10 Aug विश्व आदिवासी दिवस 2026: अराकू घाटी में आदिवासी संस्कृति एवं हस्तशिल्प का उत्सव
Tribal craftsSelf-help groupsWelfare schemesCultural exhibitionRoad connectivityFood distribution✎ भारत में जनजातीय विकास का लक्ष्य उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए समावेशी और सतत संवृद्धि सुनिश्चित करना है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधानों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का सहारा लिया जाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, कला एवं संस्कृति | GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, जनजातीय प्रशासन | GS Paper III — आर्थिक विकास, समावेशी संवृद्धि
- Prelims: विश्व आदिवासी दिवस, जनजातीय कल्याण योजनाएँ, जनजातीय संस्कृति, स्वयं सहायता समूह (SHG), Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act (PESA), अनुसूचित जनजातियाँ (ST)
- Essay: जनजातीय विकास और पहचान का संरक्षण, समावेशी विकास: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में जनजातीय विकास का लक्ष्य उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए समावेशी और सतत संवृद्धि सुनिश्चित करना है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधानों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का सहारा लिया जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, विश्व आदिवासी दिवस (World Adivasi Day) पूरे देश में सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जनजातीय हस्तशिल्प और व्यंजनों की प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं, तथा जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर ज़ोर दिया गया। विभिन्न सरकारी अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने जनजातीय कल्याण हेतु चलाई जा रही योजनाओं और पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयास, सड़क संपर्क कार्यक्रम और शैक्षिक पहलें शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने 1994 में 9 अगस्त को विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of the World’s Indigenous Peoples) घोषित किया था।
- भारत में जनजातीय समुदाय देश की जनसंख्या का लगभग 8.6 प्रतिशत हैं और संविधान की पाँचवीं तथा छठी अनुसूची के तहत विशेष प्रावधानों द्वारा संरक्षित हैं।
- भारत सरकार जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएँ और कार्यक्रम चलाती है।
- जनजातीय क्षेत्रों में विकास अक्सर मुख्यधारा के विकास से पीछे रह जाता है, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के अवसरों में असमानताएँ पैदा होती हैं।
- जनजातीय संस्कृति, कला, भाषा और परंपराओं का संरक्षण उनकी पहचान बनाए रखने और राष्ट्रीय विरासत को समृद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups – SHG) जनजातीय महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत में जनजातीय कल्याण से संबंधित प्रमुख पहलें
- पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA Act), 1996: यह अधिनियम अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लिए ग्राम सभाओं को स्वशासन का अधिकार प्रदान करता है।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs): यह मंत्रालय जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और कल्याण के लिए नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों को तैयार करने और लागू करने हेतु नोडल एजेंसी है।
- वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act), 2006: यह अधिनियम वन में रहने वाले जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के वन भूमि पर अधिकारों को मान्यता देता है।
- प्रधानमंत्री वन धन योजना (Pradhan Mantri Van Dhan Yojana): यह योजना जनजातीय लोगों द्वारा लघु वनोपज (Minor Forest Produce – MFP) के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आजीविका सृजन पर केंद्रित है।
- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (Eklavya Model Residential Schools – EMRS): ये विद्यालय दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मध्य और उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करते हैं।
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (National Scheduled Tribes Finance and Development Corporation – NSTFDC): यह निगम अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को आय सृजन गतिविधियों के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है।
- आदिवासी उप-योजना (Tribal Sub-Plan – TSP): यह योजना राज्यों को जनजातीय विकास के लिए विशेष आवंटन करने का निर्देश देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन | आदिवासी समुदायों की संस्कृति, पहचान और अधिकारों को मान्यता देना तथा उनके योगदान का सम्मान करना। |
| सांस्कृतिक प्रदर्शन और शिल्प प्रदर्शनी | आदिवासी कला, हस्तशिल्प और व्यंजनों को बढ़ावा देना, जिससे उनकी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हो सके और आर्थिक अवसर भी मिलें। |
| समावेशी विकास पर जोर | आदिवासी पहचान और परंपराओं को बनाए रखते हुए उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना। |
| महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता | आदिवासी महिलाओं का सशक्तिकरण और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना। |
| दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्क और एम्बुलेंस सेवाएँ | आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार करना। |
| आदिवासी छात्रों के लिए उत्कृष्टता के स्कूल | आदिवासी युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाना। |
महत्व
सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
- यह दिवस आदिवासी समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय परंपराओं और जीवन शैली को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है।
- यह आदिवासी पहचान के संरक्षण और संवर्धन में सहायता करता है, जिससे उन्हें मुख्यधारा के समाज में अपनी विशिष्टता बनाए रखने का प्रोत्साहन मिलता है।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से गैर-आदिवासी आबादी को आदिवासी संस्कृति के प्रति संवेदनशील बनाया जाता है, जिससे आपसी समझ और सम्मान बढ़ता है।
आर्थिक महत्व
- आदिवासी हस्तशिल्प, कलाकृतियों और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी उनके लिए बाजार के अवसर पैदा करती है, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होता है।
- स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को वित्तीय सहायता प्रदान करने से आदिवासी महिलाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलता है और वे आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं।
- पर्यटन को बढ़ावा देकर आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह दिवस सरकार को आदिवासी कल्याण और विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर देता है, साथ ही मौजूदा योजनाओं और पहलों की समीक्षा करने का मंच भी प्रदान करता है।
- जिला प्रशासन द्वारा आदिवासी विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों और नई पहलों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
- यह आदिवासी समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नीति निर्माताओं को प्रेरित करता है, जिससे अधिक प्रभावी और लक्षित नीतियाँ बन सकें।
चुनौतियाँ
1. सांस्कृतिक पहचान का क्षरण
- आधुनिकीकरण और बाहरी प्रभावों के कारण आदिवासी भाषाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं के लुप्त होने का खतरा।
- युवा पीढ़ी में अपनी पारंपरिक संस्कृति के प्रति घटती रुचि और शहरी जीवन शैली की ओर झुकाव।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज, विविधता, जनजातीय मुद्दे
2. आर्थिक पिछड़ापन और आजीविका के मुद्दे
- वन उत्पादों पर निर्भरता में कमी, भूमि विस्थापन और बाजार तक सीमित पहुँच के कारण आजीविका के अवसरों का अभाव।
- ऋणग्रस्तता, बिचौलियों का शोषण और न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) का उचित लाभ न मिल पाना।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, जनजातीय विकास
3. स्वास्थ्य और पोषण संबंधी चुनौतियाँ
- दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों और बुनियादी ढाँचे की कमी।
- कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की उच्च दर, और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अधिक निर्भरता।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, मानव विकास
4. शिक्षा का अभाव और गुणवत्ता संबंधी समस्याएँ
- स्कूलों तक पहुँच की कमी, शिक्षकों की अनुपलब्धता और आदिवासी भाषाओं में शिक्षण सामग्री का अभाव।
- उच्च शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों की कमी, जिससे रोजगार प्राप्त करने में बाधाएँ आती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शिक्षा, मानव संसाधन विकास
5. बुनियादी ढाँचे की कमी
- दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क संपर्क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं का अभाव।
- यह विकास योजनाओं के कार्यान्वयन और सेवाओं की पहुँच में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, क्षेत्रीय असमानताएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि विस्थापन | विकास परियोजनाओं और खनन के कारण आदिवासियों का अपनी पारंपरिक भूमि से विस्थापन, जिससे उनकी आजीविका और पहचान पर खतरा। |
| वन अधिकारों का कार्यान्वयन | वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ, जिससे आदिवासियों को उनके वन संसाधनों पर अधिकार नहीं मिल पाते। |
| स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच | दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (Primary Health Centres) की कमी और चिकित्सा कर्मियों की अनुपलब्धता, जिससे स्वास्थ्य परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव। |
| शिक्षा में अंतराल | आदिवासी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच में असमानता, जिससे ड्रॉपआउट दर अधिक और कौशल विकास में बाधाएँ। |
| सांस्कृतिक संरक्षण | आधुनिकता के प्रभाव में आदिवासी भाषाओं, कलाओं और रीति-रिवाजों के लुप्त होने का जोखिम, जिससे उनकी अनूठी पहचान खतरे में। |
| आर्थिक शोषण | बिचौलियों द्वारा वन उत्पादों और कृषि उपज के लिए कम मूल्य का भुगतान, जिससे आदिवासियों का आर्थिक शोषण होता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- Food in PGRS योजना
- खेत बचाओ अभियान ऋण मेला
- ASR लक्ष्यम रोजगार प्रकोष्ठ
- जीरो मातृ मृत्यु दर पहल
- अडावी थाली बाटा सड़क संपर्क कार्यक्रम
- उत्कृष्टता के स्कूल
आगे की राह
- आदिवासी भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम और पाठ्यक्रम विकसित करना।
- आदिवासी हस्तशिल्प और उत्पादों के लिए स्थायी बाजार लिंकेज स्थापित करना, जिसमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग और भौगोलिक संकेत (Geographical Indication) टैग का प्रचार शामिल हो।
- दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, टेलीमेडिसिन और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता में सुधार करना।
- आदिवासी युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना जो उनकी पारंपरिक कलाओं और आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA) का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना और सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को मान्यता देना, जिससे आदिवासियों को उनके संसाधनों पर नियंत्रण मिल सके।
- आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे, जैसे सड़क, बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करना।
- आदिवासी समुदायों को विकास योजनाओं की योजना और कार्यान्वयन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना, ताकि उनकी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को सही ढंग से संबोधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विश्व आदिवासी दिवस · आदिवासी संस्कृति · समावेशी विकास · जनजातीय कल्याण योजनाएँ · स्वयं सहायता समूह · मातृ मृत्यु दर · शिक्षा पहल · सड़क संपर्क कार्यक्रम · जनजातीय हस्तशिल्प · आदिवासी पहचान संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 15: भेदभाव का निषेध, विशेष रूप से सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 16: सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता, पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान।
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना।
- अनुच्छेद 244: अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
- पाँचवीं अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर अन्य राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित प्रावधान।
- छठी अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान।
अवधारणा प्रवाह
विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन → आदिवासी संस्कृति और पहचान का प्रदर्शन → आदिवासी विकास योजनाओं का अनावरण → समुदायों का सशक्तिकरण और कल्याण → समावेशी विकास और संरक्षण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है।
2. भारत का संविधान ‘आदिवासी’ शब्द को परिभाषित करता है।
3. अनुच्छेद 366(25) भारत में अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। कथन 2 गलत है। भारत का संविधान ‘आदिवासी’ शब्द को परिभाषित नहीं करता है, बल्कि ‘अनुसूचित जनजाति’ शब्द का उपयोग करता है। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 366(25) भारत में अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहलें जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास से संबंधित हैं?
1. फूड इन PGRS योजना
2. खेत बचाओ अभियान ऋण मेला
3. ASR लक्ष्यम रोजगार प्रकोष्ठ
4. आदवी थाली बाटा सड़क संपर्क कार्यक्रम
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प (फूड इन PGRS योजना, खेत बचाओ अभियान ऋण मेला, ASR लक्ष्यम रोजगार प्रकोष्ठ और आदवी थाली बाटा सड़क संपर्क कार्यक्रम) जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास से संबंधित पहलें हैं, जैसा कि समाचार में उल्लेख किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में विभिन्न सरकारी पहलें और स्वयं सहायता समूह किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? हाल के उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में जनजातीय समुदायों की स्थिति और समावेशी विकास के महत्व को संक्षेप में बताएं। सरकारी पहलों पर चर्चा करें, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क और रोजगार से संबंधित योजनाएँ (जैसे आदवी थाली बाटा, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, जीरो मैटरनल मोर्टेलिटी रेट पहल, ASR लक्ष्यम रोजगार प्रकोष्ठ)। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें वित्तीय सहायता, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन शामिल हो। जनजातीय पहचान, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के महत्व को उजागर करें। निष्कर्ष में, इन प्रयासों के माध्यम से जनजातीय समुदायों के समग्र उत्थान और मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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