आरबीआई 24 सितंबर 2026 को ओवरनाइट वीआरआरआर नीलामी करेगा: यूपीएससी-पीसीएस परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

RBI to conduct Overnight Variable Rate Reverse Repo (VRRR) auction under LAF on September 24, 2026 — diagram

आरबीआई 24 सितंबर 2026 को ओवरनाइट वीआरआरआर नीलामी करेगा: यूपीएससी-पीसीएस परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

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VRRR Auction Process

✎ परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी RBI द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक मौद्रिक नीति उपकरण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF), परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR), मुद्रास्फीति नियंत्रण, मौद्रिक नीति, चलनिधि प्रबंधन
  • Essay: भारतीय अर्थव्यवस्था में RBI की भूमिका और चुनौतियाँ, मौद्रिक नीति के उपकरण और उनका प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी RBI द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक मौद्रिक नीति उपकरण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 23 सितंबर, 2026 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घोषणा की कि वह 24 सितंबर, 2026 को चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के तहत 1.25 लाख करोड़ रुपये की एक दिवसीय परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी आयोजित करेगा। यह निर्णय वर्तमान और उभरती चलनिधि स्थितियों की समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय रिज़र्व बैंक देश की मौद्रिक नीति का संचालन करता है और अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करता है।
  • चलनिधि प्रबंधन RBI के प्रमुख कार्यों में से एक है, जिसके तहत वह बैंकिंग प्रणाली में धन की उपलब्धता को नियंत्रित करता है।
  • जब बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त धन होता है, तो मुद्रास्फीति (Inflation) का दबाव बढ़ सकता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए RBI चलनिधि को अवशोषित करता है।
  • चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) RBI का एक प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरण है जिसका उपयोग बैंकों को रातोंरात आधार पर धन उधार लेने या RBI के पास अतिरिक्त धन जमा करने की अनुमति देकर चलनिधि को समायोजित करने के लिए किया जाता है।
  • LAF के तहत रेपो दर (Repo Rate) और रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate) प्रमुख दरें हैं।
  • VRRR नीलामी का उपयोग अक्सर तब किया जाता है जब RBI को बाजार से बड़ी मात्रा में चलनिधि को अस्थायी रूप से अवशोषित करने की आवश्यकता होती है।

परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी क्या है?

  • परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (Variable Rate Reverse Repo – VRRR) नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि (Liquidity) को अवशोषित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक मौद्रिक नीति उपकरण है।
  • यह रिवर्स रेपो नीलामी का एक प्रकार है, जहाँ बैंक RBI को अपनी अतिरिक्त निधि उधार देते हैं और बदले में ब्याज अर्जित करते हैं।
  • ‘परिवर्तनीय दर’ का अर्थ है कि नीलामी में ब्याज दर तय नहीं होती, बल्कि यह बोली प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होती है, जिससे RBI को बाजार की स्थितियों के अनुसार चलनिधि प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलता है।
  • यह चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) का एक हिस्सा है, जो RBI को अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • VRRR नीलामी का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक चलनिधि को कम करना है, जिससे मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित किया जा सके और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
  • यह अल्पकालिक चलनिधि प्रबंधन के लिए एक प्रभावी उपकरण है, खासकर जब बाजार में अचानक या मौसमी चलनिधि अधिशेष होता है।
  • इस नीलामी में, बैंक अपनी अतिरिक्त निधि को RBI के पास एक निश्चित अवधि (जैसे एक दिन) के लिए जमा करते हैं और RBI उन्हें एक निश्चित दर पर ब्याज का भुगतान करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ओवरनाइट वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी यह अल्पकालिक अतिरिक्त तरलता (liquidity) को अवशोषित करने का एक साधन है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में नकदी का प्रबंधन होता है।
तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के तहत LAF RBI का प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरण है जिसका उपयोग तरलता को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, जिसमें रेपो (Repo) और रिवर्स रेपो (Reverse Repo) संचालन शामिल हैं।
₹1,25,000 करोड़ की अधिसूचित राशि यह बैंकिंग प्रणाली से ₹1.25 लाख करोड़ की तरलता को अवशोषित करने के RBI के इरादे को दर्शाता है, जो बाजार में अतिरिक्त नकदी के स्तर का संकेत देता है।
1 दिन की अवधि अत्यंत अल्पकालिक प्रकृति दर्शाती है कि यह तात्कालिक तरलता प्रबंधन के लिए है, जो बाजार में अचानक आए बदलावों पर प्रतिक्रिया देता है।
परिवर्तनीय दर (Variable Rate) यह नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से बाजार-निर्धारित ब्याज दर को सक्षम बनाता है, जो तरलता की स्थिति के आधार पर लचीलापन प्रदान करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • तरलता प्रबंधन: RBI इस नीलामी का उपयोग बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने के लिए करता है, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) पर नियंत्रण रखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • मौद्रिक नीति का संकेत: VRRR नीलामी के माध्यम से RBI की कार्रवाई बाजार को तरलता की स्थिति और भविष्य की मौद्रिक नीति के रुख के बारे में संकेत देती है।
  • ब्याज दरों पर प्रभाव: तरलता को अवशोषित करके, RBI अल्पकालिक बाजार ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।

वित्तीय स्थिरता

  • अत्यधिक तरलता का नियंत्रण: अत्यधिक तरलता वित्तीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकती है और परिसंपत्ति बुलबुले (asset bubbles) को बढ़ावा दे सकती है। VRRR नीलामी इसे नियंत्रित करने में मदद करती है।
  • बैंकिंग प्रणाली का संतुलन: यह सुनिश्चित करता है कि बैंकों के पास न तो बहुत अधिक और न ही बहुत कम नकदी हो, जिससे उनकी उधार देने की क्षमता और समग्र वित्तीय स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

नियामक महत्व

  • RBI की स्वायत्तता: यह RBI की अपनी मौद्रिक नीति को स्वायत्त रूप से संचालित करने और अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार तरलता को समायोजित करने की क्षमता को दर्शाता है।
  • पारदर्शिता और दक्षता: नीलामी प्रक्रिया बाजार सहभागियों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और तरलता प्रबंधन में दक्षता लाती है।

चुनौतियाँ

1. तरलता का सटीक आकलन

  • अर्थव्यवस्था में तरलता की स्थिति का सटीक आकलन करना एक चुनौती है, क्योंकि यह कई कारकों (जैसे सरकारी खर्च, पूंजी प्रवाह) से प्रभावित होती है।
  • गलत आकलन से या तो बहुत अधिक तरलता अवशोषित हो सकती है (जिससे ऋण की कमी हो सकती है) या बहुत कम (जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है)।

2. ब्याज दर अस्थिरता

  • VRRR नीलामी के माध्यम से तरलता प्रबंधन से अल्पकालिक बाजार ब्याज दरों में अस्थिरता आ सकती है, जिससे बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए योजना बनाना मुश्किल हो सकता है।
  • अचानक या बड़े तरलता समायोजन से बाजार में घबराहट हो सकती है।

3. बाजार सहभागिता

  • यह सुनिश्चित करना कि नीलामी में पर्याप्त बाजार सहभागिता हो ताकि एक प्रतिस्पर्धी दर का निर्धारण हो सके, एक चुनौती हो सकती है।
  • कुछ बैंक अपनी तरलता को बनाए रखना पसंद कर सकते हैं, जिससे नीलामी की प्रभावशीलता कम हो सकती है।

4. मौद्रिक नीति संचरण

  • VRRR नीलामी के माध्यम से RBI द्वारा किए गए परिवर्तनों का अर्थव्यवस्था में व्यापक रूप से संचरण (transmission) सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • कभी-कभी, बैंक RBI की दरों के अनुरूप अपनी उधार दरों को समायोजित नहीं करते हैं, जिससे नीति का प्रभाव कम हो जाता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अतिरिक्त तरलता का प्रबंधन अत्यधिक तरलता मुद्रास्फीति के दबाव और वित्तीय अस्थिरता को बढ़ा सकती है।
ब्याज दरों पर प्रभाव VRRR नीलामी अल्पकालिक बाजार दरों को प्रभावित करती है, जिसका अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
मौद्रिक नीति का संचरण यह सुनिश्चित करना कि RBI की कार्रवाइयां बैंकों की उधार दरों और व्यापक अर्थव्यवस्था में प्रभावी ढंग से परिलक्षित हों।
आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव तरलता को बहुत अधिक अवशोषित करने से आर्थिक संवृद्धि के लिए आवश्यक ऋण की उपलब्धता बाधित हो सकती है।
वैश्विक आर्थिक कारक वैश्विक पूंजी प्रवाह और केंद्रीय बैंकों की नीतियां घरेलू तरलता की स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे प्रबंधन जटिल हो जाता है।

आगे की राह

  • RBI को तरलता की स्थिति का निरंतर और सूक्ष्म विश्लेषण करना चाहिए ताकि VRRR नीलामी की आवृत्ति और राशि को अनुकूलित किया जा सके।
  • मौद्रिक नीति संचरण को बेहतर बनाने के लिए बैंकों के साथ संवाद और प्रोत्साहन तंत्र को मजबूत करना चाहिए।
  • वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए नीलामी प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा और सुधार करना चाहिए।
  • वैश्विक आर्थिक रुझानों और पूंजी प्रवाह की बारीकी से निगरानी करनी चाहिए ताकि तरलता प्रबंधन में अप्रत्याशित झटकों से बचा जा सके।
  • वित्तीय प्रणाली में किसी भी संभावित प्रणालीगत जोखिम (systemic risk) की पहचान करने और उसे कम करने के लिए सतर्क रहना चाहिए।
  • दीर्घकालिक तरलता प्रबंधन के लिए अन्य उपकरणों (जैसे ओपन मार्केट ऑपरेशंस) के साथ VRRR नीलामी का प्रभावी ढंग से समन्वय करना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

RBI तरलता की स्थिति की समीक्षा करता है।  →  अतिरिक्त तरलता की पहचान की जाती है।  →  RBI ओवरनाइट VRRR नीलामी की घोषणा करता है।  →  बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी RBI को जमा करते हैं।  →  RBI तरलता को अवशोषित करता है और ब्याज का भुगतान करता है।  →  बैंकिंग प्रणाली में तरलता का स्तर कम होता है।  →  मुद्रास्फीति और वित्तीय स्थिरता पर प्रभाव पड़ता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करने के लिए आयोजित की जाती है।
2. चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के तहत, RBI बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है।
3. रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से उधार लेते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि VRRR नीलामी का उपयोग RBI द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करने के लिए किया जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि LAF के तहत, RBI बैंकों को ऋण देता भी है और उनसे उधार भी लेता है; यह केवल ऋण प्रदान नहीं करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से उधार लेता है, न कि वह दर जिस पर बैंक RBI से उधार लेते हैं (वह रेपो दर है)।

Q2. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा आयोजित परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. बाजार में मुद्रा आपूर्ति बढ़ाना।
  2. बैंकों को दीर्घकालिक ऋण प्रदान करना।
  3. बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करना।
  4. सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद को बढ़ावा देना।

उत्तर: बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करना। — VRRR नीलामी RBI का एक मौद्रिक नीति उपकरण है जिसका उपयोग बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त चलनिधि (liquidity) को अवशोषित करने के लिए किया जाता है, जिससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति के संचालन में परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यह भारत में चलनिधि प्रबंधन और मुद्रास्फीति नियंत्रण में कैसे योगदान देती है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में VRRR नीलामी की परिभाषा और RBI के मौद्रिक नीति उपकरण के रूप में इसकी स्थिति। मुख्य भाग में VRRR की कार्यप्रणाली (चलनिधि अवशोषण, अल्पकालिक प्रकृति) और चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के तहत इसके महत्व पर चर्चा करें। चलनिधि प्रबंधन में इसकी भूमिका (अतिरिक्त धन को बैंकिंग प्रणाली से बाहर निकालना, ब्याज दरों को प्रभावित करना) और मुद्रास्फीति नियंत्रण में इसके योगदान (मांग को कम करना, मूल्य स्थिरता बनाए रखना) का विश्लेषण करें। इसके प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें, जिसमें इसकी सीमाएं या बाजार पर संभावित प्रभाव शामिल हो सकते हैं। निष्कर्ष में भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए इसके समग्र महत्व पर प्रकाश डालें।

स्रोत: RBI


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