हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को मिले Article 371(J) के पूर्ण लाभ: समिति का आह्वान

Hyderabad Karnataka Horata Samiti renews call for effective implementation of Article 371(J) — diagram

हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को मिले Article 371(J) के पूर्ण लाभ: समिति का आह्वान

कल्याण कर्नाटक विकास ढांचाअनुच्छेद 371(J)विशेष प्रावधानकल्याण कर्नाटक क्षेत्रबीदर, गुलबर्गा, यादगीर, रायचूर, कोप्पल, बेल्लारीKKRDBविकास बोर्ड (धन आवंटन में देरी)लाभ विस्तारकृषि, सिंचाई, उद्योग, संस्कृतिक्षेत्रीय असमानता13 वर्षों बाद भी लक्ष्य अधूरे
कल्याण कर्नाटक विकास ढांचा

✎ अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना और शिक्षा, रोजगार तथा विकास में समान अवसर प्रदान करना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ  |  GS Paper II — विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय
  • Prelims: अनुच्छेद 371(J), कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र, हैदराबाद कर्नाटक होराटा समिति, क्षेत्रीय असमानताएँ, संवैधानिक संशोधन, विशेष प्रावधान
  • Essay: भारत में क्षेत्रीय असमानताएँ और समावेशी विकास की चुनौतियाँ, संघवाद और राज्यों की स्वायत्तता: भारतीय संदर्भ में विशेष प्रावधानों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना और शिक्षा, रोजगार तथा विकास में समान अवसर प्रदान करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हैदराबाद कर्नाटक होराटा समिति (Hyderabad Karnataka Horata Samiti) ने संविधान के अनुच्छेद 371(J) के प्रभावी कार्यान्वयन की अपनी माँग को फिर से दोहराया है। समिति का कहना है कि इस संवैधानिक प्रावधान को लागू हुए 13 वर्ष से अधिक हो जाने के बावजूद, इसके इच्छित उद्देश्य अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। समिति ने विशेष रूप से शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार से परे कृषि, सिंचाई, उद्योग, संस्कृति और कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के समग्र विकास में इसके लाभों के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया है।

पृष्ठभूमि

  • कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र, जिसे पहले हैदराबाद कर्नाटक के नाम से जाना जाता था, कर्नाटक राज्य का एक पिछड़ा क्षेत्र है। इसमें बीदर, गुलबर्गा (कलबुर्गी), यादगीर, रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी जिले शामिल हैं।
  • यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हैदराबाद के निजाम के शासन के अधीन था और स्वतंत्रता के बाद भी विकास के कई मापदंडों पर शेष कर्नाटक से पीछे रहा।
  • क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और इस क्षेत्र के लोगों को समान अवसर प्रदान करने के लिए एक लंबे संघर्ष के बाद, अनुच्छेद 371(J) को संविधान में जोड़ा गया।
  • पूर्व मंत्री वैजनाथ पाटिल ने अनुच्छेद 371(J) के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था, और उनके जन्मदिन पर आयोजित एक सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया गया।
  • समिति का आरोप है कि अनुच्छेद 371(J) के इच्छित लाभों का केवल 15 से 20 प्रतिशत ही लोगों तक पहुँचा है, और औद्योगिक विकास सीमित रहा है।
  • कल्याणा कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (Kalyana Karnataka Regional Development Board – KKRDB) को आवंटित धन के उपयोग और वार्षिक कार्य योजनाओं की तैयारी में देरी पर भी चिंता व्यक्त की गई है।

अनुच्छेद 371(J) क्या है?

  • अनुच्छेद 371(J) भारतीय संविधान में एक विशेष प्रावधान है जो कर्नाटक राज्य के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र (पहले हैदराबाद कर्नाटक) के लिए विशेष दर्जा प्रदान करता है।
  • इस अनुच्छेद का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना और शिक्षा, रोजगार तथा विकास के अवसरों में समानता को बढ़ावा देना है।
  • यह प्रावधान राज्यपाल को कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए एक अलग विकास बोर्ड स्थापित करने का अधिकार देता है, जिसे कल्याणा कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) के नाम से जाना जाता है।
  • यह क्षेत्र के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • यह राज्य सरकार के पदों पर क्षेत्र के निवासियों के लिए आरक्षण का भी प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद राज्यपाल को यह सुनिश्चित करने का अधिकार देता है कि क्षेत्र के विकास के लिए धन का उचित आवंटन हो और तकनीकी शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए सुविधाओं का प्रावधान किया जाए।
  • इसका उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देना और संरक्षित करना भी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अनुच्छेद 371(J) कल्याण कर्नाटक क्षेत्र (पूर्व में हैदराबाद-कर्नाटक) के लिए विशेष प्रावधान
क्षेत्रीय असमानताएँ शिक्षा, रोज़गार, कृषि और औद्योगिक विकास में असंतुलन को संबोधित करना
कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) क्षेत्र के विकास के लिए निधियों का आवंटन और परियोजनाओं का क्रियान्वयन
सांस्कृतिक संरक्षण क्षेत्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को मान्यता और बढ़ावा देना
सार्वजनिक आंदोलन अनुच्छेद 371(J) को सुरक्षित करने और उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण

महत्व

क्षेत्रीय विकास

  • यह अनुच्छेद कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में शिक्षा, रोज़गार, कृषि, सिंचाई और उद्योग जैसे क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।
  • इसका उद्देश्य क्षेत्र के समग्र विकास के माध्यम से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है।

सामाजिक न्याय

  • यह प्रावधान क्षेत्र के लोगों को शिक्षा और सार्वजनिक रोज़गार में समान अवसर प्रदान करके सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
  • यह हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है।

सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण

  • यह क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को मान्यता देने और उसे बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह राज्योत्सव पुरस्कारों, मैसूरु दशहरा सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न अकादमियों में क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने में सहायक है।

संघवाद और विकेंद्रीकरण

  • यह भारतीय संघवाद के भीतर क्षेत्रीय आकांक्षाओं को समायोजित करने और राज्यों के भीतर विशिष्ट क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने का एक उदाहरण है।
  • यह कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास पहलों के विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देता है।

चुनौतियाँ

1. अप्रभावी कार्यान्वयन

  • अनुच्छेद 371(J) के लागू होने के 13 साल से अधिक समय बाद भी इसके इच्छित उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं हुए हैं।
  • लाभ केवल 15-20% लोगों तक ही पहुँच पाए हैं, जिससे व्यापक असंतोष है।

2. निधियों का कुप्रबंधन और पारदर्शिता की कमी

  • कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) को आवंटित निधियों के उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं।
  • परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और पारदर्शिता की कमी चिंता का विषय है।

3. सीमित औद्योगिक और कृषि विकास

  • KIADB भूमि की उपलब्धता के बावजूद औद्योगिक विकास सीमित रहा है।
  • सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और बहु-फसली खेती को बढ़ावा देने में कमी से कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

4. शिक्षा और रोज़गार में असमानताएँ

  • सरकारी स्कूलों के विलय और बंद होने से शिक्षा तक पहुँच प्रभावित हुई है।
  • शिक्षा और रोज़गार में समान अवसरों की कमी क्षेत्रीय असमानताओं को बढ़ाती है।

5. सांस्कृतिक पहचान की उपेक्षा

  • कल्याण कर्नाटक की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली है।
  • राज्योत्सव पुरस्कारों और अन्य सांस्कृतिक मंचों में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अनुच्छेद 371(J) का कार्यान्वयन इच्छित उद्देश्यों की प्राप्ति में विफलता, केवल 15-20% लाभ
कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) निधियों के उपयोग पर सवाल, वार्षिक कार्य योजनाओं में देरी, पारदर्शिता की कमी
औद्योगिक विकास KIADB भूमि की उपलब्धता के बावजूद सीमित वृद्धि
कृषि और सिंचाई सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने में देरी, बहु-फसली खेती को बढ़ावा देने में कमी
शिक्षा सरकारी स्कूलों का विलय और बंद होना
सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व राज्योत्सव पुरस्कारों, मैसूरु दशहरा और अकादमियों में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व

आगे की राह

  • अनुच्छेद 371(J) के तहत सभी क्षेत्रों (कृषि, सिंचाई, उद्योग, संस्कृति) में लाभों का प्रभावी विस्तार सुनिश्चित किया जाए।
  • कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाए, जिसमें निधियों के उपयोग की निगरानी शामिल है।
  • क्षेत्र के लिए एक अलग बजट का प्रावधान किया जाए ताकि क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।
  • शिक्षा और सार्वजनिक रोज़गार में समान अवसरों को सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं, जिसमें सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ करना शामिल है।
  • औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए KIADB भूमि का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए और निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जाए।
  • सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए बहु-फसली खेती को प्रोत्साहित किया जाए।
  • कल्याण कर्नाटक की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को मान्यता दी जाए और राज्योत्सव पुरस्कारों तथा अन्य सांस्कृतिक मंचों में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 371(J): कर्नाटक के लिए विशेष प्रावधान

अवधारणा प्रवाह

हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में क्षेत्रीय असमानताएँ  →  अनुच्छेद 371(J) का अधिनियमन (विशेष प्रावधान)  →  कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) का गठन  →  अनुच्छेद के अप्रभावी कार्यान्वयन पर सार्वजनिक असंतोष  →  क्षेत्रीय विकास और सामाजिक न्याय की मांग का नवीनीकरण  →  प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नीतिगत सुधारों की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक राज्य के हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करता है।
2. यह प्रावधान केवल शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार तक सीमित है।
3. कल्याणा कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) इस अनुच्छेद के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र (जिसे अब कल्याणा कर्नाटक कहा जाता है) के लिए विशेष प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है। यह प्रावधान शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार के अलावा कृषि, सिंचाई, उद्योग, संस्कृति और समग्र विकास को भी कवर करता है। कथन 3 सही है। KKRDB इस अनुच्छेद के तहत आवंटित धन के उपयोग और परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है। इसलिए, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. अभिकथन (A): हैदराबाद कर्नाटक होराटा समिति अनुच्छेद 371(J) के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग कर रही है।
कारण (R): समिति का मानना है कि इस संवैधानिक प्रावधान के इच्छित उद्देश्य 13 साल बाद भी पूरी तरह से प्राप्त नहीं हुए हैं।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि समिति ने प्रभावी कार्यान्वयन की मांग को नवीनीकृत किया है। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि समिति का तर्क है कि प्रावधान के इच्छित उद्देश्य अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है क्योंकि समिति की मांग का आधार यही है कि उद्देश्य पूरे नहीं हुए हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए क्या विशेष प्रावधान करता है? इस प्रावधान के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अनुच्छेद 371(J) का संक्षिप्त परिचय, इसका उद्देश्य और यह किस क्षेत्र से संबंधित है। (लगभग 20-30 शब्द)
2. **अनुच्छेद 371(J) के विशेष प्रावधान:**
* शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों का आरक्षण।
* राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण।
* कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए अलग विकास बोर्ड (कल्याणा कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड – KKRDB) की स्थापना।
* क्षेत्र के विकास के लिए निधियों का आवंटन।
* क्षेत्र के लोगों के लिए कृषि, सिंचाई, उद्योग और संस्कृति के क्षेत्रों में विशेष अवसर।
* राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ।
3. **प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ (समालोचनात्मक परीक्षण):**
* **उद्देश्यों की अप्राप्ति:** समिति के अनुसार, 13 साल बाद भी केवल 15-20% लाभ ही लोगों तक पहुँचे हैं।
* **सीमित लाभ:** लाभों का केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित रहना, जबकि कृषि, उद्योग, संस्कृति जैसे अन्य क्षेत्रों में अपेक्षित विकास न होना।
* **धन के उपयोग में पारदर्शिता का अभाव:** KKRDB द्वारा आवंटित निधियों के उपयोग और वार्षिक कार्य योजनाओं की तैयारी में देरी और पारदर्शिता की कमी।
* **औद्योगिक विकास का अभाव:** KIADB भूमि की उपलब्धता के बावजूद औद्योगिक विकास का सीमित रहना।
* **साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की उपेक्षा:** क्षेत्र की समृद्ध विरासत को पर्याप्त मान्यता न मिलना (जैसे राज्योत्सव पुरस्कार, मैसूरु दशहरा में प्रतिनिधित्व की कमी)।
* **सरकारी स्कूलों का विलय/बंद होना:** शिक्षा के क्षेत्र में चिंताएँ।
* **सिंचाई परियोजनाओं में देरी:** कृषि क्षेत्र में समस्याओं का कारण।
* **क्षेत्रीय असमानताएँ:** विशेष प्रावधान के बावजूद क्षेत्रीय असमानताओं का बना रहना।
* **राजनीतिक इच्छाशक्ति और नौकरशाही बाधाएँ:** कार्यान्वयन में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और नौकरशाही की शिथिलता।
4. **निष्कर्ष:** इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए आवश्यक उपाय (जैसे अलग बजट, अधिक पारदर्शिता, समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना) और अनुच्छेद 371(J) के महत्व को रेखांकित करना। (लगभग 20-30 शब्द)

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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