03 Aug राज्यसभा ने पारित किया एमएसएमई संशोधन विधेयक, विपक्ष ने किया विरोध प्रदर्शन
✎ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 MSME के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और CPSEs के लिए TReDS के माध्यम से चालान निपटान को अनिवार्य करके क्षेत्र की तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करने का प्रयास करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — संसद और राज्य विधानमंडल—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय। औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनके प्रभाव।
- Prelims: MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026, TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSEs), सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में MSME का योगदान
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में MSME क्षेत्र की भूमिका और चुनौतियाँ।, संसदीय कार्यवाही में व्यवधान: लोकतंत्र पर प्रभाव और समाधान।
त्वरित पुनरावृत्ति: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 MSME के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और CPSEs के लिए TReDS के माध्यम से चालान निपटान को अनिवार्य करके क्षेत्र की तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करने का प्रयास करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विपक्ष के विरोध के बावजूद, राज्यसभा ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 (Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026) पारित कर दिया है। यह विधेयक MSME क्षेत्र के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थापना और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) के माध्यम से चालान निपटान को अनिवार्य करके तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करने का प्रयास करता है। यह विधेयक 2006 के अधिनियम का स्थान लेगा।
पृष्ठभूमि
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो रोज़गार सृजन, विनिर्माण उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- MSME विकास अधिनियम, 2006 (MSME Development Act, 2006) ने MSME क्षेत्र के संवर्धन और विकास के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान किया था।
- समय के साथ, MSME क्षेत्र को तरलता (Liquidity) की कमी, ऋण तक पहुँच और पंजीकरण प्रक्रियाओं में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
- सरकार MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए विभिन्न पहल कर रही है।
- केंद्रीय MSME मंत्री के अनुसार, MSME क्षेत्र भारत के GDP में 31% और विनिर्माण उत्पादन में 36% का योगदान देता है, जबकि निर्यात में इसका योगदान 41% है।
- 2014-15 से MSME को वितरित बकाया ऋण 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 38.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 का स्थान लेगा।
- यह MSME के मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म (National Digital Platform) की अधिसूचना का प्रावधान करता है।
- विधेयक का उद्देश्य MSME क्षेत्र की तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करना है।
- यह सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए MSME से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) के माध्यम से चालान निपटान (Invoice Settlements) को अनिवार्य करता है।
- TReDS एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जो MSME को उनके व्यापार प्राप्तियों (Trade Receivables) को वित्तपोषित करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उन्हें कार्यशील पूंजी (Working Capital) तक त्वरित पहुँच मिलती है।
- यह विधेयक संवैधानिक सिद्धांतों और व्यवसायों के हितों को बनाए रखते हुए सभी संबंधित पक्षों के हितों को संतुलित करने का लक्ष्य रखता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रावधान | सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के निःशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे पारदर्शिता और पहुंच बढ़ेगी। |
| 2006 के अधिनियम का प्रतिस्थापन | MSME क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और चुनौतियों को संबोधित करने के लिए कानूनी ढाँचे को अद्यतन करता है। |
| CPSEs के लिए TReDS के माध्यम से चालान निपटान अनिवार्य | केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा MSMEs से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए भुगतान में तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करेगा। |
| तरलता संबंधी चिंताओं का समाधान | MSMEs को समय पर भुगतान सुनिश्चित करके उनकी कार्यशील पूंजी (Working Capital) की उपलब्धता में सुधार करेगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- MSME क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में 31% GDP, 36% विनिर्माण उत्पादन और 41% निर्यात में योगदान देता है, यह विधेयक इस योगदान को और बढ़ाएगा।
- MSMEs को समय पर भुगतान सुनिश्चित करके उनकी वित्तीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देगा, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी।
- TReDS (Trade Receivables Discounting System) के माध्यम से चालान निपटान को अनिवार्य करके MSMEs के लिए ऋण तक पहुंच में सुधार करेगा।
सामाजिक महत्व
- MSME क्षेत्र बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करता है, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जिससे आय असमानता कम होती है।
- छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाकर समावेशी विकास को बढ़ावा देता है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ होता है।
प्रशासनिक महत्व
- राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाएगा, जिससे MSMEs के लिए व्यापार करना आसान होगा (Ease of Doing Business)।
- कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाकर MSME क्षेत्र के विनियमन और निगरानी को मजबूत करेगा।
चुनौतियाँ
1. विपक्षी विरोध और सदन की कार्यवाही में बाधा
- विधेयक पर सार्थक चर्चा और विचार-विमर्श की कमी, जिससे कानून की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- संसदीय लोकतंत्र में बहस और असहमति के महत्व को कम करता है।
यूपीएससी लिंक: राज्यव्यवस्था: संसद और राज्य विधानमंडल – कार्यप्रणाली, शक्तियाँ और विशेषाधिकार
2. TReDS के कार्यान्वयन की चुनौतियाँ
- सभी CPSEs और MSMEs के बीच TReDS प्रणाली को अपनाने और उसके प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना।
- छोटे MSMEs के लिए डिजिटल साक्षरता और तकनीकी पहुंच की कमी एक बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि और विकास
3. MSMEs की तरलता संबंधी समस्याएँ
- हालांकि विधेयक तरलता को संबोधित करता है, फिर भी MSMEs को पूंजी तक पहुंच, ऋण उपलब्धता और उच्च ब्याज दरों जैसी अन्य वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- सरकारी खरीद में MSMEs की भागीदारी को बढ़ाना और उनके लिए एक समान अवसर सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति और इसके प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संसदीय कार्यवाही में व्यवधान | महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और विचार-विमर्श की कमी, जिससे कानून की गुणवत्ता प्रभावित होती है। |
| TReDS का पूर्ण कार्यान्वयन | छोटे MSMEs के लिए तकनीकी पहुंच और जागरूकता की कमी, जिससे प्रणाली का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पाएगा। |
| MSMEs के लिए ऋण उपलब्धता | बैंकों और वित्तीय संस्थानों से पर्याप्त और समय पर ऋण प्राप्त करने में MSMEs को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। |
| भुगतान में देरी | भले ही TReDS अनिवार्य हो, फिर भी बड़े खरीदारों द्वारा भुगतान में देरी की प्रवृत्ति बनी रह सकती है, जिससे MSMEs की कार्यशील पूंजी प्रभावित होगी। |
आगे की राह
- TReDS प्लेटफॉर्म के बारे में MSMEs और CPSEs के बीच जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- छोटे MSMEs के लिए डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सहायता प्रदान करना ताकि वे नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
- MSME क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्धता में सुधार हेतु बैंकों और वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहित करना, विशेषकर प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के तहत।
- विधेयक के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना और किसी भी बाधा को दूर करना।
- संसद में रचनात्मक बहस और विचार-विमर्श के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर सर्वसम्मति बन सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) · MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 · राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म · ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) · आर्थिक संवृद्धि · रोज़गार सृजन · निर्यात प्रोत्साहन · तरलता संबंधी चिंताएँ · संसदीय प्रक्रिया · विधेयक पारित होना · संविधान के सिद्धांत · केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSEs)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 107’, ‘note’: ‘विधेयकों को प्रस्तुत करने और पारित करने से संबंधित।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 118’, ‘note’: ‘संसद की प्रक्रिया के नियम बनाने की शक्ति।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा कानून बनाने की शक्ति।’}
अवधारणा प्रवाह
MSME क्षेत्र की तरलता और पंजीकरण की चुनौतियाँ → MSMEs विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का प्रस्ताव → राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और TReDS के माध्यम से चालान निपटान का प्रावधान → MSMEs के लिए समय पर भुगतान और आसान पंजीकरण → MSME क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता और विकास में वृद्धि → आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. MSME क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 31% का योगदान देता है।
2. यह क्षेत्र देश के विनिर्माण उत्पादन में 36% का योगदान करता है।
3. भारत के कुल निर्यात में MSME क्षेत्र का योगदान लगभग 41% है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। केंद्रीय MSME मंत्री के अनुसार, MSME क्षेत्र भारत के GDP में 31%, विनिर्माण उत्पादन में 36% और निर्यात में 41% का योगदान देता है।
Q2. कथन (A): MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य MSME क्षेत्र की तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करना है।
कारण (R): यह विधेयक सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) को MSMEs से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए इनवॉइस सेटलमेंट को ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से करने का आदेश देता है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — कथन A और कारण R दोनों सही हैं, और कारण R कथन A का सही स्पष्टीकरण है। विधेयक का मुख्य उद्देश्य MSME क्षेत्र की तरलता की समस्या को हल करना है, और TReDS के माध्यम से अनिवार्य इनवॉइस सेटलमेंट इस उद्देश्य को प्राप्त करने का एक प्रमुख तंत्र है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का एक प्रमुख उद्देश्य है?
- MSMEs के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पंजीकरण की व्यवस्था करना।
- सभी MSMEs के लिए सरकारी खरीद में 50% आरक्षण सुनिश्चित करना।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा MSMEs से खरीद के लिए इनवॉइस सेटलमेंट को TReDS के माध्यम से अनिवार्य करना।
- MSMEs को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दरों को 5% तक सीमित करना।
उत्तर: केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा MSMEs से खरीद के लिए इनवॉइस सेटलमेंट को TReDS के माध्यम से अनिवार्य करना। — विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) को MSMEs से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए इनवॉइस सेटलमेंट को ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से करने का आदेश देना है, ताकि क्षेत्र की तरलता संबंधी चिंताओं को दूर किया जा सके। पंजीकरण स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा कीजिए और यह क्षेत्र की तरलता संबंधी चिंताओं को कैसे संबोधित करने का प्रयास करता है, इसका विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: MSME क्षेत्र का भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्व (GDP, निर्यात, रोज़गार में योगदान) का संक्षिप्त उल्लेख।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान: MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के मुख्य बिंदुओं का वर्णन करें, जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वैच्छिक पंजीकरण और TReDS के माध्यम से CPSEs द्वारा इनवॉइस सेटलमेंट को अनिवार्य करना।
तरलता संबंधी चिंताओं का समाधान: विस्तार से बताएं कि TReDS प्रणाली MSMEs के लिए भुगतान चक्र को कैसे सुव्यवस्थित करती है, कार्यशील पूंजी (working capital) तक पहुंच में सुधार करती है, और विलंबित भुगतानों की समस्या को कम करती है।
आर्थिक प्रभाव: इस विधेयक के माध्यम से MSME क्षेत्र की संवृद्धि, रोज़गार सृजन और निर्यात क्षमता पर पड़ने वाले संभावित सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करें।
चुनौतियाँ और आगे की राह: विधेयक के कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों (जैसे जागरूकता, तकनीकी पहुंच) और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदमों पर संक्षिप्त चर्चा।
निष्कर्ष: MSME क्षेत्र के सतत विकास के लिए ऐसे विधायी उपायों के महत्व पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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