22 Jul विश्व में भूख का स्तर तीसरे साल गिरा, लेकिन अफ्रीका में अभी भी बड़ी चुनौती: UN रिपोर्ट 2026
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, गरीबी और भूख से संबंधित मुद्दे | GS Paper III — आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा
- Prelims: SOFI रिपोर्ट, सतत विकास लक्ष्य (SDG 2), खाद्य सुरक्षा, कुपोषण, वैश्विक भूख सूचकांक, संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)
- Essay: वैश्विक खाद्य सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भारत की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: वैश्विक भूख में लगातार कमी के बावजूद, क्षेत्रीय असमानताएँ और बाहरी कारक 2030 तक SDG 2 की प्राप्ति के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश कर रहे हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र की ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2026’ (SOFI 2026) रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में लगातार तीसरे वर्ष वैश्विक भूख के स्तर में कमी आई है। हालांकि, यह प्रगति असमान है और 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए अपर्याप्त है, विशेष रूप से अफ्रीका में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
पृष्ठभूमि
- SOFI रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की पाँच विशिष्ट एजेंसियों — FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित की जाती है।
- यह रिपोर्ट वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
- सतत विकास लक्ष्य 2 (SDG 2) का उद्देश्य ‘भूख को समाप्त करना, खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना, पोषण में सुधार करना और सतत कृषि को बढ़ावा देना’ है।
- 2025 में वैश्विक आबादी का 7.8 प्रतिशत (लगभग 645 मिलियन लोग) भूख से प्रभावित थे, जो 2024 के 8.1 प्रतिशत और 2022 के 8.6 प्रतिशत से कम है।
- एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में सुधार देखा गया है, जबकि अफ्रीका में अभी भी सबसे अधिक (लगभग 309 मिलियन) भूखे लोग हैं।
- मध्य पूर्व संघर्ष और अल नीनो जैसी चरम मौसमी घटनाएँ भविष्य में भूख की स्थिति को और खराब कर सकती हैं।
खाद्य सुरक्षा और कुपोषण
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) तब होती है जब सभी लोगों को, हर समय, सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक भौतिक, सामाजिक और आर्थिक पहुँच प्राप्त हो।
- कुपोषण (Malnutrition) एक व्यापक शब्द है जो पोषक तत्वों की कमी, अधिकता या असंतुलन को संदर्भित करता है। इसमें अल्पपोषण (अंडरन्यूट्रिशन) और अतिपोषण (ओवरन्यूट्रिशन) दोनों शामिल हैं।
- अल्पपोषण में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम ऊँचाई), वेस्टिंग (ऊँचाई के हिसाब से कम वज़न), कम वज़न (उम्र के हिसाब से कम वज़न) और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी शामिल है।
- खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) का अर्थ है भोजन तक पहुँच की अनिश्चितता या अपर्याप्तता, जिससे व्यक्ति को गुणवत्ता या मात्रा में समझौता करना पड़ता है।
- SOFI रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक आबादी का 25.8 प्रतिशत (लगभग 2.1 बिलियन लोग) मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे।
- ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक प्रचलित है, और महिलाएँ अभी भी असमान रूप से प्रभावित हैं।
- जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, आर्थिक मंदी और असमानताएँ वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैश्विक भूख में कमी | लगातार तीसरे वर्ष वैश्विक भूख में गिरावट दर्ज की गई है, जो प्रगति की संभावना को दर्शाती है। |
| क्षेत्रीय असमानताएँ | एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में सुधार हुआ है, जबकि अफ्रीका में सर्वाधिक भूखे लोग हैं। |
| खाद्य असुरक्षा | वैश्विक स्तर पर खाद्य असुरक्षा में कमी आई है, लेकिन यह अभी भी महामारी-पूर्व के स्तर से अधिक है। |
| ग्रामीण-शहरी अंतर | ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक प्रचलित है। |
| लैंगिक असमानता | महिलाएं अभी भी खाद्य असुरक्षा से असंगत रूप से प्रभावित हैं, हालांकि लैंगिक अंतर थोड़ा कम हुआ है। |
| भविष्य की चुनौतियाँ | मध्य पूर्व संघर्ष, चरम मौसमी घटनाएँ (जैसे अल नीनो) और मानवीय सहायता में कमी भविष्य की प्रगति को बाधित कर सकती हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- भूख और कुपोषण में कमी से मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) में सुधार होता है।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) में सुधार से समाज में स्थिरता और शांति बढ़ती है।
- महिलाओं और ग्रामीण आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना लैंगिक समानता और समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
आर्थिक महत्व
- स्वस्थ आबादी की उत्पादकता अधिक होती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
- खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा पर सरकारी व्यय कम होता है।
- कृषि क्षेत्र में निवेश और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देता है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- वैश्विक भूख को संबोधित करना सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से SDG 2 (शून्य भूख)।
- यह रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवीय सहायता के महत्व पर प्रकाश डालती है, विशेषकर संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में।
- जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है।
चुनौतियाँ
1. क्षेत्रीय असमानताएँ
- अफ्रीका में भूखे लोगों की संख्या सबसे अधिक है, जो वैश्विक प्रगति के बावजूद एक बड़ी चुनौती है।
- विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के स्तर में भारी अंतर है, जिससे लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, गरीबी और विकास
2. संघर्ष और अस्थिरता
- मध्य पूर्व संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनाव खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) को बढ़ाते हैं और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं।
- संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुँचाना चुनौतीपूर्ण होता है, जिससे भूख और कुपोषण बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आंतरिक सुरक्षा
3. जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम
- अल नीनो जैसी चरम मौसमी घटनाएँ कृषि उत्पादन को प्रभावित करती हैं और खाद्य असुरक्षा को बढ़ाती हैं।
- जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, आपदा प्रबंधन
4. वित्तीय सहायता में कमी
- आधिकारिक विकास सहायता (Official Development Assistance) और मानवीय वित्तपोषण में कमी वैश्विक भूख से निपटने के प्रयासों को कमजोर कर रही है।
- विकासशील देशों के पास खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संगठन, विकास सहायता
5. खाद्य प्रणाली की भेद्यता
- वैश्विक खाद्य प्रणालियाँ बाहरी झटकों, जैसे ऊर्जा और उर्वरक की कीमतों में वृद्धि, के प्रति संवेदनशील हैं।
- स्वस्थ आहार की उच्च लागत कई लोगों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, खाद्य प्रसंस्करण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अफ्रीका में भूख | तेजी से बढ़ती जनसंख्या के बीच सर्वाधिक भूखे लोग। |
| मध्य पूर्व संघर्ष | खाद्य मुद्रास्फीति और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान। |
| चरम मौसमी घटनाएँ | कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव, खाद्य असुरक्षा में वृद्धि। |
| मानवीय वित्तपोषण में कमी | वैश्विक भूख से निपटने के प्रयासों में बाधा। |
| स्वस्थ आहार की लागत | गरीब और कमजोर आबादी के लिए पौष्टिक भोजन तक पहुँच की कमी। |
| ग्रामीण-शहरी असमानता | ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा का उच्च प्रसार। |
आगे की राह
- क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए लक्षित और अनुकूलित नीतियाँ अपनाना।
- संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना और मानवीय सहायता तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और कृषि को जलवायु-लचीला बनाने के लिए निवेश करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना और विकासशील देशों को पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- खाद्य प्रणालियों को मजबूत करना, जिसमें आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है।
- स्वस्थ और पौष्टिक आहार को सभी के लिए वहनीय और सुलभ बनाना।
- महिलाओं और ग्रामीण आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देना।
- खाद्य अपशिष्ट (Food Waste) को कम करने और खाद्य वितरण प्रणालियों में सुधार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वैश्विक भूख सूचकांक · खाद्य सुरक्षा · सतत विकास लक्ष्य (SDG 2) · कुपोषण · क्षेत्रीय असमानताएँ · SOFI रिपोर्ट · जलवायु परिवर्तन · भू-राजनीतिक संघर्ष · खाद्य असुरक्षा · स्वस्थ आहार की लागत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार
- अनुच्छेद 47: पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार
अवधारणा प्रवाह
संघर्ष/चरम मौसम → खाद्य आपूर्ति में व्यवधान → खाद्य मुद्रास्फीति → खाद्य असुरक्षा/भूख → कुपोषण/स्वास्थ्य समस्याएँ → मानव विकास में बाधा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (SOFI) रिपोर्ट 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 2025 में वैश्विक जनसंख्या का 7.8 प्रतिशत भूख का सामना कर रहा था, जो पिछले वर्षों की तुलना में कमी दर्शाता है।
2. अफ्रीका में अब पूर्ण रूप से सबसे अधिक भूखे लोग हैं, हालांकि वहां की जनसंख्या में भूख का प्रतिशत स्थिर हो रहा है।
3. रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व संघर्ष के कारण 2030 तक भूख से प्रभावित लोगों की संख्या में कमी आने की संभावना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक जनसंख्या का 7.8 प्रतिशत भूख का सामना कर रहा था, जो 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत से कम है।
कथन 2 सही है। अफ्रीका में अब लगभग 309 मिलियन भूखे लोग हैं, जो एशिया से अधिक है, और यह पूर्ण रूप से सबसे अधिक संख्या है, हालांकि वहां की जनसंख्या में भूख का प्रतिशत 20.3% से घटकर 20.0% हो गया है।
कथन 3 गलत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व संघर्ष के कारण 2030 तक भूख से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ सकती है (510-520 मिलियन), जो पूर्व-संघर्ष परिदृश्य (503 मिलियन) से अधिक है।
Q2. खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (SOFI) रिपोर्ट निम्नलिखित में से किन संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से जारी की जाती है?
1. खाद्य और कृषि संगठन (FAO)
2. अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD)
3. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)
4. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)
5. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 3, 4 और 5
- केवल 1, 2, 3, 4 और 5
- केवल 2, 3, 4 और 5
उत्तर: केवल 1, 2, 3, 4 और 5 — SOFI रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की पाँच विशिष्ट एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से जारी की जाती है: खाद्य और कृषि संगठन (FAO), अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP), और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वैश्विक भूख के स्तर में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट के बावजूद, क्षेत्रीय असमानताएँ और खाद्य असुरक्षा की व्यापकता सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस संदर्भ में, वैश्विक भूख को कम करने में प्रगति की प्रकृति का विश्लेषण कीजिए और उन प्रमुख कारकों पर चर्चा कीजिए जो इस प्रगति को बाधित कर रहे हैं।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, SOFI रिपोर्ट के आंकड़ों का उपयोग करते हुए वैश्विक भूख में कमी की प्रवृत्ति और इसकी नाजुक प्रकृति पर चर्चा करें। एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति को उजागर करें, साथ ही अफ्रीका में बढ़ती पूर्ण संख्या और खाद्य असुरक्षा की व्यापकता जैसी क्षेत्रीय असमानताओं पर भी प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, मध्य पूर्व संघर्ष, जलवायु परिवर्तन (जैसे अल नीनो), ऊर्जा और उर्वरक की बढ़ती कीमतें, आधिकारिक विकास सहायता में कमी, और मानवीय वित्तपोषण में कटौती जैसे प्रमुख कारकों का विश्लेषण करें जो वैश्विक भूख को कम करने की प्रगति को बाधित कर रहे हैं। अंत में, SDG 2 (शून्य भूख) को प्राप्त करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान करने हेतु बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर संक्षिप्त निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: who.int
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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