकरणों का उपयोग बढ़ाना।
- मादक पदार्थों के व्यापार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने और उन्हें बाधित करने के लिए विशेष इकाइयाँ स्थापित करना।
- मादक पदार्थों के आदी व्यक्तियों के लिए व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाना।
- मादक पदार्थों की अवैध खेती को रोकने के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और पड़ोसी देशों के साथ सूचना साझाकरण तंत्र विकसित करना।
- NDPS अधिनियम, 1985 के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों का गठन करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) · मादक पदार्थ एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS अधिनियम) · अवैध मादक पदार्थों की तस्करी · नशा मुक्त भारत अभियान · अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ व्यापार · कानून प्रवर्तन एजेंसियां · सीमा पार अपराध · संगठित अपराध · मादक पदार्थों का दुरुपयोग · नशीली दवाओं की रोकथाम
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: नशीले पेय और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक औषधियों के उपभोग का प्रतिषेध’}
अवधारणा प्रवाह
अवैध मादक पदार्थों की तस्करी → कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा खुफिया जानकारी → गहन प्रवर्तन अभियान और जब्ती → NDPS अधिनियम, 1985 के तहत कानूनी कार्रवाई → अवैध व्यापार नेटवर्क का विघटन → समाज पर सकारात्मक प्रभाव और सुरक्षा में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है।
2. NDPS अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और उपभोग को नियंत्रित करता है।
3. पॉपी स्ट्रॉ (डोडा चूरा) NDPS अधिनियम के तहत एक नियंत्रित पदार्थ नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है। NDPS अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों से संबंधित सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। कथन 3 गलत है। पॉपी स्ट्रॉ (डोडा चूरा) NDPS अधिनियम के तहत एक नियंत्रित पदार्थ है, और इसकी अवैध तस्करी दंडनीय अपराध है।
Q2. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) का प्राथमिक कार्य क्या है?
- केवल अवैध मादक पदार्थों की खेती को रोकना।
- मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ खुफिया जानकारी आधारित प्रवर्तन और निवारक जागरूकता पहल करना।
- भारत में मादक पदार्थों के वैध उत्पादन और वितरण को विनियमित करना।
- केवल अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ व्यापार पर नज़र रखना।
उत्तर: मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ खुफिया जानकारी आधारित प्रवर्तन और निवारक जागरूकता पहल करना। — CBN का प्राथमिक कार्य मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ खुफिया जानकारी आधारित प्रवर्तन और निवारक जागरूकता पहल करना है, साथ ही वैध मादक पदार्थों के उत्पादन को भी विनियमित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से उत्पन्न चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इन चुनौतियों से निपटने में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) जैसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी की बढ़ती समस्या और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का संक्षिप्त परिचय।
चुनौतियाँ: अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से उत्पन्न प्रमुख चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण करें, जैसे:
• सीमा पार तस्करी और अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।
• युवाओं में बढ़ती लत और स्वास्थ्य पर प्रभाव।
• संगठित अपराध और आतंकवाद से संबंध।
• आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव।
• कानून प्रवर्तन में आने वाली बाधाएँ (उदाहरण: तकनीकी चुनौतियाँ, मानव संसाधन)।
CBN की भूमिका: इन चुनौतियों से निपटने में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) की भूमिका का मूल्यांकन करें, जिसमें शामिल हैं:
• खुफिया जानकारी एकत्र करना और प्रवर्तन अभियान चलाना।
• NDPS अधिनियम, 1985 का प्रभावी कार्यान्वयन।
• अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय।
• ‘नशा मुक्त भारत’ जैसे जागरूकता अभियानों में योगदान।
• हालिया अभियानों और सफलताओं का उल्लेख (जैसे राजस्थान में CBN के अभियान)।
निष्कर्ष: मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जिसमें कानून प्रवर्तन, जागरूकता, पुनर्वास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीबीएन (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड) की राजस्थान इकाई द्वारा हाल ही में चलाए गए गहन प्रवर्तन अभियानों में लगभग कितनी तस्करी की गई सामग्री जब्त की गई?
- लगभग 3 टन
- लगभग 4 टन
- लगभग 5 टन
- लगभग 6 टन
उत्तर: लगभग 4 टन — सीबीएन की राजस्थान इकाई ने हाल ही में पूरे राज्य में चलाए गए गहन प्रवर्तन अभियानों के दौरान लगभग चार टन तस्करी की गई सामग्री जब्त की थी।
Mains: सीबीएन की राजस्थान इकाई द्वारा चलाए गए गहन प्रवर्तन अभियानों के माध्यम से तस्करी रोकने में मिली सफलता के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, राजस्थान में सीमा सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 1,158 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहण करेगी - October 3, 2026
- Wildlife Corridors: Key to Survival for UPSC & State PCS Aspirants - October 3, 2026
- अमित शाह भोपाल में गौपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे, न्याय संहिता प्रदर्शनी का उद्घाटन - October 3, 2026

No Comments