07 Aug लोकसभा ने पास किया बिल: UPI और RuPay पर MDR लगाने का रास्ता खुला
✎ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR ढांचे को संशोधित करने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे बैंकों और फिनटेक को बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस), MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट), RuPay कार्ड, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026
- Essay: डिजिटल भुगतान और भारत का आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन में प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR ढांचे को संशोधित करने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे बैंकों और फिनटेक को बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने हाल ही में कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य कर नियमों को सरल बनाना, निवेश आकर्षित करना और मौजूदा कानूनी प्रावधानों को हटाना है जो बैंकों तथा भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से रोकते हैं। यह विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने के लिए कानूनी समर्थन भी प्रदान करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR को शून्य कर दिया था।
- शून्य MDR नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर डिजिटल भुगतान का बोझ कम करना था, जिससे वे इसे आसानी से अपना सकें।
- हालांकि, बैंकों और फिनटेक कंपनियों ने तर्क दिया कि शून्य MDR के कारण उन्हें बुनियादी ढांचे और नवाचार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन नहीं मिल रहा था।
- इस नीति के कारण भुगतान सेवा प्रदाताओं को लेनदेन की लागत वहन करनी पड़ रही थी, जिससे उनकी वित्तीय व्यवहार्यता प्रभावित हो रही थी।
- वित्तीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित शुल्क व्यापारियों पर लागू होगा, उपयोगकर्ताओं पर नहीं, और यह बैंकों तथा फिनटेक को बुनियादी ढांचे और नवाचार में निवेश करने में मदद करेगा।
- भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की UPI और सेवा संचालन समिति अभी MDR पर निर्णय लेगी, जो संसद द्वारा विधेयक पारित होने के बाद होगा।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो एक व्यापारी अपने ग्राहकों से डेबिट या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक को भुगतान करता है।
- यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के एक प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
- MDR का उद्देश्य बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की गई भुगतान प्रसंस्करण सेवाओं की लागत को कवर करना है।
- इसमें भुगतान गेटवे, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और धोखाधड़ी की रोकथाम जैसी सेवाएं शामिल होती हैं।
- भारत में, सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कुछ भुगतान माध्यमों, जैसे UPI और RuPay पर MDR को शून्य कर दिया था।
- प्रस्तावित विधेयक सरकार को इस शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने की शक्ति देता है, जिससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को कुछ लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकती है।
- यह शुल्क आमतौर पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क से कम होने की उम्मीद है और यह ₹2,000 से अधिक के व्यावसायिक भुगतानों पर 0.25% से 0.4% तक हो सकता है, जिस पर एक समग्र सीमा भी होगी।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
UPI शुल्क · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम · डिजिटल भुगतान · वित्तीय समावेशन · डिजिटल अर्थव्यवस्था · रुपे कार्ड · शून्य MDR ढाँचा · वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) · आर्थिक संवृद्धि · राजकोषीय नीतियाँ · बैंकिंग क्षेत्र
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो व्यापारी प्रत्येक डिजिटल लेनदेन के लिए बैंक को भुगतान करते हैं।
2. वर्तमान में, UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर कोई MDR लागू नहीं होता है।
3. हाल ही में पारित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य-MDR ढाँचे को संशोधित करने का अधिकार देता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि MDR वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल लेनदेन स्वीकार करने के लिए बैंकों या भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay कार्ड पर MDR को शून्य कर दिया था। कथन 3 भी सही है क्योंकि हाल ही में लोकसभा द्वारा पारित विधेयक सरकार को इस शून्य-MDR ढाँचे में बदलाव करने की कानूनी शक्ति प्रदान करता है।
Q2. अभिकथन (A): सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया है।
कारण (R): शून्य MDR बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढाँचे और नवाचार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A सत्य है, लेकिन R असत्य है। — अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए शून्य MDR नीति अपनाई थी। हालाँकि, कारण (R) असत्य है क्योंकि शून्य MDR वास्तव में बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व का नुकसान करता है, जिससे उन्हें बुनियादी ढाँचे और नवाचार में निवेश करने में बाधा आती है, न कि प्रोत्साहित करता है। विधेयक का उद्देश्य इसी समस्या का समाधान करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। हाल ही में पारित विधेयक के आलोक में, UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR को फिर से लागू करने के संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की परिभाषा:** MDR क्या है, यह कौन भुगतान करता है (व्यापारी), और यह किसे प्राप्त होता है (बैंक/भुगतान सेवा प्रदाता)।
2. **डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में MDR की भूमिका:**
* **सकारात्मक भूमिका:** बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व का स्रोत, जो उन्हें बुनियादी ढाँचे (POS मशीनें, भुगतान गेटवे), प्रौद्योगिकी उन्नयन और नवाचार (जैसे सुरक्षा सुविधाएँ) में निवेश करने में सक्षम बनाता है। डिजिटल लेनदेन की लागत को कवर करना।
* **नकारात्मक भूमिका/चुनौतियाँ:** व्यापारियों पर वित्तीय बोझ, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर। डिजिटल लेनदेन को अपनाने में बाधा।
3. **शून्य MDR ढाँचा और इसका प्रभाव:**
* सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay पर शून्य MDR का परिचय।
* इसके लाभ (डिजिटल लेनदेन में वृद्धि, उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त सेवा)।
* इसके नुकसान (बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व हानि, नवाचार और बुनियादी ढाँचे के विकास पर नकारात्मक प्रभाव)।
4. **हाल ही में पारित विधेयक और संभावित प्रभाव:**
* विधेयक का उद्देश्य: सरकार को शून्य-MDR ढाँचे को संशोधित करने की कानूनी शक्ति देना।
* **संभावित सकारात्मक प्रभाव:** बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व में वृद्धि, जिससे वे डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे में निवेश कर सकेंगे, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। प्रतिस्पर्धा में वृद्धि।
* **संभावित नकारात्मक प्रभाव:** व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ, जिसका आंशिक रूप से उपभोक्ताओं पर पारित होने की संभावना। डिजिटल लेनदेन की लागत में वृद्धि से इसके अपनाने की गति धीमी हो सकती है। वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों पर संभावित प्रभाव।
* **सरकार की भूमिका:** MDR की दरें निर्धारित करने में संतुलन बनाना ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और उद्योग के विकास के बीच सामंजस्य स्थापित हो सके।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जो MDR के महत्व और इसके पुन: परिचय के संभावित परिणामों को दर्शाता हो, साथ ही यह भी बताए कि सरकार को डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक विवेकपूर्ण नीति अपनानी चाहिए।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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