24 Jul वीबी-जी राम-जी योजना: ग्रामीण रोज़गार गारंटी में बड़ा बदलाव, जानें नए प्रावधान
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार
- Prelims: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, महात्मा गांधी नरेगा, ग्रामीण रोज़गार गारंटी, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS), प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS), ग्रामीण विकास मंत्रालय, पूरा-सरकार दृष्टिकोण
- Essay: ग्रामीण भारत में रोज़गार सृजन और आजीविका सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, भारत के आर्थिक विकास में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: वीबी-जी राम-जी अधिनियम 2025, जो 01 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ है, ग्रामीण परिवारों के लिए रोज़गार की कानूनी गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करता है और ग्रामीण आजीविका तथा अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने के लिए एक ‘पूरा-सरकार’ दृष्टिकोण अपनाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) कार्यक्रम के कार्यान्वयन की लगातार समीक्षा कर रही है। यह अधिनियम 01 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजन और आजीविका सुरक्षा को मज़बूत करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में ग्रामीण रोज़गार गारंटी की अवधारणा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के माध्यम से स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 100 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी प्रदान करना था।
- ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन के लिए MGNREGA एक महत्वपूर्ण साधन रहा है, जिसने लाखों ग्रामीण परिवारों को आय का स्रोत प्रदान किया है।
- समय के साथ, MGNREGA के कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ सामने आईं, जिनमें मज़दूरी के भुगतान में देरी और योजना की निगरानी से संबंधित मुद्दे शामिल थे।
- इन चुनौतियों का समाधान करने और ग्रामीण रोज़गार गारंटी संरचना को और अधिक मज़बूत करने के लिए ‘विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम 2025’ लाया गया।
- यह नया अधिनियम 01 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हो गया है, जो ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम क्या है?
- यह अधिनियम ‘विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम 2025’ के तहत 01 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हुआ है।
- यह अधिनियम एक वित्तीय वर्ष में प्रति ग्रामीण परिवार रोज़गार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
- वीबी-जी राम-जी अधिनियम आजीविका से जुड़ी अवसंरचना को अपने मुख्य क्षेत्रों में से एक मानते हुए बहुत प्राथमिकता देता है और खेती, उससे जुड़े क्षेत्रों और दूसरे सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित कर ‘पूरा-सरकार’ वाला दृष्टिकोण अपनाता है।
- समय पर मज़दूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) लागू किया है, जिसके तहत मज़दूरी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है।
- कार्यक्रम के कार्यान्वयन की रियल टाइम निगरानी और समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) लागू की गई है।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए, इस योजना के तहत केंद्र का हिस्सा 95,692.31 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो ग्रामीण रोज़गार के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान है।
- राज्यों के अनुमानित हिस्से को मिलाकर, कार्यक्रम का कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा होने की उम्मीद है, जो इस योजना के प्रति सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| रोज़गार गारंटी में वृद्धि | ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन की रोज़गार की कानूनी गारंटी। |
| व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) | कार्यक्रम के कार्यान्वयन की वास्तविक समय (रियल-टाइम) निगरानी और समस्याओं का त्वरित समाधान। |
| राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) | मज़दूरी का समय पर और सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करना। |
| आजीविका अवसंरचना पर ज़ोर | कौशल विकास केंद्र, ग्रामीण लाइब्रेरी, डिजिटल लर्निंग केंद्र जैसी सामुदायिक संसाधनों का निर्माण। |
| पूरा-सरकार दृष्टिकोण | खेती, संबद्ध क्षेत्रों और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित कर समग्र विकास। |
| पर्याप्त बजटीय प्रावधान | वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र का हिस्सा ₹95,692.31 करोड़, कुल खर्च ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में आय सृजन और क्रय शक्ति में वृद्धि करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।
- ग्रामीण बेरोज़गारी और अल्प-रोज़गार की समस्या का समाधान करके आर्थिक स्थिरता प्रदान करना।
- ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण से दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देना।
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाना।
- ग्रामीण-शहरी प्रवासन को कम करने में सहायता करना, जिससे शहरी क्षेत्रों पर दबाव कम होगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार।
शासनिक महत्व
- प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मज़बूत करना और ‘पूरा-सरकार’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
- कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मज़बूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- योजना के तहत काम की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना का निर्माण सुनिश्चित करना।
- भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकना, विशेषकर मज़दूरी भुगतान और सामग्री खरीद में।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
2. मज़दूरी भुगतान में देरी
- तकनीकी समस्याओं या प्रशासनिक अक्षमता के कारण मज़दूरी भुगतान में देरी की संभावना।
- भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- लाभार्थियों तक समय पर और पूर्ण भुगतान सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: कल्याणकारी योजनाएँ
3. कौशल विकास और आजीविका
- ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास केंद्रों और डिजिटल लर्निंग केंद्रों की स्थापना और रखरखाव।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करना।
- प्रशिक्षित व्यक्तियों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-3: समावेशी विकास
4. निगरानी और मूल्यांकन
- वास्तविक समय (रियल-टाइम) निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।
- कार्यान्वयन एजेंसियों की समस्याओं का समय पर समाधान करना।
- कार्यक्रम के परिणामों का नियमित मूल्यांकन और आवश्यक सुधार करना।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| काम की मांग और आपूर्ति | सभी पात्र ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त और समय पर रोज़गार उपलब्ध कराना। |
| मज़दूरी भुगतान में देरी | तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं के कारण लाभार्थियों तक मज़दूरी पहुंचने में विलंब। |
| अवसंरचना की गुणवत्ता | निर्मित ग्रामीण अवसंरचना की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करना। |
| भ्रष्टाचार और लीकेज | योजना के तहत धन के दुरुपयोग और अनियमितताओं को रोकना। |
| कौशल विकास का प्रभाव | प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रासंगिकता और स्थायी आजीविका सृजन में उनकी भूमिका। |
| केंद्र-राज्य समन्वय | योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सुचारु तालमेल। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)
- विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-JI)
आगे की राह
- कार्यक्रम के तहत काम की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए एक गतिशील तंत्र विकसित करना।
- मज़दूरी भुगतान प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करना और भुगतान में किसी भी देरी को रोकने के लिए सख्त समय-सीमा लागू करना।
- ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ना।
- भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करना और सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) को मज़बूत करना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और बेहतर बनाना ताकि योजना का सुचारु कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- कार्यक्रम के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और आवश्यकतानुसार नीतिगत सुधार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) · रोज़गार सृजन · ग्रामीण विकास · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) · प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) · कानूनी गारंटी · सतत आजीविका · पूरा-सरकार दृष्टिकोण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 41: काम पाने का अधिकार
- अनुच्छेद 43: कामगारों के लिए निर्वाह मज़दूरी
अवधारणा प्रवाह
VB-G RAM-JI अधिनियम 2025 का अधिनियमन → ग्रामीण परिवारों के लिए 125 दिन के रोज़गार की कानूनी गारंटी → MIS, NeFMS, DBT जैसी प्रणालियों का कार्यान्वयन → ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका संसाधनों का निर्माण → ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण → विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अधिनियम 01 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हुआ है।
2. यह एक वित्तीय वर्ष में प्रति ग्रामीण परिवार रोज़गार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है।
3. यह आजीविका से जुड़ी अवसंरचना को प्राथमिकता देता है और कौशल विकास केंद्रों के निर्माण की अनुमति देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अधिनियम 01 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ है। कथन 2 सही है क्योंकि यह रोज़गार गारंटी को 100 से 125 दिन बढ़ाता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह आजीविका अवसंरचना और कौशल विकास केंद्रों को बढ़ावा देता है।
Q2. वीबी-जी राम-जी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में निम्नलिखित में से कौन-सा/से शामिल है/हैं?
1. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NEFMS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का कार्यान्वयन।
2. रियल-टाइम निगरानी के लिए व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) की स्थापना।
3. कार्यक्रम को सुचारु रूप से लागू करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित रूप से धनराशि जारी करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी तीनों कथन सही हैं। NEFMS और DBT समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करते हैं। MIS रियल-टाइम निगरानी के लिए है और राज्यों को नियमित रूप से धनराशि जारी करना कार्यक्रम के सुचारु कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत में रोज़गार सृजन और सतत आजीविका को बढ़ावा देने में किस प्रकार एक महत्वपूर्ण कदम है? इसके प्रमुख प्रावधानों और कार्यान्वयन चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में वीबी-जी राम-जी अधिनियम के महत्व को समझाना है, जिसमें रोज़गार गारंटी में वृद्धि, आजीविका अवसंरचना पर ध्यान और ‘पूरा-सरकार’ दृष्टिकोण शामिल हैं। दूसरे भाग में अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों जैसे 125 दिन की रोज़गार गारंटी, MIS, DBT और NEFMS का उल्लेख करना है। अंत में, कार्यान्वयन से जुड़ी संभावित चुनौतियों जैसे समय पर मजदूरी भुगतान, तकनीकी बाधाएं, राज्यों के साथ समन्वय और धन के प्रभावी उपयोग पर चर्चा करनी है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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