लोकसभा ने पारित किया कराधान बिल, यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर का प्रावधान शामिल

Taxation bill clears Lok Sabha, allows provision for MDR on UPI transactions — concept mind map

लोकसभा ने पारित किया कराधान बिल, यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर का प्रावधान शामिल

✎ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का लक्ष्य भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को सशक्त बनाना और डिजिटल भुगतान प्रणाली में MDR के संबंध में सरकार को लचीलापन प्रदान करना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय  |  GS Paper III — निवेश मॉडल  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
  • Prelims: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफेस), MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट), भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, राजकोषीय नीति
  • Essay: भारत में डिजिटल भुगतान का भविष्य और आर्थिक संवृद्धि, आत्मनिर्भर भारत: इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण और विदेशी निवेश की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का लक्ष्य भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को सशक्त बनाना और डिजिटल भुगतान प्रणाली में MDR के संबंध में सरकार को लचीलापन प्रदान करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक (Taxation and Other Laws (Amendment) Bill) लोकसभा में पारित किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को समर्थन देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए देश में स्थित डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाना है। इसके अतिरिक्त, यह विधेयक UPI और RuPay कार्ड भुगतानों के लिए मौजूदा शून्य-MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था को बदलने के लिए एक कानूनी ढांचा भी प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के माध्यम से घरेलू विनिर्माण, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में, को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से किए गए भुगतानों पर बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं द्वारा कोई शुल्क (MDR) नहीं लगाया जाता है।
  • यह शून्य-MDR व्यवस्था डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देने में सहायक रही है, लेकिन भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व सृजन की चुनौती भी पैदा करती है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान करने के लिए 5 जून को एक अध्यादेश जारी किया गया था, जिसे यह विधेयक प्रतिस्थापित करेगा।
  • भारत में डेटा केंद्रों का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
  • घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और नीतिगत निश्चितता प्रदान करने के लिए विदेशी कंपनियों को कर छूट देने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।

कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026

  • यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन करता है और आयकर अधिनियम से इसे अलग करता है।
  • यह सरकार को UPI और RuPay कार्ड भुगतानों के लिए मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था को बदलने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। केंद्र सरकार अधिसूचना के माध्यम से उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन को निर्दिष्ट करने के लिए सशक्त होगी जो शुल्क-मुक्त रहेंगे।
  • विधेयक का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का समर्थन करना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारत में डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाना है।
  • यह विधेयक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान करता है।
  • यह फंड प्रबंधकों को भारत में स्थानांतरित होने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उनके वैश्विक आय पर देश में कर लगने से रोकने के लिए आवश्यक शर्तों की संख्या कम हो जाती है।
  • यह विधेयक 2040-41 तक उन विदेशी कंपनियों के लिए मौजूदा आयकर छूट का विस्तार करता है जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए अनुबंध निर्माताओं को नियुक्त करती हैं। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके आवश्यक घटक शामिल हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन UPI और RuPay कार्ड भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा विदेशी पूंजी आकर्षित करके और घरेलू विनिर्माण को समर्थन देकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाना।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए आयकर छूट सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर छूट, जिससे विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
फंड प्रबंधकों का भारत में स्थानांतरण भारत में फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुगम बनाना, जिससे उनकी वैश्विक आय पर कराधान की शर्तों को कम किया जा सके।
अनुबंध निर्माताओं के लिए आयकर छूट का विस्तार भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाले विदेशी अनुबंध निर्माताओं के लिए आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाना।
कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में भंडारण के लिए आयकर छूट इलेक्ट्रॉनिक घटकों को कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में रखने वाली विदेशी कंपनियों के लिए 15 साल की आयकर छूट, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह विधेयक भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है।
  • UPI और RuPay कार्ड भुगतानों पर MDR लागू करने का प्रावधान डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राजस्व मॉडल को मजबूत कर सकता है, जिससे बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए आयकर छूट और फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुगम बनाना भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।

विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला

  • इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में संलग्न विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का विस्तार और कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में भंडारण के लिए छूट, भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाने में मदद करेगा।
  • यह उपाय मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट और सर्वर जैसे निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा।

नीतिगत निश्चितता और निवेश

  • यह विधेयक विदेशी निवेशकों और कंपनियों को ‘प्रक्रिया निश्चितता’ (process certainty) प्रदान करता है, जिससे भारत में व्यापार करना आसान हो जाता है।
  • विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाना डेटा केंद्रों के उपयोग को प्रोत्साहित करेगा, जिससे डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र

  • MDR प्रावधानों में बदलाव से UPI और RuPay जैसे स्वदेशी भुगतान प्रणालियों के दीर्घकालिक स्थायित्व और विकास को बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि यह सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व का एक स्रोत उत्पन्न करेगा।
  • हालांकि, सरकार के पास यह शक्ति होगी कि वह कुछ भुगतान मोड या लेनदेन को शुल्क-मुक्त बनाए रखे, जिससे आम जनता पर बोझ कम हो।

चुनौतियाँ

1. MDR का उपभोक्ता पर प्रभाव

  • UPI लेनदेन पर MDR लगाने से उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है, जो वर्तमान में मुफ्त सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
  • यह डिजिटल भुगतान अपनाने की गति को धीमा कर सकता है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ नकदी का प्रचलन अभी भी अधिक है।

2. प्रतियोगिता और नवाचार

  • MDR लागू होने से भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है, जिससे नवाचार के लिए प्रोत्साहन कम हो सकता है।
  • यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि MDR की दरें इतनी अधिक न हों कि वे डिजिटल लेनदेन को हतोत्साहित करें।

3. राजस्व का वितरण

  • MDR से प्राप्त राजस्व का बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य हितधारकों के बीच उचित वितरण सुनिश्चित करना एक चुनौती होगी।
  • यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि राजस्व मॉडल सभी प्रतिभागियों के लिए टिकाऊ हो।

4. नियामक जटिलताएँ

  • भुगतान मोड या लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने के लिए सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
  • विभिन्न प्रकार के लेनदेन के लिए अलग-अलग MDR दरें निर्धारित करने से नियामक जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
UPI पर MDR उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की संभावना, डिजिटल भुगतान अपनाने में कमी।
इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में प्रतिस्पर्धा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अन्य देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना, उच्च गुणवत्ता और लागत-प्रभावशीलता बनाए रखना।
विदेशी निवेश का प्रवाह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के कारण विदेशी पूंजी प्रवाह में अस्थिरता।
डेटा गोपनीयता और सुरक्षा विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं द्वारा भारतीय डेटा केंद्रों के उपयोग से डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
राजकोषीय प्रभाव आयकर छूट और अन्य प्रोत्साहनों से सरकार के राजस्व पर पड़ने वाला संभावित प्रभाव।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केवल विनिर्माण तक सीमित न रहकर, उच्च-स्तरीय प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षमताओं का भारत में हस्तांतरण सुनिश्चित करना।

आगे की राह

  • MDR दरों को सावधानीपूर्वक निर्धारित किया जाना चाहिए ताकि डिजिटल भुगतान को हतोत्साहित किए बिना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राजस्व उत्पन्न हो सके।
  • सरकार को छोटे लेनदेन और विशिष्ट उपयोगकर्ता समूहों के लिए शुल्क-मुक्त विकल्पों को बनाए रखने पर विचार करना चाहिए ताकि वित्तीय समावेशन सुनिश्चित हो सके।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए प्रदान की गई कर छूटों के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।
  • भारत को केवल विनिर्माण केंद्र बनने के बजाय, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, अनुसंधान और विकास में भी निवेश को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा विकसित किया जाना चाहिए, विशेष रूप से विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए।
  • डिजिटल भुगतान साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि MDR के संभावित प्रभावों के बारे में उपभोक्ताओं को सूचित किया जा सके।
  • घरेलू उद्योगों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कौशल विकास और बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · विदेशी पूंजी निवेश · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 · UPI लेनदेन · व्यापारी छूट दर (MDR) · शून्य-MDR व्यवस्था · डिजिटल भुगतान · राजकोषीय नीतियां · आर्थिक संवृद्धि

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • [‘अनुच्छेद 265’, ‘कानून के अधिकार के बिना कर नहीं’]
  • [‘अनुच्छेद 246’, ‘संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियाँ’]
  • [‘सातवीं अनुसूची’, ‘संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची’]

अवधारणा प्रवाह

कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित  →  भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन  →  UPI और RuPay पर MDR लागू करने का कानूनी ढाँचा  →  इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए आयकर छूट का विस्तार  →  विदेशी निवेश को प्रोत्साहन और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा  →  डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना है।
2. यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है।
3. वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को शुल्क लगाने की अनुमति है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना है, साथ ही यह भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि वर्तमान में UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है (शून्य-MDR व्यवस्था)।

Q2. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान सही है/हैं?
1. यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान करता है।
2. यह भारत में फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए शर्तों की संख्या को कम करता है।
3. यह भारत में अनुबंधित निर्माताओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। विधेयक में ये तीनों प्रावधान शामिल हैं, जो विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से हैं।

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन व्यापारी छूट दर (MDR) का सबसे सटीक वर्णन करता है?

  1. यह वह शुल्क है जो ग्राहक डिजिटल भुगतान करने के लिए बैंक को भुगतान करता है।
  2. यह वह शुल्क है जो सरकार डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों को देती है।
  3. यह वह शुल्क है जो बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता व्यापारी से डिजिटल लेनदेन स्वीकार करने के लिए लेते हैं।
  4. यह वह शुल्क है जो RBI सभी डिजिटल लेनदेन पर लगाता है।

उत्तर: यह वह शुल्क है जो बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता व्यापारी से डिजिटल लेनदेन स्वीकार करने के लिए लेते हैं। — व्यापारी छूट दर (MDR) वह शुल्क है जो बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता व्यापारी से डिजिटल लेनदेन (जैसे क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, UPI) स्वीकार करने के लिए लेते हैं। यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में होता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण करें। यह विधेयक भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय दें, इसके मुख्य उद्देश्यों (विदेशी पूंजी, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण) पर प्रकाश डालें।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:**
* भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 से आयकर अधिनियम को अलग करना और UPI/RuPay MDR व्यवस्था में बदलाव का कानूनी ढांचा।
* विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों से अर्जित आय पर आयकर छूट।
* भारत में फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुविधाजनक बनाना।
* इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगी विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का 2040-41 तक विस्तार।
* सीमा-शुल्क बंधुआ गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण के लिए 15-वर्षीय आयकर छूट।
* विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढांचे का सरलीकरण।
3. **इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर प्रभाव:**
* विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा।
* घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन।
* आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और रोजगार सृजन।
* निर्यात क्षमता में वृद्धि।
4. **डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव:**
* MDR व्यवस्था में संभावित बदलाव: ‘शून्य-MDR’ से ‘शुल्क-आधारित’ मॉडल की ओर संक्रमण।
* भुगतान सेवा प्रदाताओं और बैंकों के लिए राजस्व मॉडल में बदलाव।
* छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव (शुल्क का बोझ)।
* डिजिटल भुगतान के विस्तार और नवाचार पर दीर्घकालिक प्रभाव।
* RBI के दृष्टिकोण का उल्लेख (लागत वहन करने की आवश्यकता)।
5. **निष्कर्ष:** विधेयक के समग्र महत्व का सारांश दें, जिसमें आर्थिक संवृद्धि, निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के संतुलन पर इसके दूरगामी प्रभावों पर जोर दिया जाए।

स्रोत: Times of India


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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