31 Jul वीबी-जी राम-जी अधिनियम 2025: ग्रामीण रोजगार गारंटी में 125 दिनों तक बढ़ोतरी
✎ वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीकृत रोजगार को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करता है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका सुरक्षा, सतत परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास और संबंधित मुद्दे
- Prelims: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025, रोजगार गारंटी योजनाएँ, ग्रामीण विकास मंत्रालय, केंद्र-राज्य निधि साझाकरण, डीबीटी-स्पर्श, सामाजिक लेखा परीक्षा
- Essay: ग्रामीण भारत में गरीबी उन्मूलन और सतत आजीविका के लिए रोजगार गारंटी योजनाओं की भूमिका, भारत में समावेशी विकास के लिए सरकारी नीतियों का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीकृत रोजगार को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करता है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका सुरक्षा, सतत परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम, 2025, 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गया है। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाने, 125 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने और ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक सुदृढ़ वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में ग्रामीण रोजगार और आजीविका सुरक्षा हमेशा से एक महत्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकता रही है, विशेषकर कृषि क्षेत्र पर निर्भरता और मौसमी बेरोजगारी के कारण।
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसे पूर्ववर्ती कार्यक्रमों ने ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम 100 दिनों के गारंटीकृत रोजगार के माध्यम से आजीविका सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास और परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत वैधानिक ढांचे की आवश्यकता महसूस की गई, जो केवल रोजगार सृजन से आगे बढ़कर आजीविका स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करे।
- प्रौद्योगिकी के उपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर अभिसरण की आवश्यकता को भी पहचाना गया।
- बढ़ती ग्रामीण आय और जीवन स्तर को सुनिश्चित करने के लिए रोजगार के दिनों की संख्या में वृद्धि और मजदूरी भुगतान में समयबद्धता पर विशेष जोर दिया गया है।
- यह अधिनियम प्रतिकूल मौसम घटनाओं के शमन और जल-संबंधी कार्यों पर भी बल देता है, जो जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है।
वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 क्या है?
- यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) के तहत एक वैधानिक ढाँचा है।
- यह प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हों, एक वित्त वर्ष में 125 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करता है, जो पहले के 100 दिनों से अधिक है।
- अधिनियम सतत एवं उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन, सतत आजीविका को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
- यह ‘संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण’ (Whole of Government Approach) की परिकल्पना करता है, जो अन्य केंद्रीय एवं राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के साथ अभिसरण को बढ़ावा देता है।
- निधि साझाकरण पद्धति उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 और अन्य सभी राज्यों तथा विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 होगी।
- यह अधिनियम निर्धारित समय के भीतर रोजगार न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते तथा मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे का स्पष्ट रूप से प्रावधान करके श्रमिकों के सांविधिक अधिकारों को सुदृढ़ करता है।
- मजदूरी भुगतान डीबीटी-स्पर्श (DBT-SPARSH) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किया जाता है, जिससे समयबद्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
- योजना के प्रभावी कार्यान्वयन, निगरानी, मूल्यांकन तथा शिकायत निवारण के लिए एक व्यापक संस्थागत ढाँचा प्रदान किया गया है, जिसमें ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार | प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्त वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का अकुशल शारीरिक कार्य सुनिश्चित करता है, जिससे आय सुरक्षा बढ़ती है। |
| निधि साझाकरण पद्धति | उत्तर-पूर्वी, हिमालयी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 का अनुपात, क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय सहायता प्रदान करता है। |
| श्रमिकों के सांविधिक अधिकार | निर्धारित समय में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी भुगतान में देरी पर मुआवजे का प्रावधान, श्रमिकों के अधिकारों को कानूनी रूप से मजबूत करता है। |
| प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यान्वयन | योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता के लिए प्रौद्योगिकी (जैसे DBT-स्पर्श, MIS) का उपयोग, कुशल सेवा वितरण और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। |
| शिकायत निवारण तंत्र | ब्लॉक और जिला स्तर पर समयबद्ध, बहु-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र, योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और लाभार्थियों को समय पर लाभ सुनिश्चित करता है। |
| अभिसरण दृष्टिकोण | अन्य केंद्रीय और राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के साथ अभिसरण को बढ़ावा देता है, जिससे जल-संबंधी कार्यों, ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका-संबंधी कार्यों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और आय वृद्धि को बढ़ावा देता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
- सतत एवं उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों का सृजन करता है, जैसे जल-संबंधी कार्य और ग्रामीण अवसंरचना, जो दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करते हैं।
- ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति में वृद्धि करता है, जिससे स्थानीय बाजारों को प्रोत्साहन मिलता है और समग्र मांग बढ़ती है।
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण परिवारों, विशेषकर कमजोर वर्गों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाता है, जिससे गरीबी और असमानता कम होती है।
- श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करता है और उन्हें बेरोजगारी भत्ता तथा मजदूरी भुगतान में देरी के लिए मुआवजे का अधिकार प्रदान करता है।
- प्रतिकूल मौसम घटनाओं के शमन हेतु कार्यों पर बल देकर ग्रामीण समुदायों की लचीलापन (resilience) बढ़ाता है।
शासनिक महत्व
- प्रौद्योगिकी-सक्षम योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है और जवाबदेही बढ़ती है।
- ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका को बनाए रखता है, जिससे स्थानीय स्तर पर सशक्तिकरण और सहभागी शासन को बढ़ावा मिलता है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निधि साझाकरण पद्धति के माध्यम से सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को मजबूत करता है।
पर्यावरणीय महत्व
- जल-संबंधी कार्यों और सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन पर बल देकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में योगदान देता है।
- ग्रामीण अवसंरचना के विकास में पर्यावरणीय स्थिरता के सिद्धांतों को एकीकृत करता है।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही
- योजना के बड़े पैमाने और ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाव के कारण धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहती है।
- सामाजिक लेखा परीक्षा (social audit) और शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू करना एक चुनौती हो सकती है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू
2. मजदूरी भुगतान में देरी
- DBT-स्पर्श जैसी प्रौद्योगिकी के बावजूद, बैंक खातों में मजदूरी के समयबद्ध अंतरण में तकनीकी या प्रशासनिक बाधाएं आ सकती हैं।
- विलंबित भुगतान के लिए मुआवजे का प्रावधान होने के बावजूद, श्रमिकों को इसे प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास
3. परिसंपत्ति सृजन की गुणवत्ता
- सृजित की जा रही ग्रामीण परिसंपत्तियों (जैसे सड़कें, तालाब) की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- अकुशल शारीरिक कार्य के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए उचित नियोजन और पर्यवेक्षण की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: ग्रामीण विकास, अवसंरचना
4. राजकोषीय स्थिरता
- योजना के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल परिव्यय एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धता है, जिसे बनाए रखना राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) पर दबाव डाल सकता है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निधि साझाकरण में राज्यों की वित्तीय क्षमता एक बाधा बन सकती है, खासकर छोटे राज्यों के लिए।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, राजकोषीय नीति
5. प्रौद्योगिकी तक पहुंच और क्षमता निर्माण
- ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लाभार्थियों और कार्यान्वयनकर्ताओं के लिए प्रौद्योगिकी (जैसे MIS, DBT) तक समान पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- ग्राम पंचायत स्तर पर पदाधिकारियों और श्रमिकों के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग हेतु पर्याप्त क्षमता निर्माण (capacity building) की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| धन का दुरुपयोग | योजना के बड़े पैमाने और ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाव के कारण धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की संभावना। |
| मजदूरी भुगतान में देरी | तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं के कारण श्रमिकों के बैंक खातों में समय पर मजदूरी अंतरण में कठिनाई। |
| परिसंपत्ति गुणवत्ता | सृजित की जा रही ग्रामीण परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करने में चुनौती। |
| राजकोषीय दबाव | योजना के बड़े परिव्यय के कारण केंद्र और राज्य सरकारों पर राजकोषीय बोझ। |
| प्रौद्योगिकी अंतर | ग्रामीण क्षेत्रों में सभी हितधारकों के लिए प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच और उसके उपयोग हेतु क्षमता निर्माण की कमी। |
| शिकायत निवारण की प्रभावशीलता | दूरदराज के क्षेत्रों में शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू करने में बाधाएं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम, 2025
आगे की राह
- सामाजिक लेखा परीक्षा को मजबूत किया जाए और उसकी रिपोर्टों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- मजदूरी भुगतान में देरी के लिए मुआवजे के तंत्र को सरल और अधिक सुलभ बनाया जाए।
- सृजित की जाने वाली परिसंपत्तियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और कड़े पर्यवेक्षण का उपयोग किया जाए।
- राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और संसाधन जुटाने की रणनीतियाँ विकसित की जाएँ।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएँ।
- शिकायत निवारण तंत्र को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए और उसकी पहुंच को और बढ़ाया जाए।
- योजना के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान की जाए।
- विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण को और गहरा किया जाए ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रोजगार गारंटी · आजीविका सहायता · ग्रामीण विकास · VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 · मनरेगा · सामाजिक लेखा परीक्षा · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · संघवाद · ग्रामीण अवसंरचना · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने के अधिकार को सुनिश्चित करना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
अवधारणा प्रवाह
ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाना → वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 का अधिनियमन → 125 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार → सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों का सृजन → रोजगार सृजन और आय वृद्धि → ग्रामीण अवसंरचना का सुदृढीकरण → विकसित भारत की दिशा में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अधिनियम प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्त वर्ष में 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का प्रावधान करता है।
2. यह अधिनियम जल-संबंधी कार्यों और मूल ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण पर केंद्रित है।
3. यह अधिनियम केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निधि साझाकरण के लिए 90:10 का अनुपात केवल उत्तर पूर्वी राज्यों और हिमालयी राज्यों के लिए निर्धारित करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीकृत रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक करता है। कथन 2 सही है क्योंकि अधिनियम जल-संबंधी कार्यों, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना तथा प्रतिकूल मौसम घटनाओं के शमन हेतु कार्यों पर बल देता है। कथन 3 गलत है क्योंकि 90:10 का अनुपात उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए है, न कि केवल उत्तर पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए।
Q2. VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 के तहत, बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान में देरी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान सही है?
- यह अधिनियम बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान नहीं करता है, केवल मजदूरी भुगतान में देरी के लिए मुआवजा देता है।
- यह अधिनियम निर्धारित समय के भीतर रोजगार न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे का स्पष्ट रूप से प्रावधान करता है।
- यह अधिनियम केवल बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान करता है, मजदूरी भुगतान में देरी के लिए कोई मुआवजा नहीं देता है।
- यह अधिनियम केंद्र सरकार के विवेक पर बेरोजगारी भत्ते और मुआवजे का प्रावधान करता है।
उत्तर: यह अधिनियम निर्धारित समय के भीतर रोजगार न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे का स्पष्ट रूप से प्रावधान करता है। — VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 निर्धारित समय के भीतर रोजगार न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते तथा मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे का स्पष्ट रूप से प्रावधान करके श्रमिकों के सांविधिक अधिकारों को और सुदृढ़ करता है।
Q3. अभिकथन (A): VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आय वृद्धि में उल्लेखनीय तेजी लाने की उम्मीद है।
कारण (R): यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीकृत रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक करता है और सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन पर बल देता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा आय वृद्धि में उल्लेखनीय तेजी लाना है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार और परिसंपत्ति निर्माण सीधे रोजगार सृजन और आय वृद्धि से संबंधित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM JI) अधिनियम, 2025 ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने में किस प्रकार सहायक होगा? इसके प्रमुख प्रावधानों और पूर्ववर्ती योजनाओं से भिन्नता पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: VB-G RAM JI अधिनियम, 2025 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और 1 जुलाई, 2026 से लागू होने का उल्लेख।
2. आजीविका सुरक्षा में सहायता: अधिनियम ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को कैसे बढ़ाता है, इस पर चर्चा करें। इसमें 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार, बेरोजगारी भत्ते, मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे और सतत आजीविका को बढ़ावा देने वाले प्रावधानों को शामिल करें।
3. प्रमुख प्रावधान: अधिनियम के मुख्य प्रावधानों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे:
क. गारंटीकृत रोजगार: 125 दिनों का अकुशल शारीरिक कार्य।
ख. निधि साझाकरण: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 90:10 (उत्तर पूर्वी, हिमालयी राज्यों और कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए) और 60:40 (अन्य राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए) का अनुपात।
ग. परिसंपत्ति सृजन: जल-संबंधी कार्य, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना पर बल।
घ. प्रौद्योगिकी का उपयोग: योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम दृष्टिकोण।
ङ. शिकायत निवारण: ब्लॉक और जिला स्तर पर बहु-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र।
च. भुगतान तंत्र: DBT-स्पर्श के माध्यम से सीधे बैंक खातों में मजदूरी का समयबद्ध अंतरण।
छ. ग्राम पंचायत की भूमिका: कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका।
4. पूर्ववर्ती योजनाओं से भिन्नता: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसे पूर्ववर्ती कार्यक्रमों से इसकी भिन्नता पर प्रकाश डालें। मुख्य अंतरों में 100 दिनों से 125 दिनों तक रोजगार में वृद्धि, ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी पर अधिक जोर और विशिष्ट निधि साझाकरण पैटर्न शामिल हो सकते हैं।
5. निष्कर्ष: अधिनियम के संभावित सकारात्मक प्रभावों और ग्रामीण विकास में इसके योगदान पर एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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