21 Sep यूएन महासभा में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर के उच्चस्तरीय दौरे का महत्व
✎ संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श और नीति-निर्माण अंग है, जहाँ सभी 193 सदस्य देश वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं और भारत अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), वैश्विक दक्षिण (Global South), बहुपक्षीय कूटनीति, भारत की विदेश नीति, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- Essay: बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका और चुनौतियाँ, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता और भारत का दृष्टिकोण
त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श और नीति-निर्माण अंग है, जहाँ सभी 193 सदस्य देश वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं और भारत अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत के विदेश मंत्री न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च-स्तरीय सत्र में भाग लेने पहुँचे हैं। इस सत्र के दौरान वे कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में शामिल होंगे, जहाँ वे वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की स्थापना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि अंग है, जिसमें सभी 193 सदस्य देशों का समान प्रतिनिधित्व होता है।
- UNGA का वार्षिक उच्च-स्तरीय सत्र सितंबर में न्यूयॉर्क में आयोजित किया जाता है, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या विदेश मंत्री भाग लेते हैं।
- भारत संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
- भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों और अपनी स्थायी सदस्यता की वकालत कर रहा है, ताकि यह वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके।
- वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के लिए भारत के सहायता कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विकास में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) क्या है?
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है और इसका मुख्य विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि अंग है।
- इसमें संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश शामिल हैं, और प्रत्येक सदस्य देश को एक वोट प्राप्त है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, निरस्त्रीकरण, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों जैसे व्यापक मुद्दों पर चर्चा करती है और सिफारिशें करती है।
- महासभा संयुक्त राष्ट्र के बजट को मंजूरी देती है और सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव करती है।
- इसके निर्णय आमतौर पर गैर-बाध्यकारी होते हैं, लेकिन वे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के नैतिक और राजनीतिक वजन को दर्शाते हैं।
- महासभा का नियमित सत्र हर साल सितंबर से दिसंबर तक चलता है, जिसमें एक उच्च-स्तरीय सामान्य बहस भी शामिल होती है।
- वर्तमान सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान कर रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च-स्तरीय संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र | यह वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण, प्राथमिकताओं और चिंताओं को प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। |
| द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें | यह विभिन्न देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। |
| ग्लोबल साउथ के लिए भारत के सहायता कार्यक्रम | यह विकासशील देशों के साथ भारत की एकजुटता और वैश्विक विकास में उसके योगदान को प्रदर्शित करता है। |
| संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की सदस्यता का मामला | यह वैश्विक शासन में भारत की बढ़ती भूमिका और स्थायी सीट की उसकी आकांक्षा को रेखांकित करता है। |
| SHANTU घोषणापत्र | यह सुरक्षा परिषद में भारत के प्रस्तावित दृष्टिकोण और सिद्धांतों को दर्शाता है, जो ‘मानदंडों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र उन्नति’ पर केंद्रित है। |
महत्व
कूटनीतिक महत्व
- यह सत्र भारत को वैश्विक मंच पर अपनी विदेश नीति के उद्देश्यों, जैसे बहुपक्षवाद को मजबूत करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना, को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
- विदेश मंत्री की उपस्थिति विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और नए सहयोग के रास्ते तलाशने में सहायक है।
- यह भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का मंच देता है, जो वैश्विक शासन में उसकी बढ़ती भूमिका के लिए महत्वपूर्ण है।
भू-राजनीतिक महत्व
- भारत ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के देशों के लिए एक मजबूत आवाज के रूप में उभर रहा है, और यह मंच इन देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।
- यह भारत को जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में योगदान करने में सक्षम बनाता है।
आर्थिक महत्व
- वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास से संबंधित चर्चाओं में भारत की भागीदारी, विशेषकर व्यापार, निवेश और विकास सहायता के संदर्भ में, महत्वपूर्ण है।
- भारत के सहायता कार्यक्रम, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, उसकी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना और वैश्विक आर्थिक सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
चुनौतियाँ
1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार
- सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को कई देशों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन परिषद के विस्तार और सुधार पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
- मौजूदा स्थायी सदस्य देशों के निहित स्वार्थ और वीटो शक्ति का मुद्दा सुधार प्रक्रिया को जटिल बनाता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: संयुक्त राष्ट्र और भारत
2. बहुपक्षीय मंचों पर आम सहमति का अभाव
- जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और व्यापार जैसे मुद्दों पर विभिन्न देशों के बीच भिन्न-भिन्न राष्ट्रीय हितों और दृष्टिकोणों के कारण आम सहमति बनाना कठिन होता है।
- बढ़ता संरक्षणवाद (Protectionism) और भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण (Geopolitical Polarization) वैश्विक सहयोग को बाधित करता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: बहुपक्षीय संस्थाएँ
3. विकासशील देशों की चिंताओं को उठाना
- ग्लोबल साउथ के देशों की विकास संबंधी चिंताओं, जैसे ऋण संकट, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, को प्रभावी ढंग से वैश्विक एजेंडे में लाना एक चुनौती है।
- विकसित और विकासशील देशों के बीच संसाधनों और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर मतभेद अक्सर समाधान तक पहुंचने में बाधा डालते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: विकासशील देशों के मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट | मौजूदा स्थायी सदस्यों का विरोध और सुधार प्रक्रिया में आम सहमति की कमी। |
| बहुपक्षीय सहयोग | विभिन्न देशों के राष्ट्रीय हितों और भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण आम सहमति बनाने में कठिनाई। |
| वैश्विक चुनौतियाँ | जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और महामारी जैसे मुद्दों पर प्रभावी और समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया का अभाव। |
| ग्लोबल साउथ की आवाज | विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे में पर्याप्त रूप से शामिल करने में चुनौतियाँ। |
आगे की राह
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को मजबूत करने हेतु सक्रिय कूटनीति जारी रखना।
- वैश्विक चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद, पर आम सहमति बनाने और प्रभावी समाधानों को बढ़ावा देने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना।
- ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग को और गहरा करना, उनकी चिंताओं को वैश्विक मंचों पर उठाना और विकास सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करना।
- बहुपक्षीय संस्थानों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, में सुधारों का समर्थन करना ताकि वे वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शा सकें।
- विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों का उपयोग करके भारत के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना और साझा मूल्यों पर आधारित गठबंधन बनाना।
- भारत की ‘SHANTU’ पहल जैसे सिद्धांतों को बढ़ावा देना, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए समावेशी और न्यायसंगत दृष्टिकोण पर जोर देते हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संयुक्त राष्ट्र महासभा · भारत की विदेश नीति · बहुपक्षीय कूटनीति · संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद · वैश्विक दक्षिण · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · भारत का वैश्विक प्रभाव · शांति और सुरक्षा · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · भारत की स्थायी सदस्यता
अवधारणा प्रवाह
विदेश मंत्री का संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में आगमन → द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में भागीदारी → भारत के वैश्विक दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं का प्रस्तुतीकरण → संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए दावेदारी → वैश्विक शासन और कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि अंग है।
2. संयुक्त राष्ट्र महासभा के सभी 193 सदस्य देशों को समान मतदान अधिकार प्राप्त हैं।
3. महासभा के अध्यक्ष का चुनाव सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि अंग है, और इसके सभी 193 सदस्य देशों को समान मतदान अधिकार प्राप्त हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि महासभा के अध्यक्ष का चुनाव महासभा द्वारा ही किया जाता है, सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर नहीं।
Q2. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत करता रहा है। UNSC के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. UNSC के पाँच स्थायी सदस्य हैं जिनके पास वीटो शक्ति है।
2. UNSC के गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
3. भारत ने SHANTU नामक एक 6-सूत्रीय घोषणापत्र प्रस्तुत किया है जो UNSC में अपनी स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 और 2 सही हैं। UNSC के पाँच स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) हैं जिनके पास वीटो शक्ति है। गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए किया जाता है। कथन 3 भी सही है, भारत ने ‘SHANTU’ नामक एक 6-सूत्रीय घोषणापत्र प्रस्तुत किया है, जो ‘Securing Holistic Advancement through Norms, Trust [and] Integrity’ का संक्षिप्त रूप है, और यह UNSC में अपनी स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की भागीदारी वैश्विक शासन में इसकी बढ़ती भूमिका को कैसे दर्शाती है? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी के प्रमुख तर्कों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की सक्रिय भागीदारी और वैश्विक मंच पर इसकी बढ़ती भूमिका का संक्षिप्त परिचय दें।
2. **UNGA में भारत की भागीदारी और वैश्विक भूमिका:**
* भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों (गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखण) का उल्लेख करें।
* वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों का प्रतिनिधित्व।
* बहुपक्षीय मंचों पर भारत का सक्रिय योगदान (जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, सतत विकास)।
* द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के माध्यम से कूटनीति का विस्तार।
* भारत के सहायता कार्यक्रमों और विकास साझेदारी का उल्लेख।
3. **UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी के तर्क:**
* **जनसंख्या और लोकतंत्र:** विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और दूसरी सबसे बड़ी आबादी।
* **आर्थिक शक्ति:** विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक (GDP)।
* **सैन्य योगदान:** संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक।
* **सभ्यतागत प्रतिनिधित्व:** एक प्राचीन सभ्यता और विविध संस्कृति का प्रतिनिधित्व।
* **SHANTU घोषणापत्र:** ‘Securing Holistic Advancement through Norms, Trust [and] Integrity’ के सिद्धांतों पर आधारित भारत का दृष्टिकोण।
* **जिम्मेदार परमाणु शक्ति:** एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में भारत की स्थिति।
* **वैश्विक चुनौतियों का समाधान:** आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका।
4. **चुनौतियाँ और आगे का मार्ग:** स्थायी सदस्यता प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियाँ (वीटो शक्ति, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व) और भारत द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियाँ।
5. **निष्कर्ष:** भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और UNSC में स्थायी सदस्यता की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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