26 Sep वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में गिद्ध सर्वेक्षण शुरू, जानिए क्यों है महत्वपूर्ण
✎ गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अपमार्जक हैं, जो मृत जानवरों के शवों को हटाकर रोगजनकों के प्रसार को रोकते हैं और पोषक तत्व चक्रण में सहायता करते हैं, जिससे जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए उनका संरक्षण अनिवार्य…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: गिद्ध संरक्षण, वायनाड वन्यजीव अभयारण्य, नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व, श्वेत-पृष्ठ गिद्ध, लाल-सिर वाला गिद्ध, भारतीय गिद्ध, पारिस्थितिकी तंत्र, विश्व वन्यजीव कोष-भारत (WWF-India)
- Essay: जैव विविधता संरक्षण: एक नैतिक और पारिस्थितिक अनिवार्यता, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का महत्व और मानव कल्याण
त्वरित पुनरावृत्ति: गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अपमार्जक हैं, जो मृत जानवरों के शवों को हटाकर रोगजनकों के प्रसार को रोकते हैं और पोषक तत्व चक्रण में सहायता करते हैं, जिससे जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए उनका संरक्षण अनिवार्य हो जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल में आगामी वन्यजीव सप्ताह समारोह से पहले, वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (Wayanad Wildlife Sanctuary) में दो दिवसीय गिद्ध सर्वेक्षण शुरू किया गया है। यह सर्वेक्षण वन विभाग, वायनाड वन्यजीव प्रभाग, विश्व वन्यजीव कोष-भारत (World Wide Fund for Nature-India) और ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वायनाड में गिद्धों की वर्तमान स्थिति और वितरण का दस्तावेजीकरण करना तथा इन पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण अपमार्जकों के संरक्षण प्रयासों में योगदान देना है।
पृष्ठभूमि
- गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, मृत जानवरों के शवों का तेजी से उपभोग करके और सड़ते हुए जैविक पदार्थों के संचय को रोककर एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखते हैं।
- शवों को परिदृश्य से हटाकर, वे पोषक तत्व चक्रण (Nutrient Cycling) में योगदान करते हैं और रोगजनकों (Pathogens) के प्रसार से जुड़े संभावित जोखिमों को भी कम कर सकते हैं।
- वायनाड केरल में गिद्ध संरक्षण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह श्वेत-पृष्ठ गिद्ध (White-rumped Vulture), लाल-सिर वाले गिद्ध (Red-headed Vulture) और भारतीय गिद्ध (Indian Vulture) जैसी तीन निवासी गिद्ध प्रजातियों की महत्वपूर्ण आबादी का समर्थन करता है।
- यह क्षेत्र बड़े नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (Nilgiri Biosphere Reserve) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इन अनिवार्य अपमार्जकों के लिए उपयुक्त आवास और खाद्य संसाधन प्रदान करता है।
- परिदृश्य में, विशेष रूप से संरक्षित वन क्षेत्रों के भीतर और आसपास बड़े स्तनधारियों के शवों की उपलब्धता, गिद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण खाद्य संसाधन प्रदान करती है।
- वायनाड में कभी-कभी हिमालयन ग्रिफॉन (Himalayan Griffon) और सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture) जैसे प्रवासी गिद्ध भी दर्ज किए जाते हैं, जो विभिन्न गिद्ध प्रजातियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बड़े परिदृश्य के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र के महत्व को और उजागर करता है।
भारत में गिद्धों का संरक्षण
- भारत में गिद्धों की आबादी में 1990 के दशक के मध्य से नाटकीय गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण पशुधन के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली डाइक्लोफेनाक (Diclofenac) नामक एक गैर-स्टेरायडल सूजन-रोधी दवा (NSAID) है।
- डाइक्लोफेनाक युक्त शवों को खाने से गिद्धों में गुर्दे की विफलता (Kidney Failure) हो जाती है, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है।
- भारत सरकार ने 2006 में पशु चिकित्सा उपयोग के लिए डाइक्लोफेनाक पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इसके अवैध उपयोग और अन्य हानिकारक NSAID का प्रचलन अभी भी एक चुनौती है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में भारत की कई गिद्ध प्रजातियाँ गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered) या लुप्तप्राय (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध हैं।
- गिद्धों के संरक्षण से पारिस्थितिकी तंत्र में सफाई और रोग नियंत्रण में मदद मिलती है, जिससे मानव स्वास्थ्य और पशुधन स्वास्थ्य दोनों को लाभ होता है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गिद्धों को अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है, जो उन्हें उच्चतम स्तर का कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| गिद्ध सर्वेक्षण का स्थान | वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (Wayanad Wildlife Sanctuary), केरल। यह नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (Nilgiri Biosphere Reserve) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। |
| सर्वेक्षण का उद्देश्य | वायनाड में गिद्धों की वर्तमान स्थिति और वितरण का दस्तावेजीकरण करना तथा उनके संरक्षण प्रयासों में योगदान देना। |
| गिद्धों की प्रजातियाँ | सफेद पूंछ वाले गिद्ध (White-rumped Vulture), लाल सिर वाले गिद्ध (Red-headed Vulture) और भारतीय गिद्ध (Indian Vulture) की महत्वपूर्ण आबादी यहाँ निवास करती है। कभी-कभी हिमालयन ग्रिफॉन (Himalayan Griffon) और सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture) जैसे प्रवासी गिद्ध भी देखे जाते हैं। |
| आयोजक | वन विभाग, वायनाड वन्यजीव प्रभाग, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (WWF-India) और ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी (Hume Centre for Ecology and Wildlife Biology) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित। |
| पारिस्थितिक भूमिका | गिद्ध तेजी से जानवरों के शवों का उपभोग करके स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, पोषक तत्वों के चक्रण में योगदान करते हैं और रोगजनकों (pathogens) के प्रसार से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करते हैं। |
महत्व
पारिस्थितिक महत्व
- गिद्ध अपमार्जक (scavengers) के रूप में कार्य करते हुए पारिस्थितिकी तंत्र को साफ रखते हैं, जिससे पर्यावरण में सड़े हुए मांस का संचय रुकता है।
- ये पोषक तत्वों के चक्रण (nutrient cycling) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, मृत जीवों से पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में लौटाते हैं।
- शवों को हटाकर, गिद्ध एंथ्रेक्स (anthrax) और रेबीज (rabies) जैसे रोगजनकों के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं, जिससे मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहते हैं।
संरक्षण महत्व
- गिद्धों की आबादी में गिरावट पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक चेतावनी संकेत है, क्योंकि वे पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
- वायनाड जैसे महत्वपूर्ण आवासों में सर्वेक्षण, संरक्षण रणनीतियों को तैयार करने और गिद्धों की प्रजातियों के लिए प्रभावी प्रबंधन योजनाएँ बनाने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करते हैं।
- गिद्धों का संरक्षण जैव विविधता (biodiversity) के व्यापक संरक्षण प्रयासों का एक अभिन्न अंग है, विशेष रूप से नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- स्वस्थ गिद्ध आबादी अप्रत्यक्ष रूप से पशुधन (livestock) और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करके ग्रामीण समुदायों को लाभ पहुँचाती है।
- गिद्धों की उपस्थिति पर्यटन (tourism) और वन्यजीव अवलोकन (wildlife observation) को बढ़ावा दे सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
1. आवास का नुकसान और विखंडन
- मानवीय गतिविधियों जैसे कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास के कारण गिद्धों के प्राकृतिक आवासों का विनाश और विखंडन हो रहा है।
- वन क्षेत्रों का सिकुड़ना गिद्धों के लिए घोंसले बनाने और भोजन खोजने के लिए उपयुक्त स्थानों की उपलब्धता को कम करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जैव विविधता का संरक्षण
2. भोजन स्रोतों की कमी और विषाक्तता
- पशुधन में डिक्लोफेनाक (diclofenac) जैसी गैर-स्टेरायडल सूजन-रोधी दवाओं (NSAIDs) का उपयोग गिद्धों के लिए विषाक्त सिद्ध हुआ है, जिससे उनकी आबादी में भारी गिरावट आई है।
- मृत पशुओं की उपलब्धता में कमी, विशेष रूप से संरक्षित क्षेत्रों के बाहर, गिद्धों के लिए भोजन की कमी का कारण बनती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: प्रदूषण और संरक्षण के मुद्दे
3. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- कुछ क्षेत्रों में, गिद्धों को मृत पशुओं के पास देखा जाता है, जिससे उन्हें कभी-कभी गलत समझा जाता है या उन्हें हानिकारक माना जाता है, जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है।
- बिजली के तारों और पवन टर्बाइनों से टकराना भी गिद्धों की मृत्यु का एक कारण है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व
4. प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण प्रयासों का अभाव
- गिद्धों की विभिन्न प्रजातियों की विशिष्ट आवश्यकताओं और खतरों को समझने और संबोधित करने के लिए लक्षित अनुसंधान और संरक्षण कार्यक्रमों की कमी।
- जन जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी की कमी भी संरक्षण प्रयासों को कमजोर करती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: संरक्षण नीतियाँ और कानून
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिक्लोफेनाक का उपयोग | पशुधन में डिक्लोफेनाक जैसी दवाओं का उपयोग गिद्धों के लिए घातक है, जिससे उनकी किडनी फेल हो जाती है। |
| आवास का नुकसान | कृषि विस्तार और शहरीकरण के कारण गिद्धों के घोंसले बनाने और भोजन खोजने के स्थानों का विनाश। |
| भोजन की कमी | मृत पशुओं की संख्या में कमी और शवों के निपटान के बदलते तरीके गिद्धों के लिए भोजन की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं। |
| विषाक्तता | शिकारियों को मारने के लिए उपयोग किए जाने वाले जहर के कारण अप्रत्यक्ष विषाक्तता, जो गिद्धों द्वारा खाए गए शवों में प्रवेश कर जाता है। |
| जन जागरूकता का अभाव | गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में आम जनता में जागरूकता की कमी। |
आगे की राह
- डिक्लोफेनाक और अन्य विषाक्त NSAIDs के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू करना और पशु चिकित्सा में सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देना।
- गिद्धों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों (Vulture Safe Zones) का विस्तार करना और इन क्षेत्रों में भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘गिद्ध रेस्तरां’ (Vulture Restaurants) जैसी पहल शुरू करना।
- गिद्धों के आवासों का संरक्षण और पुनर्स्थापन करना, जिसमें घोंसले बनाने वाले पेड़ों की रक्षा करना और उनके लिए सुरक्षित भोजन स्थलों का प्रबंधन करना शामिल है।
- गिद्धों की आबादी की निगरानी के लिए नियमित सर्वेक्षण और अनुसंधान करना, ताकि उनकी स्थिति और खतरों को समझा जा सके।
- गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना, विशेष रूप से स्थानीय समुदायों और किसानों के बीच।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, क्योंकि गिद्धों की कुछ प्रजातियाँ प्रवासी होती हैं और उनके संरक्षण के लिए सीमा पार प्रयासों की आवश्यकता होती है।
- घायल गिद्धों के बचाव और पुनर्वास के लिए सुविधाओं का विकास करना तथा बंदी प्रजनन कार्यक्रमों (captive breeding programs) को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
गिद्ध संरक्षण · पर्यावरण संतुलन · नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम · पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ · रेड-हेडेड वल्चर · व्हाइट-रम्प्ड वल्चर · भारतीय गिद्ध · लुप्तप्राय प्रजातियाँ · जैव विविधता · संरक्षण प्रयास · वन्यजीव सर्वेक्षण
अवधारणा प्रवाह
वायनाड में गिद्ध सर्वेक्षण शुरू होता है। → सर्वेक्षण गिद्धों की संख्या और वितरण का आकलन करता है। → गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में अपमार्जक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। → गिद्धों की आबादी में गिरावट पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। → सर्वेक्षण डेटा संरक्षण रणनीतियों को सूचित करता है। → प्रभावी संरक्षण गिद्धों की आबादी को बहाल करता है। → स्वस्थ गिद्ध आबादी एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में अपमार्जक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. वायनाड वन्यजीव अभयारण्य नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है।
3. भारत में गिद्धों की आबादी में गिरावट का एक प्रमुख कारण डिक्लोफेनाक नामक दवा है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि गिद्ध मृत पशुओं का सेवन करके पारिस्थितिकी तंत्र को साफ रखने में मदद करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि वायनाड वन्यजीव अभयारण्य वास्तव में नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कथन 3 भी सही है क्योंकि डिक्लोफेनाक पशुओं को दी जाने वाली एक दर्द निवारक दवा थी, जो गिद्धों के लिए जहरीली साबित हुई और उनकी आबादी में भारी गिरावट का कारण बनी।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा गिद्धों के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में से एक नहीं है?
- डिक्लोफेनाक के पशु चिकित्सा उपयोग पर प्रतिबंध
- गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित करना
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के तहत गिद्धों के आवासों का विकास
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गिद्धों को उच्च सुरक्षा प्रदान करना
उत्तर: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के तहत गिद्धों के आवासों का विकास — राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिसका गिद्धों के आवासों के विकास से सीधा संबंध नहीं है। अन्य सभी विकल्प गिद्ध संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं, फिर भी उनकी आबादी गंभीर रूप से खतरे में है। भारत में गिद्धों की घटती आबादी के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करें और उनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व (अपमार्जक, रोग नियंत्रण, पोषक तत्व चक्रण) का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **गिद्धों की घटती आबादी के कारण:**
* **डिक्लोफेनाक और अन्य NSAIDs:** पशुओं में उपयोग होने वाली दर्द निवारक दवाओं (जैसे डिक्लोफेनाक, केटोप्रोफेन, एसिक्लोफेनाक) का गिद्धों पर विषाक्त प्रभाव।
* **आवास का नुकसान और विखंडन:** वनों की कटाई, शहरीकरण, कृषि विस्तार के कारण प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना।
* **भोजन की कमी:** मृत पशुओं की उपलब्धता में कमी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन प्रबंधन में बदलाव।
* **विषाक्तता:** कीटनाशकों, चूहे मारने वाली दवाओं और अन्य पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों का अप्रत्यक्ष सेवन।
* **बिजली के तार और पवन टर्बाइन:** उड़ान के दौरान टकराव से मौतें।
* **जलवायु परिवर्तन:** खाद्य श्रृंखला और प्रजनन पैटर्न पर संभावित प्रभाव।
3. **सरकार द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयास:**
* **डिक्लोफेनाक पर प्रतिबंध:** पशु चिकित्सा उपयोग के लिए डिक्लोफेनाक और अन्य हानिकारक NSAIDs पर प्रतिबंध।
* **गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र:** विभिन्न राज्यों (जैसे पिंजौर, रानी, भोपाल, जूनागढ़) में प्रजनन केंद्रों की स्थापना, कैप्टिव प्रजनन और पुनः परिचय कार्यक्रम।
* **गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र (Vulture Safe Zones – VSZs):** डिक्लोफेनाक मुक्त क्षेत्रों की पहचान और उनका विकास।
* **राष्ट्रीय कार्य योजना:** गिद्ध संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan for Vulture Conservation) का कार्यान्वयन।
* **जागरूकता अभियान:** किसानों और पशुपालकों के बीच सुरक्षित वैकल्पिक दवाओं के उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
* **वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972:** गिद्धों को अनुसूची I में रखकर उच्चतम कानूनी सुरक्षा प्रदान करना।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** बॉन कन्वेंशन (Convention on Migratory Species) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों के तहत सहयोग।
4. **निष्कर्ष:** गिद्ध संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए, भविष्य की चुनौतियों और सतत प्रयासों की आवश्यकता पर बल देना।
स्रोत: The Hindu
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में हाल ही में शुरू हुए गिद्ध सर्वेक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
- B. सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल गिद्धों की संख्या का अनुमान लगाना है।
- C. यह सर्वेक्षण केरल राज्य वन अनुसंधान संस्थान (KFRI) द्वारा शुरू किया गया है।
- D. सर्वेक्षण में केवल प्रवासी गिद्धों को शामिल किया जा रहा है।
उत्तर: A. यह सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। — केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में गिद्ध सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य गिद्धों की संख्या और उनके संरक्षण की स्थिति का आकलन करना है।
Mains: वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में चल रहे गिद्ध सर्वेक्षण के महत्व और इसके संभावित परिणामों पर प्रकाश डालते हुए, केरल राज्य वन विभाग द्वारा अपनाई जाने वाली गिद्ध संरक्षण रणनीतियों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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