23 Jul आईपीसी के समझौतों से यूपी में स्वास्थ्य नवाचार और गुणवत्ता में वृद्धि
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भारतीय अर्थव्यवस्था एवं विकास
- Prelims: भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC), CSIR-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP), डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU), औषधीय पौधे, हर्बल दवाएं, फार्माकोविजिलेंस, सहायक उपकरण, विकसित भारत
- Essay: विकसित भारत के निर्माण में स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक नवाचार की भूमिका, समावेशी विकास और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण में प्रौद्योगिकी का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) ने CSIR-CIMAP और DSMNRU के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर औषधीय पौधों के मानकीकरण, हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन और दिव्यांगजनों के सहायक उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा फार्माकोविजिलेंस को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) ने हाल ही में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU) और CSIR-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP) के साथ दो समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर और नवीनीकरण किया है। इन समझौतों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता, वैज्ञानिक नवाचार और दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों के मूल्यांकन को बढ़ावा देना है, जो ‘विकसित उत्तर प्रदेश-विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार का ‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण देश के समग्र विकास, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रमुख स्तंभ हैं, पर केंद्रित है।
- भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है, जो दवाओं के मानकों को निर्धारित करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
- औषधीय पौधों और हर्बल दवाओं का भारत में एक समृद्ध पारंपरिक इतिहास है, और उनके मानकीकरण तथा गुणवत्ता मूल्यांकन का महत्व बढ़ता जा रहा है।
- दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता सुनिश्चित करना उनके सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- फार्माकोविजिलेंस (Pharmacovigilance) दवा सुरक्षा निगरानी की प्रक्रिया है, जो दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों का पता लगाने, उनका आकलन करने और उन्हें रोकने में मदद करती है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थागत सहयोग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं।
भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) और उसके सहयोग
- भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।
- इसका मुख्य कार्य देश में बेची जाने वाली दवाओं के लिए मानक निर्धारित करना और उनकी गुणवत्ता, शुद्धता तथा शक्ति सुनिश्चित करना है।
- IPC ‘भारतीय औषध संहिता’ (Indian Pharmacopoeia) प्रकाशित करता है, जो भारत में दवाओं के निर्माण, परीक्षण और भंडारण के लिए आधिकारिक मानकों का संग्रह है।
- CSIR-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP) के साथ नवीनीकृत समझौता ज्ञापन औषधीय पौधों के अनुसंधान, मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन पर केंद्रित है।
- डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU) के साथ नए समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दिव्यांगजनों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक प्रोटोकॉल विकसित करना है।
- यह सहयोग दिव्यांगजनों में दवा सुरक्षा जागरूकता और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए सांकेतिक भाषा आधारित फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास में भी सहायता करेगा।
- ये साझेदारियां वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और संस्थागत सहयोग को मजबूत करके ‘विकसित यूपी-विकसित भारत’ के साझा दृष्टिकोण में योगदान करती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| औषधीय पौधों का अनुसंधान और मानकीकरण | पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक आधार प्रदान करना और हर्बल दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना। |
| हर्बल दवाओं का गुणवत्ता मूल्यांकन | उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण हर्बल दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता का आकलन | दिव्यांगजनों के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता में सुधार करना। |
| सांकेतिक भाषा आधारित फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल | दिव्यांगजनों में दवा सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग को सुगम बनाना। |
| संस्थागत साझेदारियों को मजबूत करना | वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- दिव्यांगजनों के लिए स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और गुणवत्ता में सुधार, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
- दवा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करना, विशेषकर संवेदनशील समूहों में।
- पारंपरिक औषधीय प्रणालियों को वैज्ञानिक मान्यता प्रदान कर समाज में उनके प्रति विश्वास बढ़ाना।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- औषधीय पौधों के अनुसंधान और हर्बल दवाओं के मानकीकरण में वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देना।
- सहायक उपकरणों के मूल्यांकन के लिए वैज्ञानिक प्रोटोकॉल विकसित करना, जिससे तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहन मिलेगा।
- फार्माकोविजिलेंस (Pharmacovigilance) के क्षेत्र में विशिष्ट प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित कर क्षमता निर्माण करना।
आर्थिक महत्व
- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पादों तक पहुंच में सुधार से स्वास्थ्य व्यय में कमी और उत्पादकता में वृद्धि।
- औषधीय पौधों और हर्बल दवाओं के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देकर संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहन।
- उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवा और दवा गुणवत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करना, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
शासनिक महत्व
- भारत सरकार के ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान।
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था के रूप में आईपीसी की भूमिका को सुदृढ़ करना।
- विभिन्न सरकारी और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर नीति कार्यान्वयन को प्रभावी बनाना।
चुनौतियाँ
1. गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण
- हर्बल दवाओं और सहायक उपकरणों के लिए एकरूप गुणवत्ता मानकों को स्थापित करना और उनका कठोरता से पालन सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- विभिन्न औषधीय पौधों की गुणवत्ता और सक्रिय घटकों में भिन्नता के कारण मानकीकरण जटिल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
2. जागरूकता और पहुंच
- दिव्यांगजनों तक सांकेतिक भाषा आधारित फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना।
- जनसंख्या के बड़े हिस्से में दवा सुरक्षा और गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य
3. अनुसंधान और विकास में निवेश
- औषधीय पौधों के अनुसंधान और सहायक उपकरणों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधन निवेश की आवश्यकता।
- दीर्घकालिक अनुसंधान परियोजनाओं के लिए निरंतर फंडिंग सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था
4. संस्थागत समन्वय
- विभिन्न सरकारी, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय और डेटा साझाकरण सुनिश्चित करना।
- साझेदारी को केवल समझौता ज्ञापनों तक सीमित न रखकर वास्तविक कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, संस्थागत ढाँचा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| हर्बल दवाओं का मानकीकरण | कच्चे माल की गुणवत्ता में भिन्नता और सक्रिय घटकों की पहचान में चुनौतियाँ। |
| सहायक उपकरणों का मूल्यांकन | विभिन्न प्रकार के उपकरणों के लिए व्यापक और वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रोटोकॉल विकसित करना। |
| दिव्यांगजनों तक पहुंच | सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण मॉड्यूल को देश के सभी हिस्सों में दिव्यांगजनों तक पहुंचाना। |
| फार्माकोविजिलेंस रिपोर्टिंग | प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की कम रिपोर्टिंग दर और जागरूकता की कमी। |
| अनुसंधान की निरंतरता | दीर्घकालिक अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सतत वित्तपोषण और विशेषज्ञता की उपलब्धता। |
आगे की राह
- औषधीय पौधों के मानकीकरण और गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए एक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क विकसित करना।
- दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों के परीक्षण और प्रमाणन हेतु एक समर्पित राष्ट्रीय केंद्र स्थापित करना।
- फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के लिए सांकेतिक भाषा सहित बहुभाषी प्रशिक्षण मॉड्यूल का व्यापक प्रसार करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा नवाचार और अनुसंधान में निवेश को बढ़ावा देना।
- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान निकायों के बीच सहयोग को और गहरा करना।
- जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से दवा सुरक्षा और गुणवत्ता के महत्व पर प्रकाश डालना।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल को अपनाना और उनका कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) · स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता · वैज्ञानिक नवाचार · औषधीय पौधों का अनुसंधान · हर्बल दवाओं का मानकीकरण · सहायक उपकरणों का गुणवत्ता मूल्यांकन · फार्माकोविजिलेंस · दिव्यांगजन सशक्तिकरण · विकसित भारत · संस्थागत सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार।’}
अवधारणा प्रवाह
आईपीसी द्वारा समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर → औषधीय पौधों का अनुसंधान और मानकीकरण → हर्बल दवाओं और सहायक उपकरणों का गुणवत्ता मूल्यांकन → दिव्यांगजनों के लिए दवा सुरक्षा जागरूकता और फार्माकोविजिलेंस → स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार और वैज्ञानिक नवाचार → ‘विकसित यूपी-विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।
2. इसका मुख्य कार्य औषधीय उत्पादों के लिए गुणवत्ता मानक स्थापित करना है।
3. हाल ही में, इसने केवल औषधीय पौधों के अनुसंधान के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। IPC स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है और इसका मुख्य कार्य औषधीय उत्पादों के लिए गुणवत्ता मानक स्थापित करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि IPC ने औषधीय पौधों के अनुसंधान के साथ-साथ सहायक उपकरणों के गुणवत्ता मूल्यांकन और सांकेतिक भाषा आधारित फार्माकोविजिलेंस के लिए भी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान औषधीय पौधों के अनुसंधान, मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन में भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) के साथ सहयोग कर रहा है?
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
- भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR)
- सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP)
- डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU)
उत्तर: सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP) — सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP) औषधीय पौधों के अनुसंधान, मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन में IPC के साथ सहयोग कर रहा है। DSMNRU सहायक उपकरणों के गुणवत्ता मूल्यांकन और सांकेतिक भाषा आधारित फार्माकोविजिलेंस के लिए सहयोग कर रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) द्वारा विभिन्न संस्थानों के साथ किए गए हालिया समझौता ज्ञापन (MOU) भारत में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक सिद्ध होंगे? चर्चा कीजिए कि ये पहलें ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे योगदान दे सकती हैं। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, IPC के समझौता ज्ञापनों (CSIR-CIMAP और DSMNRU के साथ) का उल्लेख करते हुए बताएं कि ये औषधीय पौधों के अनुसंधान, हर्बल दवाओं के मानकीकरण, सहायक उपकरणों के गुणवत्ता मूल्यांकन और फार्माकोविजिलेंस में कैसे सुधार लाएंगे। दूसरे भाग में, इन पहलों को ‘विकसित भारत’ के व्यापक लक्ष्य से जोड़ें, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के संदर्भ में।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- महाराष्ट्र में खेल व युवा विकास: केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक - July 23, 2026
- नशा मुक्त भारत अभियान: राष्ट्रीय संकल्प और व्यापक रणनीति - July 23, 2026
- NMBA 6th Anniversary: National Pledge Against Drug Abuse 2026 - July 23, 2026

No Comments