सरकार संसद में पारित करेगी प्रमुख विधेयक, जानिए क्या है FCRA और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक

सरकार संसद में पारित करेगी प्रमुख विधेयक, जानिए क्या है FCRA और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक — Key bills and parliamentary logjam timeline

सरकार संसद में पारित करेगी प्रमुख विधेयक, जानिए क्या है FCRA और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: FCRA, जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, सार्वजनिक परीक्षा विधेयक, संसदीय कार्यवाही, विधेयक पारित करने की प्रक्रिया
  • Essay: भारतीय लोकतंत्र में संसदीय कार्यप्रणाली की चुनौतियाँ, शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही: विधायी परिप्रेक्ष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: FCRA भारत में विदेशी चंदे के प्रवाह को विनियमित करता है ताकि इसका उपयोग राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल गतिविधियों के लिए न हो, और इसके प्रस्तावित संशोधन अनुपालन को और मजबूत करेंगे।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सरकार संसद के मौजूदा सत्र में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक (Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill) और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill) जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का लक्ष्य बना रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध के कारण संसदीय कार्यवाही में लगातार व्यवधान आ रहा है, जिससे विधेयकों के पारित होने पर अनिश्चितता बनी हुई है।

पृष्ठभूमि

  • संसद में गतिरोध भारतीय विधायी प्रक्रिया की एक आवर्ती विशेषता रही है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के कारण कार्यवाही बाधित होती है।
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों और संघों को विनियमित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (Registration of Births and Deaths Act, 1969) जन्म और मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान करता है, और इसमें प्रस्तावित संशोधन पंजीकरण प्रक्रिया को और सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखते हैं।
  • हाल ही में, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) और राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक (Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill) जैसे कुछ विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित किए गए हैं।
  • विपक्षी दल छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग के मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर रहे हैं, जिससे संसद में गतिरोध और बढ़ गया है।
  • संसदीय सत्र के दौरान विधेयकों को पारित करना सरकार के विधायी एजेंडे के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन व्यवधानों से इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है या विधेयक अटक सकते हैं।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) क्या है?

  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों, संघों और कंपनियों को विनियमित करने वाला एक कानून है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी चंदे का उपयोग भारत की संप्रभुता, अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली गतिविधियों के लिए न किया जाए।
  • FCRA के तहत, विदेशी चंदा प्राप्त करने के इच्छुक सभी संगठनों को गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।
  • पंजीकृत संगठनों को विदेशी चंदे के उपयोग और प्राप्तियों का नियमित रूप से लेखा-जोखा देना होता है और निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
  • यह अधिनियम सरकार को उन संगठनों के पंजीकरण को रद्द करने या निलंबित करने का अधिकार देता है जो इसके प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।
  • FCRA में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं ताकि इसके प्रावधानों को मजबूत किया जा सके और विदेशी चंदे के दुरुपयोग को रोका जा सके।
  • प्रस्तावित संशोधन संभवतः अनुपालन आवश्यकताओं को और कड़ा करेंगे या अधिनियम के दायरे में कुछ नए प्रावधान जोड़ेंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए सख्त अनुपालन और ढाँचे स्थापित करना।
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA) विदेशी योगदान के विनियमन को मजबूत करना और इसके दुरुपयोग को रोकना।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकने और दोषियों को दंडित करने के लिए कड़े प्रावधान।
राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों और सम्मान के प्रति अपमान को रोकने के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत करना।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 MSME क्षेत्र के विकास और विनियमन को बढ़ावा देना।

महत्व

शासन और पारदर्शिता

  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक सटीक जनसांख्यिकीय डेटा सुनिश्चित करेगा, जो नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • FCRA संशोधन विदेशी निधियों के प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित होगी।

सामाजिक न्याय और जवाबदेही

  • सार्वजनिक परीक्षा विधेयक छात्रों के लिए निष्पक्ष और समान अवसर सुनिश्चित करेगा, जिससे योग्यता को बढ़ावा मिलेगा।
  • राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम विधेयक देश के प्रतीकों और मूल्यों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देगा।

आर्थिक विकास

  • MSME विकास विधेयक इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को बढ़ावा देगा, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) होगी।

चुनौतियाँ

1. संसदीय गतिरोध

  • विपक्ष और सरकार के बीच लगातार गतिरोध के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में देरी हो रही है।
  • विपक्षी दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने से विधायी कार्य प्रभावित हो रहा है।

2. राजनीतिक ध्रुवीकरण

  • विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच तीव्र मतभेद, विशेष रूप से छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर, सदन में रचनात्मक बहस को बाधित कर रहे हैं।
  • आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे से ध्यान भटका रही है।

3. विधेयकों का पारित होना

  • गतिरोध के कारण सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे विधायी प्रक्रिया धीमी हो रही है।
  • कुछ विधेयकों को हंगामे के बीच पारित किया जा रहा है, जिससे उनकी वैधता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
संसदीय कार्यवाही में बाधा महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में देरी, विधायी एजेंडे का प्रभावित होना।
पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन छात्रों पर बल प्रयोग का मुद्दा, विपक्ष द्वारा गृह मंत्री से माफी की मांग।
विपक्षी दलों का विरोध सदन में रचनात्मक बहस की कमी, सरकार पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप।
सरकार का विधायी एजेंडा गतिरोध के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में कठिनाई।

आगे की राह

  • सरकार और विपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए ताकि संसदीय गतिरोध को समाप्त किया जा सके।
  • विधेयकों पर व्यापक विचार-विमर्श और बहस के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे उनकी गुणवत्ता में सुधार हो।
  • संसदीय समितियों की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि विधेयकों की गहन जांच हो सके और आम सहमति बन सके।
  • सदन के नियमों और प्रक्रियाओं का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि सुचारू कार्यवाही हो सके।
  • जनहित के मुद्दों पर राजनीतिक दलों को एक साथ आना चाहिए और राष्ट्रीय महत्व के विधेयकों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • छात्रों के विरोध प्रदर्शनों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संसदीय गतिरोध · विधेयक पारित करना · FCRA संशोधन · लोकतांत्रिक प्रक्रिया · कार्यपालिका-विधायिका संबंध · विपक्ष की भूमिका · कानून निर्माण · संसदीय कार्यवाही · अध्यादेश · जाँच और संतुलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 79’, ‘note’: ‘भारत की संसद का गठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 107’, ‘note’: ‘विधेयकों को पुरःस्थापित और पारित करने के संबंध में’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 118’, ‘note’: ‘संसद की प्रक्रिया के नियम’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाते हैं।  →  संसद में विपक्ष द्वारा विरोध प्रदर्शन और गतिरोध।  →  विधेयकों के पारित होने में देरी या हंगामे के बीच पारित होना।  →  विधायी एजेंडा प्रभावित होता है और शासन में चुनौतियाँ आती हैं।  →  लोकतंत्र और जवाबदेही पर संभावित प्रभाव।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) का उद्देश्य विदेशी दान के उपयोग को विनियमित करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह भारत के राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल न हो।
2. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकना है।
3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 में जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के लिए कड़े अनुपालन और ढांचे का प्रावधान है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। FCRA विदेशी दान को विनियमित करता है, सार्वजनिक परीक्षा विधेयक अनुचित साधनों को रोकता है और जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक विलंबित पंजीकरण के लिए कड़े नियम बनाता है।

Q2. विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह केवल भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशों से प्राप्त दान को विनियमित करता है।
  2. यह गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशी दान प्राप्त करने से पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
  3. यह भारत में व्यक्तियों और संघों द्वारा विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को विनियमित करता है।
  4. यह केवल सरकारी संगठनों द्वारा प्राप्त विदेशी दान को नियंत्रित करता है।

उत्तर: यह भारत में व्यक्तियों और संघों द्वारा विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को विनियमित करता है। — FCRA भारत में व्यक्तियों और संघों द्वारा विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को विनियमित करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे अंशदान राष्ट्रीय हित के प्रतिकूल गतिविधियों के लिए उपयोग न हों।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संसदीय गतिरोध भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण करें और ऐसे गतिरोधों को दूर करने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संसदीय गतिरोध की संक्षिप्त परिभाषा और भारतीय लोकतंत्र पर इसके प्रभावों का उल्लेख।
2. **संसदीय गतिरोध के कारण:**
* सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण।
* महत्वपूर्ण विधेयकों पर आम सहमति का अभाव।
* विपक्ष द्वारा विरोध प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही में बाधा।
* सरकार द्वारा विपक्ष की मांगों को अनदेखा करना।
* अध्यक्ष/सभापति की भूमिका और उनके अधिकार।
3. **भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रभाव:**
* कानून निर्माण में देरी या बाधा (जैसे FCRA संशोधन, जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक)।
* महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा का अभाव।
* कार्यपालिका की जवाबदेही में कमी।
* संसद की प्रतिष्ठा में गिरावट और जनता का विश्वास कम होना।
* अध्यादेशों पर अत्यधिक निर्भरता।
4. **गतिरोधों को दूर करने के संभावित उपाय:**
* **संवैधानिक प्रावधानों का पालन:** नियम और प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन।
* **आम सहमति का निर्माण:** सरकार और विपक्ष के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना।
* **संसदीय समितियों की भूमिका:** विधेयकों की गहन जांच और आम सहमति बनाने में समितियों का उपयोग।
* **पीठासीन अधिकारियों की सक्रिय भूमिका:** सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए निष्पक्ष और प्रभावी प्रबंधन।
* **नैतिक आचरण संहिता:** सांसदों के लिए एक आचार संहिता का विकास।
* **जनता की भागीदारी:** सार्वजनिक बहस और दबाव के माध्यम से सांसदों पर जवाबदेही का दबाव।
* **उदाहरण:** विभिन्न देशों में संसदीय गतिरोध से निपटने के सफल मॉडल।
5. **निष्कर्ष:** एक मजबूत और प्रभावी संसद के लिए गतिरोधों को कम करने और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: Hindustan Times


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment