अमित शाह ने कोलकाता में विश्व के सबसे बड़े दही संयंत्र का भूमि पूजन किया, जानिए पूरी डिटेल

अमित शाह ने कोलकाता में विश्व के सबसे बड़े दही संयंत्र का भूमि पूजन किया, जानिए पूरी डिटेल — Amul Bengal Dairy Plant Impact

अमित शाह ने कोलकाता में विश्व के सबसे बड़े दही संयंत्र का भूमि पूजन किया, जानिए पूरी डिटेल

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — कृषि  |  GS Paper II — शासन
  • Prelims: अमूल बंगाल डेयरी परियोजना, विश्व का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र, श्वेत क्रांति 2.0, सहकारिता मंत्रालय, सहकार से समृद्धि, दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियाँ
  • Essay: सहकारिता: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल, श्वेत क्रांति 2.0: भारत में दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों के जीवन में परिवर्तन

त्वरित पुनरावृत्ति: अमूल बंगाल डेयरी परियोजना कोलकाता में स्थापित विश्व का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र है, जो ‘सहकार से समृद्धि’ और ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लक्ष्यों को साकार करते हुए पश्चिम बंगाल के लाखों पशुपालकों को सशक्त बनाएगा।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कोलकाता में अमूल बंगाल डेयरी परियोजना के अंतर्गत विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन किया है। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संयंत्र से पश्चिम बंगाल के 1.20 लाख दुग्ध उत्पादक पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा और राज्य में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमि

  • अमूल (AMUL – Anand Milk Union Limited) भारत का एक प्रसिद्ध दुग्ध सहकारी ब्रांड है, जिसकी स्थापना 1946 में हुई थी। यह ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution) का प्रतीक रहा है, जिसने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाया।
  • भारत सरकार ने ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के साथ सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) का गठन किया है, जिसका उद्देश्य सहकारी आंदोलन को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
  • पश्चिम बंगाल में कृषि और पशुपालन का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन दुग्ध प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में अभी भी विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
  • यह परियोजना पश्चिम बंगाल में पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य दिलाने और उनकी आय बढ़ाने में सहायक होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • राज्य सरकार द्वारा अमूल को 30 एकड़ भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराना इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

अमूल बंगाल डेयरी परियोजना क्या है?

  • अमूल बंगाल डेयरी परियोजना कोलकाता में स्थापित किया जा रहा विश्व का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र है।
  • इस संयंत्र की दूध प्रसंस्करण क्षमता 10 लाख लीटर प्रतिदिन होगी, जिससे बड़े पैमाने पर दुग्ध उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
  • यह परियोजना पश्चिम बंगाल के 1.20 लाख दुग्ध उत्पादक पशुपालकों को सीधे लाभ पहुँचाएगी, जिससे उन्हें अपने दूध का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
  • परियोजना का उद्देश्य ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है, जिसमें दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालकों का सशक्तिकरण शामिल है।
  • यह संयंत्र पश्चिम बंगाल में दुग्ध उत्पादों, विशेषकर ‘मिष्टी दही’ के उत्पादन और वितरण को बढ़ावा देगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
  • भारत सरकार पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए भी उपक्रम लगाएगी, जिसमें सेक्स-सॉर्टेड सीमन (Sex-sorted semen) की व्यवस्था होगी, जिससे अगले 15 वर्षों में प्रत्येक पशुपालक के घर में 25% अधिक दूध देने वाली नस्ल के कम से कम दो पशु होंगे।
  • सहकारिता मंत्रालय की 70 से अधिक किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ छह महीने के भीतर बंगाल के किसानों तक पहुँचाया जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विश्व का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र यह संयंत्र 10 लाख लीटर दूध प्रतिदिन संसाधित करेगा, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी।
1.20 लाख दुग्ध उत्पादक पशुपालकों को लाभ सीधे तौर पर बड़ी संख्या में पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
30 एकड़ निःशुल्क भूमि राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने से परियोजना की लागत कम होगी और इसके तीव्र कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी।
पशुओं की नस्ल सुधार भारत सरकार द्वारा सेक्स-सॉर्टेड सीमन (Sex-sorted semen) की व्यवस्था सहित नस्ल सुधार के उपक्रम, जिससे दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
सहकारिता मॉडल अमूल का सहकारिता मॉडल, जहाँ उपभोक्ता द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक रुपये का 87 पैसा सीधे पशुपालकों को मिलता है, आर्थिक समानता को बढ़ावा देगा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह परियोजना पश्चिम बंगाल में दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
  • पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी और गरीबी उन्मूलन में सहायता मिलेगी।
  • रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जिससे बेरोजगारी कम होगी।
  • राज्य में डेयरी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और ‘मिष्टी दही’ जैसे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

सामाजिक महत्व

  • सहकारिता के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को संगठित होने तथा सामूहिक शक्ति का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।
  • पशुधन विकास से ग्रामीण समुदायों का सशक्तिकरण होगा, विशेषकर महिला पशुपालकों का।
  • पोषण सुरक्षा में सुधार होगा, क्योंकि डेयरी उत्पादों की उपलब्धता और सामर्थ्य बढ़ेगी।

रणनीतिक महत्व

  • यह परियोजना ‘सहकार से समृद्धि’ के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण कदम है, जो सहकारिता आंदोलन को मजबूत करेगा।
  • पश्चिम बंगाल में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करेगा, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिलेगी।
  • ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगा, जिसका उद्देश्य देश में दुग्ध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना है।

चुनौतियाँ

1. पशुधन स्वास्थ्य और प्रबंधन

  • पशुओं में बीमारियों का प्रबंधन और नियंत्रण एक चुनौती है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  • वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने के लिए पशुपालकों को प्रशिक्षण और जागरूकता की आवश्यकता है।

2. बाजार संपर्क और अवसंरचना

  • दूरदराज के क्षेत्रों से दूध संग्रह और प्रसंस्करण इकाइयों तक परिवहन के लिए मजबूत कोल्ड चेन (Cold Chain) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) की आवश्यकता है।
  • प्रतियोगी बाजार में उत्पादों की उचित मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

3. वित्तीय समावेशन और ऋण

  • छोटे पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु खरीदने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए पर्याप्त संस्थागत ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  • वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाई।

4. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता

  • जलवायु परिवर्तन के कारण पशुधन पर पड़ने वाले प्रभावों, जैसे चारा और पानी की उपलब्धता में कमी, का प्रबंधन।
  • डेयरी उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट के उचित निपटान और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण और स्थानीय प्रतिरोध बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अक्सर स्थानीय समुदायों के प्रतिरोध का सामना करता है।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कौशल विकास आधुनिक डेयरी प्रौद्योगिकियों को छोटे पशुपालकों तक पहुँचाना और उन्हें प्रशिक्षित करना एक चुनौती है।
गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा बड़े पैमाने पर उत्पादन में उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
अंतर-राज्यीय समन्वय विभिन्न राज्यों के बीच डेयरी उत्पादों के विपणन और वितरण में समन्वय की आवश्यकता।

आगे की राह

  • पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशुओं, वैज्ञानिक चारा प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच प्रदान की जाए।
  • डेयरी उत्पादों के लिए एक मजबूत कोल्ड चेन और परिवहन अवसंरचना का विकास किया जाए, ताकि दूध की बर्बादी कम हो।
  • छोटे और सीमांत पशुपालकों को संस्थागत ऋण और वित्तीय सहायता तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजनाएँ लागू की जाएँ।
  • सहकारी समितियों को मजबूत किया जाए और उन्हें आधुनिक प्रबंधन तकनीकों तथा बाजार संपर्क से जोड़ा जाए।
  • पशुपालकों को डेयरी फार्मिंग की आधुनिक तकनीकों, स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
  • डेयरी उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए पर्यावरण-अनुकूल समाधानों को बढ़ावा दिया जाए।
  • राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अमूल बंगाल डेयरी परियोजना · सहकारिता मंत्रालय · श्वेत क्रांति 2.0 · सहकार से समृद्धि · पशुधन नस्ल सुधार · दुग्ध उत्पादक · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · खाद्य प्रसंस्करण उद्योग · आत्मनिर्भर भारत · सोनार बांग्ला

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43B’, ‘note’: ‘सहकारी समितियों के संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा सहकारिता को बढ़ावा  →  अमूल जैसी सहकारी संस्थाओं का विस्तार  →  डेयरी उत्पादन संयंत्रों की स्थापना  →  पशुपालकों को बेहतर मूल्य और नस्ल सुधार  →  ग्रामीण आय में वृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण  →  ‘सहकार से समृद्धि’ का लक्ष्य प्राप्त

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अमूल बंगाल डेयरी परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह परियोजना पश्चिम बंगाल में विश्व का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र स्थापित करेगी।
2. इस परियोजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
3. यह परियोजना केवल मिष्टी दही के उत्पादन पर केंद्रित है और अन्य दुग्ध उत्पादों को शामिल नहीं करती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि यह परियोजना विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र की स्थापना करेगी। कथन 2 भी सही है क्योंकि इसका उद्देश्य पशुपालकों को दूध का अधिक से अधिक रेट दिलाना है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह परियोजना 10 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग करेगी, जिससे विभिन्न दुग्ध उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं, केवल मिष्टी दही तक सीमित नहीं है।

Q2. भारत सरकार द्वारा पशुधन नस्ल सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों के संदर्भ में, ‘सेक्स-सॉर्टेड सीमन’ (Sex-Sorted Semen) तकनीक का प्राथमिक लाभ क्या है?

  1. यह पशुओं में रोगों के प्रसार को कम करता है।
  2. यह दूध उत्पादन की लागत को काफी कम करता है।
  3. यह मादा बछड़ों के जन्म की संभावना को बढ़ाता है, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है।
  4. यह पशुओं के जीवनकाल को बढ़ाता है और उनकी उत्पादकता में सुधार करता है।

उत्तर: यह मादा बछड़ों के जन्म की संभावना को बढ़ाता है, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है। — सेक्स-सॉर्टेड सीमन तकनीक का प्राथमिक लाभ यह है कि यह मादा बछड़ों के जन्म की संभावना को बढ़ाता है। चूंकि मादा पशु ही दूध देते हैं, यह तकनीक डेयरी किसानों के लिए अधिक दूध उत्पादक पशुधन प्राप्त करने में सहायक होती है, जिससे उनकी आय और समग्र दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और किसानों की आय दोगुनी करने में सहकारिता मॉडल की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। अमूल बंगाल डेयरी परियोजना जैसे पहल इस दिशा में कैसे योगदान कर सकते हैं, विस्तार से चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में सहकारिता मॉडल की अवधारणा, उसके सिद्धांतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उसके सकारात्मक प्रभावों (जैसे किसानों को बेहतर मूल्य, बिचौलियों का उन्मूलन, सामूहिक शक्ति) पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में अमूल बंगाल डेयरी परियोजना का उदाहरण देते हुए बताएं कि कैसे यह परियोजना दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाएगी, पशुधन नस्ल सुधार में मदद करेगी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देगी। ‘सहकार से समृद्धि’ और ‘श्वेत क्रांति 2.0’ जैसे विजन को भी इसमें शामिल करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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