05 Sep संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित किया, एपी एनजीओ ने किया स्वागत
✎ संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को 'अंतर्राष्ट्रीय बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस' घोषित किया गया है, जो बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा और NFHS के आंकड़ों के अनुसार इसमें कमी देखी जा रही है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — सामाजिक मुद्दे | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, शासन, सामाजिक न्याय
- Prelims: बाल विवाह, अंतर्राष्ट्रीय बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS), बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006, संयुक्त राष्ट्र (UN), बाल अधिकार
- Essay: बाल विवाह: सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ और समाधान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भारत में सामाजिक सुधार
त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस’ घोषित किया गया है, जो बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा और NFHS के आंकड़ों के अनुसार इसमें कमी देखी जा रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा 27 नवंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस’ (International Day for the Elimination of Child, Early and Forced Marriage) घोषित करने के निर्णय का स्वागत किया है। यह निर्णय बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ वैश्विक जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार, भारत में 20-24 आयु वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ था।
- NFHS 2023-24 के आंकड़ों में यह प्रतिशत घटकर 20.1% हो गया है, जो इस दिशा में कुछ प्रगति को दर्शाता है।
- केंद्र सरकार ने 2026 तक बाल विवाह में 10% की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और कानूनी परिणाम गंभीर होते हैं, जो बच्चों के समग्र विकास को बाधित करते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र के इस कदम से सदस्य देशों को बाल विवाह के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने और प्रभावी नीतियां बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
बाल विवाह क्या है?
- बाल विवाह एक ऐसा विवाह है जिसमें एक या दोनों पक्ष 18 वर्ष से कम आयु के होते हैं।
- यह मानव अधिकार का उल्लंघन है और बच्चों को उनके बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास के अधिकारों से वंचित करता है।
- बाल विवाह लड़कियों को विशेष रूप से प्रभावित करता है, जिससे उन्हें कम उम्र में गर्भावस्था, मातृ मृत्यु दर में वृद्धि और घरेलू हिंसा का अधिक जोखिम होता है।
- यह गरीबी, लैंगिक असमानता, शिक्षा की कमी और सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों जैसे कारकों से जुड़ा हुआ है।
- संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन बाल विवाह को समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर काम कर रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस | बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को नामित किया गया। |
| राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS, 2019-21) | भारत में बाल विवाह की व्यापकता पर महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है, जो नीति निर्माण के लिए आधार प्रदान करता है। |
| 20-24 आयु वर्ग की महिलाओं में बाल विवाह का प्रतिशत (NFHS, 2019-21) | 23.3% दर्शाता है कि अभी भी बड़ी संख्या में लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से पहले हो रहा है। |
| केंद्र सरकार का लक्ष्य | 2026 तक बाल विवाह में 10% की कमी लाना, जो इस समस्या से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और बाल अधिकार कार्यकर्ता | जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, पीड़ितों को सहायता प्रदान करने और सरकारी नीतियों की वकालत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- बाल विवाह लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे गरीबी और लैंगिक असमानता का चक्र बना रहता है।
- यह महिलाओं को घरेलू हिंसा, यौन शोषण और कम उम्र में गर्भावस्था के उच्च जोखिम में डालता है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ जाती है।
- बाल विवाह का उन्मूलन लैंगिक समानता (Gender Equality) और महिलाओं के सशक्तिकरण (Women Empowerment) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
कानूनी और शासनिक महत्व
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस की घोषणा बाल विवाह को समाप्त करने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करती है और सदस्य देशों को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।
- यह भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम (Prohibition of Child Marriage Act), 2006 जैसे मौजूदा कानूनों के सख्त प्रवर्तन (Enforcement) की आवश्यकता पर बल देता है।
- यह दिवस सरकारों, नागरिक समाज संगठनों और समुदायों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है ताकि बाल विवाह को जड़ से खत्म किया जा सके।
आर्थिक महत्व
- बाल विवाह के कारण लड़कियों की शिक्षा और कौशल विकास में बाधा आती है, जिससे उनकी आर्थिक उत्पादकता (Economic Productivity) कम हो जाती है और राष्ट्रीय विकास में उनका योगदान सीमित हो जाता है।
- बाल विवाह से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक सहायता की आवश्यकताएं सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर बोझ डालती हैं।
- बाल विवाह को समाप्त करने से महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी (Labour Force Participation) में वृद्धि होगी, जिससे देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. सामाजिक मानदंड और परंपराएं
- कई समुदायों में बाल विवाह को सामाजिक रूप से स्वीकार्य या धार्मिक रूप से अनिवार्य माना जाता है, जिससे इसे समाप्त करना मुश्किल हो जाता है।
- माता-पिता अक्सर अपनी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने या दहेज (Dowry) के बोझ को कम करने के लिए कम उम्र में उनका विवाह कर देते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, भारतीय समाज
2. गरीबी और शिक्षा का अभाव
- गरीब परिवारों में लड़कियों को अक्सर आर्थिक बोझ माना जाता है, और उनका विवाह कम उम्र में कर दिया जाता है ताकि परिवार पर वित्तीय दबाव कम हो सके।
- शिक्षा की कमी या स्कूलों तक पहुंच का अभाव लड़कियों को बाल विवाह के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक अवसर कम होते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, मानव विकास
3. कानूनों का अपर्याप्त प्रवर्तन
- बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के बावजूद, कई मामलों में कानून का प्रभावी ढंग से प्रवर्तन नहीं हो पाता है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- पुलिस और न्यायिक प्रणाली में जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी भी बाल विवाह के मामलों से निपटने में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, कानून और व्यवस्था
4. डेटा संग्रह और निगरानी की चुनौतियाँ
- बाल विवाह के वास्तविक आंकड़ों को एकत्र करना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन मामलों में जहां इसे गुप्त रूप से किया जाता है।
- योजनाओं और हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) की कमी है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बाल विवाह की उच्च व्यापकता | NFHS डेटा दर्शाता है कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से पहले हो रहा है, जो एक गंभीर सामाजिक समस्या है। |
| जागरूकता की कमी | कई समुदायों में बाल विवाह के कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी परिणामों के बारे में जागरूकता का अभाव है। |
| कार्रवाई योजना का अभाव | अंतर्राष्ट्रीय दिवस के सख्त पालन और जागरूकता बढ़ाने के लिए एक ठोस कार्य योजना की आवश्यकता है। |
| अंतर-क्षेत्रीय समन्वय | बाल विवाह को रोकने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता है। |
आगे की राह
- बाल विवाह के कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी परिणामों के बारे में स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रभावी प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, न्यायिक अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील और प्रशिक्षित किया जाए।
- लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच में सुधार किया जाए और उन्हें कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।
- बाल विवाह के मामलों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने और पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए मजबूत सामुदायिक निगरानी तंत्र (Community Monitoring Mechanism) स्थापित किए जाएं।
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए ताकि परिवारों को अपनी बेटियों का विवाह कम उम्र में करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
- अंतर्राष्ट्रीय दिवस को केवल एक प्रतीकात्मक घटना के बजाय, बाल विवाह के खिलाफ ठोस कार्रवाई और प्रगति की समीक्षा के अवसर के रूप में उपयोग किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाल विवाह उन्मूलन · अंतर्राष्ट्रीय दिवस · राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) · बाल अधिकार · लैंगिक समानता · कानूनी प्रावधान · सामाजिक जागरूकता · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · महिला सशक्तिकरण · संयुक्त राष्ट्र पहल · शिक्षा का अधिकार · स्वास्थ्य परिणाम
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता)
- अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार)
- अनुच्छेद 23 (मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का निषेध)
- अनुच्छेद 24 (कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध)
- अनुच्छेद 39(f) (बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर)
अवधारणा प्रवाह
संयुक्त राष्ट्र द्वारा बाल विवाह उन्मूलन दिवस की घोषणा → भारत में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा → NFHS डेटा के आधार पर समस्या की गंभीरता का आकलन → कानूनी प्रावधानों (जैसे बाल विवाह निषेध अधिनियम) का सख्त प्रवर्तन → शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता के माध्यम से लड़कियों का सशक्तिकरण → बाल विवाह में कमी और सामाजिक विकास को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया है।
2. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) 2019-21 के अनुसार, 20-24 आयु वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ था।
3. भारत सरकार ने 2026 तक बाल विवाह में 10% की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल, प्रारंभिक और जबरन विवाह उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया है। NFHS 2019-21 के अनुसार, 20-24 आयु वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ था। कथन 3 गलत है क्योंकि समाचार में केवल यह बताया गया है कि केंद्र ने 2026 तक बाल विवाह में 10% की कमी लाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह भारत सरकार का आधिकारिक लक्ष्य है या किसी विशेष संगठन का।
Q2. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह अधिनियम केवल लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित करता है।
- यह अधिनियम बाल विवाह को शून्य (void) घोषित करता है।
- यह अधिनियम बाल विवाह को प्रतिषेध करता है और ऐसे विवाहों को अमान्य (voidable) बनाता है।
- यह अधिनियम केवल बाल विवाह के आयोजकों को दंडित करता है, न कि इसमें शामिल पक्षों को।
उत्तर: यह अधिनियम बाल विवाह को प्रतिषेध करता है और ऐसे विवाहों को अमान्य (voidable) बनाता है। — बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 बाल विवाह को प्रतिषेध करता है और ऐसे विवाहों को अमान्य (voidable) बनाता है, जिसका अर्थ है कि पीड़ित पक्ष की इच्छा पर इसे रद्द किया जा सकता है। यह अधिनियम लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष निर्धारित करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बाल विवाह उन्मूलन के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित करने के निर्णय के आलोक में, भारत में बाल विवाह की व्यापकता के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसके उन्मूलन हेतु सरकार तथा नागरिक समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के निर्णय का उल्लेख करते हुए करें। भारत में बाल विवाह की व्यापकता के कारणों को सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक कारकों के संदर्भ में विस्तार से बताएं (जैसे गरीबी, अशिक्षा, लैंगिक असमानता, पारंपरिक मान्यताएं)। इसके बाद, सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का मूल्यांकन करें, जिसमें बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 जैसे कानूनी प्रावधान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं, और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े शामिल हों। नागरिक समाज संगठनों (NGOs) की भूमिका, जागरूकता अभियानों और जमीनी स्तर पर हस्तक्षेपों पर भी प्रकाश डालें। अंत में, चुनौतियों और आगे की राह पर चर्चा करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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