05 Aug आर्टिकल 370 निरस्ती के 7 वर्ष: कश्मीर में सुरक्षा बढ़ी, बिना अनुमति प्रदर्शन पर रोक
✎ अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन ने जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त कर दिया, जिससे यह भारत के अन्य राज्यों के समान हो गया, और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ
- Prelims: अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35A, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, भारतीय ध्वज संहिता, संघवाद, सार्वजनिक व्यवस्था
- Essay: भारतीय संघवाद की बदलती प्रकृति और क्षेत्रीय स्वायत्तता का प्रश्न, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन ने जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त कर दिया, जिससे यह भारत के अन्य राज्यों के समान हो गया, और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने पर, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती द्वारा विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने और हाल ही में हुई आतंकी घटनाओं के मद्देनजर, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बिना अनुमति के किसी भी विरोध प्रदर्शन या जुलूस पर रोक लगा दी है। पुलिस ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील की है, जबकि प्रशासन महबूबा मुफ्ती के खिलाफ ‘भारतीय ध्वज संहिता’ (Flag Code of India) के उल्लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
पृष्ठभूमि
- 5 अगस्त, 2019 को भारत सरकार ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संवैधानिक आदेश जारी कर अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त कर दिया और अनुच्छेद 35A (Article 35A) को भी समाप्त कर दिया।
- इस निर्णय के साथ ही, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019) के माध्यम से जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) और लद्दाख (विधानसभा रहित) में विभाजित कर दिया गया।
- अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था, जिसके तहत भारतीय संसद के कई कानून राज्य पर सीधे लागू नहीं होते थे और राज्य का अपना संविधान था।
- अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर विधानमंडल को ‘स्थायी निवासियों’ को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार व विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता था, विशेषकर संपत्ति के स्वामित्व और सरकारी नौकरियों के संबंध में।
- सरकार ने इन परिवर्तनों को जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण, विकास और आतंकवाद के उन्मूलन के लिए आवश्यक बताया था।
- इन संवैधानिक परिवर्तनों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसने दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा और चुनाव आयोग को सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने का निर्देश दिया।
अनुच्छेद 370 और 35A क्या थे?
- अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था, जो जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता था। यह 17 अक्टूबर, 1949 को संविधान में जोड़ा गया था।
- इस अनुच्छेद के तहत, रक्षा, विदेश मामले और संचार को छोड़कर, भारतीय संसद को जम्मू-कश्मीर के संबंध में कानून बनाने के लिए राज्य सरकार की सहमति की आवश्यकता होती थी।
- जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान, अपना झंडा और अपनी नागरिकता संबंधी कानून थे।
- अनुच्छेद 35A को 1954 में राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से संविधान में शामिल किया गया था, जो अनुच्छेद 370 से उत्पन्न हुआ था।
- यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर विधानमंडल को ‘स्थायी निवासियों’ को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार व विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता था।
- स्थायी निवासियों को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने, सरकारी नौकरियों में आवेदन करने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने जैसे विशेष अधिकार प्राप्त थे।
- अनुच्छेद 35A गैर-स्थायी निवासियों को राज्य में संपत्ति खरीदने या सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने से प्रतिबंधित करता था, जिसे कुछ हलकों में भेदभावपूर्ण माना जाता था।
- इन अनुच्छेदों का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के समय की विशेष परिस्थितियों को संबोधित करना और राज्य की सांस्कृतिक पहचान व जनसांख्यिकी को बनाए रखना था।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अनुच्छेद 370 का निरसन | जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा समाप्त कर भारत के अन्य राज्यों के समान लाया गया। |
| धारा 35A का निरसन | जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को परिभाषित करने वाले कानूनों को समाप्त किया गया, जिससे बाहरी लोगों को संपत्ति खरीदने और सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की अनुमति मिली। |
| राज्य का पुनर्गठन | जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। |
| सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि | क्षेत्र में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। |
| विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध | बिना अनुमति के रैलियों और विरोध प्रदर्शनों पर रोक, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास। |
महत्व
राजनीतिक महत्व
- अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन ने जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों के साथ पूर्ण रूप से एकीकृत किया, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक संविधान’ के सिद्धांत को बल मिला।
- राज्य के पुनर्गठन ने केंद्र सरकार को क्षेत्र के प्रशासन और विकास पर अधिक नियंत्रण प्रदान किया।
सुरक्षा महत्व
- सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि और विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखना तथा अलगाववादी गतिविधियों पर अंकुश लगाना है।
- नियंत्रण रेखा (LoC) पर कड़ी निगरानी और संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च से सीमा पार घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों को रोकने में मदद मिली है।
सामाजिक महत्व
- स्थायी निवास संबंधी कानूनों में बदलाव से क्षेत्र में निवेश और रोज़गार के अवसरों में वृद्धि की संभावना है, जिससे स्थानीय आबादी को लाभ मिल सकता है।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों से सांप्रदायिक सौहार्द और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
चुनौतियाँ
1. लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
- विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और राजनीतिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने से लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के अधिकार सीमित हो सकते हैं।
- स्थानीय राजनीतिक नेताओं की हिरासत और उन पर कानूनी कार्रवाई की संभावना से राजनीतिक असंतोष बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: मूल अधिकार
2. स्थानीय आबादी का असंतोष
- अनुच्छेद 370 के निरसन को लेकर स्थानीय आबादी के एक वर्ग में अभी भी असंतोष है, जो क्षेत्र में अस्थिरता का कारण बन सकता है।
- महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शनों का आह्वान इस असंतोष को दर्शाता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: उग्रवाद
3. आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ
- आतंकी घटनाओं और नियंत्रण रेखा पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता दर्शाती है कि क्षेत्र में अभी भी सुरक्षा चुनौतियाँ मौजूद हैं।
- अलगाववादी संगठन और बाहरी तत्व क्षेत्र में अशांति फैलाने का प्रयास कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: सीमा प्रबंधन
4. विकास और निवेश की चुनौतियाँ
- सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक अस्थिरता के कारण क्षेत्र में अपेक्षित आर्थिक विकास और निवेश आकर्षित करने में बाधाएँ आ सकती हैं।
- स्थानीय उद्योगों और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध | अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लंघन। |
| स्थानीय राजनीतिक असंतोष | अनुच्छेद 370 के निरसन को लेकर स्थानीय आबादी और नेताओं में नाराजगी। |
| आतंकवादी गतिविधियाँ | क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा। |
| ध्वज संहिता का उल्लंघन | राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर और कानूनी कार्रवाई की संभावना। |
| जम्मू राज्य की मांग | क्षेत्रीय पहचान और स्वायत्तता को लेकर नई अलगाववादी प्रवृत्तियाँ। |
आगे की राह
- स्थानीय आबादी के साथ संवाद और विश्वास बहाली के उपाय किए जाएँ, ताकि उनकी चिंताओं को दूर किया जा सके।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ लोकतांत्रिक अधिकारों, विशेषकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाए।
- क्षेत्र में आर्थिक विकास, निवेश और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज और नीतियाँ लागू की जाएँ।
- युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
- सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और खुफिया जानकारी साझाकरण को और मजबूत किया जाए।
- स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया जाए और पंचायती राज संस्थाओं को अधिक अधिकार और संसाधन प्रदान किए जाएँ।
- सांप्रदायिक सौहार्द और शांति को बढ़ावा देने के लिए नागरिक समाज संगठनों और धार्मिक नेताओं को शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अनुच्छेद 370 · अनुच्छेद 35A · जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम · संघवाद · राज्य का दर्जा · मौलिक अधिकार · सार्वजनिक व्यवस्था · राष्ट्रीय सुरक्षा · ध्वज संहिता · विरोध प्रदर्शन का अधिकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 370’, ‘note’: ‘जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 35A’, ‘note’: ‘स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध’}
अवधारणा प्रवाह
अनुच्छेद 370 का निरसन → जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन → सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि → विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध → स्थानीय आबादी का असंतोष → कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 370 को 5 अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद हटा दिया गया था।
2. अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार और विशेषाधिकार प्रदान करता था।
3. भारत के ध्वज संहिता (Flag Code of India) के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊपरी पट्टी हमेशा केसरिया होनी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 370 को 5 अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति के आदेश से निरस्त किया गया था। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार और विशेषाधिकार प्रदान करता था, जिसे अनुच्छेद 370 के साथ ही निरस्त कर दिया गया था। कथन 3 सही है। भारत के ध्वज संहिता के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊपरी पट्टी केसरिया, बीच में सफेद पट्टी पर अशोक चक्र और सबसे निचली पट्टी हरी होनी चाहिए।
Q2. अभिकथन (A): जम्मू-कश्मीर में बिना अनुमति के किसी भी विरोध प्रदर्शन या जुलूस पर रोक लगा दी गई है।
कारण (R): यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि हाल की घटनाओं और अलगाववादी अपीलों के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह कदम शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के सात वर्ष बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह कदम क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास लाने में सफल रहा है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने (5 अगस्त, 2019) का संक्षिप्त उल्लेख और इसके पीछे के उद्देश्य (एक राष्ट्र, एक संविधान, विकास, आतंकवाद पर नियंत्रण)।
2. राजनीतिक परिदृश्य का विश्लेषण:
– सकारात्मक पहलू: केंद्र शासित प्रदेशों का गठन (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख), स्थानीय निकायों के चुनाव, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के प्रयास।
– नकारात्मक पहलू/चुनौतियाँ: राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग, राजनीतिक दलों की असहमति, विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध, राजनीतिक गतिविधियों में कमी।
3. सुरक्षा परिदृश्य का विश्लेषण:
– सकारात्मक पहलू: आतंकवाद और अलगाववाद में कमी के सरकारी दावे, घुसपैठ पर नियंत्रण, सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई उपस्थिति।
– नकारात्मक पहलू/चुनौतियाँ: लक्षित हत्याएं, आतंकी घटनाओं का जारी रहना, सीमा पार से चुनौतियाँ, मानवाधिकारों के मुद्दे।
4. स्थायी शांति और विकास पर प्रभाव:
– विकास के दावे: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, निवेश के प्रयासों, पर्यटन में वृद्धि।
– आलोचनात्मक मूल्यांकन: क्या विकास समावेशी है? स्थानीय लोगों की भागीदारी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता की चुनौतियाँ।
– शांति की स्थिति: क्या यह शांति वास्तविक है या बलपूर्वक थोपी गई? जनभागीदारी का अभाव।
5. निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए आगे की राह, जिसमें राज्य का दर्जा बहाल करने की संभावना, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना, स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं को संबोधित करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना शामिल हो।
स्रोत: bhaskar.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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