07 Oct राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने आईपीयू अरुशा सत्र में कश्मीर पर दिया जवाब
✎ अंतर-संसदीय संघ (IPU) संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल सक्रिय रूप से भाग लेता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — भारतीय संविधान और राजव्यवस्था
- Prelims: अंतर-संसदीय संघ (IPU), राज्यसभा उपसभापति, संसदीय प्रतिनिधिमंडल, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, कूटनीति, भारत की विदेश नीति
- Essay: अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और संसदीय कूटनीति का महत्व, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के संरक्षण में संसदों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर-संसदीय संघ (IPU) संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल सक्रिय रूप से भाग लेता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश के नेतृत्व में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं अंतर-संसदीय संघ (IPU) विधानसभा में भाग लिया। इस दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न समितियों की बैठकों और कार्यशालाओं में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें स्वास्थ्य, लोकतंत्र, मानवाधिकार, शांति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत के आंतरिक मामलों पर की गई अनुचित टिप्पणियों पर भी जवाब देने के अधिकार का प्रयोग किया, जिसमें कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया गया।
पृष्ठभूमि
- अंतर-संसदीय संघ (IPU) संसदों का एक वैश्विक संगठन है, जो लोकतंत्र को बढ़ावा देने और संसदीय संवाद के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित है।
- भारत IPU का एक सक्रिय सदस्य रहा है और इसके विभिन्न सत्रों में नियमित रूप से अपने संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजता है।
- संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहाँ सांसद विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ सीधे संवाद करते हैं।
- यह कूटनीति सरकारों के बीच औपचारिक संबंधों से परे जाकर लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देती है और साझा वैश्विक चुनौतियों पर आम सहमति बनाने में मदद करती है।
- IPU विधानसभाएं विभिन्न देशों के सांसदों को एक मंच प्रदान करती हैं जहाँ वे वैश्विक महत्व के मुद्दों पर चर्चा करते हैं और प्रस्ताव पारित करते हैं।
- भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता रहा है।
अंतर-संसदीय संघ (IPU) क्या है?
- अंतर-संसदीय संघ (IPU) राष्ट्रीय संसदों का वैश्विक संगठन है, जिसकी स्थापना 1889 में हुई थी। यह दुनिया के सबसे पुराने बहुपक्षीय संगठनों में से एक है।
- इसका मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को बढ़ावा देना, मानवाधिकारों और लैंगिक समानता का सम्मान सुनिश्चित करना तथा अंतर्राष्ट्रीय शांति और सहयोग को सुदृढ़ करना है।
- IPU संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करता है और उसके लक्ष्यों का समर्थन करता है, विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को प्राप्त करने में।
- यह संसदों के बीच संवाद और सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करता है, जिससे सांसद वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर सकें और साझा समाधान खोज सकें।
- IPU के सदस्य देशों की संख्या 180 से अधिक है, जो इसे दुनिया भर के सांसदों के लिए एक व्यापक मंच बनाती है।
- यह विभिन्न विषयों पर स्थायी समितियों और कार्यशालाओं का आयोजन करता है, जैसे कि शांति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, सतत विकास, लोकतंत्र और मानवाधिकार, तथा स्वास्थ्य।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अंतर-संसदीय संघ (IPU) विधानसभा में भागीदारी | यह भारत की संसदीय कूटनीति और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। |
| कश्मीर पर भारत का रुख | अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया। |
| विभिन्न स्थायी समितियों में सांसदों की भागीदारी | लोकतंत्र, मानवाधिकार, शांति, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत के विचारों को साझा करने का अवसर। |
| दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तिकरण पर चर्चा | समावेशी सामाजिक विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करता है। |
| आतंकवाद और महत्वपूर्ण खनिजों पर कार्यशालाएँ | वैश्विक चुनौतियों पर संसदीय प्रतिक्रियाओं को मजबूत करने और साझा समृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर। |
| सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में शांति बनाए रखने पर चर्चा | उभरती प्रौद्योगिकियों के नैतिक और सुरक्षा निहितार्थों पर अंतर्राष्ट्रीय संवाद में भारत की भागीदारी। |
महत्व
कूटनीतिक महत्व
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का मुखर प्रतिनिधित्व, विशेषकर कश्मीर मुद्दे पर।
- वैश्विक शासन और संसदीय कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका को मजबूत करना।
- विभिन्न देशों के सांसदों के साथ संवाद और सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना।
सामाजिक महत्व
- दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तिकरण पर संसदीय रणनीतियों पर चर्चा के माध्यम से समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करना।
- मानवाधिकारों और लोकतंत्र के वैश्विक मानकों को बनाए रखने में भारत की भूमिका को रेखांकित करना।
सुरक्षा और तकनीकी महत्व
- आतंकवाद के प्रति संसदीय प्रतिक्रियाओं को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों के साझा प्रबंधन पर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना।
- सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के शांतिपूर्ण उपयोग और उनके विनियमन पर अंतर्राष्ट्रीय संवाद में योगदान।
चुनौतियाँ
1. अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर संप्रभुता का संरक्षण
- कुछ देशों द्वारा भारत के आंतरिक मामलों पर अनुचित टिप्पणियों का सामना करना।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों और संप्रभुता की प्रभावी ढंग से रक्षा करना।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति
2. वैश्विक चुनौतियों पर आम सहमति बनाना
- आतंकवाद, मानवाधिकार और शांति जैसे मुद्दों पर विभिन्न देशों के बीच आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- विभिन्न राष्ट्रीय हितों और दृष्टिकोणों के बीच संतुलन स्थापित करना।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संगठन, वैश्विक शासन
3. उभरती प्रौद्योगिकियों का विनियमन
- सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई प्रौद्योगिकियों के नैतिक, कानूनी और सुरक्षा निहितार्थों को समझना और उन पर अंतर्राष्ट्रीय सहमति बनाना।
- इन प्रौद्योगिकियों के शांतिपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करते हुए उनके दुरुपयोग को रोकना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा
4. संसदीय कूटनीति की प्रभावशीलता
- संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी को ठोस नीतिगत परिणामों में बदलना।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाए गए मुद्दों पर घरेलू नीतियों और कानूनों में उचित समायोजन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: संसद और राज्य विधानमंडल, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कश्मीर पर अनुचित टिप्पणियाँ | भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप। |
| आतंकवाद के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया | आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार आतंकवाद पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की कमी। |
| मानवाधिकारों का सार्वभौमिक अनुप्रयोग | विभिन्न देशों में मानवाधिकारों की व्याख्या और प्रवर्तन में असमानताएँ। |
| सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विकास | AI हथियारों के प्रसार और उनके नैतिक उपयोग पर अंतर्राष्ट्रीय विनियमन की आवश्यकता। |
| समावेशी सामाजिक विकास | दिव्यांगजनों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए समान अवसरों और अधिकारों को सुनिश्चित करने में वैश्विक चुनौतियाँ। |
आगे की राह
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति दृढ़ और स्पष्ट रुख बनाए रखना।
- अंतर-संसदीय संघ (IPU) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी को और बढ़ाना।
- लोकतंत्र, मानवाधिकार, शांति और सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना।
- आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे साझा वैश्विक खतरों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए पहल करना।
- दिव्यांगजनों सहित सभी कमजोर वर्गों के समावेशी विकास और सशक्तिकरण के लिए संसदीय कूटनीति का उपयोग करना।
- साझा समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के सतत प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने पर अंतर्राष्ट्रीय संवाद में सक्रिय भूमिका निभाना।
- भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उन्हें भारत के वैश्विक प्रयासों में भागीदार बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अंतर-संसदीय संघ (IPU) · संसदीय कूटनीति · लोकतंत्र और मानवाधिकार · अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा · भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल · राज्यसभा उपसभापति · संसदों की भूमिका · आतंकवाद के प्रति संसदीय प्रतिक्रिया · दिव्यांगजनों के अधिकार · भारत की संप्रभुता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना
- अनुच्छेद 253: अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करना
अवधारणा प्रवाह
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल IPU विधानसभा में भाग लेता है। → प्रतिनिधिमंडल वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख प्रस्तुत करता है। → कश्मीर पर भारत की संप्रभुता का मुखर बचाव किया जाता है। → लोकतंत्र, मानवाधिकार और शांति पर चर्चा में योगदान दिया जाता है। → आतंकवाद और AI जैसे विषयों पर कार्यशालाओं में भागीदारी होती है। → यह भारत की संसदीय कूटनीति और वैश्विक शासन में भूमिका को मजबूत करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अंतर-संसदीय संघ (IPU) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. IPU एक वैश्विक संगठन है जिसमें राष्ट्रीय संसदें शामिल हैं।
2. यह शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संसदीय कूटनीति और संवाद को बढ़ावा देता है।
3. IPU का मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। IPU वास्तव में राष्ट्रीय संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो संसदीय कूटनीति और संवाद के माध्यम से शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है। हालाँकि, कथन 3 गलत है क्योंकि IPU का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है, न कि न्यूयॉर्क में।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय अंतर-संसदीय संघ (IPU) की स्थायी समितियों द्वारा चर्चा किए जाने वाले संभावित विषयों में से एक नहीं है?
- स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे
- लोकतंत्र और मानवाधिकार
- शांति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा
- किसी विशेष देश की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया
उत्तर: किसी विशेष देश की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया — IPU वैश्विक महत्व के मुद्दों पर चर्चा करता है जैसे स्वास्थ्य, लोकतंत्र, मानवाधिकार, शांति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा। किसी विशेष देश की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया पर टिप्पणी करना या उसमें हस्तक्षेप करना IPU के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि यह राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अंतर-संसदीय संघ (IPU) जैसे वैश्विक संसदीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, चर्चा कीजिए कि ये मंच भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अंतर-संसदीय संघ (IPU) का संक्षिप्त परिचय और भारत की इसमें भागीदारी का उल्लेख।
2. **IPU में भारत की सक्रिय भागीदारी का महत्व:**
* **संसदीय कूटनीति:** वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करना और अन्य देशों के साथ संवाद स्थापित करना।
* **बहुपक्षीय मंचों पर प्रभाव:** अंतर्राष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार, लोकतंत्र और शांति जैसे विषयों पर वैश्विक सहमति बनाने में योगदान।
* **राष्ट्रीय हितों का संरक्षण:** कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत की संप्रभुता और अखंडता का बचाव करना, जैसा कि हाल ही में देखा गया।
* **सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान:** अन्य संसदों से विधायी प्रक्रियाओं, शासन और सामाजिक विकास के संबंध में सीखना।
* **सॉफ्ट पावर का विस्तार:** भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करना।
3. **विदेश नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक:**
* **वैश्विक शासन में भूमिका:** भारत की बढ़ती वैश्विक आकांक्षाओं को दर्शाना और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व की भूमिका निभाना।
* **आतंकवाद और सुरक्षा:** आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत करने और साझा सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग को बढ़ावा देना।
* **आर्थिक सहयोग:** महत्वपूर्ण खनिजों और साझा समृद्धि जैसे विषयों पर चर्चा के माध्यम से आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देना।
* **मानवाधिकार और सामाजिक विकास:** दिव्यांगजनों के अधिकारों जैसे समावेशी विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाना।
* **द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करना:** प्रतिनिधिमंडलों के बीच अनौपचारिक बैठकों और संवाद के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना।
4. **निष्कर्ष:** भारत की संसदीय कूटनीति के महत्व को दोहराना और वैश्विक मंचों पर इसकी निरंतर सक्रिय भूमिका की आवश्यकता पर बल देना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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