स्वामित्व योजना में देरी पर कलेक्टरी जाने का अल्टीमेटम: सीएस का बड़ा फैसला

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स्वामित्व योजना में देरी पर कलेक्टरी जाने का अल्टीमेटम: सीएस का बड़ा फैसला

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स्वामित्व योजना में भ्रष्टाचार नियंत्रण प्रक्रिया

✎ स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से संपत्ति के अधिकार प्रदान कर ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है, जबकि राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।  |  GS Paper III — भूमि सुधार
  • Prelims: स्वामित्व योजना, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, राजस्व प्रशासन, ग्राम स्वराज
  • Essay: सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त भारत, डिजिटल सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से संपत्ति के अधिकार प्रदान कर ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है, जबकि राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, मुख्य सचिव ने स्वामित्व योजना के कार्यान्वयन में देरी और राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर जिला कलेक्टरों को अल्टीमेटम दिया है। कई जिलों के पटवारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति भी जारी की गई है, जो राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
  • पारंपरिक राजस्व प्रशासन प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप अधिक होने के कारण भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहती है, खासकर नामांतरण (mutation), बंटवारे और अन्य भूमि संबंधी कार्यों में।
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) सरकारी अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए एक प्रमुख कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • ई-गवर्नेंस (e-Governance) पहलें, जैसे कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (Digital India Land Records Modernization Programme – DILRMP), भूमि अभिलेखों को आधुनिक बनाने और पारदर्शिता लाने पर केंद्रित हैं।
  • स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को उनकी संपत्ति के अधिकार का दस्तावेजीकरण प्रदान करना है, जिससे विवाद कम हों और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिले।
  • राजस्व अधिकारियों, विशेषकर पटवारियों की भूमिका, ग्रामीण भूमि प्रशासन में केंद्रीय है, और उनके माध्यम से ही अधिकांश भूमि संबंधी कार्य संपन्न होते हैं।

स्वामित्व योजना क्या है?

  • स्वामित्व (SVAMITVA) योजना का पूर्ण रूप ‘सर्वे ऑफ विलेजेज एंड मैपिंग विद इम्प्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरियाज’ (Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) है।
  • यह योजना पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) द्वारा 24 अप्रैल, 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर शुरू की गई थी।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी आवासीय भूमि का स्वामित्व अधिकार प्रदान करना है, जिससे वे अपनी संपत्ति का उपयोग वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में कर सकें।
  • योजना के तहत ड्रोन तकनीक (Drone Technology) और नवीनतम सर्वेक्षण विधियों का उपयोग करके ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का मानचित्रण किया जाता है।
  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों को कम करने, ग्रामीण योजना को बेहतर बनाने और संपत्ति कर संग्रह के लिए एक स्पष्ट आधार प्रदान करने में मदद करती है।
  • लाभार्थियों को ‘संपत्ति कार्ड’ (Property Card) जारी किए जाते हैं, जो उन्हें अपनी संपत्ति के कानूनी मालिक के रूप में मान्यता देते हैं और बैंक ऋण प्राप्त करने में भी सहायक होते हैं।
  • यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक हिस्सा है और ग्रामीण भारत में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है।
  • योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों के राजस्व विभाग, पंचायती राज विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के सहयोग से किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई यह सुशासन (Good Governance) और सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के क्रियान्वयन पर जोर ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकारों को स्पष्ट करने और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने के लिए योजना का त्वरित और प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है।
कलेक्टरों को मुख्य सचिव का अल्टीमेटम यह प्रशासनिक जवाबदेही (Administrative Accountability) को बढ़ाता है और अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
पटवारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कानूनी कार्रवाई को सक्षम बनाता है, जिससे सार्वजनिक कार्यालयों में कदाचार पर अंकुश लगता है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा यह दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रशासनिक निगरानी और समन्वय को प्रभावी बनाता है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ती है।

महत्व

प्रशासनिक महत्व

  • यह कार्रवाई सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाती है, जिससे नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है।
  • भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने से सुशासन के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलता है और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचता है।
  • अधिकारियों को प्रदर्शन-आधारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक कुशल होता है।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • स्वामित्व योजना के त्वरित क्रियान्वयन से ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनके संपत्ति अधिकारों का दस्तावेजीकरण मिलता है, जिससे वे बैंक ऋण (Bank Loans) जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
  • संपत्ति विवादों में कमी आती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, क्योंकि संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है।
  • भ्रष्टाचार पर लगाम लगने से कमजोर वर्गों को राहत मिलती है, जिन्हें अक्सर सरकारी सेवाओं तक पहुँचने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है।

कानूनी और नैतिक महत्व

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई से कानून के शासन (Rule of Law) की पुष्टि होती है और यह संदेश जाता है कि कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • यह सार्वजनिक अधिकारियों के बीच नैतिक आचरण और ईमानदारी को बढ़ावा देता है, जो एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. प्रशासनिक अक्षमता और भ्रष्टाचार

  • राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और कार्य में देरी एक पुरानी समस्या है, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा डालती है।
  • जवाबदेही की कमी और निगरानी तंत्र में शिथिलता के कारण निचले स्तर पर भ्रष्टाचार पनपता है।

2. स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड का अद्यतन न होना और तकनीकी उपकरणों (जैसे ड्रोन) के उपयोग में विशेषज्ञता की कमी।
  • पटवारियों और अन्य राजस्व कर्मचारियों के बीच कार्यभार और योजना के प्रति प्रतिरोध या स्पष्ट भूमिका की मांग।

3. जवाबदेही तय करने में कठिनाई

  • भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है, जिससे न्याय में देरी होती है।
  • निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ उच्च अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।

4. मानव संसाधन और क्षमता निर्माण

  • राजस्व विभाग में कर्मचारियों की कमी और उन्हें आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण का अभाव।
  • भ्रष्टाचार से निपटने और नई योजनाओं को लागू करने के लिए कर्मचारियों की क्षमता निर्माण की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राजस्व कार्यों में अनियमितता यह नागरिकों के लिए सेवाओं तक पहुँच को बाधित करता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में देरी ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनके संपत्ति अधिकारों से वंचित करता है और वित्तीय समावेशन में बाधा डालता है।
पटवारियों द्वारा रिश्वतखोरी यह सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करता है और सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
प्रशासनिक जवाबदेही की कमी यह अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के प्रति उदासीन बनाता है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रभावित करता है।
भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण तकनीकी बाधाएँ और डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme)

आगे की राह

  • राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
  • स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी उपकरणों का व्यापक उपयोग किया जाए तथा कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए।
  • भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित जांच और अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों या फास्ट-ट्रैक प्रक्रियाओं का गठन किया जाए।
  • राजस्व कर्मचारियों के लिए स्पष्ट सेवा वितरण मानक (Service Delivery Standards) और समय-सीमा निर्धारित की जाए तथा उनके प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जाए।
  • डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली (Digital Land Records Management System) को मजबूत किया जाए और इसे अन्य सरकारी सेवाओं के साथ एकीकृत किया जाए।
  • नागरिकों को भ्रष्टाचार की शिकायत करने के लिए आसान और सुरक्षित माध्यम उपलब्ध कराए जाएं तथा शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • राजस्व विभाग में मानव संसाधन की कमी को दूर किया जाए और कर्मचारियों के लिए नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वामित्व योजना · राजस्व प्रशासन · भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम · भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण · पंचायती राज मंत्रालय · ग्राम स्वराज · ई-गवर्नेंस · जवाबदेही · पारदर्शिता · लोकपाल

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 300A’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना संपत्ति से वंचित न करना’}

अवधारणा प्रवाह

राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितता  →  स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में देरी  →  मुख्य सचिव द्वारा कलेक्टरों को अल्टीमेटम  →  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई  →  प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता में वृद्धि  →  ग्रामीण संपत्ति अधिकारों का स्पष्टीकरण  →  सुशासन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ प्रदान करना है।
2. यह योजना केवल कृषि भूमि के लिए लागू है, आवासीय भूमि के लिए नहीं।
3. पंचायती राज मंत्रालय इस योजना के लिए नोडल मंत्रालय है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को उनके संपत्ति अधिकारों का रिकॉर्ड (स्वामित्व कार्ड) प्रदान करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों (आबादी ग्राम) में आवासीय संपत्तियों के लिए है, न कि केवल कृषि भूमि के लिए। कथन 3 सही है क्योंकि पंचायती राज मंत्रालय ही स्वामित्व योजना का नोडल मंत्रालय है।

Q2. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अधिनियम सार्वजनिक पदाधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार के कृत्यों को रोकने के लिए बनाया गया था।
2. इस अधिनियम के तहत रिश्वत लेना और देना दोनों ही अपराध हैं।
3. अधिनियम में लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन के लिए पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 का प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक पदाधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। कथन 2 सही है क्योंकि अधिनियम रिश्वत लेने और देने दोनों को अपराध मानता है। कथन 3 सही है क्योंकि लोक सेवकों के खिलाफ इस अधिनियम के तहत अभियोजन शुरू करने के लिए संबंधित सरकार या सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वामित्व योजना के उद्देश्यों और ग्रामीण भारत में इसके महत्व का विस्तार से वर्णन कीजिए। साथ ही, राजस्व प्रशासन में भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में यह योजना कितनी प्रभावी हो सकती है, विवेचना कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** स्वामित्व योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके लॉन्च की तिथि (24 अप्रैल 2020) और नोडल मंत्रालय (पंचायती राज मंत्रालय) का उल्लेख।
2. **स्वामित्व योजना के उद्देश्य:**
* ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ (स्वामित्व कार्ड) प्रदान करना।
* संपत्ति विवादों को कम करना।
* ग्रामीण नियोजन को सुगम बनाना।
* वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में सहायता करना।
* ग्राम पंचायतों के लिए संपत्ति कर निर्धारण का आधार प्रदान करना।
* ड्रोन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का मानचित्रण।
3. **ग्रामीण भारत में महत्व:**
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।
* संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व से सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण।
* भूमि संबंधी धोखाधड़ी और विवादों में कमी।
* ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में सहायता।
4. **राजस्व प्रशासन में भ्रष्टाचार नियंत्रण में प्रभावशीलता:**
* **सकारात्मक प्रभाव:**
* संपत्ति अभिलेखों के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता में वृद्धि।
* मानवीय हस्तक्षेप में कमी से रिश्वतखोरी की संभावना कम।
* स्पष्ट स्वामित्व से पटवारी जैसे निचले स्तर के अधिकारियों पर निर्भरता में कमी।
* विवादों के त्वरित समाधान से बिचौलियों की भूमिका समाप्त।
* **चुनौतियाँ/सीमाएँ:**
* योजना के क्रियान्वयन में देरी और प्रशासनिक अक्षमता।
* तकनीकी अवसंरचना और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी।
* ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और डिजिटल साक्षरता का अभाव।
* स्थानीय स्तर पर निहित स्वार्थों और प्रतिरोध का सामना।
* केवल आबादी वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होने के कारण कृषि भूमि से संबंधित भ्रष्टाचार पर सीमित प्रभाव।
5. **निष्कर्ष:** योजना की क्षमता और भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए इसके महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और जन जागरूकता की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: amarujala.com


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