22 Oct सीएक्यूएम ने दिल्ली में धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए कदम, एमसीडी को मिले निर्देश

✎ CAQM एक वैधानिक निकाय है जिसके निर्देश NCR की संबंधित एजेंसियों पर बाध्यकारी हैं, और धूल प्रदूषण (मुख्यतः PM10) पर नियंत्रण सड़क, निर्माण और खुदाई स्थलों पर सख्त अनुपालन से ही संभव है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण, PM10 और PM2.5, पर्यावरणीय शासन) | GS Paper II — शासन और सांविधिक निकाय (वैधानिक आयोग, केंद्र-राज्य समन्वय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का प्रशासन) | GS Paper II — संविधान (अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 48A, अनुच्छेद 51A(छ) और अनुच्छेद 239AA)
- Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) — राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए वैधानिक निकाय, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), PM10 और PM2.5 में अंतर; धूल प्रदूषण का मुख्य संबंध PM10 से, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के कार्य, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), 2019, अनुच्छेद 239AA — दिल्ली का विशेष संवैधानिक दर्जा (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
- Essay: शहरी वायु प्रदूषण: विधिक निर्देश और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई, सतत विकास बनाम निर्माण गतिविधि: स्वच्छ वायु का अधिकार और विकास की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: CAQM एक वैधानिक निकाय है जिसके निर्देश NCR की संबंधित एजेंसियों पर बाध्यकारी हैं, और धूल प्रदूषण (मुख्यतः PM10) पर नियंत्रण सड़क, निर्माण और खुदाई स्थलों पर सख्त अनुपालन से ही संभव है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को अपने अध्यक्ष और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव की सह-अध्यक्षता में दिल्ली सरकार की संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक कर धूल प्रदूषण की समीक्षा की। आयोग ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को सड़कों और खुले स्थानों पर धूल कम करने के उपाय मजबूत करने के निर्देश दिए। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया। आयोग के संज्ञान में आया कि निर्माण कार्यों से जुड़ी कई एजेंसियाँ धूल रोकने के उपाय, जैसे अवरोधक और धूल-रोधी स्क्रीन लगाना तथा खुदाई के दौरान धूल जमा होने से रोकना, नहीं कर रहीं। नियम उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों, परियोजना संचालकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई और जिला मजिस्ट्रेटों को अपने क्षेत्रों में अनुपालन की निगरानी का दायित्व सौंपा गया।
पृष्ठभूमि
- दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय समस्या है, क्योंकि प्रदूषण के स्रोत दिल्ली के बाहर के क्षेत्रों तक फैले हैं। इसी समन्वय की आवश्यकता से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन हुआ।
- CAQM का गठन पहले अध्यादेश (2020) और फिर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के माध्यम से हुआ। इससे पहले विभिन्न एजेंसियों की भूमिका बिखरी हुई थी और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर भी कार्रवाई होती रही थी।
- धूल प्रदूषण, विशेषकर सड़क की धूल और निर्माण-ध्वंस से उत्पन्न धूल, श्वसन योग्य कणों (PM10) का एक प्रमुख स्रोत है। इसके नियंत्रण के लिए निर्माण और ध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 जैसे विधिक ढाँचे मौजूद हैं।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), 2019 के अंतर्गत 131 शहरों में PM10 और PM2.5 के स्तर में कमी के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिनमें धूल नियंत्रण एक प्रमुख घटक है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने स्वच्छ वायु को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रण संवैधानिक दायित्व के रूप में भी देखा जाता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) क्या है?
- CAQM राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वय, नियंत्रण और सुधार के लिए गठित एक वैधानिक निकाय है।
- यह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 द्वारा स्थापित है। इसकी संरचना में केंद्र, संबंधित राज्यों और विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व होता है।
- आयोग को संबंधित राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के विभागों, नगर निकायों और अन्य एजेंसियों को निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है। ये निर्देश वैधानिक रूप से बाध्यकारी होते हैं।
- निर्देशों के उल्लंघन पर अधिनियम में दंडात्मक प्रावधान हैं, इसीलिए आयोग की बैठकों में अधिकारियों की जवाबदेही पर विशेष बल दिया जाता है।
- GRAP वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर के आधार पर चरणबद्ध कार्रवाई का ढाँचा है। इसमें निर्माण गतिविधियों और सड़क धूल नियंत्रण से जुड़े उपाय सम्मिलित होते हैं।
- दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत कार्य करती है और CAQM के निर्देशों के ज़मीनी क्रियान्वयन में सहयोग करती है।
- संवैधानिक संदर्भ में अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण का दायित्व) और अनुच्छेद 51A(छ) (नागरिकों का पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य) महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली का विशेष संवैधानिक दर्जा अनुच्छेद 239AA से जुड़ा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता (Feature) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| बैठक का स्वरूप | वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) के अध्यक्ष और दिल्ली के मुख्य सचिव की सह-अध्यक्षता में बैठक हुई, जिससे केंद्रीय निकाय और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय का स्पष्ट ढांचा दिखता है। |
| धूल प्रदूषण पर केंद्रित समीक्षा | आयोग ने धूल प्रदूषण को वायु प्रदूषण के एक प्रमुख स्रोत के रूप में चिन्हित कर उसके नियंत्रण की लगातार समीक्षा की है। |
| वैधानिक निर्देश | आयोग के निर्देश वैधानिक हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा उनका पालन अनिवार्य है। इससे नीति से आगे बढ़कर प्रवर्तन (Enforcement) का पक्ष सामने आता है। |
| नगर निगम की भूमिका | दिल्ली नगर निगम (MCD) को अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों और खुले स्थानों पर धूल कम करने के निर्देश दिए गए, जिससे स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी रेखांकित होती है। |
| निर्माण कार्यों पर नियंत्रण | निर्माण और खुदाई से जुड़ी एजेंसियों द्वारा अवरोधक तथा धूल रोकने वाली स्क्रीन लगाने जैसे उपायों की कमी को चिन्हित किया गया। |
| जिला स्तर पर निगरानी | दिल्ली सरकार के जिला मजिस्ट्रेट क्षेत्रवार अनुपालन की निगरानी करेंगे, जिससे निर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन की व्यवस्था बनती है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- धूल प्रदूषण में PM10 जैसे कण प्रमुख होते हैं, जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। सड़कों, निर्माण स्थलों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना बनती है।
- सड़कों से धूल और कचरा हटाना तथा खुले स्थानों पर हरित आवरण व जल छिड़काव जैसे उपाय स्थानीय स्तर पर प्रदूषण का भार घटाते हैं।
शासन और संस्थागत महत्व
- बहु-एजेंसी समन्वय का यह मॉडल दिखाता है कि वायु प्रदूषण जैसी अंतर्राज्यीय समस्या में एक ही विभाग पर्याप्त नहीं होता।
- वैधानिक निर्देशों की अवहेलना पर अधिकारियों और परियोजना संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी से जवाबदेही (Accountability) का सिद्धांत मजबूत होता है।
- दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को समन्वय सुनिश्चित करने का दायित्व देना राज्य स्तर पर संस्थागत भूमिकाओं के स्पष्ट बंटवारे को दर्शाता है।
विधिक और न्यायिक परिप्रेक्ष्य
- पर्यावरण संरक्षण के विधिक ढांचे में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 मूल आधार हैं। आयोग के निर्देश इसी व्यापक ढांचे के अंतर्गत आते हैं।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा धूल नियंत्रण पर समय-समय पर दिए गए आदेश इस तरह के प्रवर्तन को न्यायिक समर्थन प्रदान करते हैं।
चुनौतियाँ
1. निर्माण स्थलों पर अनुपालन की कमी
- कई एजेंसियां और विभाग निर्माण कार्यों में धूल रोकने के आवश्यक उपाय नहीं कर रहे हैं।
- अवरोधक और धूल रोकने वाली स्क्रीन जैसे साधारण उपाय भी व्यापक रूप से लागू नहीं हो पा रहे हैं।
- खुदाई के दौरान धूल जमा होने से रोकने के उपाय अनिवार्य होने के बावजूद उनका पालन असमान है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण; प्रदूषण नियंत्रण
2. बहु-एजेंसी समन्वय की चुनौती
- दिल्ली में नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, परियोजना संचालक और अन्य एजेंसियां अलग-अलग अधिकार क्षेत्र में कार्य करती हैं।
- केंद्रीय आयोग के निर्देश और राज्य एजेंसियों की कार्ययोजना के बीच तालमेल की कमी से क्रियान्वयन प्रभावित होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: केंद्र-राज्य संबंध; शासन में समन्वय तंत्र
3. स्थानीय निकायों की क्षमता
- सड़कों और खुले स्थानों की सफाई व धूल नियंत्रण के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन और तकनीकी क्षमता का होना आवश्यक है।
- क्षेत्रवार निष्पादन और निगरानी के लिए मानव संसाधन और डिजिटल निगरानी प्रणाली की आवश्यकता बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: स्थानीय शासन; शहरी प्रशासन की चुनौतियां
4. प्रवर्तन और दंड का प्रभाव
- नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की घोषणा के बावजूद प्रभावी दंड और उसका समय पर अमल चुनौती बना हुआ है।
- दोषी अधिकारियों, परियोजना संचालकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच जवाबदेही तय करना जटिल प्रक्रिया है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन में जवाबदेही; लोक सेवा में नैतिकता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा (Issue) | चिंता (Concern) |
|---|---|
| निर्माण स्थल प्रबंधन | धूल रोकने के उपायों की अनुपस्थिति से PM10 स्तर पर सीधा दबाव पड़ता है। |
| एजेंसियों के बीच समन्वय | कई विभागों की भूमिकाएं अस्पष्ट होने से जिम्मेदारी टलने का खतरा रहता है। |
| नगर निगम की कार्यक्षमता | सड़क और खुले क्षेत्रों की नियमित सफाई व धूल नियंत्रण के लिए संसाधनों की कमी बाधक हो सकती है। |
| दंड का प्रवर्तन | निर्देशों की अवहेलना पर कार्रवाई में देरी से निवारक प्रभाव (Deterrence) कमजोर होता है। |
| निगरानी तंत्र | जिला स्तर पर निगरानी का वास्तविक असर डेटा और नियमित जांच की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme)
आगे की राह
- निर्माण स्थलों के लिए धूल नियंत्रण उपायों (अवरोधक, स्क्रीन, जल छिड़काव) को अनुमति प्रक्रिया की अनिवार्य शर्त बनाया जाए।
- नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और परियोजना संचालकों के बीच कार्य-विभाजन और समयबद्ध कार्ययोजना स्पष्ट की जाए।
- सड़कों और खुले स्थानों की यांत्रिक सफाई तथा नियमित जल छिड़काव के लिए संसाधन और तकनीकी क्षमता बढ़ाई जाए।
- धूल प्रदूषण के वास्तविक समय (Real-time) निगरानी नेटवर्क का विस्तार कर हॉटस्पॉट की पहचान और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- नियम उल्लंघन के मामलों में समयबद्ध जांच और पारदर्शी दंड प्रक्रिया लागू कर निवारक प्रभाव सुदृढ़ किया जाए।
- जिला मजिस्ट्रेट स्तर की निगरानी को नियमित रिपोर्टिंग और सार्वजनिक डैशबोर्ड से जोड़ा जाए।
- स्थानीय समुदायों और निर्माण क्षेत्र के हितधारकों को जागरूक कर स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा दिया जाए।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत शहर-स्तरीय कार्ययोजनाओं में धूल नियंत्रण को प्राथमिकता के रूप में शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु प्रदूषण प्रबंधन · धूल प्रदूषण · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) · निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट · संवैधानिक निर्देश · अंतर-एजेंसी समन्वय · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु और जीवन का अधिकार
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का कर्तव्य
- अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का पर्यावरण संरक्षण का मूल कर्तव्य
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को शक्तियां और दायित्व
अवधारणा प्रवाह
निर्माण स्थलों, खुदाई और खुली सड़कों से धूल (PM10) का उत्सर्जन बढ़ता है। → धूल के कण वायु में फैलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के समग्र वायु प्रदूषण स्तर को बढ़ाते हैं। → वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग वैधानिक निर्देश जारी कर संबंधित एजेंसियों को धूल नियंत्रण के उपाय अनिवार्य करता है। → दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और परियोजना एजेंसियां क्षेत्रवार कार्ययोजना के अनुसार क्रियान्वयन करती हैं। → जिला मजिस्ट्रेट जमीनी स्तर पर अनुपालन की निगरानी करते हैं। → अनुपालन न होने पर अधिकारियों और परियोजना संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई से जवाबदेही तय होती है और वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा बनती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CAQM एक सांविधिक निकाय है जिसका गठन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत किया गया है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों से संबंधित मुद्दों का समाधान करना है।
3. आयोग के पास वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों में निर्देश जारी करने और उनका अनुपालन सुनिश्चित करने की शक्तियाँ हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1: CAQM एक सांविधिक निकाय है, जिसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत गठित किया गया है। यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
कथन 2: CAQM का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों से संबंधित मुद्दों का समाधान करना है, जिसमें निगरानी, विनियमन और प्रवर्तन शामिल है।
कथन 3: आयोग के पास वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और कम करने के लिए विभिन्न एजेंसियों और विभागों को निर्देश जारी करने और उनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की व्यापक शक्तियाँ हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से धूल प्रदूषण को कम करने के उपायों में शामिल हो सकता/सकते है/हैं?
1. निर्माण स्थलों पर धूल अवरोधक और स्क्रीन लगाना।
2. सड़कों और खुले स्थानों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना।
3. निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का उचित प्रबंधन और निपटान।
4. वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — कथन 1, 2 और 3 सीधे धूल प्रदूषण को कम करने के उपाय हैं, जैसा कि समाचार में भी उल्लेख किया गया है। निर्माण स्थलों पर अवरोधक, सड़कों पर पानी का छिड़काव और अपशिष्ट प्रबंधन धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकते हैं। कथन 4 वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने से वायु प्रदूषण कम होता है, लेकिन यह सीधे तौर पर धूल प्रदूषण को कम करने का उपाय नहीं है, बल्कि यह कणिकीय पदार्थ (PM) के अन्य स्रोतों से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण, विशेषकर धूल प्रदूषण, एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के गठन और उसके सांविधिक निर्देशों के आलोक में इस समस्या के समाधान में अंतर-एजेंसी समन्वय के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीरता और धूल प्रदूषण के विशिष्ट संदर्भ का उल्लेख करें। CAQM के गठन और उसके सांविधिक स्वरूप का संक्षिप्त परिचय दें।
मुख्य भाग:
1. CAQM की भूमिका और शक्तियाँ: CAQM अधिनियम, 2021 के तहत आयोग की सांविधिक शक्तियों, निर्देशों को जारी करने और उनके अनुपालन को सुनिश्चित करने की क्षमता पर प्रकाश डालें।
2. धूल प्रदूषण के स्रोत और प्रभाव: निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों, सड़कों की धूल, खुले में कचरा जलाने आदि जैसे धूल प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन करें। स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करें।
3. अंतर-एजेंसी समन्वय का महत्व: स्पष्ट करें कि वायु प्रदूषण एक बहु-क्षेत्रीय समस्या है जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियां (जैसे MCD, DPCC, निर्माण एजेंसियां, जिला प्रशासन) शामिल हैं। प्रभावी समाधान के लिए इन एजेंसियों के बीच समन्वय, सूचना साझाकरण और संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दें।
4. चुनौतियों और कमियाँ: निर्देशों के अनुपालन में आने वाली बाधाओं, एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, जवाबदेही के मुद्दों और प्रवर्तन में ढिलाई जैसी चुनौतियों का विश्लेषण करें। समाचार में उल्लिखित निर्माण स्थलों पर नियमों के उल्लंघन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता का संदर्भ दें।
5. समाधान और आगे की राह: बेहतर समन्वय तंत्र, प्रौद्योगिकी का उपयोग (जैसे वास्तविक समय की निगरानी), सार्वजनिक जागरूकता, सख्त प्रवर्तन और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई जैसे उपायों का सुझाव दें। सतत विकास लक्ष्यों के साथ वायु गुणवत्ता प्रबंधन को जोड़ने पर भी विचार करें।
निष्कर्ष: एक समग्र और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें ताकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Delhi PCS (DSSSB) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Management) द्वारा हाल ही में आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- दिल्ली सरकार की एजेंसियों के साथ धूल प्रदूषण की समीक्षा और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करना
- दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का पुनर्गठन करना
- दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित नई शिक्षा नीति पर चर्चा करना
- दिल्ली में जल संरक्षण के उपायों पर विचार-विमर्श करना
उत्तर: दिल्ली सरकार की एजेंसियों के साथ धूल प्रदूषण की समीक्षा और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करना — सीएक्यूएम द्वारा आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य दिल्ली सरकार की एजेंसियों के साथ मिलकर धूल प्रदूषण की समीक्षा करना और वायु प्रदूषण को कम करने के उपायों को और प्रभावी बनाना था।
Mains: सीएक्यूएम द्वारा दिल्ली सरकार की विभिन्न एजेंसियों के साथ आयोजित बैठक में उठाए गए प्रमुख बिंदुओं का वर्णन कीजिए। दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर अपने सुझाव भी प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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