26 Sep आंध्र प्रदेश: रायलसीमा में 1 लाख करोड़ रुपये के वैश्विक बागवानी केंद्र का शुभारंभ

✎ रायलसीमा में ₹1 लाख करोड़ की 'ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब' परियोजना का लक्ष्य सरकारी और निजी निवेश के माध्यम से क्षेत्र को बागवानी फसलों का एक प्रमुख केंद्र बनाना है, जिसमें आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल कटाई उपरांत प्रबंधन पर विशेष जोर…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy) | GS Paper III — कृषि (Agriculture) | GS Paper III — निवेश मॉडल (Investment Models)
- Prelims: बागवानी फसलें, सूक्ष्म सिंचाई, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन, निजी निवेश, कृषि अवसंरचना
- Essay: कृषि क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी का महत्व, सतत कृषि विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: रायलसीमा में ₹1 लाख करोड़ की ‘ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब’ परियोजना का लक्ष्य सरकारी और निजी निवेश के माध्यम से क्षेत्र को बागवानी फसलों का एक प्रमुख केंद्र बनाना है, जिसमें आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल कटाई उपरांत प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र को ₹1 लाख करोड़ की परियोजना ‘ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब – रायलसीमा राइजिंग’ के शुभारंभ के साथ एक वैश्विक बागवानी केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की अनुकूल जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए बागवानी फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
पृष्ठभूमि
- रायलसीमा क्षेत्र अपनी शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु के लिए जाना जाता है, जो कुछ विशिष्ट बागवानी फसलों के लिए आदर्श है।
- कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, और बागवानी इसका एक तेजी से बढ़ता हुआ उप-क्षेत्र है जो खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में योगदान देता है।
- भारत सरकार और राज्य सरकारें कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों को लागू कर रही हैं।
- कृषि क्षेत्र में निजी निवेश (Private Investment) को आकर्षित करना और आधुनिक तकनीकों (Modern Techniques) को अपनाना उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) प्रणालियाँ, जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर, जल उपयोग दक्षता में सुधार और फसल की पैदावार बढ़ाने में सहायक होती हैं।
- फसल कटाई उपरांत प्रबंधन (Post-harvest Management) और विपणन (Marketing) अवसंरचना की कमी अक्सर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने से रोकती है।
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब – रायलसीमा राइजिंग परियोजना क्या है?
- यह ₹1 लाख करोड़ की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका लक्ष्य रायलसीमा को वैश्विक बागवानी केंद्र बनाना है।
- परियोजना में अगले तीन से चार वर्षों में सरकार द्वारा ₹40,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जबकि ₹60,000 करोड़ निजी निवेश के माध्यम से जुटाए जाने की उम्मीद है।
- प्रथम चरण में, 12 क्लस्टरों में 72,789 हेक्टेयर भूमि पर बागवानी फसलों की खेती का विस्तार किया जाएगा।
- इस वर्ष अतिरिक्त 78,082 हेक्टेयर भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाया जाएगा ताकि 30% पानी के उपयोग से 100% उपज सुनिश्चित की जा सके।
- ड्रिप सिस्टम, पॉलीहाउस, स्प्रिंकलर, ड्रोन और बूम स्प्रेयर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही अंतर-फसल (Inter-cropping) और नियंत्रित वातावरण खेती (Controlled Environment Cultivation) पर भी जोर दिया जाएगा।
- परियोजना में फसल कटाई उपरांत प्रबंधन और विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
- वृक्षारोपण अभियान और बागवानी प्रौद्योगिकी चुनौती प्रश्नोत्तरी जैसे जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
- किसानों को ₹1 लाख तक की सब्सिडी के साथ फार्म पॉन्ड और वीड मैट को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ₹1 लाख करोड़ की परियोजना | यह परियोजना रायलसीमा क्षेत्र में बागवानी क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धता दर्शाती है। |
| सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) | सरकार द्वारा ₹40,000 करोड़ और निजी निवेश से ₹60,000 करोड़ का योगदान, विकास में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों की भूमिका को उजागर करता है। |
| 72,789 हेक्टेयर में खेती का विस्तार | यह चरण-1 में बागवानी फसलों के तहत आने वाले क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। |
| सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) का उपयोग | 78,082 हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लागू करने से जल दक्षता में सुधार होगा और 30% कम पानी में 100% उपज सुनिश्चित होगी। |
| तकनीकी नवाचारों का प्रचार | ड्रिप सिस्टम, पॉलीहाउस, स्प्रिंकलर, ड्रोन और बूम स्प्रेयर जैसे आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने से उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि होगी। |
| फसल कटाई के बाद प्रबंधन और विपणन पर ध्यान | यह उपज के मूल्यवर्धन और किसानों के लिए बेहतर आय सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का संकेत देता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह परियोजना रायलसीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी, जिससे कृषि आय में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- बागवानी उत्पादों के निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
- निजी निवेश को आकर्षित करने से पूंजी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
कृषि विकास
- आधुनिक कृषि तकनीकों और सूक्ष्म सिंचाई के उपयोग से कृषि उत्पादकता और दक्षता में सुधार होगा।
- बागवानी फसलों के विविधीकरण से किसानों को बेहतर आय प्राप्त करने में मदद मिलेगी और कृषि जोखिम कम होगा।
- फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और विपणन पर ध्यान केंद्रित करने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का उपयोग जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगा, जो जल-तनाव वाले क्षेत्रों के लिए आवश्यक है।
- नियंत्रित वातावरण में खेती और अंतर-फसल (inter-cropping) को बढ़ावा देने से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और जैव विविधता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सामाजिक महत्व
- किसानों की आय में वृद्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होगा और गरीबी कम होगी।
- कृषि क्षेत्र में कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
चुनौतियाँ
1. जल संसाधनों का प्रबंधन
- रायलसीमा क्षेत्र में अक्सर पानी की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई के बावजूद जल प्रबंधन एक चुनौती बना रहेगा।
- भूजल स्तर की निगरानी और उसके सतत उपयोग को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: जल संसाधन; अर्थव्यवस्था: कृषि चुनौतियाँ
2. बाजार संपर्क और मूल्य श्रृंखला
- उत्पादकों को उपभोक्ताओं से जोड़ने के लिए कुशल आपूर्ति श्रृंखला और विपणन बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है।
- फसलों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना और बिचौलियों की भूमिका को कम करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: कृषि विपणन, मूल्य श्रृंखला प्रबंधन
3. निजी निवेश को आकर्षित करना
- ₹60,000 करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल और निवेश सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
- निजी क्षेत्र के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन और जोखिम-साझाकरण तंत्र की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
4. तकनीकी अपनाने और कौशल विकास
- किसानों को नई तकनीकों जैसे ड्रोन और पॉलीहाउस का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करना और उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करना एक चुनौती हो सकती है।
- तकनीकी सहायता और विस्तार सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: कृषि में प्रौद्योगिकी, कौशल विकास
5. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव, जैसे अनियमित वर्षा और अत्यधिक तापमान, बागवानी फसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
- जलवायु-लचीली किस्मों और कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना आवश्यक होगा।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन, कृषि पर प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल उपलब्धता | रायलसीमा जैसे शुष्क क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बागवानी के लिए पर्याप्त और सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित करना। |
| बाजार पहुंच | छोटे और सीमांत किसानों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाना और बिचौलियों के शोषण को रोकना। |
| तकनीकी हस्तांतरण | आधुनिक कृषि तकनीकों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना और किसानों को प्रशिक्षित करना। |
| निजी क्षेत्र की भागीदारी | ₹60,000 करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित करने और उसे बनाए रखने के लिए अनुकूल माहौल बनाना। |
| फसल कटाई के बाद का नुकसान | भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण होने वाले नुकसान को कम करना। |
| जलवायु परिवर्तन का अनुकूलन | बदलते मौसम पैटर्न और चरम मौसमी घटनाओं के प्रति बागवानी क्षेत्र को लचीला बनाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission)
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana)
- कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund)
आगे की राह
- जल-कुशल सिंचाई प्रणालियों के व्यापक कार्यान्वयन के साथ-साथ जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर ध्यान केंद्रित करना।
- किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और विपणन रणनीतियों में प्रशिक्षित करने के लिए व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करना।
- निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतिगत ढांचा तैयार करना, जिसमें कर प्रोत्साहन और आसान ऋण सुविधाएं शामिल हों।
- शीत भंडारण, प्रसंस्करण इकाइयों और परिवहन नेटवर्क सहित मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास करना ताकि फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम किया जा सके और मूल्यवर्धन किया जा सके।
- स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए ई-नाम (e-NAM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाना और निर्यात संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना।
- जलवायु-लचीली फसल किस्मों और कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सके।
- अनुसंधान और विकास में निवेश करना ताकि नई और बेहतर बागवानी किस्मों तथा कृषि तकनीकों का विकास किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बागवानी क्षेत्र · कृषि विविधीकरण · सूक्ष्म सिंचाई · फसल कटाई उपरांत प्रबंधन · निजी निवेश · कृषि अवसंरचना · जलवायु अनुकूल कृषि · किसानों की आय · खाद्य प्रसंस्करण · क्षेत्रीय विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
अवधारणा प्रवाह
रायलसीमा में अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ → ₹1 लाख करोड़ की ‘ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब’ परियोजना का शुभारंभ → आधुनिक तकनीकों और सूक्ष्म सिंचाई का उपयोग → बागवानी फसलों का उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि → फसल कटाई के बाद प्रबंधन और विपणन पर ध्यान → क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) प्रणाली में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई शामिल है।
2. यह जल उपयोग दक्षता को बढ़ाती है और उर्वरकों के उपयोग को कम कर सकती है।
3. भारत में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) एक महत्वपूर्ण पहल है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। सूक्ष्म सिंचाई में ड्रिप (बूंद-बूंद) और स्प्रिंकलर (छिड़काव) जैसी प्रणालियाँ शामिल हैं, जो पौधों की जड़ क्षेत्र में सीधे पानी पहुंचाती हैं। कथन 2 सही है। सूक्ष्म सिंचाई जल की बचत करती है और पोषक तत्वों की लीचिंग को कम करके उर्वरक दक्षता में सुधार करती है। कथन 3 सही है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का एक प्रमुख घटक ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop) है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देना है।
Q2. बागवानी फसलों के संदर्भ में, ‘नियंत्रित वातावरण खेती’ (Controlled Environment Cultivation) का क्या अर्थ है?
- फसलों को खुले मैदान में बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के उगाना।
- केवल जैविक उर्वरकों का उपयोग करके खेती करना।
- तापमान, आर्द्रता और प्रकाश जैसे पर्यावरणीय कारकों को नियंत्रित करके फसलों की खेती करना।
- बारिश पर निर्भर रहने वाली खेती प्रणाली।
उत्तर: तापमान, आर्द्रता और प्रकाश जैसे पर्यावरणीय कारकों को नियंत्रित करके फसलों की खेती करना। — ‘नियंत्रित वातावरण खेती’ एक ऐसी कृषि पद्धति है जहाँ पौधों के विकास के लिए आवश्यक पर्यावरणीय कारकों जैसे तापमान, आर्द्रता, प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और पोषक तत्वों को कृत्रिम रूप से नियंत्रित किया जाता है। इसका उद्देश्य फसल की उपज और गुणवत्ता को अधिकतम करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बागवानी क्षेत्र के विकास में निजी निवेश की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस क्षेत्र में ‘फसल कटाई उपरांत प्रबंधन’ (Post-harvest Management) के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में बागवानी क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और इसके महत्व का संक्षिप्त उल्लेख।
निजी निवेश की भूमिका: निजी निवेश के लाभ (पूंजी, प्रौद्योगिकी, नवाचार, बाजार पहुंच, मूल्य श्रृंखला विकास) और चुनौतियों (छोटे किसानों तक पहुंच, जोखिम, नीतिगत स्थिरता की आवश्यकता) का विश्लेषण।
फसल कटाई उपरांत प्रबंधन का महत्व: कटाई के बाद के नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता और शेल्फ-लाइफ में सुधार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में इसकी भूमिका।
सरकारी पहल: निजी निवेश और फसल कटाई उपरांत प्रबंधन को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी योजनाओं (जैसे राष्ट्रीय बागवानी मिशन, कृषि अवसंरचना कोष) का उल्लेख।
निष्कर्ष: बागवानी क्षेत्र के सतत विकास के लिए निजी-सार्वजनिक भागीदारी और प्रभावी फसल कटाई उपरांत प्रबंधन के महत्व पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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