10 Aug राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026: प्रमुख बदलाव और प्रभाव
✎ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य NCDC अधिनियम, 1962 में संशोधन कर सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका का विस्तार करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, विकास और नियोजन
- Prelims: राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), सहकारी आंदोलन, सहकारिता मंत्रालय, संविधान का 97वां संशोधन अधिनियम, सहकारी समितियां
- Essay: भारत में सहकारी आंदोलन की भूमिका और चुनौतियाँ, सरकारी नीतियों के माध्यम से समावेशी विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य NCDC अधिनियम, 1962 में संशोधन कर सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका का विस्तार करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को 10 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया है। यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना चाहता है, जिसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका का विस्तार करना है। यह संशोधन सहकारी समितियों के लिए वित्तीय सहायता और विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- भारत में सहकारी आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को एक साथ लाकर उनके हितों की रक्षा करना है।
- संविधान के 97वें संशोधन अधिनियम, 2011 ने सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा दिया, जिससे उनके गठन और कामकाज को बढ़ावा मिला।
- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की स्थापना 1963 में संसद के एक अधिनियम द्वारा कृषि उपज के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात और आयात के लिए सहकारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और वित्तपोषित करने के उद्देश्य से की गई थी।
- हाल के वर्षों में, भारत सरकार ने ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के साथ सहकारी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया है।
- जुलाई 2021 में एक अलग सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Co-operation) का गठन किया गया, जो सहकारी आंदोलन को एक नई गति प्रदान करने के लिए समर्पित है।
- यह संशोधन विधेयक सहकारी क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं और आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप NCDC के दायरे और कार्यप्रणाली को अद्यतन करने का प्रयास करता है।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) क्या है?
- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) एक सांविधिक निगम है जिसकी स्थापना 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहकारी सिद्धांतों पर आधारित कार्यक्रमों के नियोजन, संवर्धन और वित्तपोषण के लिए सहायता प्रदान करना है।
- NCDC विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिनमें कृषि-प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, डेयरी, मत्स्य पालन और हथकरघा शामिल हैं।
- यह सहकारी समितियों को तकनीकी और प्रबंधकीय मार्गदर्शन भी प्रदान करता है ताकि वे अपनी दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार कर सकें।
- NCDC ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर कृषि और संबद्ध गतिविधियों में।
- संशोधन विधेयक का उद्देश्य NCDC के जनादेश का विस्तार करना है ताकि यह नए और उभरते क्षेत्रों में सहकारी समितियों का समर्थन कर सके और उनकी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
- यह निगम को अधिक लचीलापन प्रदान करेगा ताकि वह बदलती आर्थिक परिस्थितियों और सहकारी क्षेत्र की विविध आवश्यकताओं के प्रति प्रतिक्रिया दे सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 | सहकारी क्षेत्र के विनियमन और विकास को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है। |
| गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत | सहकारिता क्षेत्र को मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उसकी निगरानी में सरकार की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। |
| लोकसभा में 10 अगस्त, 2026 को पेश | कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सहकारी संस्थाओं के कामकाज में सुधार की दिशा में एक कदम। |
| सहकारी समितियों के दायरे का विस्तार | कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से परे अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी सहकारी समितियों की भूमिका को बढ़ावा देना। |
| निगम की वित्तीय और कार्यात्मक स्वायत्तता में वृद्धि | सहकारी क्षेत्र के लिए अधिक प्रभावी ढंग से संसाधन जुटाने और कार्यक्रमों को लागू करने में सक्षम बनाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगा, जिससे किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को लाभ मिलेगा।
- सहकारी क्षेत्र में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देकर आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिल सकती है।
- यह कृषि उत्पादों के विपणन, प्रसंस्करण और भंडारण में सहकारी समितियों की भूमिका को बढ़ाकर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगा।
सामाजिक महत्व
- सहकारी समितियां सामाजिक समावेश (Social Inclusion) को बढ़ावा देती हैं, विशेषकर हाशिए पर पड़े समुदायों और महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा करती हैं।
- यह विधेयक ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आय असमानता को कम करने में योगदान दे सकता है।
- सामुदायिक स्वामित्व और भागीदारी को प्रोत्साहित करके सामाजिक पूंजी (Social Capital) का निर्माण करता है।
शासनिक महत्व
- यह विधेयक सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ाएगा, जिससे कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।
- सहकारी समितियों के प्रभावी विनियमन के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- केंद्र सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- विधेयक के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक क्षमता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना एक चुनौती हो सकती है, क्योंकि सहकारिता राज्य का विषय है।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीतियां और हस्तक्षेप
2. वित्तीय स्थिरता
- कई सहकारी समितियां वित्तीय रूप से कमजोर हैं; विधेयक के तहत उन्हें मजबूत करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और निगरानी की आवश्यकता होगी।
- निगम की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के बावजूद, संसाधनों की कमी एक बाधा बनी रह सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन
3. राजनीतिक हस्तक्षेप
- सहकारी समितियों में अक्सर राजनीतिक हस्तक्षेप देखा जाता है, जो उनके पेशेवर कामकाज को प्रभावित कर सकता है।
- विधेयक को यह सुनिश्चित करना होगा कि सहकारी समितियों की स्वायत्तता बनी रहे और वे राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. जागरूकता और क्षमता निर्माण
- सहकारी समितियों के सदस्यों और पदाधिकारियों के बीच नए प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक होगा।
- प्रबंधन और तकनीकी कौशल में क्षमता निर्माण की कमी सहकारी समितियों के आधुनिकीकरण में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन और विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्य सूची का विषय | सहकारिता राज्य सूची का विषय है, जिससे केंद्र के कानून के कार्यान्वयन में राज्यों के साथ समन्वय की आवश्यकता होगी। |
| वित्तीय संसाधनों की कमी | कई सहकारी समितियां वित्तीय रूप से कमजोर हैं, जिन्हें मजबूत करने के लिए पर्याप्त पूंजी और सहायता की आवश्यकता है। |
| कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार | सहकारी क्षेत्र में कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की घटनाएं देखी गई हैं, जिन्हें नए प्रावधानों से प्रभावी ढंग से निपटना होगा। |
| तकनीकी पिछड़ापन | कई सहकारी समितियां आधुनिक तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने में पीछे हैं, जिससे उनकी दक्षता प्रभावित होती है। |
| सदस्यों की निष्क्रियता | कुछ सहकारी समितियों में सदस्यों की भागीदारी कम होती है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सहकार से समृद्धि
- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Co-operative Development Corporation – NCDC) योजनाएँ
आगे की राह
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए ताकि विधेयक के प्रावधानों का सुचारु कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- सहकारी समितियों के सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-गवर्नेंस (e-Governance) उपकरणों का उपयोग किया जाए।
- वित्तीय रूप से कमजोर सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष पैकेज और आसान ऋण सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- सहकारी समितियों को कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों जैसे डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा और पर्यटन में भी विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- सहकारी आंदोलन को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए मजबूत नियामक और निगरानी तंत्र स्थापित किए जाएं।
- युवाओं और महिलाओं को सहकारी समितियों में शामिल होने और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम · सहकारी आंदोलन · सहकारी संघवाद · संविधान (97वां संशोधन) अधिनियम · राज्य सूची · संवैधानिक प्रावधान · बहु-राज्य सहकारी समितियाँ · ग्रामीण विकास · कृषि ऋण · सहकारिता मंत्रालय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(c)’, ‘note’: ‘संघ या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43B’, ‘note’: ‘सहकारी समितियों के संवर्धन का राज्य का कर्तव्य’}
- {‘article’: ‘भाग IXB’, ‘note’: ‘सहकारी समितियों से संबंधित प्रावधान’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘सहकारिता राज्य सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 → सहकारी क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण और विस्तार → ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक समावेश को बढ़ावा → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन → भारत में ‘सहकार से समृद्धि’ का लक्ष्य
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 43B में सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रावधान है।
2. संविधान (97वां संशोधन) अधिनियम, 2011 ने सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा और संरक्षण प्रदान किया।
3. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 43B राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है और सहकारी समितियों को बढ़ावा देने से संबंधित है। कथन 2 सही है। 97वां संशोधन अधिनियम, 2011 ने सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा दिया, जिसमें अनुच्छेद 19(1)(c) में ‘सहकारी समितियां’ जोड़ना और भाग IXB शामिल करना शामिल है। कथन 3 सही है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) का मुख्य कार्य कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और निर्यात के लिए सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
Q2. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे उपयुक्त है?
- यह विधेयक केवल शहरी सहकारी बैंकों के विनियमन से संबंधित है।
- यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के दायरे का विस्तार करता है ताकि यह कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों को भी कवर कर सके।
- यह विधेयक सहकारी समितियों को केंद्र सरकार के पूर्ण नियंत्रण में लाता है।
- यह विधेयक सहकारी समितियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देता है।
उत्तर: यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के दायरे का विस्तार करता है ताकि यह कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों को भी कवर कर सके। — राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य NCDC के कार्यक्षेत्र का विस्तार करना है, जिससे यह कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के अलावा अन्य उभरते क्षेत्रों में भी सहकारी समितियों को सहायता प्रदान कर सके। यह सहकारी आंदोलन को मजबूत करने और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में इसकी भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सहकारी आंदोलन के विकास में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, सहकारी समितियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए, सहकारी संघवाद को मजबूत करने में इसकी क्षमता का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में सहकारी आंदोलन का संक्षिप्त परिचय और NCDC की स्थापना का उद्देश्य।
2. NCDC की भूमिका का परीक्षण:
a. वित्तीय सहायता: कृषि, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण आदि में सहकारी समितियों को ऋण और अनुदान।
b. तकनीकी मार्गदर्शन: परियोजना निर्माण, प्रबंधन और प्रशिक्षण में सहायता।
c. नीतिगत समर्थन: सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए नीतियों और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
d. विविधीकरण: कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों में सहकारी समितियों के विस्तार में भूमिका।
3. संवैधानिक प्रावधान:
a. अनुच्छेद 19(1)(c): सहकारी समितियां बनाने का अधिकार।
b. अनुच्छेद 43B: सहकारी समितियों के संवर्धन से संबंधित राज्य नीति का निदेशक सिद्धांत।
c. भाग IXB: सहकारी समितियों से संबंधित विस्तृत प्रावधान (जैसे बोर्ड का गठन, लेखा-परीक्षा, चुनाव)।
4. सहकारी संघवाद को मजबूत करने में NCDC की क्षमता:
a. केंद्र-राज्य समन्वय: NCDC केंद्र सरकार की एक संस्था होने के नाते, राज्यों में सहकारी समितियों के साथ समन्वय स्थापित कर सकती है।
b. बहु-राज्य सहकारी समितियाँ: विभिन्न राज्यों में फैली सहकारी समितियों के लिए एकीकृत समर्थन प्रदान करना।
c. ग्रामीण-शहरी संबंध: ग्रामीण और शहरी सहकारी समितियों के बीच संबंधों को मजबूत करना।
d. समावेशी विकास: विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में सहकारी आंदोलन के संतुलित विकास को बढ़ावा देना।
e. नीति निर्माण में राज्यों की भागीदारी: NCDC के माध्यम से राज्यों की आवश्यकताओं और सुझावों को राष्ट्रीय नीति में शामिल करना।
5. निष्कर्ष: सहकारी आंदोलन और सहकारी संघवाद को मजबूत करने में NCDC के महत्व पर बल।
स्रोत: PRS Legislative Research
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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