16 Sep वायनाड में मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा कारण: बंदर और जंगली सूअर
✎ मानव-वन्यजीव संघर्ष तब होता है जब मानव और वन्यजीव एक-दूसरे के संसाधनों या स्थान पर अतिक्रमण करते हैं, जिससे दोनों को नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं, और वायनाड में बंदर और जंगली सूअर इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदा और आपदा प्रबंधन)
- Prelims: मानव-वन्यजीव संघर्ष, वायनाड, कन्नूर विश्वविद्यालय, जंगली सूअर, बंदर, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022
- Essay: मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-वन्यजीव संघर्ष तब होता है जब मानव और वन्यजीव एक-दूसरे के संसाधनों या स्थान पर अतिक्रमण करते हैं, जिससे दोनों को नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं, और वायनाड में बंदर और जंगली सूअर इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कन्नूर विश्वविद्यालय और जिनेवा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक तीन-वर्षीय वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, वायनाड में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख स्रोत अब हाथी और बाघ नहीं, बल्कि बंदर और जंगली सूअर बन गए हैं। इस अध्ययन में 49 गाँवों के 998 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया, जिसमें पाया गया कि 84% को वन्यजीवों के साथ संघर्ष का अनुभव हुआ और 81% ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति नकारात्मक धारणा व्यक्त की।
पृष्ठभूमि
- मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) तब होता है जब मानव और वन्यजीव एक-दूसरे के संसाधनों या स्थान पर अतिक्रमण करते हैं, जिससे मनुष्यों, वन्यजीवों या दोनों को नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
- भारत में, वन्यजीवों की आबादी में वृद्धि, वनों की कटाई, कृषि विस्तार और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण यह संघर्ष बढ़ रहा है।
- पारंपरिक रूप से, भारत में हाथी, बाघ और तेंदुए जैसे बड़े मांसाहारी और शाकाहारी जीवों को मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुख्य कारण माना जाता रहा है।
- केरल के वायनाड जैसे क्षेत्र, जो पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित हैं, में मानव बस्तियाँ और कृषि भूमि अक्सर वन क्षेत्रों से सटी होती हैं, जिससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।
- यह संघर्ष अक्सर फसलों को नुकसान, पशुधन की हानि, संपत्ति को क्षति और दुर्लभ मामलों में मानव जीवन की हानि का कारण बनता है।
- संघर्ष के कारण स्थानीय समुदायों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति नकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे संरक्षण प्रयासों में बाधा आती है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष क्या है?
- मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) उस स्थिति को संदर्भित करता है जहाँ वन्यजीवों की उपस्थिति मानव जीवन या आजीविका के लिए खतरा बन जाती है, या इसके विपरीत।
- यह तब उत्पन्न होता है जब मानव और वन्यजीव एक ही संसाधनों या स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे दोनों पक्षों को नुकसान होता है।
- संघर्ष के कारणों में आवास का नुकसान और विखंडन, वन्यजीव गलियारों का अवरोध, कृषि का विस्तार, शहरीकरण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
- इसके परिणामों में फसलों को नुकसान, पशुधन की हत्या, संपत्ति को क्षति, मानव चोट या मृत्यु, और वन्यजीवों को प्रतिशोधी हत्या या चोट शामिल हैं।
- भारत में, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, लेकिन संघर्ष के प्रबंधन के लिए विशिष्ट रणनीतियों की आवश्यकता है।
- सरकार द्वारा संघर्ष को कम करने के लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं, जैसे कि फसल बीमा योजनाएँ, क्षतिपूर्ति योजनाएँ, वन्यजीवों को भगाने के तरीके और जागरूकता कार्यक्रम।
- हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि छोटे और मध्यम आकार के जानवर, जैसे बंदर और जंगली सूअर, भी महत्वपूर्ण और लगातार संघर्ष का कारण बन सकते हैं, खासकर कृषि समुदायों के लिए।
- संघर्ष के प्रबंधन के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, सामुदायिक भागीदारी, नीतिगत हस्तक्षेप और प्रभावी कार्यान्वयन शामिल हों।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानव-वन्यजीव संघर्ष का बदलता स्वरूप | अध्ययन दर्शाता है कि वायनाड में हाथी और बाघ के बजाय बंदर और जंगली सूअर संघर्ष के प्रमुख स्रोत बन रहे हैं, जो नीति निर्माताओं के लिए एक नई चुनौती है। |
| छोटे जानवरों से अधिक नुकसान | बंदर और जंगली सूअर जैसे छोटे जानवर बार-बार फसल और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों पर संचयी (cumulative) रूप से बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। |
| नकारात्मक धारणा | 81% उत्तरदाताओं ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति नकारात्मक धारणा व्यक्त की, जो संरक्षण प्रयासों की स्वीकार्यता के लिए एक बड़ी बाधा है। |
| संघर्ष की गंभीरता | बंदरों से संबंधित संघर्षों को सबसे अधिक ‘अत्यधिक गंभीर’ श्रेणी में रखा गया, जबकि जंगली सूअर कृषि हानि से जुड़े थे। |
| व्यापकता | अध्ययन में शामिल सभी 49 गांवों में वन्यजीवों के साथ संघर्ष की सूचना मिली, जो समस्या की व्यापकता को दर्शाता है। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- यह अध्ययन वन्यजीव प्रबंधन रणनीतियों (wildlife management strategies) को फिर से परिभाषित करने में मदद करेगा, विशेषकर उन प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित करने में जो पहले कम महत्वपूर्ण मानी जाती थीं।
- यह पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के संतुलन और मानव बस्तियों के निकट वन्यजीवों के व्यवहार पैटर्न को समझने में सहायक होगा।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- किसानों की आजीविका पर छोटे जानवरों द्वारा होने वाले लगातार नुकसान के गंभीर आर्थिक प्रभावों को उजागर करता है, जिससे ग्रामीण गरीबी और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ता है।
- वन्यजीवों के प्रति नकारात्मक धारणा को संबोधित करने और समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करने के लिए सामाजिक हस्तक्षेपों (social interventions) की आवश्यकता पर बल देता है।
शासन और नीति निर्माण
- यह अध्ययन सरकार को मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए अधिक प्रभावी और लक्षित नीतियां बनाने में मदद करेगा, जिसमें फसल सुरक्षा और क्षतिपूर्ति तंत्र (compensation mechanisms) शामिल हैं।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ विकेन्द्रीकृत (decentralised) वन्यजीव प्रबंधन योजनाओं को विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
चुनौतियाँ
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रबंधन
- बंदरों और जंगली सूअरों जैसे छोटे जानवरों से होने वाले लगातार नुकसान को रोकने के लिए प्रभावी और टिकाऊ समाधान विकसित करना एक चुनौती है।
- वन्यजीवों की आबादी को नियंत्रित करने और उनके प्राकृतिक आवासों को बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; आपदा प्रबंधन
2. समुदाय की भागीदारी और धारणा
- वन्यजीव संरक्षण के प्रति स्थानीय समुदायों की नकारात्मक धारणा को बदलना और उन्हें संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना।
- संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त और समय पर क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन; सामाजिक न्याय
3. वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा का उपयोग
- मानव-वन्यजीव संघर्ष के बदलते पैटर्न को समझने और उसके समाधान के लिए निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा संग्रह की आवश्यकता है।
- अध्ययन के निष्कर्षों को नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में प्रभावी ढंग से एकीकृत करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पर्यावरण
4. पर्यावास का क्षरण और अतिक्रमण
- मानव बस्तियों के विस्तार और कृषि गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना, जिससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।
- वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) और संरक्षित क्षेत्रों को बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण; भूगोल
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बंदरों और जंगली सूअरों का बढ़ता प्रभाव | ये प्रजातियाँ अब हाथी और बाघ से भी अधिक बार-बार और व्यापक नुकसान पहुंचा रही हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है। |
| वन्यजीव संरक्षण के प्रति नकारात्मक धारणा | अधिकांश उत्तरदाताओं की नकारात्मक राय संरक्षण प्रयासों की सफलता को बाधित करती है और स्थानीय समर्थन को कम करती है। |
| फसल और संपत्ति का नुकसान | लगातार होने वाले नुकसान से कृषि उत्पादकता कम होती है, खाद्य असुरक्षा बढ़ती है और किसानों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। |
| नीतिगत प्रतिक्रिया की कमी | मौजूदा नीतियां शायद बड़े मांसाहारी जानवरों पर अधिक केंद्रित हैं, जबकि छोटे लेकिन अधिक विनाशकारी प्रजातियों के लिए विशिष्ट रणनीतियों की कमी है। |
| क्षतिपूर्ति तंत्र की अपर्याप्तता | क्षतिपूर्ति प्रक्रियाएं अक्सर धीमी और अपर्याप्त होती हैं, जिससे प्रभावित समुदायों का असंतोष बढ़ता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972)
- प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant)
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
आगे की राह
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रजाति-विशिष्ट प्रबंधन योजनाएं विकसित की जाएं, विशेषकर बंदरों और जंगली सूअरों के लिए।
- फसल सुरक्षा के लिए नवीन और स्थानीय रूप से उपयुक्त तकनीकों जैसे बाड़ लगाना, ध्वनि उपकरण और जैविक प्रतिकारक (organic repellents) को बढ़ावा दिया जाए।
- वन्यजीवों से होने वाले नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति तंत्र को सुव्यवस्थित और त्वरित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।
- स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए और उन्हें जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षित किया जाए।
- वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और उनके गलियारों को बनाए रखने पर जोर दिया जाए ताकि मानव बस्तियों में उनके प्रवेश को कम किया जा सके।
- वन्यजीवों की आबादी के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए अनुसंधान और डेटा संग्रह को मजबूत किया जाए, जिसमें नसबंदी (sterilization) जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
- वन विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानव-वन्यजीव संघर्ष · वन्यजीव संरक्षण · पर्यावरण नीति · फसल क्षति · सामाजिक-आर्थिक प्रभाव · स्थानीय समुदाय · वन्यजीव प्रबंधन · संरक्षण रणनीतियाँ · जैव विविधता · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों के प्रति दया और संरक्षण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों का संरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
मानव बस्तियों का विस्तार और कृषि गतिविधियाँ → वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का क्षरण → मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि (बंदर, जंगली सूअर) → फसल और संपत्ति का नुकसान, आजीविका पर असर → वन्यजीव संरक्षण के प्रति नकारात्मक सामुदायिक धारणा → प्रभावी प्रबंधन और नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष केवल बड़े मांसाहारी जानवरों जैसे बाघ और हाथी के कारण होता है।
2. छोटे जानवर जैसे बंदर और जंगली सूअर भी कृषि को महत्वपूर्ण क्षति पहुँचाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष में योगदान कर सकते हैं।
3. वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों की धारणा संघर्ष की आवृत्ति और तीव्रता से प्रभावित होती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अध्ययन से पता चला है कि छोटे जानवर जैसे बंदर और जंगली सूअर भी मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख स्रोत हो सकते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि अध्ययन में जंगली सूअरों द्वारा कृषि को होने वाली व्यापक क्षति का उल्लेख किया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि अध्ययन में पाया गया कि लोगों की धारणा केवल प्रजातियों से नहीं, बल्कि उनकी यात्राओं की आवृत्ति और संघर्ष की तीव्रता से भी प्रभावित होती है।
Q2. भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act), 1972 के तहत, निम्नलिखित में से कौन-सा जानवर अनुसूची I में शामिल है, जिसे उच्चतम स्तर का संरक्षण प्राप्त है?
- जंगली सूअर
- बंदर (कुछ प्रजातियाँ)
- हाथी
- मोर
उत्तर: हाथी — वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में हाथी को शामिल किया गया है, जो इसे उच्चतम स्तर का कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। जंगली सूअर अनुसूची III में है, मोर अनुसूची I में है (राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण), और बंदरों की कुछ प्रजातियाँ अनुसूची II या III में हो सकती हैं, लेकिन हाथी को विशेष संरक्षण प्राप्त है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इस चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों में आवास का नुकसान, मानव बस्तियों का विस्तार, कृषि पद्धतियों में बदलाव, वन आवरण में कमी, और वन्यजीव गलियारों का विखंडन शामिल हैं। प्रबंधन रणनीतियों में शामिल हैं: वैज्ञानिक अध्ययन और डेटा संग्रह (जैसे वायनाड अध्ययन), सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता कार्यक्रम, फसल क्षतिपूर्ति योजनाएं, वन्यजीवों को भगाने के लिए गैर-घातक तरीके, बाड़ लगाना, वन्यजीव गलियारों का संरक्षण, और संवेदनशील क्षेत्रों में भूमि उपयोग योजना। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और अन्य संबंधित कानूनों का उल्लेख करें। स्थानीय समुदायों की नकारात्मक धारणाओं को सकारात्मक में बदलने के लिए सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर भी विचार करें।
स्रोत: The Hindu
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: वायनाड में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारणों में से एक, वन्य सूअरों और बंदरों के उद्भव का मुख्य कारण क्या है?
- वन्यजीव अभयारण्यों का अतिक्रमण और मानव बस्तियों का विस्तार
- जलवायु परिवर्तन के कारण वन्यजीवों के आवास का नष्ट होना
- वन विभाग द्वारा किए गए संरक्षण प्रयासों में कमी
- स्थानीय लोगों द्वारा वन्यजीवों का अवैध शिकार
उत्तर: वन्यजीव अभयारण्यों का अतिक्रमण और मानव बस्तियों का विस्तार — वायनाड में वन्य सूअरों और बंदरों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण वन्यजीव अभयारण्यों का अतिक्रमण और मानव बस्तियों का विस्तार है।
Mains: वायनाड में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारणों और इसके निवारण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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